
राजनांदगांव : अधिनियम निरस्त कर प्रबंधन बौद्धों को सौंपने की मांग…
राजनांदगांव , सावित्री बाई फुले के स्मृति दिवस पर एक दिवसीय देशव्यापी प्रदर्शन किया गया। कलेक्ट्रेट के सामने सामने धरना दिया गया। इसमें बोधगया मंदिर अधिनियम को निरस्त कर महाबोधि महा विहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्ध समाज को सौंपने की मांग की गई। उन्होंने कहा भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ है। बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 (बीटी एक्ट) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13, 25, 26, 29 का उल्लंघन करता है।
अनुच्छेद 13 के अनुसार 26 जनवरी 1950 से पहले सभी कानुन, अधिनियम को निरस्त करने का प्रावधान है। देश की आजादी के 79 साल बाद भी यह बी.टी. एक्ट 1949 का चलते रहना संविधान की अवमानना और बौद्धों के साथ अन्याय पूर्ण कानून है। इसके विरूद्ध बोधगया में 58 सालों से आंदोलन चल रहा है और महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्धों को मिलना चाहिए। इसके लिए 134 सालों से आंदोलन चल रहा है। इसी क्रम में बीटी एक्ट 1949 निरस्त कर महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्धों को सौंपने की मांग पर 12 फरवरी 2025 से ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम के माध्यम से बोधगया में अनिश्चित कालीन धरना आंदोलन चल रहा है।
मांग पर लगातार धरना प्रदर्शन भी कर रहे हैं महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के लिए राज्य स्तरीय धरना 1 से 31 जुलाई 2025 तक किया गया था। वहीं फिर एक बार एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। भिक्खु धम्मतप ने प्रदेशभर के बौद्ध समुदायों से संपर्क कर प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।






