छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

गुरु के बाना,,,” गीत के साथ याद किए गए नाचा के पितामह मंदराजी दाऊ

 सांगीतिक बैठकी आयोजित कर लोक कलाकारों व कला साहित्य सुधियो ने दी श्रद्धांजलि

राजनांदगांव / छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक रंग शैली “नाचा” के पितामह दाऊ मंदराजी को उनकी 41 वी पुण्य तिथि पर लोक कलाकारो व कला साहित्य सुधियो द्वारा कृतज्ञता पूर्वक याद किया गया और सांगीतिक बैठकी आयोजित कर गायन- वादन के साथ उन्हें भाव-भीनी श्रद्धांजलि दी गई।

नाचा के गम्मतिहा कलाकार प्रेमलाल साव के संयोजना में कला- ग्राम कन्हारपुरी में आयोजित उक्त सांगीतिक बैठकी में मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक व वरिष्ठ लोक संगीतकार, कला/ साहित्य सुधि आत्माराम कोशा “अमात्य” जी थे वहीं कार्यक्रम की आभासी माध्यम से अध्यक्षता कवि / साहित्यकार व फिल्म निर्माता अखिलेश प्रसाद मिश्रा ने की ।

इस अवसर पर कला/ साहित्य सुधि राकेश इंदूभूषण ठाकुर, कवि/ कथाकार मानसिंह “मौलिक” कवि पवन यादव “पहुना” आनंद राम सार्वा “अनंत”  नाचा के वरिष्ठ कलाकार दाऊ चतुर सिंह, मोहरी वादक नत्थन दास जी,नाचा परी कलाकार छन्नु लाल साहू, विसराम साहू, तबला वादक एवं गायक महादेव हिरवानी व मनहरन साहु “मनु”, मोहन लाल, महावीर आदि लोक कलाकारों ने मंदराजी गौठान में स्थापित दाऊ मंदराजी की आवक्ष प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही संगीत कार खुमान लाल साव की प्रतिमा पर हार- फूल चढ़ाकर उन्हें नमन किया गया।
सांगीतिक बैठकी में कला पुष्प का अर्पण
दाऊ मंदराजी की पुण्यांजलि अवसर पर सुप्रसिद्ध रंग-कर्मी हबीब तनवीर के नाट्य ग्रूप-नया थियेटर के संगीतकार रहे स्व० देवीलाल नाग के निवास स्थान कन्हारपुरी में कलाकारों द्वारा सांगीतिक बैठकी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि श्री कोशा जी द्वारा मंदराजी दाऊ जी के साथ बिताए क्षणो व कलाकारी जीवन में दाऊ जी के साथ घटी घटनाओं और उनकी सांगीतिक बैठकी आयोजन व नाचा के प्रति दाऊ जी की जीवटता जिसमे खून से लथपथ हालत में रात भर हारमोनियम बजाने को शिद्दत के साथ याद किया। कला/ साहित्य सुधि राकेश इंदूभूषण ठाकुर ने दाऊ मंदराजी को महान कलाकार  बताया और कहा कि उन्होंने नाचा कला के लिए दो- दो गांवों की जमींदारी फूंक दी । कवि /कथाकार मानसिंह मौलिक ने दाऊ जी को छत्तीसगढ़ी लोक कला के सच्चा सपूत बताते हुए कहा कि कन्हारपुरी की धरती निश्चित ही धन्य है जहां के स्कूल में दाऊ जी पढ़ें, मोहन कारीगीर के यहां चिंकारा वादन व हारमोनियम सीखा और नाचा कला को नए अंदाज व नया आयाम दिया और उन्होंने यहां कला बीजों का रोपण करते हुए  नाचा रंग शैली को दुनिया भर में अमर‌ कर दिया । पवन यादव “पहुना” ने भी वरिष्ठ कला धर्मी श्री कोशा सहित यहां के नाचा कलाकारो से प्राप्त कला ज्ञान को अपना धरोहर बताया वहीं कवि आनंदराम सार्वा “अनंत” ने मंदराजी दाऊ पर सुंदर कविता पाठ कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मरने के बाद कोई, होता नहीं किसी का,,
 इस मौके पर दाऊ मंदराजी और उनके शिष्य रहे लोक संगीतकार स्व० देवी लाल के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर सांगीतिक बैठकी की शुरुआत की गई जिसमें नाचा कलाकार नत्थन दास व प्रेम लाल ने 70 के दशक के सुप्रसिद्ध नाचा गीत गुरु के बाना,, बांध लिए बाना जी,, गाकर रंग जमाया वहीं चतुर दाऊ ने मंदराजी दाऊ  द्वारा प्रायः गाए जाने वाले ग़ज़ल , दुनिया में क्या भरोसा,, नाचीज, जिंदगी का,, मरने के बाद कोई होता नहीं किसी का, गाकर दाऊ जी को श्रद्धांजलि दी। इसी तरह नाचा कलाकार विसराम साहू, छन्नूलाल साहू ने जनाना परी गीत में जगज्जननी माता दुर्गा के सुमरनी गीत गाए वहीं गायक मनहरन साहु मनु ने दाऊ जी के जमाने के गीत, सास गारी देये,,को शिद्दत से याद करते हुए ढोलक पर संगत की। देर तक चले इस सांगीतिक बैठकी में हारमोनियम पर संगत दाऊ चतुरसिंग बजरंग , तबले पर संगत क्रमशः मोहनलाल साहू (मोखला )व महावीर साहू (सुंदरा) ने की। मंजीरे में सुर संतराम निर्मलकर ने मिलाए। इस दौरान कन्हारपुरी के वरिष्ठ नागरिक श्यामलाल बजरंग,स्व० देवी लाल की धर्म पत्नी श्रीमती श्याम बाई, सुपुत्र राजू नाग खेमचंद हिरवानी,बिरजु निषाद,टोपी हिरवानी,धनराज बैगा, नेमचंद् हिरवानी,लीलाराम, रवेल हिरवानी,भोला निर्मलकर आदि सहित बड़ी संख्या में कलाप्रेमी व संगीत अनुरागी जन उपस्थित थे।

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