रोजगार समाचार

भारत में श्रम सुधार 2026: चार श्रम संहिताएं, EPFO 3.0 और मजदूरी-सामाजिक सुरक्षा में बड़ा बदलाव

भारत में लंबे समय से अटके श्रम सुधार अब अपने सबसे अहम मोड़ पर पहुँच चुके हैं। करीब पाँच साल के इंतजार के बाद केंद्र सरकार ने संकेत दे दिए हैं कि 2026 में चारों श्रम संहिताओं (Labour Codes) का पूर्ण कार्यान्वयन ज़मीनी स्तर पर शुरू होगा।सरकार द्वारा हाल ही में प्रकाशित विस्तृत नियमों में सभी श्रमिकों के लिए वैधानिक न्यूनतम मजदूरी और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा का वादा किया गया है। ये चार श्रम संहिताएँ देश के 29 पुराने श्रम कानूनों को समेटकर एक सरल और आधुनिक ढांचे में बदल देती हैं, जो आज की आर्थिक और रोजगार संबंधी वास्तविकताओं को बेहतर तरीके से दर्शाता है।

EPFO 3.0: भविष्य निधि सेवाओं में बड़ा डिजिटल अपग्रेड

  • पीएफ निकासी को और तेज़ व सरल बनाना
  • कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-1995) के तहत पेंशन निर्धारण को आसान करना
  • कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI-1976) के तहत बीमा दावों का शीघ्र निपटान

सरकार का कहना है कि EPFO 3.0 से सेवा की गति, पारदर्शिता और सदस्य संतुष्टि में बड़ा सुधार होगा।2025 रहा परिवर्तनकारी वर्ष”: श्रम मंत्री का दावा केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने 2025 को भारत की श्रम व्यवस्था के लिए एक “वास्तव में परिवर्तनकारी वर्ष” बताया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने कहा कि 21 नवंबर 2025 को चारों श्रम संहिताओं का प्रभावी होना एक बड़ी उपलब्धि रही। उनका कहना है कि 2026 का फोकस होगा

  • टेक्नोलॉजी आधारित सेवा डिलीवरी
  • ज़मीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन
  • श्रम संहिताओं के तहत बनाए गए नियमों का संचालन

मांडविया के अनुसार, ये नियम कानूनों को सिर्फ कागज़ तक सीमित न रखकर कार्यस्थल पर वास्तविक परिणाम देने का माध्यम बनेंगे, जिससे श्रमिकों और नियोक्ताओं – दोनों को स्पष्टता मिलेगी।भारत के श्रम इतिहास का सबसे बड़ा सुधारसरकार का दावा है कि ये सुधार भारत को अधिक औपचारिक और समावेशी श्रम बाजार की ओर तेज़ी से ले जाएंगे।मंत्री मांडविया ने इन्हें भारत के श्रम कानून इतिहास का सबसे व्यापक सुधार बताया है, जिनका उद्देश्य है: श्रमिक कल्याण में सुधार

असंगठित क्षेत्र का औपचारिकीकरण ,रोजगार के नए अवसर पैदा करना रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा का विस्तारश्रम सुधारों के साथ-साथ सरकार ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना भी शुरू की है, जिसका अनुमानित बजट करीब 1 लाख करोड़ रुपये है। इस योजना का लक्ष्य अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ नौकरियों को प्रोत्साहन देना है।सामाजिक सुरक्षा कवरेज में भी बड़ा इज़ाफा हुआ है सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कवरेज पहले: लगभग 19% अब: 64% से अधिक इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ (ISSA) ने भी मान्यता दी है।

डिजिटल लेबर इंफ्रास्ट्रक्चर ने बदली तस्वीर

ई-श्रम पोर्टल राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सेवाओं की पहुंच को काफी मजबूत किया है। इन पहलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। EPFO 3.0 इसी डिजिटल बदलाव का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। ट्रेड यूनियनों का विरोध और आम हड़ताल की तैयारी हालाँकि, ये सुधार विवादों से अछूते नहीं हैं। कई केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने श्रम संहिताओं को श्रमिक-विरोधी बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की है 22 दिसंबर 2025 को हुई बैठक में संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच ने 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया यूनियनों का आरोप है कि ये संहिताएँ श्रमिक अधिकारों और सुरक्षा पर व्यापक हमला हैं। इस हड़ताल को 9 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलन में औपचारिक मंज़ूरी दी जाएगी।

उद्योग जगत की राय: “एक मील का पत्थर

वहीं, उद्योग जगत इन सुधारों को सकारात्मक रूप में देख रहा है। सीआईआई और एम्प्लॉयर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया से जुड़े उद्योगप्रतिनिधियों का कहना है कि 2025 श्रम सुधारों के लिए एक निर्णायक वर्ष रहा है और नए नियम निवेश, रोजगार और औद्योगिक स्थिरता को बढ़ावा देंगे।

आगे की राह

जैसे-जैसे 2026 नजदीक आ रहा है, भारत के श्रम सुधार एक निर्णायक चौराहे पर खड़े हैं। सरकार डिजिटल सिस्टम और रोजगार योजनाओं के दम पर कार्यान्वयन को आगे बढ़ा रही है, जबकि ट्रेड यूनियनें इसे श्रमिक अधिकारों के लिए खतरा मान रही हैं। आने वाला साल तय करेगा कि ये सुधार ज़मीनी स्तर पर कितना प्रभाव डाल पाते हैं।