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 CG : जल है तो कल है और अमृत सरोवर इस ‘कल’ को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय संकल्प है

  • विशेष लेख- लोकेश्वर सिंह 

रायपुर

 जल है तो कल है और अमृत सरोवर इस 'कल' को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय संकल्प है

भारत में जल हमेशा से जीवन, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी रहा है। लेकिन समय के साथ बदलते मौसम, अनियमित वर्षा और भूजल स्तर में लगातार गिरावट ने गाँवों में पानी की उपलब्धता को चुनौतीपूर्ण बना दिया। इसी पृष्ठभूमि में देशभर में शुरू हुए “अमृत सरोवर” अभियान ने जल-संरक्षण को एक नए स्वरूप और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाया है। यह सिर्फ एक तालाब निर्माण कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी, पर्यावरण-संरक्षण और ग्रामीण विकास का समन्वित मॉडल बन चुका है।

 जल है तो कल है और अमृत सरोवर इस 'कल' को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय संकल्प है

अमृत सरोवर -सोच से साकार तक
               प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्रारंभ हुए इस राष्ट्रीय मिशन का उद्देश्य प्रत्येक जिले में अनेक “अमृत सरोवर” विकसित करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़े, मिट्टी व जल संरक्षण हो और स्थानीय समुदाय को स्थायी लाभ मिल सके।  अमृत सरोवर की संकल्पना तीन प्रमुख आधारों पर टिकी है- जल संचयन, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण समुदाय की भागीदारी। इस मॉडल में गाँव का हर व्यक्ति पंच-सरपंच से लेकर श्रमिक, किसान और युवा अपनी सक्रिय भूमिका निभाता है।

 जल है तो कल है और अमृत सरोवर इस 'कल' को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय संकल्प है

सरोवर का विस्तृत स्वरूप -सिर्फ संरचना नहीं, सजीव संसाधन
               एक अमृत सरोवर का निर्माण मात्र मिट्टी खुदाई या सफाई भर नहीं है। इसके साथ कई दीर्घकालिक प्रावधान सुनिश्चित किए जाते हैं। गहरी खुदाई कर बड़ी जल क्षमता का निर्माण, तल एवं तटों पर घास/वनस्पति रोपण, चारों ओर सुरक्षा तटबंध, वर्षा जल संग्रहण के वैज्ञानिक प्रबंध, आसपास वृक्षारोपण कर जल संरक्षण चक्र को मजबूत करना, गाँव के लिए पर्यटन/मनोरंजन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशना भी है। इससे सरोवर केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि पूरे गाँव की पर्यावरणीय और सामाजिक धुरी बन जाता है।

क्यों आवश्यक है अमृत सरोवर?
              ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले वर्षों में पानी की कमी और बरसाती जल का बहाव एक गंभीर समस्या बन चुका था। अमृत सरोवर इसके जवाब में एक समग्र समाधान बनकर उभरा- भूजल स्तर में वृद्धि, कृषि के लिए सिंचाई सुविधा में सुधार, पशुओं के लिए सुरक्षित पानी की उपलब्धता, बाढ़ नियंत्रण में सहायता, सूखे की समस्या में राहत, पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होती है। इन सभी प्रभावों ने अमृत सरोवर को ग्रामीण विकास योजनाओं में केंद्र बिंदु बना दिया है।

एमसीबी जिले का उदाहरण – उत्कृष्टता का मॉडल
                 जिला एमसीबी में अमृत सरोवर अभियान ने विकास का नया मानक स्थापित किया है। यहाँ प्रत्येक ब्लॉक में सरोवरों को समयबद्ध तरीके से विकसित किया गया, स्थानीय मजदूरों को मनरेगा के माध्यम से रोजगार, ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी, संरक्षण के आधुनिक उपाय के साथ लागू किया गया। सरोवरों के पूर्ण होने के बाद आसपास के किसानों को फसल की सिंचाई में बड़ी सहायता मिली है। बरसात के बाद जल भराव से बचाव और तालाबों की स्थायी जल उपस्थिति ने ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए हैं। कई गाँवों में अमृत सरोवर आज पिकनिक स्पॉट, समुदाय मिलन स्थल, और पर्यावरण शिक्षा केंद्र के रूप में पहचान बना चुके हैं।

जनभागीदारी- इस मिशन की सबसे बड़ी ताकत
                 एक अमृत सरोवर तभी सफल होता है जब गाँव स्वयं इसमें भागीदारी करता है। ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह, युवा मंडल, स्कूल, किसान-सभी अपने-अपने स्तर पर योगदान देते हैं इसमें श्रमदान, पौधरोपण, जल संरक्षण के प्रति जागरूकता, रखरखाव और सुरक्षा, सरोवर में कचरा न डालने की प्रतिज्ञा लेना शामिल है। इससे सरोवर लंबे समय तक जीवित रहता है और जल सतत उपयोग योग्य बनता है।

भविष्य की दिशा- स्थायी जल प्रबंधन का मजबूत आधार
               अमृत सरोवर अभियान ग्रामीण भारत में स्थायी जल प्रबंधन का मजबूत आधार बन रहा है। यह जल संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रहने देता बल्कि सामुदायिक आंदोलन में बदल देता है।
भविष्य में सरोवर पर्यटन केंद्र, पर्यावरण शिक्षा संस्थान, आजीविका मॉडल (मत्स्य पालन, पर्यटन), सामुदायिक विकास परिसर के रूप में सामने आ सकते हैं।

अमृत सरोवर, अमृत भविष्य
              अमृत सरोवर केवल जल संचयन का माध्यम नहीं, बल्कि गाँवों में आत्मनिर्भरता, सामुदायिक शक्ति और प्रकृति के साथ संतुलन की नई कहानी है। यह कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों के लिए वह मूल्यवान जल-धरोहर तैयार कर रहा है, जो भविष्य में गाँवों की जीवनरेखा बनकर उभरेगी। जल है तभी कल है और अमृत सरोवर इस “कल” को सुरक्षित रखने का राष्ट्रीय संकल्प है।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.