छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

राजनांदगांव : जीते जी रक्तदान, जाते-जाते नेत्रदान और सबसे बढ़िया देहदान का संदेश दिया गया…

राजनांदगांव , सक्षम सम दृष्टि, क्षमता विकास और अनुसंधान मंडल द्वारा संचालित बौद्धिक मंदता वाले बच्चों के विशेष सामर्थ्य स्कूल में 21 मार्च को मनाए जाने वाले डाउन सिंड्रोम दिवस 23 मार्च को मनाया गया। शुभारंभ सक्षम के प्रतिक कवि सूरदास जी अष्टवक जी और भारत माता पर दीप प्रज्वलन कर किया गया। सक्षम के जिलाध्यक्ष हेमंत तिवारी ने आयोजन में शामिल अतिथियों का स्वागत कर उद्बोधन प्रस्तुत किया। डाउन सिंड्रोम क्या है, क्यों होता है, इसके बचाव के उपाय, इसके प्रकार की विस्तार से जानकारी दी।

समाज कल्याण की उप संचालक वैशाली मरडवार ने बताया कि ऐसे बच्चों को कैसे सक्षम बनाया जा सकता है। समाज का माता-पिता का पालकों, शिक्षकों के दायित्व के संबंध में जानकारी दी। इस तरह के बच्चों के साथ किस तरह से व्यवहार करें जिससे वे कमोबेस सामान्य लोगों की तरह अपना जीवन यापन कर सकें इस पर चर्चा की और कार्यक्रम में उपस्थित चिह्नांकित डाउन सिंड्रोम के बच्चों से मंचस्थ अतिथियों को रूबरू कराया। कार्यक्रम को रामजी राजवाड़े सक्षम के राज्य संगठन मंत्री रायपुर के द्वारा संबोधित करते गतिविधियों की जानकारी दी गई।

पीडितों और मानव सेवा को सर्वश्रेष्ठ बताया उन्होंने पीड़ितों, मानवता की सेवा को सर्वश्रेष्ठ बताया और उनके द्वारा राज्य के अन्य जिलों में हो रही गतिविधियों के विषय में जानकारी दी। समारोह को समाज सेवी एवं सक्षम के पदाधिकारी गौतम पारख ने भी संबोधित किया। अभिलाषा मनोकामना और सामर्थ्य के विशेष डाउन सिंड्रोम के बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति दी।

यह दिवस बहुत ही विशेष बच्चों को समर्पित, इन्हें प्रोत्साहन दिया जाए वैशाली मरडवार ने बताया यह दिवस बहुत ही विशेष बच्चों को समर्पित है। यह बहुत संवेदनशील दिव्यांगता है। समाज कल्याण विभाग समस्त प्रकार के दिव्यांगों, वृद्धजनों, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और संरक्षण में कार्य कर रहा है। कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख राधेश्याम शर्मा, जितेन्द्र शर्मा, सक्षम के किशोरी लाट, कोषाध्यक्ष प्रकाश सांखला, समाज सेवी गौतम पारख, ऋतु शर्मा, देव कुमार निर्वाणी, अनिल नागवंशी, समीर क्षत्रिय, सामर्थ्य के शिक्षक दीप्ति देवांगन, अभिलाषा के शिक्षक मालती श्रीवास्तव, आराधना सवाईत, बीआरपी देवकी सिंह राजपूत, नसरीन खान मौजूद रही।

भावनात्मक विकास और स्नेह की भावना में अंतर नहीं होता इसे समझना जरूरी ऐसे बच्चों की शिक्षा, प्रशिक्षण, बातचीत और समर्थन से सामान्य जीवन जीने में मदद की जा सकती है। यह रोग जन्म के समय ही मौजूद होता है और आमतौर पर माता की उम्र बढ़ने या कोशिका विभाजन की एक यादृच्छिक त्रुटि के कारण होता है, न कि गलत आदत या भोजन से होता है। यह संक्रामक यानी दूसरों में फैलने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि जन्मजात आनुवंशिक है। गर्भावस्था में स्क्रीनिंग जांच, रक्त जांच, पेट का अल्ट्रासाउंड जैसे डबल मार्कर, क्वाड स्क्रीनिंग या नीप्स, नीष्ट से बच्चे के डाउन सिंड्रोम की संभावना का अनुमान लगाया जाता है।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.