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CG : हरित कौशल विकास : आदिवासी युवाओं से जैव विविधता संरक्षण को नई दिशा

रायपुर,

 हरित कौशल विकास : आदिवासी युवाओं से जैव विविधता संरक्षण को नई दिशा
 हरित कौशल विकास : आदिवासी युवाओं से जैव विविधता संरक्षण को नई दिशा

छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं को कौशल विकास से जोड़कर जैव-विविधता संरक्षण को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी उद्देश्य से बोर्ड ने वन मंत्री केदार कश्यप की पहल पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सहयोग से हरित कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किया है। यह विशेष प्रशिक्षण इसलिए तैयार किया गया है ताकि जंगलों में रहने वाले युवाओं को जैव विविधता संरक्षण से जुड़ी जानकारी, व्यवहारिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिल सकें।

आदिवासी युवाओं को कौशल और रोजगार उपलब्ध कराने जैव विविधता संरक्षण बन रहा है सशक्त माध्यम

       वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार का यह प्रयास आदिवासी युवाओं को कौशल, ज्ञान और रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण को भी सशक्त बना रहा है।
 गौरतलब है कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आजीविका के नए अवसर प्रदान करना, पर्यावरण मित्र करियर की ओर प्रेरित करना तथा उन्हें स्थानीय संसाधनों के संरक्षण में सक्षम बनाना है। प्रशिक्षण में युवाओं को राष्ट्रीय उद्यान गाइड, पर्यटक गाइड, प्राकृतिक इतिहास प्रदर्शक, वन संसाधन सहायक, पारंपरिक वन संरक्षण तकनीकों, और वन आधारित आजीविका से जुड़े विभिन्न कौशल सिखाए गए।

105 युवाओं ने प्रथम चरण में दिया गया प्रशिक्षण

     इसी कड़ी में राज्य के जांजगीर, कटघोरा, कोरबा, जगदलपुर, बीजापुर, सुकमा आदि कई जिले से कुल 105 युवाओं ने प्रथम चरण में भाग लिया। प्रशिक्षण 10 से 30 दिनों तक चला और इसमें युवाओं को बिना किसी शुल्क के फील्ड भ्रमण, जैव विविधता पहचान, पारिस्थितिक संवेदनशीलता, वन संपदा का संरक्षण, औषधीय पौधों की पहचान और दस्तावेजीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों का ज्ञान दिया गया। विशेष रूप से आकांक्षी सुकमा जिले के 65 युवाओं ने जंगलों में पाए जाने वाले 153 प्रजातियों के पौधों और 47 पक्षी प्रजातियों की पहचान की। वन विभाग के विशेषज्ञों ने उन्हें हर्बेरियम बनाने, जैव-विविधता सर्वे तथा उपकरणों के उपयोग का भी प्रशिक्षण दिया।

युवाओं को वैज्ञानिक तरीके से परंपरागत ज्ञान का संरक्षण  सिखाया जाता है

      इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण भाग यह भी है कि युवाओं को वैज्ञानिक तरीके से परंपरागत ज्ञान का संरक्षण करना सिखाया जा रहा है। इससे स्थानीय समुदायों में जैव-विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में ग्रामीणों की भागीदारी भी मजबूत हो रही है।

दुर्लभ पौधों और जीवों की कर पा रहे हैं पहचान

    इस प्रशिक्षण का मुख्य प्रभाव यह रहा कि अब युवा अपने क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ पौधों और जीवों की पहचान कर पा रहे हैं। कई प्रशिक्षण प्राप्त युवा ईको-गाइड, नेचर गाइड, बैचलर सर्वे टीम और ईको-टूरिज्म गतिविधियों से जुड़ कर रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।

lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.