
Rajnandgaon : शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ…
राजनांदगांव. शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य प्रो. सुचित्रा गुप्ता के निर्देशन में भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) समिति द्वारा किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय दर्शन, परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की अविरल धारा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
कार्यशाला के प्रथम दिवस मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य देवेंद्र (ग्रामीण सेवा, छत्तीसगढ़ प्रांत) ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा कोई तर्क नहीं, एक भाव है- यह हमारे जीवन का मार्गदर्शन करने वाला दर्शन है। उन्होंने बताया कि यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कारों और आचरण के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में माटी को मां का दर्जा दिया गया है, जो प्रकृति और पर्यावरण के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाता है।
भारतीय संस्कृति है अद्भूत
आचार्य देवेंद्र ने ‘वैदिक मैथेमेटिक्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा में विज्ञान, तर्क और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें प्रकृति की पूजा, परंपराओं का संरक्षण और अंधकार को दूर करने का संदेश देती है। कार्यक्रम का संचालन वंदना मिश्रा और लिकेश्वर सिन्हा ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
इसलिए है महत्वपूर्ण
प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने कहा कि ज्ञान की ललक हर क्षेत्र में देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि ‘जो अपनी जड़ों को पहचानता है, वही सुदृढ़ भविष्य का निर्माण करता है।’ उन्होंने इस कार्यशाला को आधुनिक शिक्षा में भारतीय परंपरा और मूल्य आधारित दृष्टिकोण के समावेश की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
नई पीढ़ी को जोड़ना उद्देश्य
संयोजक डॉ. त्रिलोक कुमार ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय जीवन दर्शन, स्वदेशी तकनीक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को पुनर्जीवित करना है। ताकि नई पीढ़ी अपने सांस्कृतिक और वैज्ञानिक मूल्यों से जुड़ सके।





