छत्तीसगढ़रायपुर जिला

CG : राज्योत्सव शिल्पग्राम में जमकर हो रही टेराकोटा शिल्प की खरीददारी…

माटीकला बोर्ड के स्टॉल पर उमड़ रही खरीददारों की भीड़

बस्तर का प्रसिद्ध अलंकृत हाथी सबको आ रहा पसंद

रायपुर, छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव 2025 के अवसर पर नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव परिसर के शिल्पग्राम में रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। यहां छत्तीसगढ़ के विभिन्न पारंपरिक और सांस्कृतिक शिल्प, कलाओं और कारीगरी की प्रदर्शनी सह विक्रय स्टॉल्स में लोग न केवल कलाकृतियों को देख रहे हैं बल्कि जमकर खरीददारी भी कर रहे हैं। शिल्पग्राम में माटीकला बोर्ड द्वारा लगाए गए स्टॉल्स में टेराकोटा मिट्टी से निर्मित आकर्षक कलाकृतियों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं।

शिल्पकारों को फायदेमंद बाजार मिला

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारंपरिक कला एवं शिल्पकारों को प्रोत्साहन देने की दिशा में मजबूत प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि राज्योत्सव जैसे भव्य आयोजन में प्रदेशभर के स्थानीय शिल्प को फायदेमंद बाजार मिल रहा है।

छत्तीसगढ़ के टेराकोटा कला अपनी विशिष्ट पहचान

छत्तीसगढ़ की टेराकोटा कला अपनी विशिष्ट शैली एवं सांस्कृतिक पहचान के लिए देश-भर में प्रसिद्ध है। विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में निर्मित टेराकोटा हाथी विशेष श्रृंगार लोगों के बीच परंपरा, आस्था और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं। यहां के कारीगर पारंपरिक ढंग से अलंकृत हाथी एवं अन्य कलाकृतियाँ तैयार करते हैं। जिसमें अनोखी डिजाइन, गोलाकार सजावट और चमकदार फिनिशिंग की खूबसूरत नक्काशी की जाती है। राज्योत्सव में टेराकोटा हाथी को लोग स्मृति-चिह्न, शोपीस के रूप में भी खरीद रहे हैं।

आदिवासी जनजीवन और घरेलू उपयोगी सामग्री का अनूठा संग्रह

छत्तीसगढ़ के बस्तर, कोण्डागांव, कांकेर, धमतरी, रायपुर, महासमुंद एवं राजनांदगाँव सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में इस कला को परंपरागत और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जा रहा है। टेराकोटा शिल्प में देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ, आदिवासी जीवन चित्रण, पशु आकृतियाँ, वॉल हैंगिंग, दीप एवं दीप-स्तंभ, गुल्लक, धूपदान, कुल्हड़, सुराही, जल पात्र, फूलदान, केटली-कप, गिलास, कढ़ाई, ढक्कन, ट्रे, बगीचे और गृह सजावट सामग्री, पारंपरिक कलश एवं शुभ प्रतीकों के साथ उपयोगी घरेलू सामग्री भी शामिल है। इन शिल्पों में प्राकृतिक रंगों का प्रयोग व बारीक नक्काशी की जाती है, जो इन्हें रोचक और आकर्षक बनाती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही है मजबूती

छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड द्वारा स्थापित पांच माटीकला प्रशिक्षण एवं उत्पादन केन्द्रों में इन कलाकृतियों का निर्माण किया जाता है। इन इकाइयों में स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षण एवं रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। राज्योत्सव में शिल्पकारों ने बताया कि राज्योत्सव घूमने आ रहे लोग शिल्पग्राम में भी जमकर खरीददारी कर रहे हैं।

lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.