राजनांदगांव : विपक्ष के राजनीतिक स्वार्थ के कारण नारी शक्ति वंदन अधिनियम अधूरा…
राजनांदगांव , नारी शक्ति वंदन अधिनियम विपक्ष के राजनीतिक स्वार्थ के कारण पूरा नहीं हुआ। खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा ने यह आरोप लगाया है। उन्होंने एक पत्रकार वार्ता लेकर कहा विपक्ष के राजनीतिक स्वार्थ के कारण महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने का ऐतिहासिक मौका अधूरा रह गया। अधिनियम देश की आधी आबादी को नीति-निर्धारण की मुख्यधारा में लाने का प्रयास था। लेकिन विपक्ष ने तकनीकी और राजनीतिक कारणों का हवाला देकर इसे आगे बढ़ने से रोक दिया।
बयान में कहा गया कि इससे महिलाओं को संसद और विधानसभा में उचित भागीदारी मिलने में देरी हुई है। महिला आरक्षण का मुद्दा पिछले तीन दशकों से लंबित है। 1996 में पहली बार बिल पेश कर कई प्रयास हुआ लेकिन राजनीतिक सहमति नहीं बन पाई। 1998 से 2003 के बीच तत्कालीन एनडीए सरकार के प्रयासों का जिक्र करते कहा गया कि उस समय भी सहयोगी दलों के विरोध के कारण बिल पारित नहीं हो सका। सत्तापक्ष ने 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए। कहा 2010 में राज्यसभा से बिल पारित होने के बाद इसे लोकसभा में आगे नहीं बढ़ाया गया। इस कारण यह लंबित रह गया। प्रेसवार्ता में भाजपा जिला अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत, सौरभ कोठारी, रवि सिन्हा, रघु शर्मा, सहित अन्य नेता शामिल रहे।
तकनीकी बहाने लगाकर समर्थन नहीं देने का आरोप विपक्ष महिला आरक्षण के समर्थन का दिखावा करता रहा, हर बार किसी न किसी तकनीकी मुद्दे को उठाकर प्रक्रिया को रोकता रहा। साथ ही यह भी कहा गया कि पंचायत स्तर पर आरक्षण को स्वीकार करना आसान था, क्योंकि इससे शीर्ष राजनीतिक संरचना पर असर नहीं पड़ता। सत्तापक्ष ने अपने कार्यकाल में महिलाओं से जुड़े मुद्दों जैसे शौचालय निर्माण, उज्ज्वला योजना, बैंकिंग समावेशन और आवास में सुधार का भी उल्लेख किया और कहा कि इन कदमों से महिलाओं की स्थिति में बदलाव आया है।



