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CG : अप्रशिक्षित इंजीनियर बिना आडिट जारी कर रहे NOC …

रायपुर । राज्य सरकार ने फायर सिस्टम की जांच और अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का काम निजी कंपनियों को सौंप दिया है। अब इस व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। निजी कंपनियों द्वारा नि:शुल्क जारी होने वाले एनओसी की प्रक्रिया को कमाई का जरिया बना लिया है। नई व्यवस्था के तहत निजी कंपनियां फायर आडिट के लिए 10 रुपए प्रति वर्गफीट तक शुल्क वसूल रही हैं। इसका सीधा असर असपतालों, स्कूलों, कालेजों और अन्य संस्थानों पर पड़ रहा है। जिससे इलाज और शिक्षा भी महंगी होने लगी हैं। मौजूदा व्यवस्था में यदि किसी अस्पताल या भवन का क्षेत्रफल 50 हजार वर्गफीट है तो उसे सिर्फ आडिट के लिए हर साल करीब 5 लाख रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है। छोटे संस्थानों के लिए भी यह राशि हजारों लेकर लाखों तक पहुंच रही है। निजी अस्पताल संचालक इस शुल्क का विरोध कर रहे हैं।

अप्रशिक्षितों के भरोसे फायर एनओसी सबसे बड़ा सवाल यह है कि अग्निशमन विभाग के पास प्रशिक्षित अधिकारी और तकनीकी स्टाफ मौजूद होने के बावजूद आडिट की जि मेदारी निजी कंपनियों को क्यों सौंपी गई है। जबकि फायर से टी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ही सरकार ने आठ अधिकारियों को फायर इंजीनियरिंग की विशेष ट्रेनिंग दिलाई थी जिस पर प्रति अधिकारी करीब तीन-तीन लाख रुपए खर्च किए गए। यह जि मेदारी निजी एजेंसियों को सौंपने से पहले आनलाइन आवेदन के बाद जिला कमांडेट की टीम मौके पर निरीक्षण करती थी और मु यालय से फायर एनओसी जारी होती थी। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नि:शुल्क थी। अब वही प्रक्रिया निजी एजेंसियों से कराई जा रही है और आडिट के नाम पर मोटी राशि वसूली जा रही है।

बिना आडिट मनमानी वसूली कई स्थानों पर बिना आडिट और स्थल निरीक्षण के ही फायर एनओसी जारी करने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। जिन इमारतों और संस्थानों में जरूरी फायर से टी सिस्टम तक स्थापित नहीं हैं, वहां भी प्रमाणपत्र देने की बात सामने आ रही हैं। निजी एजेंसियों द्वारा एनओसी के नाम पर दो लाख रुपए तक शुल्क वसूलने की भी शिकायतें मिल रही हैं, जबकि सरकार के हिस्से में सिर्फ जीएसटी की राशि ही पहुंच रही है। जबकि दूसरे राज्यों में एनओसी प्रक्रिया छग से आसान है। मध्यप्रदेश में 50 बिस्तरों से कम वाले अस्पतालों को पंजीकृत इंजीनियर के प्रमाणीकरण के आधार पर संचालन की अनुमति दी जाती है और फायर से टी सर्टीफिकेट की वैधता तीन वर्ष होती है। वहीं आंध्रप्रदेश में एनओसी नवीनीकरण पांच वर्ष के लिए किया जाता है। वहां संचालक द्वारा सेल्फ सर्टीफिकेट देकर यह प्रमाणित किया जाता है कि संस्थान में अग्निशमन यंत्र लगे हैं और नियमित माकड्रिल कराई जाती है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी फायर से टी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फायर एनओसी केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गई तो व्यवस्था पड़े हादसे के कारण बन सकती है। संवेदनशील व्यवस्था में नियमित, वास्तविक निरीक्षण जरूरी है अन्यथा आपात स्थिति में गंभीर दुर्घटना की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। एनओसी के वगैर लाइसेंस नवीनीकरण भी नहीं निजी एजेंसियों की मनमानी को और बढ़ावा स्वास्थ्य विभाग के उस फैसले से भी मिल रहा है जिसमें लाइसेंस नवीनीकरण के लिए फायर एनओसी अनिवार्य कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना फायर एनओसी के क्लीनिक, नर्सिंग होम और अस्पतालों को नर्सिंग होम एक्ट के तहत संचालन का नवीनीकरण लाइंसेस नहीं जाएगा। अस्पताल संचालकों का कहना है कि फायर एनओसी की जटिल प्रक्रिया और शुल्क के कारण कई पुराने संस्थानों का संचालन मुश्किल हो रहा है।

lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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