
राजनांदगांव : जिले के गरीब और वंचित समूह के बच्चों को खाली सीटों पर प्रवेश देने 16 फरवरी से 31 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन लिया जाएगा…
राजनांदगांव , शिक्षा का अधिकार कानून आरटीई में 16 दिसंबर 2025 को किए बदलाव का खामियाजा इस साल बच्चों एवं पालकों को भुगतना पड़ेगा। इस साल प्रदेश में सिर्फ 19,495 सीटों पर गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश मिलेगा। साल 2012 से साल 2025 तक आरटीई अंतर्गत निजी स्कूलों में दिए प्रवेश की वर्ष वार आंकड़ों की बात करें तो 13 सालों में इस साल सबसे कम संख्या में गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा। हर साल आरटीई में सीटों की संख्या घट रही है। ऐसे में पालकों को निजी स्कूलों में महंगी फीस देकर बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम आरटीई के तहत पहले चरण में प्रवेश के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने शेड्यूल जारी कर दिया है। जिले के गरीब और वंचित समूह के बच्चों को खाली सीटों पर प्रवेश देने 16 फरवरी से 31 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन लिया जाएगा। शिक्षा विभाग द्वारा नियुक्त सरकारी स्कूल के प्राचार्य नोडल अफसरों के द्वारा वेरिफिकेशन के बाद प्रदेश स्तर पर लॉटरी सिस्टम से 13 से 17 अप्रैल तक सीटों का आवंटन किया जाएगा। वहीं 1 से 30 मई तक पंजीकृत निजी स्कूलों में रिक्त सीटों में एडमिशन की प्रक्रिया चलेगी।
दो चरणों में पूरी होगी एडमिशन की प्रक्रिया निजी स्कूलों को प्रोफाइल अपडेट करने 31 जनवरी को शेड्यूल जारी किया गया था। वहीं 7 फरवरी तक डीईओ एवं नोडल प्राचार्यों को सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दूसरे चरण में 8 से 20 जून तक स्कूल रजिस्ट्रेशन, सत्यापन 25 जून तक किया जाएगा। छात्र पंजीयन 1 से 11 जुलाई तक किया जाएगा। नोडल अफसरों द्वारा वेरिफिकेशन 15 जुलाई तक, लॉटरी एवं आवंटन होगा। 27 से 31 जुलाई तक, एडमिशन 3 से 17 अगस्त तक होगा। निजी स्कूलों में पालक आवेदन कर सकेंगे।
इस साल प्रदेश में केवल 19495 सीटों पर प्रवेश छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिस्टोफर पॉल इसका विरोध कर रहे है। उन्होंने जनवरी में स्कूल शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर शिक्षा का अधिकार कानून में किए बदलाव को निरस्त कर स्थायी आदेश जारी करने मांग की थी। इस सत्र में केवल 19,495 सीटों में गरीब बच्चों को प्रवेश देने की घोषणा आरटीई पोर्टल में की गई है। पॉल का कहना है बीजेपी सरकार गरीब बच्चों को मुफ्त में मंहगे प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा नहीं देना चाहती। मूल कानून में गैर संवैधानिक बदलाव किया है।



