
राजनांदगांव की सियासत में नई चर्चा: रूपचंद भीमनानी की नियुक्ति से वर्चस्व की अटकलें तेज
राजनांदगांव। जिले की राजनीति में इन दिनों एक नई नियुक्ति को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। संतोष पांडे द्वारा ऊर्जा विभाग, CSPDCL, CSPTCL और संबंधित विद्युत संस्थाओं के कार्यों के लिए रूपचंद भीमनानी को सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
गौरतलब है कि राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक और प्रदेश के वरिष्ठ नेता डॉ. रमन सिंह ने रूपचंद भीमनानी को विधायक प्रतिनिधि के रूप में जिम्मेदारी दी है। ऐसे में अब उन्हीं को सांसद प्रतिनिधि बनाए जाने से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या जिले में भाजपा के दो बड़े नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग चल रही है?
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में जारी पत्र में सांसद संतोष पांडे ने राजनांदगांव जिले में ऊर्जा विभाग और उससे जुड़े संस्थानों के कार्यों, बैठकों और योजनाओं के समन्वय हेतु रूपचंद भीमनानी को अपना अधिकृत प्रतिनिधि नियुक्त किया है। पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री सहित विभागीय अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि एक ही व्यक्ति को पहले विधायक प्रतिनिधि और अब सांसद प्रतिनिधि बनाए जाने से संगठन के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर संकेत मिल रहे हैं। कुछ लोग इसे समन्वय की रणनीति बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करने की कवायद के रूप में देख रहे हैं।

क्या वर्चस्व की लड़ाई?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह नियुक्ति केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए है या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश भी छिपा है?
क्या इससे यह संकेत मिलता है कि जिले में नेतृत्व की भूमिका को लेकर अंदरूनी प्रतिस्पर्धा है?
हालांकि, आधिकारिक रूप से भाजपा या किसी भी नेता की ओर से इस विषय पर कोई बयान सामने नहीं आया है।
संगठन में समन्वय या सियासी संकेत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कई बार जनप्रतिनिधि अपने भरोसेमंद व्यक्तियों को विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारी देकर कार्यों में तेजी लाने की कोशिश करते हैं। वहीं विपक्ष और स्थानीय स्तर पर इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।
फिलहाल, यह नियुक्ति प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है, लेकिन इससे जुड़े सियासी मायनों को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
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