
Rajnandgaon : सीएम बोले राज्य के विकास में डॉ रमन का योगदान, डॉ रमन सिंह ने खान पान की भी की प्रसंशा…
राजनांदगांव, स्टेट स्कूल ग्राउंड में बुधवार की रात युवा वेलफेयर फाउंडेशन ने कैलाश खेर नाइट का आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी शिरकत की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के जन्मदिन पर स्टेट हाई स्कूल प्रांगण में कैलाश खेर राग नांदगांव कार्यक्रम में भारी संख्या में श्रोता उमड़े। मुख्यमंत्री साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने देर रात्रि तक देश के प्रख्यात बॉलीवुड सिंगर पद्मश्री कैलाश खेर के सुमधुर गीतों का आनंद लिया। भारतीय लोक संगीत एवं सूफी गायन की अलहदा शैली से पद्मश्री कैलाश खेर ने महफिल में समां बांध दिया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का यह क्षण गौरवपूर्ण एवं ऐतिहासिक है। आज हम प्रदेश की संस्कारधानी राजनांदगांव की इस पवित्र भूमि में हम सब के लोकप्रिय जनप्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ के तीन बार के मुख्यमंत्री रहे, केन्द्रीय मंत्री रहे, वर्तमान में विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का जन्मदिन मनाने के लिए प्रदेश भर से यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु से प्रार्थना है कि डॉ. रमन स्वस्थ एवं दीर्घायु रहें और आगे भी इसी तरह से देश एवं प्रदेश व जनसेवा करते रहे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने 15 वर्षों तक छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश का चहुंमुखी विकास किया।
राजनीतिक दृष्टिकोण से मेरा पुनर्जन्म राजनांदगांव में हुआ: रमन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन ने कहा कि राजनांदगांव के नागरिकों ने मुझे विधायक सांसद, केन्द्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष बनने का अवसर दिया है। राजनांदगांव की जनता के प्रेम, आशीर्वाद, विश्वास, सम्मान के कारण मैं ऐसे महत्वपूर्ण पदों पर पहुंच सका हूं। उन्होंने बताया कि मेरा जन्म कबीरधाम जिले के रामपुर में हुआ है, लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोण से मेरा दूसरा पुनर्जन्म राजनांदगांव में हुआ। इसके लिए उन्होंने राजनांदगांव की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया।
रमन ने कहा राजनांदगांव के नागरिक शांति और प्रेम के साथ मिलकर रहते हैं। राजनांदगांव की जनता के कारण देश में मेरी अलग पहचान बनी है। राजनांदगांव संस्कारधानी नगरी है राजनांदगांव में जो प्रभाव है बाबा बर्फानी का संसार है, शीतला माता का दरबार है, गुरुद्वारे के संस्कार हैं। पार्रीनाला के मजार का आशीर्वाद है। यहां उदयाचल भी है और अभिलाषा, आस्था और समता भी है। यहां की पोहा-जलेबी और आलूगुंडा नहीं खाए तो राजनांदगांव अधूरा रहेगा। यहां की रबड़ी, कचौरी, मुंगोड़ी, चाय, पान का जायका लिए बिना राजनांदगांव अधूरा है।





