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CG: खदान में डंपर पलटा, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल …

CG: खदान में डंपर पलटा, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल …

CG: खदान में डंपर पलटा, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल …

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की कुसमुंडा एसईसीएल कोयला खदान में नीलकंठ कंपनी में लगातार हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खदान में सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी के चलते कर्मचारियों और वाहन संचालन के दौरान लगातार जोखिम बढ़ता जा रहा है। बताया जा रहा है कि गुरूवार को कुसमुंडा कोयला खदान में स्लाइड डंप के दौरान दो डंपर गहरी खाई में गिर गए थे। इसके बाद बुधवार, 8 अप्रैल को एक और भारी भरकम डंपर इसी गड्ढे में जा घुसी। इन दोनों घटनाओं में हालांकि वाहन चालक सुरक्षित रहे और किसी के हताहत होने की खबर नहीं मिली।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह घटनाएं खदान में सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन में गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती हैं। कर्मचारियों और वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी और नियमित सुरक्षा जांच अनिवार्य है। खदान में आउटसोर्सिंग के तहत काम कर रही नीलकंठ कंपनी के प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। लगातार हादसे यह दर्शाते हैं कि खदान में जोखिम प्रबंधन और सुरक्षा उपायों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

एसईसीएल प्रबंधन ने कहा कि सभी चालक और कर्मचारी सुरक्षित हैं और दुर्घटना के बाद खाई से डंपरों को बाहर निकालने का कार्य पूरा कर लिया गया है। साथ ही वाहन संचालन के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए चेतावनी जारी की गई है। स्थानीय कर्मचारी और मजदूरों का कहना है कि अगर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया तो भविष्य में बड़े हादसे होने की संभावना है। उनका यह भी कहना है कि खदान में सुरक्षा उपायों की नियमित निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यह घटनाक्रम न केवल खदान कर्मचारियों के लिए खतरा पैदा करता है, बल्कि कोयला उत्पादन प्रक्रिया और स्थानीय कामगारों की सुरक्षा पर भी गंभीर असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खदानों में सुरक्षा को प्राथमिकता दिए बिना उत्पादन बढ़ाने का प्रयास खतरनाक साबित हो सकता है।

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