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Israel ने पहचाना Somaliland को—Somalia भड़का, African Union चेतावनी, क्या बदलेगा?

इजरायल ने सोमालीलैंड को स्वतंत्र देश की मान्यता दी: पहला देश बना, सोमालिया और अफ्रीकी संघ ने की कड़ी निंदा, ट्रंप बोले- 'क्या कोई जानता है सोमालीलैंड क्या है?'

शुक्रवार को इज़राइल ने एक ऐतिहासिक और विवादास्पद फैसला लेते हुए सोमालिया के उत्तरी हिस्से में स्थित सोमालीलैंड क्षेत्र को एक “स्वतंत्र और संप्रभु राज्य” के रूप में आधिकारिक मान्यता दे दी। ऐसा करने वाला इज़राइल दुनिया का पहला देश बन गया है। इस फैसले से सोमालिया की सरकार और अफ्रीकी संघ (AU) में तुरंत रोष फैल गया है।

सोमालिया के विदेश मंत्रालय ने इस कदम को अपनी “संप्रभुता पर जानबूझकर हमला” बताते हुए चेतावनी दी है कि इससे क्षेत्र में शांति भंग होगी। अफ्रीकी संघ ने भी इज़राइल के कदम को “दृढ़ता से खारिज” करते हुए कहा है कि यह पूरे अफ्रीका महाद्वीप में शांति के लिए खतरनाक मिसाल कायम करता है।

सोमालीलैंड का संक्षिप्त इतिहास:
सोमालीलैंड ने 1991 में सोमालिया से अपनी स्वतंत्रता की एकतरफा घोषणा की थी। हालाँकि, इसके बाद से इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी देश द्वारा मान्यता नहीं मिली है। इस क्षेत्र की अपनी मुद्रा, पासपोर्ट और सेना है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय अलगाव के कारण यह गंभीर गरीबी और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है

इज़राइल और नेतन्याहू की दलील:
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि यह निर्णय ‘अब्राहम समझौतों’ की भावना के अनुरूप है, जिसके तहत पिछले कुछ वर्षों में कई अरब देशों ने इज़राइल के साथ संबंध सामान्य किए हैं। नेतन्याहू ने सोमालीलैंड के राष्ट्रपति मूसा बीही अब्दी को इज़राइल आने का निमंत्रण भी दिया है। सोमालीलैंड की ओर से इस फैसले का स्वागत किया गया है और इसे एक “रणनीतिक साझेदारी” की शुरुआत बताया गया है।

अमेरिका का रुख:
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने, जिनकी अगुवाई में अब्राहम समझौते हुए थे, सोमालीलैंड को अमेरिकी मान्यता देने के विरोध में हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक साक्षात्कार में जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा, “नहीं,” और यहाँ तक कहा, “क्या वास्तव में कोई जानता है कि सोमालीलैंड क्या है?”

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया:

तुर्की और मिस्र: सोमालिया के करीबी सहयोगी तुर्की ने इज़राइल के इस कदम को “खुला हस्तक्षेप” करार दिया है। मिस्र ने भी सोमालिया की एकता और अखंडता के लिए अपना समर्थन दोहराया है। रणनीतिक महत्व: विश्लेषकों का मानना है कि इज़राइल का यह कदम रणनीतिक है। सोमालीलैंड अदन की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है, जो एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इज़राइल यमन में हौथी विद्रोहियों जैसे खतरों के मद्देनजर इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहता है।

इज़राइल का यह कदम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया और जटिल मोड़ लाया है। जहाँ एक ओर सोमालीलैंड के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत है, वहीं दूसरी ओर इसने क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है और सोमालिया के साथ साथ कई अफ्रीकी और मुस्लिम देशों की नाराजगी मोल ली है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य देश भविष्य में इज़राइल के इस कदम का अनुसरण करते हैं या फिर सोमालीलैंड अंतरराष्ट्रीय अलगाव में ही रहता है।

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