
CG : हद हो गई…! बेसन-आटा, मैदा व मसाले भी मिलावटी
रायपुर । राजधानी रायपुर में समय-समय पर मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाये जाते हैं लेकिन नकली य मिलावटी सामानो कि बिक्री मे कमी नहीं हो रही है, बल्कि दिनोदिन मेन्युफ़ेक्चरिङ्ग् बढते ही जा रही है । राजधानी में पहले नकली पनीर बनाने वाली फैक्ट्री को पकड़ा था उसी के साथ नकली बेसन और मसाला भी अब मार्केट में आ चुका है।
फैक्ट्री शहर के बाहरी इलाके में संचालित होती है । इसके अलावा अंबिकापुर, बलरामपुर, तिल्दा, भाटापारा, बालोद , राजनांदगाव, दुर्ग,राजधानी में गुढिय़ारी, कटोरा तालाब, लाखे नगर,फाफाडीह , अमलीडीह सहित पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के गोंदिया, उल्हासनगर नकली खाद्य पदार्थों के निर्माण का प्रमुख केंद्र हैं जहां से पूरे भारत में नकली खाद्य पदार्थो की सप्लाई होती है। जहां सस्ते तेल, मिल्क पाउडर और रासायनिक तत्वों को मिलाकर एनालॉग पनीर तैयार किया जाता है उसी तर्ज पर लकड़ी के बुरादे में एसेंस मिलाकर मसाला तैयार किया जाता है ।
मजेदार बात यह है कि प्रतिबंधित लाखड़ी दाल तथा मटर दाल से बेसन तैयार किया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। राजधानी सहित पूरा प्रदेश नकली खाद्य सामान उत्पादकों की जद में है। नकली को असली पनीर, बेसन या मसाला के नाम पर शहर के होटलों, डेयरियों और मिठाई दुकानों में सप्लाई किया जा रहा है।
छुटभैये नेताओं से लेकर बड़े नेताओं तक पहुंच : मजे की बात यह है कि पकड़े जाने के बावजूद ये नकली मसाला माफिया छुटभैये नेताओं के माध्यम से बड़े नेताओं तक पहुंच कर अवैध गतिविधि में शुरू से ही संलिप्त है। नकली खाद्य सामग्री के उत्पादक रायपुर के दर्जनों प्रतिष्ठानों में इसकी सप्लाई करते हैं जो ओरिजनल जैसे ही दिखते हैं.पर होता है नकली। स्वाद भी उसी तरह ही मिलते जुलते रहता है।
अधिकारियों से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि यह एक संगठित नेटवर्क है जो अन्य शहरों में भी मिलावटी उत्पादों की आपूर्ति कर रहे है। जिसमें समाजसेवा से जुड़े लोग अधिकतर हैं और समाज की नेतागिरी करते-करते शासन-प्रशासन और बड़े नेताओं के नज़दीकी हासिल कर लेते है उसी का फायदा ये नक्काल उठाते हैं।
उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर कोई चिंतित नहीं : नकली खाद्य सामग्री का खुले आम बिकना खाद्य गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता वाली बात है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि ऐसे मामलों में अब जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ स त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मजबूरी का फायदा उठा रहे मिलावटखोर : देखा जा रहा है कि बेतहाशा मंहगाई के वजह से आम जनता को कम पैसे में सामान खरीदने में रूचि होने लगी है, असली नकली से अब कोई सरोकार नहीं रहा गया है क्योंकि असली सामान की कीमत देने पैसे नहीं होते और नकली सामान हर कंपनी के हूबहू बाजार में कम दामों में मिल जा रहा है।
इसी का फायदा नकली सामान बेचने वाले नक्काल लोग उठा रहे हैं। आम जनता को आगाह कर रहा : जनता से रिश्ता लगातार पिछले कई अंको में इसके बारे में खबर प्रकाशित कर शासन प्रशासन और आम जनता को आगाह कर रहा है। धड़ल्ले से हो रही नकली उत्पाद की सप्लाई के बारे में जनता से रिश्ता ने पिछले कई अंक में समाचार प्रकाशित किया था। दुकानदार जहां मोटे कमीशन के लालच में ये सामान बेच रहे हैं, वहीं नकली से अनजान ग्राहक भी कम कीमत पर सामान पाकर खुश हैं।
दरअसल रायपुर में मिलावटी बेसन, नकली मसाला,नकली पनीर, नकली खोआ, क्रीम व चायपत्ती, साबुन, ड्रायफ्रूट, कपडे और इलेक्ट्रानिक, इलेक्ट्रिक का जखीरा मिलने के बाद यह साबित हो गया। छत्तीसगढ़ में नकली खाद्य सामग्री, कास्मेटिक से लेकर सारा घरेलू सामान आसानी से खपाया जा रहा है। करोड़ों-अरबों का कारोबार रायपुर समेत प्रदेश भर में ब्रॉडेड कंपनी के नाम पर नकली सामान खपाने का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। अकेले रायपुर में हर महीने करोड़ों के इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, कास्मेटिक, खाद्य सामग्री, कपड़े समेत अन्य सामान खपाया जा रहा है।
नकली सामानों के कारोबार में अवैध विदेशी तस्करों का का एकाधिकार है। शरीर के लिए नुकसानदेह : अब वो ब्रांडेड उत्पाद के मिलते जुलते नाम के नकली उत्पाद बनाने वाली कंपनी से सांठगांठ कर सरकार की आंखों में धूल झोंककर करोड़़ों की कमाई कर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है और जीएसटी की चोरी भी कर रहे हैं।
नकली उत्पाद को खपाने में पाकिस्तानियों और बांग्लादेशी तस्कर व्यापारियों का हाथ होना बताया जा रहा है। आसपास ब्रांडेड कंपनियों के नकली उत्पाद की फैक्ट्रियां चल रही धड़ल्ले से, स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़, ग्राहकों को सीधा जहर दे रहे हैं। बेसन, मसाला, काजू-बादाम, दवाइयां, इलेक्ट्रानिक्स और अन्य खाने-पीने की नकली वस्तुओं के जद में शहरी और ग्रामीण बाजार फूड एंड ड्रग सेप्टी विभाग को राजनीतिक रसूखदारों और छुटभैया नेताओं के संरक्षण के चलते यह कारोबार फलफूल रहा है। नकली सामानों की जाँच नहीं हो रही : फूड एंड ड्रग से टी विभाग द्वारा भी नियमित चेकिंग नहीं की जा रही है जिसके चलते मार्केट नकली उत्पाद से अटा पड़ा है।
शिकायत करने पर स बंधित जगह पर छापेमारी की जाती है, लेकिन वह भी औपचारिकता निभाने के रूप में होती है। जबकि नियमित रूप से चेकिंग करना फूट एंड ड्रग से टी विभाग की जि मेदारी का हिस्सा है। पुलिस विभाग में भी नकली सामानों की जांच करने के लिए अलग से विंग नहीं है, जो नकली माल की जांच करे।
आम लोगों के साथ ब्रांडेड कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा की गई शिकायत के आधार पर जांच के नाम पर खानापूर्ति हो रही हैं। क्योंकि पुलिस अपना मूल काम कानून व्यवस्था पर ध्यान रखे या इन नकली सामान बेचने वालों की खबर ले। देखा ये भी जा रहा है कि नकली उत्पाद की फैक्ट्रियां छुटभैये नेताओं की होती है या ये फैक्ट्री वाले इन छुटभैये नेताओं से नज़दीकी बना कर रखते हैं ताकि समय पर ये इन अवैध गतिविधियों को संचालित करने में इनकी मदद करें। भाटापारा तिल्दा चकरभाटा और अन्य जगह ज्यादा उत्पादन राजधानी सहित समूचे छत्तीसगढ़ में ब्रांडेड कंपनियों के नकली उत्पाद धड़ल्ले से बिक रहे हैं।
न सिर्फ नकली प्रोडक्ट बिक रहे बल्कि इन नकली उत्पादों का निर्माण व पैकेजिंग भी छत्तीसगढ़ विभिन्न शहरों में ही हो रहा है। राज्य के खाद्य एवं औषधि व उपभोक्ता संरक्षण विभाग की उदासीनता से खाद्य पदार्थों से लेकर ब्रांडेड कंपनियों के इलेक्ट्रानिक्स, फैब्रिक्स, कास्मेटिक वस्तुओं के नकली उत्पाद राज्य में आसानी बेचे व बनाए जा रहे हैं।
भाटापारा-बिलासपुर नकली उत्पाद का मु य केंद्र राज्य के रायपुर, तिल्दा, भाटापारा, चकरभाठा, भिलाई-दुर्ग, रायगढ़, चांपा, धमतरी, बिलासपुर में नकली उत्पाद बनाने के कुटीर उद्योग चल रहे हैं। कई फैक्ट्रियां भी हैं जहां ब्रांडेड कंपनियों के हूबहू प्रोडक्ट तैयार और पैकेजिंग किए जाते हैं।नकली व प्रतिबंधित दवाएं भी धड़ल्ले से बिक रही राजधानी में प्रतिबंधित दवाओं का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
यह सब जानते हुए भी प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। जनता से रिश्ता ने शुरू से ही नकली सामानों के अलावा शराब, गांजा, भांग, चरस और नशीली वस्तुओं के खिलाफ मुहिम चलाया हुआ है। ब्रांडेड कंपनियों के नाम से नकली वस्तुओं के उत्पादन और बिक्री करने वालों के खिलाफ पुलिस अब छत्तीसगढ़ तमाम डुप्लीकेट कंपनियों की कुंडली खंगालने का काम शुरू कर दिया है।
उसके बावजूद नकली सामानों का कारोबार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। नकली उत्पाद का गढ़ बना रायपुर : देश की नामचीन और बड़ी कंपनियों के नाम पर नकली उत्पाद का राजधानी रायपुर गढ़ बन चुका है।
सारे नकली सामान आसपास के इलाके से ही यहाँ लाया जाता है, यहां पर सक्रिय सिंडिकेट बड़ी कंपनियों के उत्पादों के हू-ब-हू नकली उत्पाद तैयार कर प्रदेश भर के बड़े बाजारों से लेकर गांव-कस्बों में इसे सस्ते दाम पर खपाया जा रहा है। नकली वस्तुओं के सेवन से तरह-तरह की बीमारी भी हो रही मसलन गैस, एसिडिटी, कब्ज, साँस लेने में तकलीफ, पीलिया, कैंसर, ब्लड प्रेशर और मत्वपूर्ण हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों से लोग जूझ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद प्रशासन कु भकर्णी नींद में सोया हुआ है।
जि मेदार विभाग अपनी जि मेदारी भी गंभीरता से नहीं निभा रहे हैं। देखा गया है कि तिल्दा नेवरा, भाटापारा के आसपास प्राय: हर दूसरे घर में नकली सामानों के उत्पादन के साथ पैकेजिंग भी हो रही है और नगर पालिका प्रशासन हो या अन्य जि मेदार विभाग सब जांच के नाम पर चक्कर लगाकर अपनी कर्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं।..






