हरीश राणा कौन हैं 13 साल Vegetative State में रहे 31 साल के बेटे को Supreme Court ने दी गरिमापूर्ण मौत की इजाज़त AIIMS में होगा इलाज बंद
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को एक ऐतिहासिक फैसले में 32 वर्षीय हरीश राणा के लिए Passive Euthanasia की अनुमति दी। हरीश 2013 से एक दुखद हादसे के बाद Persistent Vegetative State में हैं और वह पहले व्यक्ति बने जिन्हें Life Support हटाने की अनुमति मिली।Justice JB Pardiwala और Justice KV Viswanathan की Bench ने हरीश के माता-पिता को Medical Support हटाने की अनुमति दी। Bench ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में मुख्य सवाल यह नहीं है कि मौत मरीज़ के हित में है या नहीं बल्कि यह है कि क्या Life-Sustaining Treatment जारी रखना मरीज़ के हित में है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| फैसले की तारीख | 11 मार्च 2026 (बुधवार) |
| Bench | Justice JB Pardiwala और Justice KV Viswanathan |
| मरीज़ का नाम | हरीश राणा |
| उम्र | 31-32 साल |
| घर | गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश |
| हादसा | 2013 में Chandigarh में चौथी मंजिल से गिरे |
| कितने साल से Vegetative State में? | 13 साल से ज़्यादा |
| अपंगता | 100% Disability, Quadriplegia |
| Life Support | Tracheostomy Tube (साँस) + PEG/Gastrostomy Tube (खाना) |
| Medical Board की राय | ठीक होने की संभावना नगण्य |
| फैसले में क्या आदेश? | AIIMS में Palliative Care, धीरे-धीरे इलाज बंद |
| भारत का पहला? | हाँ — 2018 के बाद Passive Euthanasia का पहला व्यावहारिक मामला |
हरीश राणा कौन हैं 19 साल में टूट गई ज़िंदगी
हरीश राणा गाज़ियाबाद के रहने वाले BTech के छात्र थे जब 2013 में Chandigarh में अपने Paying Guest आवास की चौथी मंजिल से गिर गए। इस हादसे में उन्हें Traumatic Brain Injury हुई जिससे वह 100% अपाहिज और Permanent Vegetative State में आ गए।
डॉक्टरों ने बार-बार कहा कि उनके ठीक होने की संभावना व्यावहारिक रूप से नगण्य है। एक दशक से ज़्यादा समय तक उनके परिवार ने उन्हें ज़िंदा रखने की दर्दनाक लड़ाई लड़ी और इस दौरान उन्हें भारी भावनात्मक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक हरीश के माता-पिता ने उनके Medical इलाज के लिए अपना घर तक बेच दिया।
माँ का दर्द: “9 महीने पेट में रखा, आज उसकी मौत माँग रही हूँ”
हरीश की माँ निर्मला राणा ने कहा — “मैंने उसे 9 महीने पेट में रखा। आज मैं कह रही हूँ कि मैं उसे आज़ाद करना चाहती हूँ। एक माँ को कभी ऐसा नहीं कहना पड़ना चाहिए — पर ऐसी ज़िंदगी का क्या फायदा?” पिता अशोक राणा ने कहा — “हम उसे छोड़ना नहीं चाहते थे। हम थक गए क्योंकि हम और पकड़ नहीं सकते थे।”
नीचली अदालत ने क्यों ठुकराया था? — Feeding Tube = Active Euthanasia?
हालाँकि Medical विशेषज्ञों ने माना कि हरीश की हालत ठीक नहीं हो सकती, फिर भी माता-पिता को Medical Support हटाने की अनुमति नहीं दी गई क्योंकि हरीश बिना Ventilator के साँस ले सकते थे। निचली अदालत ने कहा कि Feeding Tube हटाना Active Euthanasia होगा जो भारत में अभी भी अवैध है।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक स्पष्टीकरण: Feeding Tube = Medical Treatment
इस ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Feeding Tube और Nasogastric Tube Medical Treatment हैं — न कि बुनियादी देखभाल। इसलिए इन्हें हटाना Passive Euthanasia के दायरे में आता है, Active Euthanasia नहीं।
यह स्पष्टीकरण बेहद ज़रूरी था क्योंकि यही वजह थी कि निचली अदालतों ने परिवार की अर्ज़ी बार-बार ठुकराई थी। इस फैसले से ऐसे हज़ारों परिवारों को दिशा मिलेगी जो इसी कानूनी दुविधा में फँसे हैं।
AIIMS में क्या होगा? — Palliative Care में धीरे-धीरे बंद होगा इलाज
सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के मामले के लिए विशेष दिशा-निर्देश भी तय किए। हरीश को AIIMS नई दिल्ली के Palliative Care विभाग में भर्ती किया जाएगा। Medical Treatment को एक Medical Board की निगरानी में धीरे-धीरे बंद किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि पूरी प्रक्रिया इस तरह की जाए कि मरीज़ को कष्ट न हो और अंत तक उनकी गरिमा बनी रहे।
विश्लेषण — Passive Euthanasia बनाम Active Euthanasia
| पहलू | Passive Euthanasia | Active Euthanasia |
|---|---|---|
| परिभाषा | इलाज बंद करके प्राकृतिक मृत्यु | सीधे जीवन समाप्त करना |
| तरीका | Ventilator, Feeding Tube, Medicines बंद | Lethal Injection |
| भारत में स्थिति | कानूनी — Supreme Court Guidelines के साथ | अवैध — Criminal Offence |
| विदेश में | व्यापक रूप से स्वीकृत | Netherlands, Belgium में कानूनी |
| हरीश राणा केस | अनुमति मिली — AIIMS में होगा | लागू नहीं |
| 2018 Common Cause Judgment | आधार बना | अभी भी प्रतिबंधित |
हरीश राणा केस का पूरा Timeline
हरीश 2013 में Chandigarh में चौथी मंजिल से गिरे और उन्हें Traumatic Brain Injury हुई। जुलाई 2024 में पिता अशोक राणा ने Delhi High Court में Euthanasia की याचिका लगाई जिसे अस्वीकार कर दिया गया। नवंबर 2025 में Supreme Court ने Noida District Hospital में Primary Medical Board गठित किया।
13 जनवरी 2026 को Supreme Court के Judges ने हरीश के माता-पिता और छोटे भाई से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। 15 जनवरी 2026 को परिवार के वकील और Additional Solicitor General की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद Supreme Court ने अपना फैसला सुरक्षित रखा।
11 मार्च 2026 को सुबह 1:28 बजे NDTV ने Breaking News दी — Supreme Court ने 13 साल से Vegetative State में रहे हरीश राणा के लिए Passive Euthanasia को मंज़ूरी दे दी।
हरीश राणा बनाम अरुणा शानबाग — दो ऐतिहासिक मामलों की तुलना
अरुणा शानबाग मामला भारत का एक ऐतिहासिक कानूनी और चिकित्सा मामला है। 1973 में KEM Hospital, Parel में काम करने वाली Junior Nurse अरुणा के साथ अस्पताल के एक चपरासी ने यौन हमला किया और वह Vegetative State में चली गईं। 24 जनवरी 2011 को 37 साल बाद पत्रकार-कार्यकर्ता Pinki Virani ने Euthanasia की याचिका दायर की।
Supreme Court ने 7 मार्च 2011 को याचिका खारिज कर दी लेकिन अपने ऐतिहासिक मत में अरुणा शानबाग के लिए Passive Euthanasia की अनुमति दे दी। हरीश राणा मामला इस मायने में अलग है कि यह 2018 के Common Cause Judgment के बाद Passive Euthanasia का पहला व्यावहारिक क्रियान्वयन है।
2018 Common Cause Judgment — वो आधार जिस पर टिका है यह फैसला
Supreme Court ने 2018 के Common Cause फैसले के तहत इस मामले की जाँच की जिसमें माना गया था कि Article 21 के तहत जीने का अधिकार में गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार भी शामिल है। Supreme Court ने कहा कि कोई व्यक्ति मृत्यु चुन सकता है जब कृत्रिम Life Support से जीवन को लम्बा खींचना उनकी गरिमा के विरुद्ध हो और ठीक होने की कोई उम्मीद न हो।
AIIMS Medical Board की रिपोर्ट — ठीक होने की संभावना शून्य
Additional Solicitor General Aishwarya Bhati ने Court को बताया कि हरीश राणा पूर्ण जड़ता की अवस्था में हैं। उनकी आँखें हलचल को Track नहीं करतीं, वह डर की उत्तेजना पर प्रतिक्रिया नहीं देते और किसी भी तरह का सार्थक Neurological सुधार नहीं हुआ है। AIIMS के Medical Board की रिपोर्ट ने Bench को आश्वस्त किया कि अब अंतिम निर्णय लेना ज़रूरी है। Justice Pardiwala ने कहा — Court इस लड़के को हमेशा इस अवस्था में नहीं रख सकत
हरीश राणा का मामला सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं था। यह एक माँ की रातों की नींद थी, एक पिता की बेची हुई छत थी और एक बेटे की 13 साल की चुप्पी थी। आज सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया वह न सिर्फ हरीश को गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार देता है बल्कि भारत में Passive Euthanasia के लिए एक नई राह भी खोलता है। AIIMS में अब Feeding Tube धीरे-धीरे हटाई जाएगी और हरीश को वह आज़ादी मिलेगी जिसकी माँग उनके माता-पिता ने सालों तक की।






