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9वीं के स्टूडेंट्स अब पढ़ेंगे थियेटर और मूर्तिकला — NEP 2020 में हुआ बड़ा बदलाव, जानें पूरी जानकारी

भारत की नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत देश की स्कूली शिक्षा में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। पहली बार 9वीं कक्षा के स्टूडेंट्स को स्कूल में थियेटर, मूर्तिकला, संगीत, नृत्य और चित्रकला जैसे विषय पढ़ने का मौका मिलेगा। यह बदलाव Academic Session 2027-28 से देशभर के स्कूलों में लागू किया जाएगा। इस नई पहल का सिलेबस NCERT (National Council of Educational Research and Training) ने तैयार किया है।

अब तक स्कूली शिक्षा में Science, Maths, Social Science और Languages जैसे विषयों पर ही ज्यादा जोर दिया जाता था। लेकिन NEP 2020 की सोच यह है कि हर बच्चे का सर्वांगीण विकास होना चाहिए — सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और रचनात्मकता में भी। इसी सोच के तहत 9वीं के स्टूडेंट्स के Curriculum में थियेटर और मूर्तिकला को जोड़ा जा रहा है।

सबसे खास बात यह है कि इन विषयों की कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी — केवल Practical Assessment होगी। इससे स्टूडेंट्स पर अतिरिक्त पढ़ाई का बोझ नहीं पड़ेगा और वे स्वतंत्र रूप से अपनी कलात्मक प्रतिभा को निखार सकेंगे। आइए जानते हैं इस नई योजना की पूरी जानकारी विस्तार से।

Theatre Syllabus: नाटक मंडली से लेकर पटकथा लेखन तक — क्या पढ़ेंगे स्टूडेंट्स?

NCERT द्वारा तैयार किए गए Theatre Syllabus में 9वीं के स्टूडेंट्स को रंगमंच की दुनिया से परिचित कराया जाएगा। सबसे पहले हर स्कूल में नाटक मंडली बनाई जाएगी जिसका अपना नाम और पहचान होगी। यह नाटक मंडली एक Team की तरह काम करेगी जिसमें हर स्टूडेंट की अपनी भूमिका होगी — कोई अभिनेता होगा, कोई Director, कोई Script Writer और कोई Stage Manager।

थियेटर के Syllabus में स्टूडेंट्स को पटकथा लेखन (Script Writing) भी सिखाया जाएगा। इससे उनकी भाषा पर पकड़ मजबूत होगी और रचनात्मक लेखन का कौशल विकसित होगा। इसके अलावा Stage का Background तैयार करना, Lighting, Sound Management और नाटक के मंच के पीछे की तैयारी के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। यह सब मिलकर स्टूडेंट्स को Theatre की पूरी दुनिया से परिचित कराएगा।

थियेटर शिक्षा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे स्टूडेंट्स में आत्मविश्वास, Public Speaking, Teamwork और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। विदेशों में तो स्कूल स्तर से ही Theatre को Curriculum का अहम हिस्सा माना जाता है और अब भारत भी उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। NCERT का मानना है कि Theatre Education से स्टूडेंट्स की Emotional Intelligence भी बेहतर होती है।

Sculpture Syllabus: मिट्टी, बांस और कपड़े से बनेंगी Masterpiece कलाकृतियाँ

NCERT ने मूर्तिकला (Sculpture) का भी विस्तृत Syllabus तैयार किया है। इस Syllabus के अनुसार 9वीं के स्टूडेंट्स को रंगों का मेल, मिट्टी की कलाकृतियाँ, बांस से बनी कलाकृतियाँ और कपड़े से बनाई जाने वाली Craft सिखाई जाएगी। यह सब भारत की समृद्ध पारंपरिक कला परंपराओं से जुड़ा है और इससे स्टूडेंट्स को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का मौका मिलेगा।

मूर्तिकला Syllabus की एक खास विशेषता कला डायरी (Art Diary) है। हर स्टूडेंट को अपनी एक कला डायरी रखनी होगी जिसमें वह अपनी बनाई कलाकृतियों को दर्ज करेगा, उनके बारे में लिखेगा और अपनी कला यात्रा को Document करेगा। यह डायरी स्टूडेंट की Portfolio की तरह काम करेगी और उसके कलात्मक विकास को दर्शाएगी।

इसके अलावा स्टूडेंट्स को Art Gallery का Visit भी कराया जाएगा। इससे वे Professional Artists की कला को करीब से देख सकेंगे और समझ सकेंगे। Art Gallery Visit से उनमें कला के प्रति गहरी समझ और सराहना का भाव विकसित होगा। यह Experiential Learning का एक बेहतरीन उदाहरण है जो किताबी पढ़ाई से कहीं अधिक प्रभावशाली होता है।

Exam Pattern: Written नहीं, सिर्फ Practical — स्टूडेंट्स के लिए राहत की खबर

थियेटर और मूर्तिकला के लिए कोई लिखित परीक्षा (Written Exam) नहीं होगी। साल के अंत में स्टूडेंट्स को केवल Practical Examination देनी होगी। Theatre में स्टूडेंट्स को Stage Performance देनी होगी और Sculpture में उनकी बनाई कलाकृतियों का मूल्यांकन किया जाएगा। यह मूल्यांकन प्रणाली बच्चों के ऊपर अनावश्यक बोझ नहीं डालेगी बल्कि उनकी असली प्रतिभा को सामने लाएगी।

NEP 2020 की यही सोच है — Rote Learning से हटकर Skill-Based Learning की ओर बढ़ना। जब स्टूडेंट्स को पता होगा कि उन्हें लिखित परीक्षा नहीं देनी तो वे इन विषयों को खुले मन से और बिना किसी Exam Pressure के सीखेंगे। इससे उनमें कला के प्रति सच्चा लगाव और रचनात्मकता विकसित होगी।

NEP 2020 के फायदे: सिर्फ किताबें नहीं, अब बनेंगे All-Rounder स्टूडेंट्स

NEP 2020 के तहत थियेटर और मूर्तिकला को Curriculum में शामिल करने के अनेक फायदे हैं। सबसे पहला फायदा यह है कि इससे स्टूडेंट्स में रचनात्मकता (Creativity) का विकास होगा। जब बच्चे मिट्टी से मूर्ति बनाएंगे या Stage पर Performance देंगे, तो उनका दिमाग नए-नए तरीकों से सोचना सीखेगा। यही Creativity आगे चलकर उन्हें किसी भी Career में सफल बनाने में मदद करेगी।

दूसरा बड़ा फायदा है मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर सकारात्मक प्रभाव। आज के दौर में स्टूडेंट्स पर Exam Pressure और Competition का भारी बोझ है। कला और संगीत को Stress Relief का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। जब बच्चे School में ही Art और Theatre सीखेंगे, तो उनका Stress Level कम होगा और वे ज्यादा खुश और Focused रहेंगे।

तीसरा फायदा है करियर के नए रास्ते खुलना। Film Industry, Theatre, Art, Music, Animation, Game Design — ये सब ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें आज भारी Demand है। अगर स्टूडेंट्स को स्कूल से ही इन कलाओं की बुनियाद मिलेगी, तो वे इन क्षेत्रों में Career बनाने के बारे में आत्मविश्वास के साथ सोच सकेंगे। Bollywood से लेकर OTT Platforms तक सभी जगह Creative Talent की जरूरत है।

NEP 2020 — भारतीय शिक्षा में एक नई क्रांति की शुरुआत

नई शिक्षा नीति 2020 के तहत 9वीं कक्षा में थियेटर और मूर्तिकला को अनिवार्य विषय बनाना एक दूरदर्शी और साहसी कदम है। NCERT ने जो Syllabus तैयार किया है वह न केवल बच्चों की कलात्मक प्रतिभा को निखारेगा बल्कि उन्हें Confident, Creative और Well-Rounded नागरिक बनाएगा। नाटक मंडली, Art Diary, Art Gallery Visit और Practical Exam — ये सब मिलकर एक ऐसी शिक्षा प्रणाली का निर्माण करेंगे जो हर बच्चे की अलग प्रतिभा को सम्मान देती है।

Academic Session 2027-28 से जब यह बदलाव लागू होगा, तो यह भारतीय शिक्षा के इतिहास में एक नया अध्याय होगा। अभिभावकों को इस बदलाव का स्वागत करना चाहिए और अपने बच्चों को इन नए विषयों में खुलकर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। कला सीखना कभी भी समय की बर्बादी नहीं है — यह एक ऐसा निवेश है जो जीवनभर काम आता है।

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