लोकपाल नियुक्ति पर उठे सवाल, हाईकोर्ट में पहुँचा मामला — छह माह से लंबित आदेश पर राजनांदगांव के प्रदीप शर्मा ने याचिका दायर की
राजनांदगांव/रायपुर। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा में लोकपाल पद हेतु वर्ष 2024 में जारी भर्ती प्रक्रिया अब विवादों में आ गई है। विभाग द्वारा मार्च 2025 में पात्रता सूची जारी की गई थी, जिसमें राजनांदगांव के प्रदीप शर्मा एकमात्र पात्र उम्मीदवार घोषित हुए थे। निर्धारित अवधि 28 अप्रैल 2025 तक किसी भी प्रकार की दावा-आपत्ति प्राप्त नहीं हुई थी, जिसके बाद एक माह के भीतर नियुक्ति आदेश जारी किया जाना था।
हालांकि, छह माह बीत जाने के बाद भी आदेश जारी नहीं किया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। इस देरी और संभावित अनियमितता को लेकर प्रदीप शर्मा ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव, मनरेगा आयुक्त, मंत्री तथा विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पूरी जानकारी दी थी। इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं होने पर प्रदीप शर्मा ने बिलासपुर हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की है।
याचिका में कहा गया है कि विभाग द्वारा पात्रता सूची जारी होने के बाद किसी अन्य व्यक्ति का नाम जोड़ना नियुक्ति नियमों का उल्लंघन है। प्रदीप शर्मा ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि नियुक्ति नियमों के तहत शीघ्र आदेश जारी करने के निर्देश दिए जाएं।
इस मामले में हाईकोर्ट के अधिवक्ता मनोज राय ने बताया कि “नियमों के अनुसार एक माह के भीतर नियुक्ति आदेश जारी किया जाना चाहिए, किंतु छह माह तक रोककर रखना और पात्रता सूची में किसी अन्य का नाम जोड़ना पूरी तरह गलत है। यदि विभाग ने ऐसा किया है तो हाईकोर्ट के आदेश से संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया की जांच कराई जाएगी।”
राजनांदगांव जिले में लोकपाल नियुक्ति न होने से पंचायत स्तर पर कई शिकायतों और कार्यों के निस्तारण में देरी हो रही है। अब उम्मीद की जा रही है कि हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद विभाग शीघ्र निर्णय लेकर लोकपाल की नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करेगा।


