• मध्यप्रदेश बना औषधीय फसलों का हब, 46 हजार हेक्टेयर में होती ईसबगोल और अश्वगंधा की खेती

    • औषधीय फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य मध्यप्रदेश
    •  46 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती ईसबगोल, अश्वगंधा की खेती

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 46 हजार 837 हैक्टेयर क्षेत्र में औषधीय फसलों ईसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस व अन्य फसलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग सवा लाख मीट्रकि टन औषधीय फसलों का उत्पादन  हुआ है। देश और विदेश में औषधीय फसलों की बढ़ती मांग के कारण किसानों का भी आकर्षण इन फसलों के उत्पादन की ओर बढ़ा है। प्रदेश में वर्ष 2022-23 में 44 हजार 324 हैक्टेयर में औषधीय फसलों की बोनी की गई थी । जो 2024-25 में बढ़कर 46 हजार 837 हैक्टेयर हो गया यानिकी 2 हजार 512 हैक्टेयर की वृद्धि हुई है। इन फसलों का वर्ष 2021-22 में उत्पादन   एक लाख 16 हजार 848 मीट्रिक टन था जो 2024-25 में बढ़कर एक लाख 24 हजार 199 मीट्रिक टन हो गया है।

    उल्लेखनीय है कि भारत में औषधीय और सुगंधित फसलों के उत्पादन में मध्यप्रदेश की सर्वाधिक भागीदारी है। एक अनुमान के अनुसार देश में औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश में उत्पादित होता है। राज्य सरकार औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान और अन्य प्रोत्साहन दे रही है। औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान करती है। सरकार पारंपरिक फसलों के अलावा औषधीय पौधों जैसी वाणिज्यिक फसलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे किसानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य मिल सके। औषधीय पौधों की खेती और संग्रह से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।

     मध्यप्रदेश में प्रमुख फसलें अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी कई औषधीय फसलों का उत्पादन होता है। प्रदेश में 13 हजार हैक्टेयर में ईसवगोल, 6 हजार 626 हैक्टेयर अश्वगंधा, 2 हजार 403 हैक्टेयर में सफेद मूसली, 974 हैक्टेयर में कोलियस तथा 23 हजार 831 हैक्टेयर में अन्य औषधी फसल की बोनी की गई है। मध्यप्रदेश सरकार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूह का औषधीय पौधों की खेती आकर्षित कर रही है। राज्य सरकार द्वारा डाबर, वैद्यनाथ जैसी आयुर्वेद कम्पनियों, संजीवनी क्लिनिक में विंध्यवैली जैसे ब्रांड के माध्यम से औषधीय उत्पादन को बाजार मुहैया करा रही है।

     

  • शारीरिक संबंध से रोकने को अदालत ने माना मानसिक उत्पीड़न, तलाक हुआ स्वीकार

    बिलासपुर
    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बहुत ही अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पत्नी का पति से शारीरिक संबंध न बनाने को मानसिक क्रूरता माना है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए पति की दायर अपील पर तलाक का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि पति को शारीरिक संबंध बनाने से रोकना उसके साथ मानसिक क्रूरता है।

    जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि 11 साल अलगाव और पत्नी की शारीरिक संबंध के लिए ईच्छा न होना मानसिक क्रूरता मानी जाएगी। विवाह के एक महीने बाद ही पत्नी मायके चली गई थी।

    यह था पति और पत्नी के बीच पूरा मामला

    दरअसल अंबिकापुर के शख्स की शादी 30 मई 2009 को रायपुर की महिला के साथ हुई थी। पति का आरोप है कि शादी के एक महीने बाद ही उसे पत्नी मायके चली गई। जिस पर उन्होंने फैमिली कोर्ट में तलाक की मांग करते हुए आवेदन दिया।

    पत्नी पर आरोप लगाया कि वह वैवाहिक दायित्व निभाने से इनकार कर रही है। महिला ने पति को यहां तक धमकी दे डाली कि अगर  वो शारीरिक संबंध बनाएगा तो अपना जीवन खत्म लेगी। पति की कई कोशिशों के बाद भी पत्नी मायके से वापस नहीं लौटी।  केस दर्ज होने के बाद भी उसने कभी पति से संपर्क नहीं किया। महिला ने पति पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।

    फैमिली कोर्ट की सुनवाई के दौरान पत्नी ने पति के आरोपों को निराधार बताया। कहा कि उसका पति एक साध्वी का भक्त हैं और वो वैवाहिक संबंधों में रुचि नहीं रखते ।  आरोप लगाया कि पति बच्चे नहीं चाहता था। पत्नी ने पहले वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए अर्जी भी लगाई, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया। फैमिली कोर्ट ने पति की अर्जी को खारिज कर दिया।

    पति ने फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी

    पति फैमिली कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हुआ और हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी। कहा कि फैमिली कोर्ट ने उनके तर्कों को सुने बगैर ही तलाक की अर्जी खारिज की है। हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए पाया कि पति-पत्नी 11 सालों से अलग रह रहे हैं। पत्नी ने माना कि वह अब पति के साथ वैवाहिक जीवन जारी नहीं रखना चाहती। हाईकोर्ट ने अलगाव के लंबे अंतराल को मानसिक क्रूरता माना और पति की तलाक की अपील को स्वीकार किया।

  • 90° ब्रिज विवाद के बीच 40 करोड़ की बिल्डिंग में मीटिंग हॉल की भूल, नया हॉल बनाना पड़ेगा

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश की राजधानी में खराब इंजीनियरिंग का एक और नमूना सामने आया है। लिंक रोड नंबर-1 पर भोपाल नगर निगम ने 5 एकड़ में करीब 40 करोड़ रुपए से 8 मंजिला बिल्डिंग तो बना दी, लेकिन जिम्मेदार मीटिंग हॉल बनाना भूल गए। 

    यह एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि ऐसे 2 प्रोजेक्ट और हैं, जिनमें खराब इंजीनियरिंग के नमूने सामने आ चुके हैं। 90 डिग्री एंगल वाले ऐशबाग ब्रिज को लेकर पहले ही भोपाल सुर्खियों में रह चुका है। फिर मेट्रो के 2 स्टेशन भी सुर्खियां बटोर चुके हैं। इन नमूनों को सिलसिलेवार जानिए…।

    सबसे पहले निगम मुख्यालय का ताजा मामला लिंक रोड नंबर-1 पर ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर नगर निगम का नया मुख्यालय भवन बना है। इसके बाद 10 से ज्यादा लोकेशन पर बने ऑफिस एक ही छत पर आ जाएंगे। करीब 40 करोड़ रुपए से बन रही बिल्डिंग में सिर्फ सोलर पैनल लग रहे हैं तो गार्डनिंग, फोन, इंटरनेट केबल और कुछ फ्लोर पर फर्नीचर का काम चल रहा है। कई मायनों में बिल्डिंग खास है।

    जब तक नया हॉल नहीं बनेगा, तब तक आईएसबीटी में होंगी बैठकें

    इन सब अच्छी बातों में एक बड़ी गलती भी हो गई। इस बिल्डिंग में परिषद का मीटिंग हॉल ही नहीं बना है। इसलिए 10 करोड़ रुपए खर्च कर परिषद हॉल बनाने का प्लान है, लेकिन जब तक यह नहीं बन जाता, तब तक आईएसबीटी में ही परिषद की बैठकें होंगी।

    पड़ताल की गई तो पता चला कि जब बिल्डिंग बनी थी, तब मीटिंग हॉल ही उसमें शामिल नहीं था। जिम्मेदारों का कहना है कि शुरुआत में बिल्डिंग की कुल लागत 22 करोड़ रुपए थी, लेकिन बाद में लागत बढ़ती गई। अब यह 40 करोड़ में आ गई। हॉल में ही परिषद की बैठक होती है।

    स्ट्रक्चरल इंजीनियर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि जब भी कोई निर्माण कार्य कराया जाता है तो उसकी डिजाइन समेत कई पैमानों पर नजर रखी जाती है। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया होती है। नगर निगम अपनी ही बिल्डिंग में मीटिंग हॉल जैसा निर्माण करना ही भूल गया। अब मीटिंग हॉल को लेकर दूसरी बिल्डिंग बनेगी, लेकिन पैसा तो जनता का ही लगेगा, जो टैक्स के रूप में वसूला गया है।

    एक बिल्डिंग, 3 कमिश्नर बिल्डिंग की पूरी डिजाइन निगम कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी ने बनवाई थी। उनकी मौजूदगी में बिल्डिंग का आधे से ज्यादा काम हुआ, जबकि बाकी काम हरेंद्र नारायण के समय हुआ। अब संस्कृति जैन के समय फिनिशिंग हो रही है।

    40% बिजली उत्पादन को लेकर बिगाड़ा फ्रंट मुख्यालय के ठीक सामने परिसर में ही पार्किंग बनाई गई है, जिस पर शेड है। इन्हीं शेड के ऊपर सोलर पैनल लगा दिए गए, ताकि 40 प्रतिशत बिजली निगम खुद ही बना सके, लेकिन ये ऐसी जगह लगाए गए हैं, जिनसे पूरी बिल्डिंग ही छिप गई, यानी बिल्डिंग का फ्रंट ही बदल गया है।

    इस मामले में निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का कहना है कि डिजाइन गलत नहीं है। उस समय आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। हालांकि, इसके बाद इस्टीमेट कॉस्ट बढ़ी है। यह भी सही है कि पुरानी डिजाइन में परिषद हॉल नहीं था। अभी और जमीन लेकर पास में ही परिषद का हॉल बनवा रहे हैं, ताकि यहां बैठकें हो सकें। पार्किंग की जगह पर आपत्ति जताई है। इस वजह से फ्रंट ढंक गया है। सोलर पैनल छत पर लगाए जा सकते हैं।

  • 19वाँ राष्ट्रीय पुरस्कार: डॉ. वाकणकर को मिलेगा सम्मान, पद्मश्री श्री मठपाल करेंगे प्रस्तुत

    19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री श्री मठपाल होंगे सम्मानित

    "पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में हालिया प्रगति" पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, 09 से 11 जनवरी, 2026 तक भोपाल में
    राष्ट्रीय संगोष्ठी में संक्षेप (Abstract) जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर 2025 तक

    भोपाल 

    19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार से पद्मश्री श्री यशोधर मठपाल को सम्मानित किया जाएगा। संस्कृति विभाग के संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय द्वारा दिये जाने वाले राष्ट्रीय सम्मान में श्री मठपाल को प्रशस्ति पत्र, सम्मान पट्टिका और 2 लाख रुपये प्रदान किए जायेगे। यह पुरस्कार किसी सक्रिय भारतीय नागरिक या संस्था को पुरातत्व के क्षेत्र में उनकी सृजनात्मक, रचनात्मक और विशिष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। आयुक्त पुरातत्व श्रीमती उर्मिला शुक्ला ने बताया कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के योगदान को स्मरण करने के लिए, पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय, भोपाल 09 से 11 जनवरी, 2026 तक कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में "पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय विज्ञान के क्षेत्रों में हालिया प्रगति" पर एक राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है। इसी दौरान 19वाँ डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में, पूरे भारत से प्रशासकों, नीति निर्माताओं, क्षेत्रीय पदाधिकारियों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों की भागीदारी होगी, जो पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालयों के क्षेत्रों में विभिन्न उभरते मुद्दों पर चर्चा करेंगे और पुरातात्विक खजानों के प्रभावी संरक्षण, प्रबंधन और विकास के लिए साक्ष्य-आधारित रणनीतियों की सिफारिश करेंगे। 

    आयुक्त पुरातत्व श्रीमती शुक्ला ने बताया कि राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्देश्य को 3 विषयों पर प्रस्तुति और चर्चा के माध्यम से संबोधित किया जाएगा। इन विषयों में पुरातत्व, नृवंश-पुरातत्व (ethnoarchaeology), पुरातत्वमिति (archaeometry), कलाकृति विश्लेषण, सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन आदि में नई सफलताएँ,  हाइब्रिड सिस्टम सहित अभिलेखागार और रिकॉर्ड प्रबंधन में उभरती प्रौद्योगिकियाँ और मूर्त और अमूर्त विरासतों (tangible and intangible heritages) के संग्रह, भंडारण, पहुँच और संरक्षण में नवीनतम विकास और डिजिटल क्यूरेशन के रुझान शमिल है। 

    सार-संक्षेप जमा करने की अंतिम तिथि 20 नवंबर तक बढ़ाई गई

    राष्ट्रीय संगोष्ठी के विषयों या संबंधित क्षेत्रों में से किसी पर भी सार-संक्षेप (Abstracts) आमंत्रित हैं। सार-संक्षेप जमा करने की अंतिम तिथि 10 नवंबर 2025 थी, जिसे अब 20 नवंबर 2025 तक बढ़ा दिया गया है। स्वीकृत सार-संक्षेप के पूर्ण पर्चों (full papers) का मूल्यांकन, संपादन किया जाएगा और उन्हें संगोष्ठी की कार्यवाही पुस्तक (seminar proceeding book) में प्रकाशित किया जाएगा। प्रत्येक विषय क्षेत्र पर सर्वश्रेष्ठ पर्चा प्रस्तुति (best paper presentation) के लिए पुरस्कार भी दिए जाएंगे। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट www.archaeology.mp.gov.in को देखा जा सकता है। 

    उल्लेखनीय है कि डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर (1919-1988), जिन्हें 'हरिभाऊ' के नाम से जाना जाता है और भारतीय शैल कला (rock art) अध्ययन के "पितामह" के रूप में संदर्भित किया जाता है, एक प्रख्यात भारतीय पुरातत्वविद्, कला इतिहासकार, मुद्राशास्त्री, पुरालेखविद् और सांस्कृतिक शोधकर्ता थे। उनका जीवन और कार्य भारत के समृद्ध प्राचीन इतिहास और प्रागैतिहासिक कला को उजागर करने और संरक्षित करने के लिए समर्पित था। उन्हें जनवरी 1975 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म श्री से सम्मानित किया गया। डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय पुरस्कार, जिसे वाकणकर सम्मान भी कहा जाता है, मध्यप्रदेश के भोपाल में पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय द्वारा (वर्ष के आधार पर) वार्षिक या द्विवार्षिक रूप से प्रस्तुत किया जाने वाला एक राष्ट्रीय पुरस्कार है।

     

  • डॉ. यादव 18 नवंबर को करेंगे राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का ऐतिहासिक उद्घाटन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव 18 नवम्बर को करेंगे राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदशर्नी का शुभारंभ

    प्रदशर्नी में 31 प्रदेशों के 900 विद्यार्थी कर रहे हैं सहभागिता
    23 नवम्बर तक होंगी विज्ञान पर केन्द्रित गतिविधियां

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल में 18 नवम्बर मंगलवार को प्रात: 9:45 पर 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। शुभारंभ समारोह में जनजातीय कार्य मंत्री  कुंवर विजय शाह एवं स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह भी मौजूद रहेंगे। प्रदशर्नी  का आयोजन राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, श्यामला हिल्स, भोपाल में किया जा रहा है। प्रदर्शनी के आयोजन में स्कूल शिक्षा विभाग सहभागिता कर रहा है। प्रदर्शनी में 31 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लगभग 900 विद्यार्थी एवं शिक्षक विज्ञान पर केन्द्रित प्रोजेक्ट एवं मॉडल प्रदर्शित करेंगे।

    बच्चों में प्रोत्साहित की जायेगी विज्ञान के प्रति रूचि

    कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना और वैज्ञानिक विचार विकसित करना है। इस कार्यक्रम में देश के समस्त प्रदेश एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के स्कूली विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में प्रतिदिन प्रात: 9 बजे से विभिन्न वैज्ञानिक संस्थाओं जैसे आंचलिक विज्ञान केन्द्र, आईसर, मैनिट, आईसेक्ट एवं ग्लोबल स्किल पार्क के वैज्ञानिक सहभागी विद्यार्थियों के साथ वैज्ञानिक वार्ता में विशेष व्याख्यान देंगे। इसके बाद 30 मिनट विद्यार्थियों के साथ प्रश्नोत्तरी भी होगी।

    विज्ञान प्रदर्शनी का 2025-26 का विषय सतत् भविष्य के लिये विज्ञान प्रौद्योगिकी रखा गया है। प्रदशर्नी के दौरान मुख्य रूप से खाद्य, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, परिवहन एवं संचार, प्राकृति खेती, आपदा प्रबंधन, गणितीय मॉडलिंग और कंप्यूटेशनल थिंकिंग के साथ अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष रूप से चर्चा की जायेगी। विज्ञान प्रदशर्नी में शाम को प्रतिदिन विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। विभिन्न राज्यों से आये विद्यार्थियों को राजधानी भोपाल के आसपास ऐतिहासिक स्थलों, संग्रहालयों, विज्ञान केन्द्र, शिल्प केन्द्र आदि का भ्रमण भी कराया जायेगा।

    प्रदशर्नी की विशेषताएं

    प्रदर्शनी में प्रतिदिन 2 हजार विद्यार्थी एवं नागरिक अवलोकन करने पहुंचेंगे। प्रदर्शनी में 240 साइंस मॉडल का प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदशर्नी में प्रतिभागी विद्यालयों की संख्या 229 है। यह प्रदर्शनी देश के विभिन्न भागों के युवाओं एवं बच्चों को विज्ञान, गणित तथा पर्यावरण संबंधी मुद्दों के विभिन्न पहलुओं के विषय में जानकारी प्राप्त करने और एक-दूसरे के साथ अपनी विविध संस्कृतियों को साझा करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगी। भोपाल में 6 दिवसीय प्रदर्शनी का समापन 23 नवम्बर को दोपहर 3:30 बजे होगा।

     

  • किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त 19 नवंबर को, PM मोदी होंगे कार्यक्रम में मौजूद

    धमतरी 
     छत्तीसगढ़ में बुधवार को धमतरी जिले में एक बड़ा राजनीतिक एवं प्रशासनिक कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है, जहां केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय धमतरी पहुंचेंगे। दोनों नेता एकलव्य खेल मैदान में आयोजित जनसभा में शामिल होंगे। इसी दिन कोयंबटूर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त जारी की जाएगी, जिसका सीधा प्रसारण धमतरी के सभा स्थल पर कराया जाएगा।

    कार्यक्रम के बाद चौहान जनसभा को संबोधित करेंगे और केंद्र की कृषि नीतियों, किसान हितैषी योजनाओं तथा छत्तीसगढ़ के लिए आगामी योजनाओं पर अपने विचार रखेंगे। धमतरी जिला प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी इस बड़े आयोजन की तैयारी में जुटे हैं। व्यवस्थाओं की समीक्षा लगातार की जा रही है। वहीं सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री के इस दौरे पर धमतरी जिले के लिए विशेष पैकेज की मांग भी रखी जा सकती है, जिससे जिले में कृषि, सिंचाई और ग्रामीण विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम को लेकर जिलेभर में उत्साह का माहौल है और बड़ी संख्या में किसानों एवं ग्रामीण जनों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही हैग

    पीएम किसान योजना की 21वीं किस्त

    जानकारी के अनुसार, 2 अगस्त को योजना से जुड़े देशभर के किसानों के खाते में 20वीं किस्त जारी कि गई थी। अब 3 महीने का समय में बीत चुका है। ऐसे में करोड़ों किसान 21वीं किस्त(PM Kisan 21th Installment) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि, केंद्र सरकार 19 नवंबर को पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी करेगी। 21वीं किस्त का लाभ मध्यप्रदेश सहित देशभर के 9 करोड़ से अधिक पात्र किसानों को मिलने वाला है। इस किस्त के लिए सरकार कुल 18 हजार करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित करेगी।

    पात्रता की मुख्य शर्तें

        आवेदक मध्य प्रदेश के स्थायी निवासी हो
        वे किसान, जिनके पास कृषि योग्य भूमि हो
        दो हेक्टेयर या उससे कम भूमि हो
        आवेदक किसान के पास आधार कार्ड हो
        बैंक अकाउंट होना भी अनिवार्य है
        पीएम किसान के लिए फार्मर आइडी अनिवार्य

     

  • एमपी प्रशासन का बड़ा कदम: 122 IAS अफसरों को मसूरी में ट्रेनिंग, चीफ सेक्रेट्री को भेजा पत्र

    भोपाल 

    लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) मसूरी में मिड करियर ट्रेनिंग आयोजित करेगा। यह ट्रेनिंग 5 जनवरी से 30 जनवरी तक चलेगी। इसमें 122 आईएएस अफसर शामिल होंगे।

    इसके साथ ही, इसमें एमपी के 39 कलेक्टरों समेत अन्य अधिकारियों को बुलाया गया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र भेजकर रजिस्ट्रेशन कराने को कहा गया है। हालांकि, प्रदेश के 39 कलेक्टरों को लेकर पेंच फंस गया है। क्या है कारण… चलिए बताते हैं।

    चुनाव आयोग के आदेशों से बनी परेशानी

        इस ट्रेनिंग के दौरान चुनाव आयोग के सख्त निर्देशों की वजह से 39 कलेक्टरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चुनाव आयोग ने SIR के कारण प्रशासनिक फेरबदल पर रोक लगा दी है।

        इससे इन कलेक्टरों को ट्रेनिंग में शामिल होने की मंजूरी मिलने की संभावना कम हो गई है। इसलिए, इन 39 कलेक्टरों का मिड करियर ट्रेनिंग में शामिल होना अब मुश्किल नजर आ रहा है।

    प्रदेश के 39 कलेक्टरों का सिलेक्शन लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशिक्षण अकादमी मसूरी में मिड करियर ट्रेनिंग के लिए किया गया है इसमें उज्जैन संभागायुक्त के अलावा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, सागर, रीवा जैसे बड़े शहरों के कलेक्टर शामिल है इसके साथ ही मंत्रालय और अलग-अलग विभागों में विभाग प्रमुख के उप सचिव और सचिव के रूप में काम करने वाले आईएएस अधिकारियों को भी ट्रेनिंग के लिए सिलेक्ट किया गया है

    24वें मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम के शेड्यूल जारी करते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखा है पांच जनवरी 2026 से 30 जनवरी तक चलने वाले मिड करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम के फेज थ्री के लिए 2010 बैच के अधिकारियों का चयन मामला दर मामला के आधार पर किया गया है जबकि 2016 बैच के अधिकारियों के लिए यह तीसरा और अंतिम अवसर है 2017 बैच के अफसरों के लिए दूसरा और वर्ष 2018 बैच के अफसरों के लिए पहला प्रशिक्षण अवसर है

    ये कलेक्टर ट्रेनिंग के लिए चयनित

    जिन कलेक्टरों का चयन ट्रेनिंग के लिए किया गया है उसमें भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान, धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल, बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह, झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना, अलीराजपुर कलेक्टर कलेक्टर नीतू माथुर, खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता, बुरहानपुर कलेक्टर हर्ष सिंह, उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह शामिल है

    साथ ही देवास कलेक्टर ऋतु राज, शाजापुर कलेक्टर रितु बाफना, आगर मालवा कलेक्टर प्रीति यादव, मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग, नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा, दतिया कलेक्टर स्वन्प्रिल जी वानखेड़े, मुरैना कलेक्टर लोकेश रामचंद्र जांगिड़, श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा को ट्रेनिंग के लिए चुना गया है

    इसके अलावा रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल, सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी, सतना कलेक्टर सतीश कुमार एस, अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली, उमरिया कलेक्टर धरणेंद्र कुमार जैन, सागर कलेक्टर संदीप जी आर दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल निवाड़ी कलेक्टर जमुना भिडे सीहोर कलेक्टर बालागुरू के रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा राजगढ़ कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीना हरदा कलेक्टर सिद्थार्थ जैन बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सोमवंशी नरिसंहरपुर कलेक्टर रजनी सिंह छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेंद्र नारायण सिवनी कलेक्टर शीतला पटले बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना, और पांढ़ुर्णा कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ का भी चयन किया गया है

    12 दिसंबर तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा

    इसमें कहा गया है कि ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए सिलेक्ट किए गए अधिकारियों का रजिस्ट्रेशन 12 दिसंबर तक ऑनलाइन कराने की कार्रवाई कराएं। साथ ही अधिकारियों से कहा गया है कि 19 दिसंबर तक प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए संबंधित अधिकारियों के नामांकन की स्वीकृति भेंजे

    सभी अफसरों को 4 जनवरी को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी मसूरी के लिए भेजना सुनिश्चित करें इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए उन अधिकारियों का चयन किया गया है जो 31 दिसंबर 2029 के पहले सेवानिवृत्त नहीं हो रहे है

    भोपाल कलेक्टर, उज्जैन कमिश्नर को भी बुलाया

    मिड करियर ट्रेनिंग के लिए 2010 बैच के एमपी कैडर को दो आईएएस अधिकारी चुने गए है इनमें भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, उज्जैन कमिश्नर आशीष सिंह शामिल है

    वीएस चौधरी कोलसानी

    रुचिका चौहान

    हरिजिंदर सिंह

    बी विजय दत्ता

    अनुग्रह पी

    चंद्रमौलि शुक्ला

    नीरज कुमार सिंह

    पंकज जैन

    अजय कटेसरिया

    निधि निवेदिता

    स्वरोचिष सोमवंशी

    प्रवीण सिंह अधयक

    अनुराग वर्मा

    प्रतिभा पाल

    फटिंग राहुल हरिदास

    राजीव रंजन मीना

    बक्की कार्तिकेयन

    अवधेश शर्मा

    कुमार पुरुषोत्तम

    सुभाष कुमार द्विवेदी

    धरणेंद्र कुमार जैन

    नरेंद्र कुमार सोमवंशी

    राजेश बाथम

    संतोष कुमार वर्मा

    अरूण कुमार परमार

    गिरीश कुमार मिश्रा

    शिवम वर्मा

    ,सोनिया मीना

    हर्ष दीक्षित

    रजनी सिंह

    प्रियंक मिश्रा

    मयंक अग्रवाल

    अनूप कुमार सिंह

    संतीष कुमार एस

    नीरज कुमार वशिष्ठ

    अमर बहादुर सिंह

    संदीप जीआर

    पवन कुमार जैन

    रिजु बाफना

    आशीष वशिष्ठ

    साकेत मालवीय

    शीतला पटले

    रिषव गुप्ता

    लोकेश रामचंद्र जांगिड़

    अंकित अष्ठाना

    नेहा मीना

    अरुण कुमार विश्वकर्मा

    भव्या मित्तल

    क्षितिज सिंघल

    दीलीप कुमार कापसे

    बुध्देश कुमार वैद्य

    अभय कुमार बेडेकर

    सुधीर कुमार कोचर

    नीतू माथुर

    जमुना भिडे

    अंजू अरुण कुमार

    परीक्षित संजयराव झाड़े

    सौरभ संजय सोनवड़े

    भारसत योगेश तुकाराम

    राहुल नामदेव धोटे

    अंकिता धाकरे

    शेर सिंह मीना

    अभिलाष मिश्रा

    देंवेंद्र कुमार नागेंद्र

    गुरु प्रसाद

    कुमार सत्यम

    संजय कुमार जैन

    राखी सहाय

    हर्ष सिंह

    अदिति गर्ग

    हर्षल पंचोली

    रितु राज

    संस्कृति जैन

    मृणाल मीना

    पार्थ जायसवाल

    हिमांशु चंद्रा

    अर्पिता वर्मा

    बालागुरू के

    जे रीभा

    रौशन कुमार

    मनोज कुमार सरियाम

    हरेंद्र नारायण

    प्रीति यादव

    जयति सिंह

    सिध्दार्थ जैन

    अंशुल गुप्ता

    स्वन्प्रिल वानखेड़े

    संजना जैन

    जगदीश कुमार गोमे

    अनुराग सक्सेना

    प्रताप नारायण यादव

    संघमित्रा गौतम

    कीर्ति खुरासिया

    अजीजा सरसार जफर

    संपना पंकज सोलंकी

    आशीष सांगवान

    राजेश कुमार जैन

    सुचिस्मिता सक्सेना

    दिशा प्रणय नागवंशी

    गजेंद्र सिंह नागेश

    मलिका निगम नागर

    मंजूषा विक्रांत राय

    संघ प्रिय

    शिशिर गेमावत

    अभिषेक चौधरी

    तपस्या परिहार

    सिध्दार्थ जैन

    प्रथम कौशिक

    श्याम वीर

    अमन वैष्णव

    हरसिमरन प्रीत कौर

    अंजलि जोसेफ

    अक्षय कुमार तेम्रवाल

    रामप्रकाश अहिरवार

    अर्चना सोलंकी

    संदीप केरकट्टा

    अभय सिंह ओहरिया

    वंदना वर्मा

    रेखा राठौर

    नवीन कुमार ध्रुर्वे

  • मध्य प्रदेश सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया, खात्मे के लिए डेडलाइन फिक्स

    मंडला 
    नक्सलियों को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक और सख्त अभियान शुरू किया गया है. मार्च 2026 तक नक्सल समस्या पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए कई आकर्षक योजनाओं की घोषणाएं भी की हैं. मंडला जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है.

    नक्सलवाद खत्म करने का रोडमैप तैयार

    एसपी रजत सकलेचा ने बताया "नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का रोडमैप तैयार है. इसके तहत पुलिस और सुरक्षा बल लगातार जंगल के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. इस बार अभियान में सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की ताकत भी जुड़ गई है."

    राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए लुभावनी पुनर्वास नीति लागू की है. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को 20 हज़ार से लेकर 4 लाख 50 हज़ार रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी.

    सरेंडर करने वाले नक्सलियों को आर्थिक मदद

    एसपी रजत सकलेचा ने बताया "सरेंडर करने वाले नक्सलियों को जमीन खरीदने के लिए 20 लाख रुपए तक की मदद दी जाएगी. प्रोत्साहन राशि के रूप में न्यूनतम 5 लाख रुपए, नए जीवन की शुरुआत के लिए 1 लाख 50 हज़ार रुपए,और विवाह करने पर 50 हज़ार रुपए की विशेष सहायता राशि प्रदान की जाएगी. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को फ्री खाद्यान्न भी दिया जाएगा ताकि वे समाज की मुख्यधारा में दोबारा जुड़ सकें. राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए लुभावनी पुनर्वास नीति लागू की है."

    अन्य नक्सलियों की जानकारी देने पर सरकारी जमीन मिलेगी

    अगर कोई नक्सली पुलिस को दूसरे नक्सली के आत्मसमर्पण या मूवमेंट की जानकारी देता है, तो उसे सरकारी नौकरी देने पर भी विचार किया जा सकता है. हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा नक्सली हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें. मार्च 2026 तक मंडला को नक्सल मुक्त बनाने का हमारा लक्ष्य है.

    इस योजना की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने मीडिया, सोशल मीडिया और स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से व्यापक प्रचार अभियान शुरू कर दिया है.

    सरकार की योजनाएं नक्सलियों तक पहंचाने की अपील

    सरकार का उद्देश्य साफ है कि जंगलों में छिपे हर नक्सली तक यह संदेश पहुंचे कि अब सरकार सज़ा नहीं, सुधार का मौका दे रही है. मंडला पुलिस और प्रशासन का मानना है कि अगर यह अभियान सफल रहा तो न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश में शांति और विकास की राह और मजबूत होगी.

     

  • मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री की सौजन्य भेंट, दोनों नेताओं ने की महत्वपूर्ण बातचीत

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. खट्टर से की सौजन्य भेंट

    डॉ. यादव ने की डॉ. खट्टर के साथ सौजन्य मुलाकात, बढ़ाई आपसी संवाद

    मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री की सौजन्य भेंट, दोनों नेताओं ने की महत्वपूर्ण बातचीत

    सिंहस्थ-2028 से जुड़ी तैयारियों एवं परियोजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार की शाम नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री डॉ. मनोहर लाल खट्टर से उनके आवास पर सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय मंत्री डॉ. खट्टर को सिंहस्थ-2028 आयोजन से जुड़ी तैयारियों एवं अन्य प्रमुख परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ क्षेत्र में अधोसंरचनात्मक विकास कार्यो और इसके विस्तार प्रस्तावों, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, शुचिता, नदी संरक्षण, पेयजल व्यवस्था, अस्थायी आवास निर्माण आदि विषयों के संबंध में केंद्रीय मंत्री को विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का सर्वोत्कृष्ट आयोजन बनाने के लिए राज्य सरकार विभिन्न बहुआयामी योजनाओं पर काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं —स्वच्छ भारत अभियान, अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी पहल, विद्युत परियोजनाओं और शहरी आधारभूत ढांचे से संबंधित अन्य योजनाओं की प्रगति की भी जानकारी दी।

    बैठक में अपर मुख्य, (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, केंद्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के प्रमुख अधिकारी तथा राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • मंदिर में चोरी की घटना: दानपेटी लेकर फरार हुईं लड़कियाँ, फुटेज वायरल

     

    बिलासपुर

    बिलासपुर के अशोक नगर स्थित भूतेश्वर महादेव मंदिर में दानपेटी चोरी का मामला सामने आया है। मंदिर परिसर में रखी दानपेटी चोरी की पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। घटना सामने आने के बाद मंदिर प्रबंधन में हड़ंकप मच गया और इसकी जानकारी तुरंत संबंधित लोगों को दी गई।

    सीसीटीवी फुटेज की जांच में पता चला कि अशोक नगर स्थित अटल आवास में रहने वाली तीन नाबालिग लड़कियां इस चोरी की घटना में शामिल थीं। फुटेज में देखा गया कि किस तरह तीनों लड़कियां दानपेटी के पास पहुंचीं और उसे उठाकर वहां से लेकर भाग गईं।

    मंदिर समिति ने इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई शुरू की और पूरी जानकारी सरकंडा थाने को दी। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दानपेटी चोरी करने के बाद इन नाबालिगों ने उसे गणपति हॉस्पिटल के पीछे स्थित खेत में गड्ढा खोदकर छिपा दिया था।

    बताया गया कि पुलिस और परिजनों की मौजूदगी में तीनों नाबालिगों से पूछताछ की गई। समाज व परिवार के सामने अपनी गलती महसूस करते हुए युवतियों के परिजनों ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। परिजनों ने भरोसा दिलाया कि ऐसी गलती दोबारा नहीं दोहराई जाएगी। चूंकि तीनों लड़कियां नाबालिग हैं, इसलिए मामले को संवेदनशील मानते हुए उन्हें कड़ी कानूनी कार्रवाई से फिलहाल बचाया गया। तीनों को समझाइश देकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।

  • सूरजपुर : जनजातीय गौरव दिवस पर ‘सूरजधारा’ ब्रांड का शुभारंभ

    जिले में स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद अब एक ही ब्रांड नाम से होंगे उपलब्ध

    सूरजपुर ,

    विगत दिवस दिनांक 15 नवम्बर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत कार्यरत स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए एकीकृत ब्रांड “सूरजधारा” का शुभारंभ किया गया। इस ब्रांड का लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री दयाल दास बघेल द्वारा किया गया।

    ब्रांड लॉन्च होने के साथ ही अब सूरजपुर जिले के विभिन्न विकासखंडों के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार सभी सामग्रियों का विक्रय “सूरजधारा” नाम से किया जाएगा। उत्पादों को समूहों द्वारा सूरजपुर सेफ फूड प्रोड्यूसर कंपनी को उपलब्ध कराया जाएगा, जहां उनका गुणवत्ता परीक्षण कर ब्रांड के नाम से पैकेजिंग की जाएगी।

    स्थानीय स्तर पर समूहों द्वारा निर्मित सामग्रियों को स्थानीय नागरिकों तक पहुँचाने की यह पहल “वोकल फॉर लोकल” की भावना को सुदृढ़ करती है। इसके माध्यम से लोगों को रसायन रहित, जैविक विधि से उत्पादित खाद्य सामग्री उपलब्ध होंगी, साथ ही स्वयं सहायता समूहों की आय में भी वृद्धि होगी।

    कार्यक्रम में कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बिजेंद्र सिंह पाटले, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रभारी अधिकारी विक्रम बहादुर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरनारायण खोटेल, जनपद पंचायत परियोजना प्रबंधक माधुरी भंडारी, सी-मार्ट कर्मचारी, कैडर तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

  • मध्यप्रदेश सरकार में फेरबदल की संभावना, मोहन यादव सक्रिय, मंत्रियों की रिपोर्ट बुलाई

    भोपाल 

     मध्यप्रदेश में मोहन यादव सरकार के दो साल पूरे होने वाले हैं. इसी बीच बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा-NDA की बड़ी जीत के बाद मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी मंत्रियों से उनके विभाग के काम-काज की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. परफॉर्मेंस के आधार पर ही अब मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी या किसी को बाहर जाना पड़ेगा.

    काम-काज की विस्तृत रिपोर्ट
    जानकारी यह है कि कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जबकि कई सीनियर विधायकों को फिर से मौका मिल सकता है. जिन नेताओं के नाम सबसे आगे चल रहे हैं, उनमें पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, मालिनी गौड़, अर्चना चिटनिस (चितनिस), अजय विष्णोई, हरिशंकर खटीक और ललिता यादव जैसे दिग्गज शामिल हैं. इनमें से कुछ पहले भी मंत्री रह चुके हैं और इनके समर्थक लंबे समय से इन्हें फिर से मंत्री बनाने की मांग कर रहे थे. साथ ही कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को केंद्रीय संगठन में जिम्मेदारी देने की भी तैयारी चल रही है. माना जा रहा है कि बिहार चुनाव में डॉ. मोहन यादव ने जिस तरह प्रचार किया और जीत में योगदान दिया, उससे दिल्ली में उनकी तारीफ हो रही है. इसी का इनाम देते हुए पार्टी आलाकमान उन्हें मंत्रिमंडल में पूरी छूट दे सकता है कि वे अपनी पसंद से टीम बनाएं.

    भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा, “हमारी पार्टी हर स्तर पर काम की समीक्षा करती रहती है. मुख्यमंत्री जी खुद हर महीने अधिकारियों और योजनाओं की समीक्षा करते हैं. दो साल पूरे होने पर विभागवार रिपोर्ट मांगी गई है, यह सामान्य प्रक्रिया है. मंत्रिमंडल विस्तार होगा या नहीं, यह मुख्यमंत्री जी का विशेष अधिकार है.”

    दूसरी तरफ कांग्रेस के पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने तंज कसा, “बिहार में बंपर जीत का बड़ा श्रेय मोहन यादव को जा रहा है. अब दिल्ली वाले उन्हें पुरस्कार में खुली छूट दे सकते हैं. अगर विस्तार हुआ तो मोहन यादव अपने से बड़े कद वाले नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं. कुछ को तो संगठन में भी भेजने की तैयारी है.” राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है. नए-पुराने चेहरों का मिश्रण और परफॉर्मेंस आधारित चयन ही इस बार की खासियत होगी. अभी सभी की निगाहें मुख्यमंत्री और दिल्ली के बड़े नेताओं के अगले संकेत पर टिकी हैं.

  • राजनीतिक और पारिवारिक संबंधों में बड़ा बदलाव, CM यादव के समधी बनेंगे अरुण यादव

    उज्जैन 

    मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव के बेटे की शादी की तैयारियां जोरों पर हैं। इस हाइ प्रोफाइल शादी के लिए दो होटल भी बुक किए जा चुके हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि मोहन यादव कांग्रेस के दिग्गज नेता के समधी बनने जा रहे हैं।

    तो आपको बता दें कि मोहन यादव के छोटे बेटे अभिमन्यु यादव की शादी कांग्रेस के दिग्गज नेता की भतीजी से होने जा रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव मोहन यादव के रिश्तेदार बनने वाले हैं।

    कांग्रेस के दिग्गज नेता की भतीजी

    पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव की भतीजी की डॉ इशिता के साथ मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के बेटे डॉ अभिमन्यु की शादी होगी। बता दें कि, पूर्व डिप्टी सीएम स्व. सुभाष यादव, दिनेश यादव के मौसा हैं। अरूण यादव और दिनेश यादव मौसरे भाई हैं।

    साथ ही सीएम की बेटी डॉ. आकांक्षा यादव दिनेश यादव की बहू है। अब दिनेश यादव की बेटी इशिता डॉ. मोहन यादव के परिवार की बहू बनने जा रही हैं।

    30 नवंबर को होगी शादी

    अभिमन्यु-इशिता की शादी 30 नवंबर को अथर्व होटल के पास स्थित मैदान में होगी। शादी कार्यक्रम में कई वीवीआईपी के पहुंचने की संभावना है। दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार, मंत्री, वरिष्ठ अफसर और पार्टी के प्रमुख के नेता। बताया जा रहा है डॉ मोहन यादव 26 नवंबर को उज्जैन पहुंच जाएंगे।

    पांच दिन तक चलेंगे कार्यक्रम

    अभिमन्यु-इशिता की शादी पर 5 दिन का कार्यक्रम होगा। जो कि 26 नवंबर से शुरु होगा। उस दिन वीआईपी आवास पर गणेश पूजन होगा। 27 को वीआईपी आवास पर हल्दी, 27 को वीआईपी आवास पर मेंहदी, 28 को गीता कॉलोनी स्थित निवास में माता पूजन, 29 अथर्व होटल में महिला संगीत, 30 की शाम अथर्व होटल में रिसेप्शन होगा।

    बता दें कि, सीएम डॉ. मोहन यादव के छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव की सगाई तकरीबन पांच महीने पहले खरगोन के किसान दिनेश यादव की बेटी से हुई थी। अभिमन्यु राजधानी भोपाल के एलएनसीटी मेडिकल कॉलेज में मास्टर्स इन सर्जरी कर रहे हैं। वहीं, डॉ इशिता एमबीबीएस के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं।

    पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव बनेंगे सीएम मोहन के समधी

    जी हां अरुण यादव की भतीजी डाक्टर इशिता के साथ सीएम मोहन यादव के बेटे डाक्टर अभिमन्यु की शादी 30  नवंबर को धूमधाम से होने जा रही है।

    आपको  बता दें कि पूर्व डिप्टी सीएम स्व. सुभाष यादव, दिनेश यादव के मौसा हैं। कांग्रेस नेता अरूण यादव और दिनेश यादव मौसरे भाई हैं। तो इस तरह से सीएम मोहन यादव के  समधी कांग्रेस के दिग्गज नेता बनने जा रहे हैं।

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभिमन्यु और डाक्टर इशिता की शादी 30 नवंबर को होगी। कार्यक्रम में कई वीवीआईपी  के पहुंचने की उम्मीद है। लिहाजा इस हाइ प्रोफाइल शादी के लिए तैयारियां चरम पर चल रही हैं। मोहन यादव कांग्रेस नेता अरुण यादव के समधी बनेंगे।

  • मुख्यमंत्री साय बोले – पंडुम कैफे का शुभारंभ बस्तर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का प्रेरक प्रतीक

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर में सामाजिक-आर्थिक बदलाव के नए अध्याय की शुरुआत करते हुए आज जगदलपुर में ‘पंडुम कैफ़े’ का शुभारंभ किया। यह कैफ़े नक्सली हिंसा के पीड़ितों और समर्पण कर चुके सदस्यों के पुनर्वास हेतु छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों को सम्मानजनक और स्थायी आजीविका प्रदान करने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। यह अनूठी पहल संघर्ष से सहयोग तक के प्रेरणादायक सफर को दर्शाती है।‘पंडुम कैफ़े’ जगदलपुर के पुलिस लाइन परिसर में स्थित है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘पंडुम कैफे’ में कार्यरत नारायणपुर की फगनी, सुकमा की पुष्पा ठाकुर, बीरेंद्र ठाकुर, बस्तर की आशमती और प्रेमिला बघेल के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत की। उन्होंने नई शुरुआत के लिए उनका हौसला बढ़ाया और ‘पंडुम कैफ़े’ के बेहतर संचालन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पंडुम कैफ़े का शुभारंभ बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का एक प्रेरक प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने साय ने कहा कि पंडुम कैफे आशा, प्रगति और शांति का उज्ज्वल प्रतीक है। कैफे में कार्यरत युवा, जो नक्सली हिंसा के पीड़ित तथा हिंसा का मार्ग छोड़ चुके सदस्य हैं, अब शांति के पथ पर अग्रसर हो चुके हैं। जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से उन्हें आतिथ्य सेवाओं, कैफ़े प्रबंधन, ग्राहक सेवा, स्वच्छता मानकों, खाद्य सुरक्षा और उद्यमिता कौशल का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

    हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति के पथ पर लौटे और कैफ़े में कार्यरत एक महिला ने इस अवसर पर भावुक होकर इस पुनर्वास पहल से हुए बदलाव की बात दोहराई। एक पूर्व माओवादी कैडर ने कहा कि,“हमने अपने अतीत में अंधेरा देखा था। आज हमें समाज की सेवा करने का यह अवसर मिला है, यह हमारे लिए एक नया जन्म है। बारूद की जगह कॉफी परोसना और अपनी मेहनत की कमाई से जीना—यह एहसास हमें शांति और सम्मान दे रहा है।”

    एक अन्य सहयोगी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि,“पहले हम अपने परिवार को सम्मानजनक जीवन देने का सपना भी नहीं देख सकते थे। अब हम अपनी मेहनत से कमाए पैसों से घर के सदस्यों का भविष्य संवार सकते हैं। यह सब प्रशासन और इस कैफ़े की वजह से संभव हुआ है।”

    एक अन्य सदस्य ने समुदाय के सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि,“हमें लगा था कि मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होगा, लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन ने हमें प्रशिक्षण दिया और हमारा विश्वास जीता। सबसे बड़ी बात यह है कि हम अब पीड़ितों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे हमें अपने अतीत के अपराधों को सुधारने और शांति स्थापित करने का अवसर मिला है।”

    उन्होंने यह भी बताया कि ‘पंडुम’ बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है, और इसकी टैगलाइन “जहाँ हर कप एक कहानी कहता है” इस बात का प्रतीक है कि यहाँ परोसी गई कॉफी सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष पर विजय और एक नई शुरुआत की कहानी भी अपने साथ लेकर आती है।

    इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, जगदलपुर महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, संभागायुक्त डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी., कलेक्टर हरिस एस., पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीगण भी उपस्थित थे।

  • प्राकृतिक आपदा से हुई मौतें: उत्तर बस्तर कांकेर में चार मामलों पर मुआवजा स्वीकृत

    उत्तर बस्तर कांकेर,

    कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड 6-4 में प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए आकाशीय बिजली गिरने तथा सर्प काटने से मृत्यु होने के 04 प्रकरणों में मृतकों के निकटतम आश्रितों को चार-चार लाख रूपए की मान से 16 लाख रुपए की सहायता राशि स्वीकृत की है।

    नरहरपुर तहसील अंतर्गत ग्राम चंवाड़ के 52 वर्षीय राजकुमार निषाद की आकाशीय बिजली गिरने से मृत्यु होने के प्रकरण में उनकी पत्नी श्रीमती ममता निषाद के लिए चार लाख रूपए तथा ग्राम डुमरपानी निवासी 35 वर्षीय रामभाऊ नेताम की सर्प काटने से मृत्यु होने के कारण पत्नी चिन्ताबाई नेताम के लिए चार लाख रूपए की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार कांकेर तहसील के ग्राम पीढ़ापाल निवासी 60 वर्षीय धनराज पोया की सर्प काटने से मृत्यु होने के प्रकरण में उनकी पत्नी  प्रमिला के लिए चार लाख रूपए तथा सरोना तहसील के ग्राम चोरिया निवासी 65 वर्षीय बिंदा कुंजाम की सर्प काटने से मृत्यु होने के प्रकरण में उनके निकटतम आश्रित सगाबाई, सगन और सगउ के लिए संयुक्त रूप से चार लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि कलेक्टर द्वारा स्वीकृत की गई है।

  • बिहार चुनाव के बाद वाड्रा का विवादित बयान: जनता असंतुष्ट, दोबारा चुनाव की जरूरत?

    इंदौर

    कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति और बिज़नेसमैन रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी राजनीतिक पारी को लेकर बड़ा बयान दिया हैं. इंदौर में उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए राजनीति में आने के संकेत दिए. इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा हमला किया. 

    रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि मैं राजनीति में आऊंगा तो लोग परिवारवाद कहने लगेंगे लेकिन अगर लोग चाहेंगे तो में राजनीति में आएंगे, अगर हम संसद में होंगे तो लोगों की बात को और बात को मजबूत करेंगे. वहीं बेटे रेहान के राजनीति में एंट्री के सवाल पर उन्होंने हा कि अभी ये सही समय नहीं है. 

     प्रियंका गांधी के पति और कांग्रेस नेता रॉबर्ट वाड्रा ने बिहार चुनाव परिणामों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता हालिया चुनाव नतीजों से किसी भी तरह खुश नहीं है। उन्होंने कहा कि जो परिणाम सामने आए हैं, वे जनता की मर्जी नहीं बल्कि चुनाव आयोग की भूमिका का नतीजा हैं। वाड्रा ने कहा कि बिहार में दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए, क्योंकि मौजूदा परिणामों पर भरोसा करना मुश्किल है।

    जनता का फैसला इससे अलग होता
     इंदौर में मीडिया से बातचीत करते हुए वाड्रा ने कहा कि चुनाव आयोग की मदद से यह परिणाम सामने लाए गए हैं और जनता का असली फैसला इससे अलग होता। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ देशभर के युवा लगातार जुड़ रहे हैं। रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए बड़े स्तर पर आंदोलन भी खड़ा किया जाएगा। उनके मुताबिक, अगर बिहार में दोबारा चुनाव कराए जाते हैं तो नतीजे बिल्कुल बदल जाएंगे।

    एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया

    वाड्रा ने कहा कि इस समय रेहान को राजनीति में डालने का सही समय नहीं है. रेहान राजनीति देखी है सीखा है और गांधी परिवार के संघर्ष को भी महसूस किया है. रॉबर्ट वाड्रा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि रेहान ने यह भी देखा है कि किस हद तक बीजेपी एजेंसी का प्रयोग करती है. 

    बीजेपी हर एक चुनाव में हमारे नाम का प्रयोग करती है. बिहार के रिजल्ट से लोग हैरान है खुश नहीं है. चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया में मदद की जिसकी वजह से ऐसे नतीजे आए हैं. बिहार में जो हुआ वो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है. एनडीए वाले अपने वादे को पूरा नहीं कर पाएगी. 
    बिहार में फिर चुनाव कराने की माँग

    इससे पहले रॉबर्ट वाड्रा ने बिहार के नतीजों पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि बिहार में चुनाव सही तरीके से नहीं कराए गए. अगर राड्य में दोबारा चुनाव कराए जाएंगे तो नतीजे पूरी तरह से बदल जाएंगे. युवा इन दिनों एनडीए सरकार की योजनाओं से परेशान हैं और सरकार को बदलना चाहते हैं. 

    आपको बता दें कि रॉबर्ट वाड्रा इन दिनों इंदौर और उज्जैन में धार्मिक यात्रा पर है. इस दौरान उन्होंने बिहार चुनाव को लेकर पत्रकारों से बात करते हुए अपनी राय भी रखी है. 

    महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे वाड्रा
    इंदौर प्रवास के दौरान वाड्रा ने अपने धार्मिक कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे दो दिनों तक मध्य प्रदेश में रहेंगे और इस दौरान उज्जैन एवं ओंकारेश्वर में ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे।

    बिहार की जनता इससे खुश नहीं
    रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि बिहार की जनता वास्तव में इन नतीजों से खुश नहीं है। जो कुछ हुआ है, वह पूरी तरह चुनाव आयोग की वजह से हुआ है। आयोग ने जिस तरह मदद की, उसके बाद जो परिणाम आए हैं, उनसे कोई भी सहमत नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के साथ अब बड़ी संख्या में युवा जुड़ रहे हैं और सभी मिलकर लोकतंत्र के लिए आंदोलन खड़ा करेंगे। यह चुनाव किसी भी तरह निष्पक्ष नहीं था, इसलिए बिहार में दोबारा मतदान होना चाहिए। अगर फिर से चुनाव हुए तो नतीजे पूरी तरह बदल जाएंगे।

  • दिव्यांगजन कल्याण नीति 2025 के मसौदे पर सुधार हेतु 18 नवंबर को राज्य स्तरीय कार्यशाला

     

    ’राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध विशेषज्ञ का होगा विमर्श’

    रायपुर,

    छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग और यूनिसेफ के विशेष सहयोग से रायपुर स्थित एक नीजि होटल में ’’छत्तीसगढ़ राज्य दिव्यांगजन कल्याण एवं पुनर्वास नीति 2025’’ के ड्राफ्ट को और सशक्त बनाने महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन करेगा।

    यह कार्यशाला महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न होगी। कार्यशाला का उद्देश्य है कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत प्रदेश के दिव्यांगजनों के लिए एक व्यापक और समावेशी नीति को अंतिम रूप देना है।

    दिव्यागजन अधिकार अधिनियम, 2016 एक ऐतिहासिक कानून है जो दिव्यांगता को दया के बजाय ’अधिकार’ के विषय के रूप में स्थापित करता है। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा ’’छत्तीसगढ़ राज्य दिव्यांगजन कल्याण एवं पुनर्वास नीति 2025’’ का एक व्यापक ड्राफ्ट तैयार किया गया है। ड्राफ्ट को और अधिक सशक्त एवं समावेशी बनाने के लिए यह कार्यशाला यूनिसेफ के विशेष सहयोग से आयोजित की जा रही है।

    यह कार्यशाला ’’हमारे बिना, हमारे बारे में कुछ भी नहीं’’ के मार्गदर्शी सिद्धांत पर आधारित होगी। इसका मुख्य उद्देश्य नीति को अंतिम रूप देने से पहले प्रमुख हितधारकों, विभिन्न संबंधित विभागों और राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से अमूल्य सुझाव एवं व्यावहारिक फीडबैंक प्राप्त करना है। इस महत्वपूर्ण विमर्श को तकनीकी और विशेषज्ञ राय प्रदान करने के लिए देश के जाने-माने विशेषज्ञ शामिल होंगे। इनमें श्री राजीव रतूड़ी (राजीव रतूड़ी बनाम भारत संघ के ऐतिहासिक मामले में मुख्य याचिकाकर्ता एवं डिसेबिलिटी राइट्स प्रमोशन इंटरनेशनल के एशिया पेसिफिक क्षेत्रीय अधिकारी), श्री समीर घोष (समावेश सलाहकार, विश्व बैंक), श्री अखिल पॉल (मुख्य संरक्षक, सेंस इंटरनेशनल इंडिया) और यूनिसेफ की विशेषज्ञ सुश्री अलका मल्होत्रा प्रमुख हैं।

    नीति-निर्माण में ’’समग्र शासन दृष्टिकोण’’ सुनिश्चित करने के लिए कार्यशाला में राज्य शासन के विभिन्न प्रमुख विभागों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। कार्यशाला में गृह (पुलिस), पंचायत एवं ग्रामीण विकास, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति कल्याण, जनसंपर्क एवं पर्यटन, सामान्य प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, वित्त, वाणिज्य एवं उद्योग, परिवहन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, महिला एवं बाल विकास, नगरीय प्रशासन एवं विकास, श्रम, खेल एवं युवा कल्याण और ग्रामोद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

    कार्यशाला में मुख्य अपेक्षित परिणाम ड्राफ्ट नीति के हर अध्याय जैसे- शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सुलभता और सामाजिक सुरक्षा पर विशेषज्ञों और इन सभी विभागों से ठोस इनपुट प्राप्त करना है। कार्यशाला में प्राप्त सुझावों को समाहित कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अंतिम नीति न केवल व्यापक, समावेशी और सुदृढ़ बने, बल्कि प्रदेश में दिव्यांगजनों के जीवन में वास्तविक व सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

  • धान खरीदी में लापरवाही: 250 राशन दुकाने रद्द, 12 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर

    रायपुर

    कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने रायपुर जिले की राशन दुकानों का आवंटन निरस्त करने का बड़ा फैसला लिया है. रविवार को छुट्टी का दिन होने के बावजूद धान खरीदी में सहयोग नहीं करने वाली सहकारी समितियों द्वारा संचालित 250 राशन दुकानों का आवंटन निरस्त किया गया है. अब इन दुकानों के संचालन का जिम्मा ग्राम पंचायतों को सौंप दिया गया है. पंचायतों से कहा गया है कि वे अपने लोगों की मदद से राशन दुकानों का संचालन करें.  

    जानकारी के मुताबिक, कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह को लगातार इस बात की शिकायत मिल रही थी कि सहकारी समितियां धान खरीदी करने में बिना वजह व्यवधान पैदा कर रही हैं. किसानों को धान बेचने से भी रोक रहे थे. इतना ही नहीं मंडियों में पहुंचने वाले किसानों को कई तरह की बातें बताकर वापस किया जा रहा था. लगातार इस तरह की शिकायत मिलने के बाद ही कलेक्टर ने आदेश जारी किया कि अब रायपुर जिले में जिन 250 राशन दुकानों का संचालन सहकारी समितियां कर रही थी, उनका संचालन अब ग्राम पंचायत वाले करेंगे.

    12 कंप्यूटर ऑपरेटरों पर एफआईआर
    राज्य में हड़ताल पर गए सहकारी समितियों के कर्मचारियों पर सरकार ने एस्मा लागू कर दिया है. सभी कर्मचारियों को हड़ताल खत्म कर धान खरीदी के लिए मंडियों में लौटने के निर्देश दिए गए हैं. ड्यूटी में कर्मचारियों को वापस नहीं लौटने पर सरकार ने एक्शन लेना शुरू किया. रायपुर के पुरानी बस्ती, खरोरा, धरसींवा और तिल्दा-नेवरा थानों में दर्जनभर कर्मचारियों पर छत्तीसगढ़ अति आवश्यक सेवा संधारण व विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 के तहत केस दर्ज किया गया है.

    जानकारी के मुताबिक पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में राजू दास, ओमप्रकाश माहले, विजय गुप्ता, सुवेश, आनंद सहित अन्य पर केस दर्ज किया गया है. धरसींवा में बृज मोहन देवांगन, तिल्दा में रामकुमार वर्मा और पोषण लाल धुरंधर, जबकि खरोरा में कौशल वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है. सभी कर्मचारी मंडियों में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं.

    हड़ताली समिति प्रबंधकों को लगा बड़ा झटका
    कलेक्टर के इस फैसले के बाद हड़ताल करने वाले सहकारी समिति प्रबंधकों को बड़ा झटका लगा है. समिति प्रबंधकों ने भी आरोप लगाया है कि हड़ताल तोड़ने के लिए ये फैसला लिया गया है. इस फैसले के बाद भी अभी तक हड़ताल खत्म करने की कोई सूचना जारी नहीं की गई है. ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से दुकानों का संचालन सहकारी समितियां ही कर रही थी.

  • छत्तीसगढ़ में नशामुक्ति अभियान की वर्षगांठ: व्यापक सहभागिता से बढ़ेगा जागरूकता मजबूत

    रायपुर,

    देशभर में 18 नवम्बर को नशामुक्त भारत अभियान की पाँचवीं वर्षगांठ पर राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर का मुख्य कार्यक्रम अमृतसर, पंजाब में होगा, जिसमें  प्रधानमंत्री  श्री नरेंद्र मोदी का संदेश वर्चुअल माध्यम से पूरे देश में प्रसारित किया जाएगा। इस राष्ट्रीय आयोजन से राज्य के हर हिस्से को जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ में भी बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित किया गया है।

    छत्तीसगढ़ के सभी जिलों, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, स्कूलों, विभागीय संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों तथा आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से सामूहिक रूप से नशामुक्ति शपथ दिलाई जाएगी। राज्यभर में नशा छोड़ने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और युवाओं को नशे से दूर रखने के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक तैयारी की गई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 70 स्थानों से वर्चुअल जुड़ाव की व्यवस्था की गई है, जिससे व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित होगी। जिला स्तर पर कलेक्टोरेट, जिला मुख्यालय सहित विभिन्न स्थानों से लगभग 26 हजार 190 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। उच्च शिक्षा संस्थानों में भी उत्साह देखने को मिल रहा है। राज्य के 25 विश्वविद्यालयों सहित उच्च शिक्षा संस्थानों में लगभग 4 लाख 48 हजार 995 प्रतिभागियों के शामिल होने का अनुमान है। वहीं अन्य विभागों के अधीन आने वाले 2,131 संस्थानों में 3 लाख 37 हजार 890 प्रतिभागी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे।

    स्वयं सहायता समूहों एवं आंगनबाड़ी-आशा कार्यकर्ताओं की सहभागिता भी महत्वपूर्ण रहेगी। प्रदेश के 28 हजार 753 स्वयं सहायता समूहों एवं आशा समूहों के माध्यम से लगभग 2 लाख 50 हजार 234 लोगों को नशामुक्ति शपथ दिलाई जाएगी। इसके अलावा 46 हजार 842 प्रतिभागियों के अन्य स्थानों से वर्चुअल रूप से जुड़ने की भी उम्मीद है।

    राज्यभर में अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों और अन्य गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति इस राष्ट्रीय अभियान को और प्रभावी बनाएगी। समाज कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा कार्यक्रम की तैयारी पूर्ण करने एवं सफल संचालन हेतु सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।राज्य सरकार का मानना है कि इस सामूहिक संकल्प के माध्यम से नशामुक्त और स्वस्थ समाज निर्माण की दिशा में जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन को नई गति मिलेगी।

  • नाले में युवक का शव मिलने से हड़कंप, पुलिस ने जांच तेज की

    दुर्ग

    दुर्ग जिले में एक बार फिर हत्या की वारदात सामने आई है। इस बार दुर्ग शहर के पोलसायपारा में नाले में युवक की लाश मिलने से हड़कंप मच गया। सफाई कर्मियों ने शव को देखा और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया और जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि युवक की हत्या के बाद शव को नाली में फेंका गया है।

    जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान संजय यादव के रूप में हुई है। सोमवार की सुबह पोलसायपारा में सफाई के दौरान कर्मियों की नजर नाले में पड़े शव पर पड़ी। देखते ही देखते बात फैली और भीड़ जमा हो गई। मौके से पुलिस को सूचना दी गई। कुछ ही देर में पुलिस की टीम भी पहुंची। पहले शव को बाहर निकलवाया गया। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को बुलाकर घटनास्थल का मुआयना कराया।

    शुरुआती जांच में शव पर चोट के निशान मिले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि युवक की हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाया गया। पुलिस ने आसपास के सीसी टीवी कैमरों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और हत्या के कारणों व आरोपियों का पता लगाने के लिए टीम गठित कर दी गई है। इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है फिलहाल मामले की जांच जारी है।