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राजनांदगांव : डॉक्टर और पेशेंट के बीच का माध्यम हैं…

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राजनांदगांव . इलाज के कठिन दौर से निकलकर स्वस्थ हुईं और अब गांव-शहर में जाकर लोगों को कैंसर के लक्षण, जांच और समय पर इलाज के लिए जागरूक कर रहीं। ये हैं शहर की सिद्धि मिरानी…। जिनके द्वारा अब करीब 5 साल में 100 से ज्यादा शिविर लगाए जा चुके हैं।

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझना किसी भी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता, लेकिन हिम्मत और सकारात्मक सोच से इस जंग को जीता भी जा सकता है। ऐसी ही एक महिला सिद्धि ने 2017 में कैंसर से लड़कर न सिर्फ खुद को स्वस्थ किया, बल्कि अब वह लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने का काम भी कर रही हैं, ताकि समय पर जांच और इलाज से कई जिंदगियां बचाई जा सकें। उनके द्वारा स्थापित सिद्धि फाउंडेशन गांव-गांव में जाकर आम लोगों को जागरुक करने का काम कर रही हैं। सिद्धि को ब्रेस्ट कैंसर हुआ था।

सही समय पर उपचार नहीं मिलने की वजह से यह बीमारी थर्ड स्टेज तक पहुंच चुकी थीं। सौभाग्य से उनकी शरीर के अन्य भाग में कैंसर नहीं फैला। तत्काल कीमोथैरेपी, रेडिएशन व सर्जरी के माध्यम से वे पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गईं। उनका कहना है कि जागरुकता इसलिए जरूरी है क्योंकि कई लोगों को बहुत देर से इसकी जानकारी लगती है तब तक समय काफी निकल जाता है। इससे उपचार में देरी होती है। कैंसर अवेयरनेस कैंप मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और महिलाओं से लेकर स्कूल, कॉलेज में जाकर और कई संस्थाओं के माध्यम से जागरूक कर रहे हैं।

कोई यदि गरीब या ज़रुरतमंद हैं तो उनकी मदद भी फाउंडेशन के माध्यम से की जा रही है। डॉक्टर और पेशेंट के बीच एक माध्यम बनकर उनकी सेवा भी की जाती है। लोगों को कैंसर से बचाव के लिए जागरुक करना, लक्षण बताना, डॉक्टर व मरीज के मध्य एक माध्यम बनना और एक तरह से सलाहकार के रूम में सिद्धि और उनका फाउंडेशन बेहतर काम कर रहा है। कई सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से कैंप लगाए जा चुके हैं। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं से मिलकर भी उन्हें जागरुक करने का काम वे कर रही हैं।

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