छत्तीसगढ़बिलासपुर जिला

CG : मुस्लिम व्यक्ति पूरी संपत्ति वसीयत नहीं कर सकता : हाईकोर्ट …

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति का एक तिहाई से अधिक हिस्सा वसीयत के जरिए किसी को नहीं दे सकता। जब तक कि बाकी वैध वारिस अपनी सहमति न दें। हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम कानून में वारिसों के अधिकारों की सुरक्षा एक मूल सिद्धांत है। यह फैसला कोरबा जिले से जुड़े एक मामले में आया है। जहां एक विधवा को उसके पति की संपत्ति में हिस्सा देने से निचली अदालतों ने इनकार कर दिया था।

दरअसल, 64 साल की जैबुननिशा ने अपने पति अब्दुल सत्तार लोधिया की जायदाद पर हक मांगते हुए हाईकोर्ट में अपील की थी। उन्होंने कोरबा के द्वितीय अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने उनके केस को 2015 और 2016 में खारिज कर दिया था। जैबुननिशा के पति की 2004 में मौत हो गई थी। जिसके बाद भतीजे मोहम्मद सिकंदर ने एक वसीयत पेश की, जिसमें दावा किया गया कि सारी जायदाद उसे मिलेगी। सिकंदर ने खुद को ‘’पालक बेटा’ बताया था। जैबुननिशा ने इस वसीयत को फर्जी बताया और कहा कि यह उनकी सहमति के बिना बनाई गई थी।

जैबुननिशा ने पहले निचली अदालतों में मुकदमा दायर किया था, लेकिन दोनों अदालतों ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालतों के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि निचली अदालतें विधवा के वैध कानूनी अधिकार की रक्षा करने में असफल रही थी।हाईकोर्ट ने मुस्लिम लॉ के सेक्शन 117 और 118 का हवाला देते हुए कहा कि वसीयत के जरिए जायदाद देने की एक सीमा है। मुस्लिम व्यक्ति अपनी जायदाद का सिर्फ एक तिहाई हिस्सा ही वसीयत कर सकता है। अगर इससे ज्यादा जायदाद वसीयत की जाती है, या किसी वारिस को दी जाती है, तो उसके लिए बाकी वारिसों की सहमति जरूरी है।

जस्टिस बीडी गुरु ने यह भी कहा कि निचली अदालतों ने गलती की कि उन्होंने विधवा पर वसीयत को गलत साबित करने का बोझ डाल दिया। असल में यह सिकंदर की जिम्मेदारी थी कि वह साबित करे कि जैबुननिशा ने पति की मौत के बाद अपनी मर्जी से और पूरी समझदारी से वसीयत के लिए सहमति दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ चुप रहने या केस दायर करने में देरी करने को रजामंदी नहीं माना जा सकता। इस मामले में कोई भी गवाह यह साबित नहीं कर पाया कि जैबुननिशा ने पूरी जायदाद वसीयत करने की इजाजत दी थी।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.