
राजनांदगांव : हरियाली बहिनी जलयात्रा से किसानों में बदलाव की दिख रही लहर…
राजनांदगांव. कृषि में लगातार पानी की कमी से जूझ रहे राजनांदगांव जिले के किसानों को अब उम्मीद की नई किरण नजर आ रही है। हरियाली बाहिनी नीर और नारी जलयात्रा कार्यक्रम के तहत अब किसानों को धान की खेती से बाहर निकलकर कम पानी वाली फसलों की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सितंबर से शुरू हुए जनजागरण अभियान के तहत अब किसानों को मक्का और दलहन जैसी फसलों के बारे में जानकारी दी जा रही है, ताकि वे पानी की बचत कर सकें और जल संकट से निपट सकें।
पिछले रबी मौसम में जलसंकट के कारण जिले में 25 फीसदी धान की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। इस समस्या को लेकर किसान बेहद चिंतित थे। इसी बीच जलयात्रा कार्यक्रम ने किसानों को समझाया कि कम पानी वाली फसलों का चयन करके वे न सिर्फ जल संकट से बच सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी इजाफा कर सकते हैं। कार्यक्रम में मक्का की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसे कम पानी में उगाया जा सकता है।
महिलाओं का योगदान
इस कार्यक्रम में महिलाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। गांव-गांव में महिलाओं के समूहों ने मक्का की खेती को बढ़ावा देने के लिए जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया। इनके प्रयासों से किसानों को कम पानी वाली फसलों के फायदे के बारे में बताया जा रहा है, ताकि वे जलवायु संकट से बच सकें और आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें।
पद्मश्री फूलबासन यादव ने कहा कि महिलाएं और पुरुष मिलकर पिछले दो महीनों से लगातार किसानों को कम पानी वाली फसलों की ओर प्रेरित कर रहे हैं। हमें दलहन, तिलहन और मक्का जैसे फसलों को बढ़ावा देना होगा, ताकि पानी की बचत हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि मक्का की कंपनियां अब आगे आकर किसानों को इस दिशा में मदद करने को तैयार हैं और सरकार दलहन तिलहन को समर्थन मूल्य पर खरीदने का वादा कर रही है। राजेश साहू ने कहा कि 20 साल पहले हमारे गांव में 10 बोर पंप थे, लेकिन अब गांव में 200 बोर पंप हैं। इससे हमें लगातार पानी को जमीन से निकालना पड़ रहा है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी नहीं बचेगा।
फसल परिवर्तन का महत्व
शिव कुमार देवांगन ने कहा कि अब किसान यह समझने लगे हैं कि कम पानी वाली फसलों को बड़े पैमाने पर उगाकर वे धान से कहीं अधिक लाभ कमा सकते हैं। वे मानते हैं कि हरियाली बाहिनी के तहत हो रही जागरूकता से किसानों में बदलाव आ रहा है और वे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।


