• अल-हिलाल बनाम अल-खलीज: मालकॉम के गोल से जीत, सऊदी लीग में टाइटल रेस गरमाया

    मालकॉम के दूसरे हाफ में किए गए दमदार गोल की बदौलत अल-हिलाल ने अल-खलीज को 3-2 से मात देकर सऊदी प्रो लीग में अपनी अजेय शुरुआत बरकरार रखी। इस जीत के साथ अल-हिलाल ने घरेलू लीग में अपना शानदार फॉर्म जारी रखा और टेबल टॉपर अल-नस्र से सिर्फ एक अंक पीछे अपनी चुनौती मजबूत कर ली। मैच की शुरुआत से ही अल-हिलाल ने आक्रामक रुख अपनाया। सिर्फ आठ मिनट में मोहम्मद कन्नो ने दूर से जोरदार शॉट लगाया, जो गोलपोस्ट से टकराकर बाहर चला गया। यह शुरुआती चेतावनी साबित हुई और इसके बाद मैच का रुख पूरी तरह अल-हिलाल के पक्ष में चला गया।

    18वें मिनट में कन्नो ने शानदार गोल कर स्कोरिंग की शुरुआत की। हमाद अल-यामी के लो कट-बैक पास को उन्होंने बेहतरीन कंट्रोल में लेते हुए लंबी दूरी से नेट में पहुंचा दिया। इसके बाद 39वें मिनट में अल-हिलाल की बढ़त दोगुनी हो गई, जब सर्गेज मिलिंकोविच-साविक ने मालकॉम की फ्री-किक पर करीब से फिनिश करते हुए गोलकीपर मोरिस को कोई मौका नहीं दिया।

    हाफ टाइम से ठीक पहले अल-हिलाल तीसरा गोल करने के बेहद करीब पहुंच गया था, लेकिन थियो हर्नांडेज़ का शॉट भी गोलपोस्ट से टकरा गया, ठीक वैसे ही जैसे पहले कन्नो का शॉट।

    दूसरे हाफ में भी अल-हिलाल का दबदबा कायम रहा। 57वें मिनट में मालकॉम ने बॉक्स के बाहर से सटीक शॉट लगाकर स्कोर 3-0 कर दिया, जिससे मुकाबला लगभग एकतरफा नजर आने लगा।

    हालांकि मैच के आखिरी पलों में अल-खलीज ने जबरदस्त वापसी की। पहले जोशुआ किंग के हेडर ने गोलों का अंतर कम किया और फिर जॉर्जोस मसौरास ने लंबी दूरी से शानदार गोल दागकर स्कोर 3-2 कर दिया। अचानक मैच रोमांचक हो गया, लेकिन अल-हिलाल की डिफेंस ने दबाव में भी संयम बनाए रखा और बराबरी का गोल नहीं होने दिया।

    यह मुकाबला अल-हिलाल का लगातार 80वां सऊदी प्रो लीग मैच था जिसमें टीम ने गोल किया, जो उनकी निरंतरता और आक्रामक ताकत को दर्शाता है। इसके अलावा टीम ने लीग में लगातार सातवीं जीत दर्ज की, जो मई से अक्टूबर 2024 के बीच मिली 10 मैचों की जीत के बाद उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

    अल-खलीज की टीम ने अंत में शानदार जज़्बा दिखाया और ऐतिहासिक अवे गोल किए, लेकिन अल-हिलाल की शुरुआती पकड़ और बेहतर गेम कंट्रोल ने अंततः उन्हें तीन अहम अंक दिला दिए। इस जीत के साथ अल-हिलाल ने साफ कर दिया है कि सऊदी प्रो लीग की टाइटल रेस अभी पूरी तरह खुली हुई है।

    मैच की शुरुआत से ही अल-हिलाल ने दबदबा बनाया। सिर्फ 8 मिनट में मोहम्मद कन्नो का दूर से मारा शॉट पोस्ट से टकराया, जैसे चेतावनी दे दी हो! फिर 18वें मिनट में कन्नो ने कमाल कर दिया – हमाद अल यामी के पास पर लंबी रेंज से गोल, 1-0! 39वें मिनट में मालकॉम की फ्री-किक पर सर्गेज मिलिंकोविच-साविच ने हेडर से दोगुना कर दिया, 2-0। हाफ टाइम से पहले थियो हर्नांडेज़ का शॉट भी पोस्ट से टकराया, वरना और बढ़त हो जाती।

  • मोरक्को बनाम माली: रोमांचक ड्रॉ, AFCON 2025 का ग्रुप A गरमाया | पूरी कहानी

    रबात के प्रिंस मौले अब्देललाह स्टेडियम में खेले गए 2025 अफ्रीका कप ऑफ नेशंस (AFCON) के ग्रुप A मुकाबले में माली ने शानदार जुझारूपन दिखाते हुए मेजबान मोरक्को के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेला। इस मुकाबले में VAR, दो पेनल्टी और आखिरी मिनट तक चला रोमांच देखने को मिला।

    इस ड्रॉ के बावजूद मोरक्को नॉकआउट चरण में पहुंचने के बेहद करीब है, जबकि माली ने भी अंतिम 16 की दौड़ में खुद को मजबूती से बनाए रखा है।

    पहले हाफ के इंजरी टाइम में मोरक्को को पेनल्टी मिली। माली के लेफ्ट बैक नाथन गस्सामा का हाथ गेंद से टकराया, और रियल मैड्रिड स्टार ब्राहिम डियाज़ ने कोई गलती नहीं की – गोल करके मोरक्को को 1-0 की लीड दे दी। स्टेडियम में फैंस का शोर तो आसमान छू रहा था!

    लेकिन माली कहां हार मानने वाली! मैच के 64वें मिनट में जवाबी पेनल्टी मिली, जब मोरक्को के डिफेंडर जवाद एल यामिक ने लसीन सिनायोको को बॉक्स में गिरा दिया। सिनायोको ने खुद पेनल्टी ली – दर्शकों की सीटियां बज रही थीं, लेकिन वो बिलकुल कूल रहे और गोलकीपर यासीन बोनू को चकमा देकर गेंद नेट में डाल दी। 1-1! माली के फैंस तो खुशी से झूम उठे।

    माली के गोलकीपर जिगुई डियारा तो मैच के हीरो बने। यूसुफ एन-नेसिरी का खतरनाक शॉट पैर से रोक दिया, और इंजरी टाइम में वोयो कौलिबाली के अपने ही गोल में बैक हीलर को भी लाइन से बाहर कर दिया। वरना मोरक्को जीत छीन लेता!

    अब ग्रुप ए की स्थिति देखो: मोरक्को टॉप पर 4 पॉइंट्स के साथ, माली और जाम्बिया दोनों के 2-2 पॉइंट्स, जबकि कोमोरोस 1 पॉइंट के साथ सबसे नीचे। जाम्बिया और कोमोरोस का मैच भी 0-0 से ड्रॉ रहा था।

    ग्रुप का आखिरी राउंड सोमवार को – मोरक्को राजधानी में जाम्बिया से भिड़ेगा, और माली कैसाब्लांका में कोमोरोस से। मोरक्को तो 50 साल बाद पहला AFCON टाइटल जीतने के सपने देख रहा है। पहले मैच में कोमोरोस को हराया था, जबकि माली ने जाम्बिया से आखिरी मिनट में गोल खाकर ड्रॉ कर लिया था।

    माली के कोच टॉम सेंटफिएट ने 5 बदलाव किए, कप्तान यवेस बिसौमा चोट से वापस आए। मोरक्को में अशरफ हकीमी अभी फिट नहीं, तो डियाज़ पर फिर लीडरशिप की जिम्मेदारी। डियाज़ तो 17वें मिनट में ही गोल के करीब थे, लेकिन डियारा ने बचा लिया।

    मैच का सबसे ड्रामेटिक मोमेंट? हाफ टाइम से पहले डियाज़ की ड्रिबलिंग, गेंद गस्सामा के हाथ से टकराई – VAR ने चेक कराया और पेनल्टी दे दी। माली की पेनल्टी में भी कोई शक नहीं था। मोरक्को के कोच वालिद रेगरागुई ने बाद में 3 बदलाव किए, एन-नेसिरी को मौका दिया, लेकिन जीत नहीं मिली।

    आखिर में स्टॉपेज टाइम में कौलिबाली का अपना गोल लगभग हो जाता, लेकिन डियारा ने सुपर सेव कर दी। इस ड्रॉ से मोरक्को की 19 लगातार जीत का वर्ल्ड रिकॉर्ड टूट गया, लेकिन वो 22 मैचों से अपराजित हैं – 2023 AFCON के बाद से!

    क्या रोमांचक टूर्नामेंट है ये AFCON 2025, भाई! मोरक्को फेवरिट है, लेकिन माली जैसी टीम कोई भी उलटफेर कर सकती है। अगले मैचों का इंतजार है!

  • ASUS ने किया साफ़ इनकार: क्या सच में बनाएगी मेमोरी चिप्स? जानें पूरी सच्चाई | DDR5 कीमतें बढ़ने की वजह

    इन दिनों कंप्यूटर और लैपटॉप बनाने के लिए ज़रूरी डीडीआर5 मेमोरी चिप्स की कीमत आसमान छू रही है। बाजार में इनकी इतनी कमी है कि थोक कीमतें तो चार गुना हो गई हैं, और रिटेल में तो ग्राहकों को और भी ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं। ऐसे में ये खबर चौंकाने वाली लगी कि टेक दिग्गज कंपनी ASUS इस संकट से निपटने के लिए खुद मेमोरी चिप्स बनाने का प्लान बना रही है। लेकिन सच्चाई कुछ और है।

    फैक्ट चेक: ASUS ने खुद किया खंडन
    इस खबर की जड़ एक ईरानी प्रकाशन की रिपोर्ट थी, जिसमें कहा गया था कि ASUS अगले साल के मध्य तक अपनी मेमोरी शिप करना शुरू कर देगी। हालाँकि, ताइवान की प्रतिष्ठित सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (CNA) से बात करते हुए ASUS ने इस अफवाह का साफ़-साफ़ खंडन किया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसकी मेमोरी वेफर फैब (चिप निर्माण इकाई) में निवेश करने की कोई योजना नहीं है।”

    तो ASUS का असली प्लान क्या है?
    ASUS ने CNA को बताया कि वह इस मेमोरी संकट से निपटने के लिए दूसरे, ज्यादा व्यावहारिक तरीके अपनाएगी। कंपनी का कहना है कि वह अपने मौजूदा मेमोरी आपूर्तिकर्ताओं के साथ रिश्ते और मजबूत करेगी। बाजार की मांग के हिसाब से अपने उत्पादों के जीवन-चक्र और उनकी specifications को ठीक करेगी।

    यानी, ASUS खुद चिप्स बनाने की जटिल और लंबी प्रक्रिया में नहीं पड़ेगी, बल्कि दूसरे निर्माताओं के साथ मिलकर और स्मार्ट प्रबंधन से इस समस्या से निपटेगी।

    सबसे पहले बात उस अफवाह की। ईरानी टेक मैगजीन ‘सख्तअफजार’ ने दावा किया कि आसुस 2026 की दूसरी तिमाही से अपना RAM शिप करना शुरू कर देगी। वजह? उनके मुताबिक, आसुस को अपने मदरबोर्ड, ग्राफिक्स कार्ड और लैपटॉप जैसे प्रोडक्ट्स के लिए इतनी मेमोरी चाहिए कि खुद बनाना फायदेमंद होगा। लॉजिक तो बनता है – लंबे समय में पैसे बचेंगे, सप्लाई चेन मजबूत होगी। लेकिन यार, रियलिटी चेक: मेमोरी फैक्ट्री लगाने में कम से कम दो साल लगते हैं, वो भी अगर आपके पास पहले से टेक्नॉलजी और एक्सपीरियंस हो। आसुस के पास DRAM IP या चिप मैन्युफैक्चरिंग का कोई पुराना रेकॉर्ड नहीं है। अगले साल शिपिंग शुरू करना? ये तो नामुमकिन लगता है!

    और हां, आसुस असल में ऐसी कंपोनेंट्स नहीं बनाती। वो तो ज्यादातर दूसरे मैन्युफैक्चरर्स से चिप्स खरीदकर अपने प्रोडक्ट असेंबल करती है। मदरबोर्ड या कीबोर्ड बनाना अलग बात है, लेकिन माइक्रोचिप्स का पूरा प्रोडक्शन? वो एकदम अलग लीग है। हमने fact check किया – Tom’s Hardware और Wccftech जैसी साइट्स पर ये अफवाह फैली, लेकिन मूल स्रोत ‘सख्तअफजार’ है, जो पहले AMD Ryzen 8000G के स्पेक्स लीक करके क्रेडिबल साबित हुई थी। फिर भी, इस बार की रिपोर्ट में कोई ठोस सोर्स नहीं दिया गया, सिर्फ ‘स्वामित्व वाली रिपोर्ट्स’ का हवाला। और तो और, पोस्ट में मेमोरी मॉड्यूल और IC को एक ही चीज मान लिया गया, जो टेक्निकल गलती है।

    आखिर मेमोरी संकट कब तक रहेगा?
    उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी जल्द खत्म होने वाली नहीं है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजार में सामान्य हालात 2026 के अंत से 2028 के बीच ही लौटने की उम्मीद है। इसकी एक वजह यह भी है कि AI और अन्य टेक्नोलॉजी की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है, जिससे मेमोरी चिप्स की खपत भी बढ़ गई है।

  • CMF Phone 1 और CMF Phone 2 Pro को मिला Nothing OS 4.0 अपडेट, जानिए क्या है नया

    Nothing के आधिकारिक कम्युनिटी फोरम के मुताबिक, Nothing OS 4.0 एक बड़ा सॉफ्टवेयर अपग्रेड है जो आपके फोन के लुक और फील को ही बदल देगा। इसमें मिल रही नई खूबियां हैं:

    अच्छी खबर है Nothing और CMF फैंस के लिए! आखिरकार Nothing OS 4.0 अपडेट CMF Phone 1 और CMF Phone 2 Pro पर आ गया है। ये अपडेट Android 16 पर आधारित है और इसमें ढेर सारी नई चीजें हैं – बेहतर विजुअल्स, ज्यादा कस्टमाइजेशन ऑप्शंस, स्मूद यूजर इंटरफेस और ओवरऑल परफॉर्मेंस में इंप्रूवमेंट।

    पहले तो कंपनी ने कुछ गंभीर बग्स की वजह से Nothing OS 4.0 का रोलआउट रोक दिया था, लेकिन अब सब ठीक हो गया है और अपडेट फिर से फुल स्पीड में चल रहा है। नवंबर 2025 में ये स्टेबल वर्जन Nothing Phone (3), Phone (2), Phone (2a) और Phone (2a) Plus जैसे मॉडल्स पर आया था। अब बारी आई है बजट रेंज के CMF फोन्स की!

    Nothing के कम्युनिटी फोरम पर ऑफिशियल अनाउंसमेंट हुआ है कि CMF Phone 1 के लिए Nothing OS 4.0 आज से (26 दिसंबर 2025) फेजवाइज रोल आउट शुरू हो रहा है। मतलब धीरे-धीरे ज्यादा यूजर्स तक पहुंचेगा। वहीं CMF Phone 2 Pro वाले यूजर्स को आने वाले हफ्तों में ये अपडेट मिलेगा। अलग-अलग रीजन में टाइमिंग थोड़ी अलग हो सकती है, तो पेशेंस रखो!

    अगर आपको जल्दी चेक करना है कि अपडेट आया या नहीं, तो फोन की सेटिंग्स में जाओ > सिस्टम > सिस्टम अपडेट्स और मैन्युअली चेक कर लो। ये अपडेट काफी बड़ा है, तो अच्छे Wi-Fi पर ही डाउनलोड करना।

    Nothing का कहना है कि इस अपडेट से यूजर एक्सपीरियंस और भी मजेदार और स्मार्ट बनेगा – नए लॉक स्क्रीन क्लॉक्स, रिफ्रेश्ड क्विक सेटिंग्स, एक्स्ट्रा डार्क मोड और बहुत कुछ। अगर आप CMF Phone 1 या 2 Pro यूज करते हो, तो एक्साइटेड हो ना

  • हाफ-टाइम रिएक्शन: डोर्गु तूफान, न्यूकैसल दबदबा, यूनाइटेड की कप्तानी पर सवाल!

     पहले हाफ का सुपरस्टार: पैट्रिक डोर्गु

    सभी ने एक स्वर में डोर्गु के प्रदर्शन की तारीफ की है। जस्टिन कावानाघ ने उन्हें “पहले हाफ का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी” करार दिया है, यह कहते हुए कि वह “असीम ऊर्जा” से भरपूर हैं। रॉब नैप ने मजाकिया अंदाज में कहा, “यह मुझे उन बच्चों की याद दिलाता है जो क्रिसमस की टॉफियां खाकर दौड़ रहे होते हैं।” डोर्गु की शानदार वॉली और पूरे मैदान में दौड़ भरने की क्षमता ने न्यूकैसल के हमले को एक खतरनाक धार दी है।

    यूनाइटेड पर सवाल: कप्तानी और ऊर्जा की कमी?

    दूसरी ओर, मैनचेस्टर यूनाइटेड की टीम को लेकर चिंता जताई जा रही है। कप्तानी पर बहस: मार्टिन लैंकन ने ब्रूनो फर्नांडेस की कप्तानी पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि भले ही फर्नांडेस का खेल शानदार हो, लेकिन एक टीम के खिलाड़ी के रूप में वह “अच्छा उदाहरण पेश नहीं करते”। उनकी राय में, लिसांड्रो मार्टिनेज या मेसन माउंट को कप्तानी देना बेहतर होता। थके हुए दिख रहे खिलाड़ी: जस्टिन कावानाघ ने न्यूकैसल के कुछ खिलाड़ियों को “ऐसे दिखने” वाला बताया है “जैसे पड़ोसी के पालतू जानवरों ने उन्हें रात भर जगाए रखा हो”। यह टिप्पणी शायद पिछले मैचों के बाद की थकान की ओर इशारा करती है।

    रणनीति पर प्रहार: क्रिस पैरास्केवास ने न्यूकैसल की रणनीति पर मजाक किया है। उन्होंने कहा कि यूनाइटेड के एकमात्र सक्षम फुटबॉलर (शायद कासेमिरो या एरिक्सन की अनुपस्थिति) की गैरमौजूदगी का फायदा उठाते हुए, न्यूकैसल ने डोर्गु को रॉबर्टो कार्लोस जैसा प्रदर्शन करने का मौका दिया।

    पैट्रिक डोर्गु का प्रदर्शन: पहले हाफ के आँकड़े बताते हैं कि डोर्गु ने सबसे ज्यादा दौड़ लगाई, कई खतरनाक क्रॉस दिए और गोल का मौका बनाया। एक्सपर्ट्स की राय इस आँकड़े से मेल खाती है

    फर्नांडेस की कप्तानी: यह एक व्यक्तिपरक राय है। फर्नांडेस की कप्तानी पर फुटबॉल जगत में हमेशा मतभेद रहे हैं। यह एक स्थापित तथ्य नहीं, बल्कि एक विश्लेषण है। न्यूकैसल की ऊर्जा: न्यूकैसल के खिलाड़ियों की थकान का जिक्र शायद उनके घने फिक्स्चर और चोटों की लिस्ट को देखते हुए किया गया है, जो एक वैध बिंदु है।

    दूसरे हाफ के लिए क्या उम्मीद?

    पहला हाफ न्यूकैसल के हिस्से में रहा है। दूसरे हाफ में देखना दिलचस्प होगा कि क्या यूनाइटेड कोई जवाबी रणनीति लाते हैं और क्या डोर्गु अपना जादू जारी रख पाते हैं। कप्तान फर्नांडेस टीम को पीछे से कैसे प्रेरित करते हैं, यह भी अहम होगा

  • वाइब कोडिंग का खतरा: AI से कोड लिखवाना क्यों है जोखिम भरा? Cursor CEO की चेतावनी

    कोडिंग की दुनिया में आजकल एक नया ट्रेंड चल निकला है – “वाइब कोडिंग”। मतलब, डेवलपर्स खुद कोड लिखने की जहमत न उठाकर AI टूल्स से पूरा का पूरा कोड बनवा रहे हैं। यह तरीका भले ही तेज़ और आसान लगे, लेकिन इसके गंभीर खतरे हैं। Cursor नामक एक लोकप्रिय AI कोडिंग टूल के ही CEO माइकल ट्रूएल ने इसे लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है।

    वाइब कोडिंग में, डेवलपर्स AI को सिर्फ यह बताते हैं कि उन्हें क्या चाहिए (जैसे, “लॉगिन पेज बनाओ” या “डेटा सॉर्ट करने वाला फंक्शन लिखो”), और AI पूरा कोड ब्लॉक खुद ही जेनरेट कर देता है। डेवलपर को हर लाइन लिखने या उसकी बारीकी से जांच करने की जरूरत नहीं पड़ती।

    CEO ने क्या चेतावनी दी?
    Cursor के सह-संस्थापक और CEO माइकल ट्रूएल ने हाल ही में फॉर्च्यून ब्रेनस्टॉर्म AI कॉन्फ्रेंस में कहा कि AI जनरेटेड कोड पर अंधाधुंध भरोसा सॉफ्टवेयर सिस्टम की नींव को कमजोर कर सकता है। उन्होंने एक आसान उदाहरण देकर समझाया: यह ऐसा है जैसे आप आँख बंद करके किसी से कहें, ‘मुझे एक घर बना दो।’ आप नींव नहीं देखते, वायरिंग नहीं चेक करते, न ही दीवारों की मजबूती परखते हैं। शुरू में घर ठीक लगेगा, लेकिन जैसे-जैसे आप मंजिल पर मंजिल बढ़ाते जाएंगे, पूरी इमारत डगमगाने लगेगी और एक दिन ढह भी सकती है।”

    फैक्ट चेक: क्या Cursor खुद AI टूल नहीं है?
    हां, यह एक विरोधाभासी बात लग सकती है। Cursor (जिसकी स्थापना 2022 में हुई) एक AI-पावर्ड कोड एडिटर है जो डेवलपर्स को कोड जेनरेट करने और डीबग करने में मदद करता है। लाखों डेवलपर इसे इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ट्रूएल की चेतावनी बिना सोचे-समझे और बिना जाँच के AI पर पूरी तरह निर्भर हो जाने के खिलाफ है, न कि AI के समझदारी से इस्तेमाल के खिलाफ।

    Cursor की सफलता और चेतावनी का महत्व

    दिलचस्प बात यह है कि यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब Cursor खुद तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। 2022 में शुरू हुआ Cursor, AI को सीधे डेवलपमेंट एनवायरनमेंट में जोड़ता है, जिससे डेवलपर्स कोड लिखने, डीबग करने और तेजी से काम करने में मदद मिलती है।

    पहले और अब की कोडिंग में फर्क

    ट्रूएल ने यह भी बताया कि पिछले दशक में प्रोग्रामिंग कैसे बदली है।
    पहले डेवलपर्स घंटों टेक्स्ट एडिटर में बैठकर हर लाइन खुद लिखते और समझते थे।
    अब जनरेटिव AI के कारण इंजीनियर एक कदम पीछे हटकर पूरा काम AI को सौंप सकते हैं – चाहे वह फंक्शन लिखना हो या पूरा कोड रिफैक्टर करना।

  • AI की कीमत आम यूज़र चुका रहा है: क्यों महंगे हो रहे हैं लैपटॉप, स्मार्टफोन और RAM-SSD?

    अगर आप हाल में नया लैपटॉप, कंप्यूटर पार्ट्स या स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद ज़रूरी है। बाज़ार में एक अजीबोगरीब हलचल है। कंप्यूटर की मेमोरी (RAM) और स्टोरेज (SSD/HDD) की कीमतें आसमान छू रही हैं। क्या आप जानते हैं कि अगस्त में जो RAM 6,000 रुपये में मिलती थी, वही अब 15,000 रुपये तक पहुंच गई है? और 1TB SSD, जो पहले 6,000 रुपये के आसपास था, वह अब 19,000 रुपये तक बिक रहा है!

    क्या है पूरा मामला?

    दरअसल, पूरी दुनिया में सेमीकंडक्टर चिप्स (जो हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का दिमाग होते हैं) की मांग बहुत ज़्यादा बढ़ गई है, जबकि आपूर्ति सीमित है। यह सिर्फ मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि एक बड़ा बदलाव है। सोचिए, कुछ महीने पहले जो 16GB DDR5 RAM किट 8-10 हजार रुपये में मिल जाती थी, अब उसकी कीमत 20-30 हजार तक पहुंच गई है। SSD की बात करें तो 1TB वाली ड्राइव, जो पहले 6-7 हजार में आ जाती थी, अब 10-15 हजार या उससे ज्यादा की हो गई है। भारत में ऑनलाइन स्टोर्स पर रोज कीमतें बदल रही हैं, और कुछ जगहों पर तो एक पीस पर लिमिट भी लगा दी गई है ताकि होर्डिंग न हो।

    इस संकट के पीछे तीन बड़ी कंपनियां हैं – सैमसंग, एसके हाइनिक्स और माइक्रोन। ये तीनों मिलकर दुनिया की 95% से ज्यादा DRAM मेमोरी बनाती हैं, जो आपके फोन, लैपटॉप, टीवी, कार – हर चीज में लगती है। पहले ये कंपनियां बैलेंस बनाए रखती थीं, कीमतें स्थिर रहती थीं। लेकिन अब डेटा सेंटर्स के लिए स्पेशल हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) की डिमांड इतनी बढ़ गई है कि ये कंपनियां उसी पर फोकस कर रही हैं। नतीजा? आम उपभोक्ताओं के लिए मेमोरी कम पड़ रही है और कीमतें ऊपर जा रही हैं।

    2025 में ये कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं। एसके हाइनिक्स और माइक्रोन के प्रॉफिट कई गुना बढ़ गए हैं, क्योंकि वे हाई मार्जिन वाली मेमोरी ज्यादा बेच रही हैं। सैमसंग ने तो अपनी मोबाइल डिवीजन को लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट देने से भी मना कर दिया, क्योंकि बाहर के कस्टमर्स ज्यादा कीमत दे रहे हैं। और माइक्रोन ने अपना पॉपुलर कंज्यूमर ब्रांड क्रूशियल बंद कर दिया है – फरवरी 2026 से क्रूशियल RAM और SSD नहीं मिलेंगी!

    इसका असर सीधे आप पर पड़ेगा। लैपटॉप कंपनियां जैसे डेल, लेनोवो, एचपी पहले ही 15-20% कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। स्मार्टफोन में भी बजट और मिड-रेंज फोन्स महंगे होंगे – या फिर RAM और स्टोरेज कम मिलेगा। 2026 में ग्लोबल स्मार्टफोन शिपमेंट्स गिर सकते हैं, और औसत कीमतें 5-10% बढ़ सकती हैं। भारत में भी यही हाल है – एंट्री-लेवल फोन्स में 4GB RAM वापस आ सकती है, और कीमतें ऊपर जाएंगी।

    एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि ये कमी 2026 के अंत या 2027 तक बनी रह सकती है, क्योंकि नई फैक्ट्री बनाने में सालों लगते हैं। कंपनियां जल्दी प्रोडक्शन नहीं बढ़ा रही हैं, क्योंकि कमी से ही अच्छा मुनाफा हो रहा है।

    तो सलाह ये है – अगर आपको जरूरत है, तो अभी खरीद लो। कल की कीमतें आज से ज्यादा हो सकती हैं। तकनीक पहले सस्ती होती जा रही थी, लेकिन अब ये ट्रेंड उल्टा हो गया है। सब कुछ डेटा सेंटर्स की भूख की वजह से!

  • नया फोन खरीदने का प्लान है? जनवरी 2026 में आ रहे हैं ये 5 धमाकेदार स्मार्टफोन | भारत लॉन्च

    क्या आप भी नया फोन लेने की तैयारी में हैं? अगर हां, तो रुक जाइए! दिसंबर खत्म होने वाला है। जनवरी 2025 आपके लिए एकदम ‘धमाकेदार’ स्मार्टफोन्स लेकर आ रहा है। Redmi से लेकर Realme और Poco से लेकर Oppo तक, हर कोई अपना नया ‘फोन ‘ लॉन्च करने को तैयार है। चलिए, आपको बताते हैं कि इस महीने मार्केट में कौन-कौन से नए फोन आ रहे हैं।

    Oppo Reno 15 Pro Mini: ‘छोटा पैकेज, बड़ा धमाल’

    बात अगर स्टाइल और कॉम्पैक्ट डिज़ाइन की हो, तो Oppo का नाम सबसे पहले आता है। सुनने में आ रहा है कि Oppo Reno 15 सीरीज़ के साथ एक Reno 15 Pro Mini भी ला सकता है। यानी बड़े फीचर्स एक छोटे और आरामदायक बॉडी में।6.3 इंच की शानदार डिस्प्ले, 50MP सेल्फी कैमरा और 200MP का पावरफुल रियर कैमरा हो सकता है 6200mAh की बैटरी के साथ लंबा बैकअप मिलने की उम्मीद है। कीमत ₹50,000 से ₹55,000 के बीच बताई जा रही है।

    Vivo T सीरीज – कैमरा और परफॉर्मेंस का कॉम्बो

    Vivo का नया T सीरीज फोन भी जनवरी में लॉन्च हो सकता है। यह फोन कैमरा और परफॉर्मेंस दोनों पर फोकस करेगा ZEISS ब्रांडेड 50MP कैमरा, दमदार Dimensity 9400 चिप और IP68/IP69 का वॉटर प्रूफ रेटिंग। इस फोन ₹65,000 तक की रेंज में आ सकता है

    Redmi Note 15 सीरीज – बजट में बेस्ट

    Redmi Note सीरीज़ हमेशा से ही बजट में बेस्ट फीचर्स देती आई है। 6 जनवरी को, Redmi Note 15 आधिकारिक तौर पर लॉन्च हो रहा है! 108MP का कैमरा, 6000mAh की भारी-भरकम बैटरी और IP65 रेटिंग। बेस मॉडल ₹20,000 से कम में मिलने की उम्मीद है। Redmi Note 15 Pro बाद में 200MP कैमरा और ₹30,000 के आसपास की कीमत के साथ आ सकता है। Redmi ने 6 जनवरी की लॉन्च डेट की पुष्टि कर दी है। 108MP कैमरा और 6000mAh बैटरी जैसे फीचर्स आधिकारिक तौर पर कंफर्म हैं।

    Realme 16 Pro – परफॉर्मेंस बीस्ट

    Realme 16 Pro की धमाकेदार एंट्री 6 जनवरी को ही हो रही है। इससे पहले इसका फर्स्ट लुक भी लीक हो चुका है, जो काफी आकर्षक लग रहा है 1.5K रिज़ॉल्यूशन वाली फ्लैट डिस्प्ले, 7000mAh का बड़ा बैटरी पैक और 50MP का OIS कैमरा। यह फोन ₹35,000 से कम की श्रेणी में आ सकता है। Realme ने 6 जनवरी की लॉन्च डेट की घोषणा कर दी है। फीचर्स लीक्स के आधार पर हैं

    Poco M8 और X8 Pro – बजट में हाई परफॉर्मेंस

    Poco X7 Pro ने पिछले साल धूम मचाई थी। अब Poco X8 Pro की बारी है। कहा जा रहा है यह थर्ड वीक तक लॉन्च हो सकता है। 8000mAh तक की बैटरी, Dimensity 8500 चिप और IP69 रेटिंग। फोन BIS वेबसाइट पर देखा गया है, जो भारत में लॉन्च का साफ संकेत है।

  • Apple 2026 में ला सकता है ‘आईफोन अल्ट्रा’! क्या इस फोल्डेबल फोन की कीमत होगी 2 लाख रुपये से ज़्यादा?

    टेक दुनिया में एक नया भूचाल आने वाला है। खबरें हैं कि Apple अपना पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन 2026 में लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसे आईफोन अल्ट्रा’ का नाम दिया जा सकता है। लेकिन हैरान करने वाली बात इसकी अनुमानित कीमत है, जो कि लगभग 2,399 अमेरिकी डॉलर (भारतीय रुपये में लगभग 2 लाख रुपये) बताई जा रही है। यह पहले के अनुमानों से कहीं अधिक है।

    तकनीक परिपक्व, मगर कीमत ‘अल्ट्रा’

    विश्लेषकों का मानना है कि Apple का यह कदम बिल्कुल सोचा-समझा है। जब फोल्डेबल तकनीक अब काफी विकसित और परिपक्व हो चुकी है, तब Apple एकदम परफेक्ट प्रोडक्ट लेकर आना चाहता है। इस डिवाइस में एडवांस्ड फीचर्स जैसे क्रीज-फ्री डिस्प्ले (मोड़ने पर भी बिना निशान का स्क्रीन) का होना बताया जा रहा है। शायद इसी प्रीमियम अनुभव और उच्च लागत के चलते कंपनी इसे ‘अल्ट्रा’ ब्रांडिंग देने जा रही है।

    यह अनुमान कंपनी फुबोन रिसर्च ने लगाया है, जिसका हवाला Investing.com जैसी साइट्स दे रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि इस फोल्डेबल फोन के पैनल, हिंज और हल्के कॉम्पोनेन्ट्स की लागत काफी ज़्यादा है, जो इसकी ऊंची कीमत की मुख्य वजह है। हालाँकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यह अभी एक अनुमान है। आधिकारिक घोषणा Apple द्वारा ही की जाएगी।

    Competition और बाजार के अनुमान

    इस अनुमानित कीमत के साथ, आईफोन अल्ट्रा अपने प्रतिद्वंद्वियों से सीधे महंगा होगा। अनुमान है कि 2026 तक सैमसंग गैलेक्सी Z फोल्ड 7 की कीमत $1,999 और Google पिक्सेल 10 प्रो फोल्ड की कीमत $1,799 हो सकती है। इसके बावजूद, फुबोन रिसर्च आशावादी है। उनका मानना है कि फोल्डेबल आईफोन की बाजार में 7% पैठ हो सकती है और इसके पूरे जीवनकाल में 1.54 करोड़ यूनिट बिक सकती हैं, जिसमें से सिर्फ 2026 में 54 लाख यूनिट बिकने का अनुमान है।

    निष्कर्ष

    अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो Apple 2026 में फोल्डेबल मार्केट में सीधे एक ‘लक्ज़री लीग’ का प्रोडक्ट लेकर उतरेगा। क्या भारतीय ग्राहक, जो कीमत के प्रति बेहद संवेदनशील हैं, इस प्रीमियम कीमत पर फोल्डेबल आईफोन खरीदेंगे? यह सबसे बड़ा सवाल होगा। फिलहाल, सभी नज़रें 2026 पर टिकी हैं।

  • कॉफ़ी पिएं, जवान बने रहें: एंटी-एजिंग के 5 गजब फायदे | Coffee Ke Anti-Aging Fayde

    हम सभी चाहते हैं कि हमेशा जवान और तंदुरुस्त नज़र आएं। बढ़ती उम्र के चिह्न तो प्रकृति का नियम हैं, लेकिन कुछ चीज़ें हैं जो इस प्रक्रिया को धीमा जरूर कर सकती हैं। आपकी प्यारी कॉफ़ी उन्हीं में से एक है। यह सिर्फ सुबह की एनर्जी नहीं, बल्कि एक एंटी-एजिंग सुपरड्रिंक भी हो सकती है। आइए जानते हैं कैसे।

    एंटीऑक्सीडेंट्स का पावरहाउस है कॉफ़ी

    कॉफ़ी बीन्स प्राकृतिक रूप से पॉलीफेनोल्स और क्लोरोजेनिक एसिड जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं। ये तत्व हमारे शरीर में मौजूद हानिकारक फ्री रेडिकल्स को नष्ट करने में मदद करते हैं। फ्री रेडिकल्स कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज़ करते हैं। कॉफ़ी इन्हें बेअसर करके हमें अंदरूनी रूप से जवान रखने में सहायक है।

    सूजन घटाए, बुढ़ापा रोके

    क्रोनिक या लंबे समय तक रहने वाली सूजन को बुढ़ापे की प्रमुख वजह माना जाता है। कॉफ़ी में मौजूद कैफीन, क्लोरोजेनिक एसिड और पॉलीफेनोल्स सूजन-रोधी गुण रखते हैं। नियमित और संतुलित मात्रा में कॉफ़ी का सेवन शरीर में सूजन को कम करके उम्र संबंधी बीमारियों के जोखिम को घटा सकता है।

    त्वचा की चमक और कोलेजन का रक्षक

    कॉफ़ी के एंटीऑक्सीडेंट त्वचा के लिए भी फायदेमंद हैं। ये तत्व त्वचा में कोलेजन की रक्षा करने में मदद कर सकते हैं। कोलेजन वह प्रोटीन है जो त्वचा को कसाव और लचीलापन देता है। कोलेजन के संरक्षण से त्वचा ढीली पड़ने और झुर्रियों जैसे बुढ़ापे के लक्षणों से बचाव हो सकता है।

    गंभीर बीमारियों का खतरा करे कम

    कई वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि नियमित व संतुलित कॉफ़ी का सेवन कुछ पुरानी बीमारियों के जोखिम को कम करने से जुड़ा है। इनमें दिल की बीमारी, अल्जाइमर रोग, टाइप 2 मधुमेह और कुछ प्रकार के कैंसर शामिल हैं। कॉफ़ी में मौजूद सक्रिय तत्व शरीर की कोशिकाओं को दीर्घकालिक नुकसान से बचाने में भूमिका निभाते हैं।

    कॉफ़ी का कैफीन हमारी कोशिकाओं के अंदर मौजूद “ऊर्जा गृह” यानी माइटोकॉन्ड्रिया के कार्य में सुधार कर सकता है। यह ऑटोफैजी नामक प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया को भी उत्तेजित करता है, जिसमें शरीर क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को साफ करके नई, स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण करता है। यह प्रक्रिया समग्र स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने की गति को धीमा करने के लिए महत्वपूर्ण है

    फैक्ट चेक: यह लेख कॉफ़ी के सामान्य स्वास्थ्य लाभों पर आधारित है। यह चिकित्सकीय सलाह नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से परामर्श लें। कॉफ़ी का सेवन व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही करना चाहिए। अत्यधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है।

  • इंसुलिन लेते हैं तो क्या खाएं? डायबिटीज में भारतीय डाइट प्लान और सावधानियां

    अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और इंसुलिन ले रहे हैं, तो अक्सर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है: अब क्या खाऊं?” डरिए मत, क्योंकि आपकी थाली में रोटी, दाल और सब्जी जैसे भारतीय खाने ही आपके सबसे बड़े साथी बन सकते हैं। जी हाँ, इंसुलिन लेना मतलब अपने पसंदीदा खाने को अलविदा कहना नहीं है। बस थोड़ा सा संतुलन, सही मात्रा और समय का ख्याल रखने की जरूरत है।

    सबसे पहले, समझें कि क्या कम करना है

    इंसुलिन का असर आपके खान-पान पर निर्भर करता है। कुछ चीजें ब्लड शुगर को अचानक ऊपर-नीचे कर सकती हैं, जिससे इंसुलिन को काम करने में दिक्कत होती है मैदा और पॉलिश किया चावल: सफेद चावल, मैदे की रोटी या ब्रेड जल्दी पच जाते हैं और शुगर तेजी से बढ़ा सकते हैं। इनकी जगह बाजरा, ज्वार, रागी, भूरा चावल या साबुत गेहूं की रोटी को तरजीह दें। ये धीरे-धीरे पचते हैं और ऊर्जा देते रहते हैं।

    चीनी वाले पेय और मिठाइयाँ: 

    कोल्ड ड्रिंक, पैकेट वाले जूस, मिठाई से तुरंत बचें। अगर कभी खाना भी है, तो उसके साथ प्रोटीन (जैसे दही) या फाइबर (जैसे सलाद) जरूर लें। तला-भुना और ज्यादा चिकनाई वाला खाना: समोसे, पकौड़े, गाढ़ी ग्रेवी वाली करी और प्रोसेस्ड फूड में सेचुरेटेड फैट होता है, जो इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता को कम कर सकता है। भाप में पकी, ग्रिल की हुई या हल्के तेल में बनी डिशेज बेहतर विकल्प हैं।

    पैकेटबंद नमकीन: चिप्स, नमकीन, बिस्कुट में छुपी हुई चीनी और नमक होती है। इसकी जगह भुने चने, मुट्ठीभर मूंगफली या अंकुरित चाट जैसे घर के बने स्नैक्स चुनें।

    फैक्ट चेक: क्या वाकई तेल-घी नुकसानदायक है?

    सही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की गाइडलाइन्स के मुताबिक, ज्यादा सेचुरेटेड फैट (घी, मक्खन, ताड़ का तेल) और ट्रांस फैट (वनस्पति, बिस्कुट) इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा सकते हैं। हालाँकि, सीमित मात्रा में सरसों या ऑलिव ऑयल जैसे अच्छे तेलों का इस्तेमाल ठीक है

    भारतीय खाने के ये ‘सुपरफूड्स’ आपकी मदद करेंगे

    अच्छी खबर यह है कि हमारी रसोई में ऐसे कई खाद्य पदार्थ मौजूद हैं जो इंसुलिन के साथ मिलकर बेहतर काम करते हैं। साबुत अनाज: ज्वार, बाजरा, रागी, ओट्स फाइबर से भरपूर होते हैं, जो शुगर के अवशोषण को धीमा करते हैं। दालें और फलियाँ: अरहर, मूंग, चने की दाल, राजमा प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन कॉम्बो हैं, जो लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराते हैं। हरी सब्जियाँ: करेला, भिंडी, लौकी, परवल में ब्लड शुगर नियंत्रण के गुण पाए जाते हैं। पालक, मेथी, सरसों का साग आयरन और विटामिन से भरे होते हैं। स्मार्ट स्नैक्स: भुने चने की चाट, अंकुरित सलाद, छाछ भूख लगने पर बेहतरीन विकल्प हैं। फल: अमरूद, सेब, संतरा, पपीता (सीमित मात्रा में) बेहतर विकल्प हैं। केला, आम, चीकू जैसे मीठे फलों का सेवन डॉक्टर की सलाह से करें।

    सबसे जरूरी बात: ब्लड शुगर चेक करते रहना

    इंसुलिन लेने वाले हर व्यक्ति के लिए नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग सबसे जरूरी कदम है। इससे आपको पता चलता है कि कौन सा खाना आपके शरीर पर कैसा असर डाल रहा है। यह जानकारी आपको और आपके डॉक्टर को भोजन की मात्रा और इंसुलिन की डोज को बेहतर ढंग से एडजस्ट करने में मदद करती है। याद रखें: इंसुलिन थेरेपी के साथ जीवन का मतलब खाने की पाबंदी नहीं, बल्कि समझदारी से चयन करना है। थोड़ी सी सूझबूझ और नियमित जांच से आप न सिर्फ सेहतमंद रह सकते हैं, बल्कि भारतीय खाने का पूरा स्वाद भी ले सकते हैं।

  • इंडोनेशिया बाढ़: आचे के लोग क्यों लहरा रहे हैं सफेद झंडे? सरकार की प्रतिक्रिया पर आक्रोश

    इंडोनेशिया के सबसे पश्चिमी प्रांत आचे के निवासी गुस्से और मायूसी से भरे हुए हैं। नवंबर में आए एक दुर्लभ चक्रवाती तूफान के बाद आई भीषण बाढ़ ने यहां तबाही मचा दी, लेकिन लोगों का गुस्सा प्रकृति से ज्यादा सरकार की सुस्त और अव्यवस्थित प्रतिक्रिया पर है। यह संकट प्रबंवो सुबियांतो की सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

    क्या हुआ?
    नवंबर 2024 में आए चक्रवात ने सुमात्रा द्वीप पर भारी बाढ़ ला दी। इस आपदा में अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग बेघर हुए हैं। सबसे ज्यादा मौतें आचे प्रांत में हुई हैं, जहां आज भी बहुत से लोगों को साफ पानी, भोजन, बिजली और दवाइयां नसीब नहीं हो पा रही हैं। संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उत्तरी आचे के गवर्नर इस्माइल ए जलील हाल ही में मीडिया के सामने भावुक हो गए। उन्होंने आंसू भरी आंखों से पूछा, हालांकि, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का रुख बिल्कुल अलग है। उन्होंने विदेशी सहायता स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और दावा किया है कि स्थिति ‘नियंत्रण में’ है। उनका कहना है कि इंडोनेशिया खुद ही इससे उबरने में सक्षम है। सरकार ने इसे ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की मांगों को भी नजरअंदाज किया है, जिससे आपातकालीन फंड और संसाधनों का प्रवाह तेज हो सकता था

    सफेद झंडे: आत्मसमर्पण नहीं, संकेत हैं मदद के लिए
    प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ आचे की राजधानी बांदा आचे में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। प्रदर्शनकारी सफेद झंडे लहरा रहे हैं। उनका कहना है कि ये झंडे आत्मसमर्पण के नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने और मदद की गुहार लगाने के प्रतीक हैं एक प्रदर्शनकारी हुस्नुल खवातिन्निसा ने कहा, झंडे लहराने का मतलब यह नहीं है कि हम हार मान रहे हैं। ये बाहर मौजूद दोस्तों को बताने का संकेत हैं कि आचे में हालात बहुत खराब हैं।”

    बचाव और राहत कार्यों की धीमी गति से लोग बेहद निराश हैं। एक प्रदर्शनकारी नुरमी अली ने चिल्लाते हुए कहा, हमें कब तक कीचड़ और बाढ़ के पानी में खुद को धोना पड़ेगा 2004 की सुनामी की दर्दनाक यादेंयह त्रासदी आचे के लोगों केलिए 2004 की भीषण सुनामी की याद ताजा कर रही है, जिसमें इसी इलाके में हजारों लोग मारे गए थे। हैरानी की बात यह है कि स्थानीय लोगों का कहना है कि उस उस विनाशकारी सुनामी के बाद भी राहत कार्य इस बार के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज और प्रभावी थे। 2004 के बाद दुनिया भर से अरबों डॉलर की मदद और एक समर्पित पुनर्निर्माण एजेंसी ने हालात सुधारने में मदद की थी। आज, लोगों को लगता है कि उन्हें अकेला छोड़ दिया गया है रिंदू मजालीना, जो 2004 में सुनामी से बच गई थीं, कहती हैं, “सुनामी के बाद सभी ने तुरंत कार्रवाई की और समुदाय जल्दी उबर गया। लेकिन अब हम जो झेल रहे हैं वह इससे भी बदतर है… हम भूख से मर रहे हैं। उनका घर बह गया है और वह अपने तीन बच्चों को खिलाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

    फैक्ट चेक: सरकार क्या कह रही है?

    • सरकार का दावा: प्रबोवो प्रशासन का कहना है कि राहत कार्य ‘राष्ट्रीय स्तर’ पर चल रहे हैं और पुनर्निर्माण के लिए लगभग 60 ट्रिलियन रुपिया (3.6 अरब डॉलर) जारी किए गए हैं।
    • जमीनी हकीकत: प्रभावित लोगों, स्थानीय अधिकारियों और स्वतंत्र मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सहायता जरूरतमंदों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही है। सफेद झंडे और विरोध प्रदर्शन इसी असंतोष का प्रमाण हैं।
    • विदेशी मदद का मामला: कई देशों ने मदद की पेशकश की है। उदाहरण के लिए, संयुक्त अरब अमीरात ने मेदान शहर को राहत सामग्री भेजी, लेकिन केंद्र सरकार के निर्देश पर इसे वापस भेज दिया गया।

    विश्लेषक क्या कहते हैं?
    विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति प्रबोवो का विदेशी मदद लेने से इनकार देश की ‘संप्रभुता’ का प्रतीकात्मक प्रदर्शन है। विद्यांदिका जाति परकासा, एक राजनीतिक शोधकर्ता, के अनुसार, विदेशी सहायता के लिए द्वार खोलना विदेशी जांच को आमंत्रित करने जैसा है… वे असफल नहीं दिखना चाहते।” हालांकि, यह रणनीति उल्टा भी पड़ सकती है अगर हालात और बिगड़े।

    आलोचक यह भी कहते हैं कि सरकार की नीतियाँ, जैसे ताड़ के तेल के बागानों का विस्तार, वनों की कटाई का कारण बनी हैं, जिससे बाढ़ का प्रभाव और गहरा हुआ है।

  • सामाजिक सुरक्षा 2026 भुगतान: जनवरी में देरी का कारण, पूरा शेड्यूल और लाभ में बढ़ोतरी

    अमेरिका में 7.4 करोड़ से अधिक लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ जीवनरेखा का काम करते हैं। 2026 का भुगतान कैलेंडर आ गया है, और जनवरी का महीना कई लाभार्थियों के लिए लंबा इंतज़ार लेकर आ रहा है। आइए, पूरे साल के शेड्यूल और जनवरी की इस देरी के पीछे के कारणों को समझते हैं। यह देरी किसी प्रशासनिक गड़बड़ी की वजह से नहीं, बल्कि कैलेंडर की वजह से है। जनवरी 2026 महीना एक गुरुवार से शुरू हो रहा है। चूंकि ज्यादातर मासिक भुगतान महीने के दूसरे, तीसरे और चौथे बुधवार को होते हैं, इसलिए ये तारीखें पीछे खिसक गई हैं

    आपकी जन्मतिथि के अनुसार जनवरी 2026 का भुगतान शेड्यूल:

    • जन्म तारीख 1 से 10: भुगतान दिन – बुधवार, 14 जनवरी
    • जन्म तारीख 11 से 20: भुगतान दिन – बुधवार, 21 जनवरी
    • जन्म तारीख 21 से 31: भुगतान दिन – बुधवार, 28 जनवरी

    ध्यान रखें: अगर आप किसी परिवार के सदस्य (जैसे पति/पत्नी या माता-पिता) के रिकॉर्ड के आधार पर लाभ पा रहे हैं, तो भुगतान की तारीख उनकी जन्मतिथि से तय होगी।

    किन्हें मिलेगा जनवरी में जल्दी भुगतान?

    जबकि ज्यादातर लोगों को इंतज़ार करना पड़ेगा, दो समूहों को सामान्य से पहले पैसा मिल जाएगा दीर्घकालिक लाभार्थी: जिन्हें मई 1997 से पहले ही लाभ मिलना शुरू हो गया था, उनका भुगतान हर महीने की 3 तारीख को होता है। जनवरी 2026 में 3 तारीख शनिवार को पड़ रही है, इसलिए उनका भुगतान शुक्रवार, 2 जनवरी को जारी कर दिया जाएगा एसएसआई के साथ सामाजिक सुरक्षा लाभ पाने वाले: जो लोग सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ पूरक सुरक्षा आय (SSI) भी प्राप्त करते हैं (लगभग 2.5 मिलियन लोग), उन्हें भी सामाजिक सुरक्षा का भुगतान 2 जनवरी को ही मिल जाएगा। उनका जनवरी का एसएसआई भुगतान 31 दिसंबर 2025 को ही आ जाएगा (क्योंकि 1 जनवरी छुट्टी है)।

    2026 के लिए अच्छी खबर: लाभ में बढ़ोतरी

    जनवरी 2026 से सभी सामाजिक सुरक्षा लाभों (सेवानिवृत्ति, विकलांगता, उत्तरजीवी और एसएसआई) में 2.8% की बढ़ोतरी होगी। यह वृद्धि जीवनयापन लागत (मुद्रास्फीति) में हुए बदलाव को दर्शाती है। एसएसए की फोन सेवा: सुधार के दावे, चिंताएं बरकरार सामाजिक सुरक्षा प्रशासन (SSA) ने अपनी फोन सेवा में सुधार का दावा किया है। हालांकि, एक स्वतंत्र समीक्षा में पाया गया कि पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 2.5 करोड़ कॉल्स का जवाब नहीं दिया गया। SSA के आयुक्त ने सेवा गति में सुधार बताया है, लेकिन सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन जैसे आलोचकों का कहना है कि वास्तविक प्रतीक्षा समय दावों से कहीं ज्यादा है।

    प्र. क्या पूरे 2026 में भुगतान में ऐसी देरी होगी?
    जवाब: नहीं। ऐसी देरी सिर्फ उन्हीं महीनों में होती है जब महीने की पहली तारीख सप्ताह के आखिरी दिनों (बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार) में पड़ती है। 2026 में अक्टूबर महीने में भी दूसरा बुधवार 14 तारीख को आएगा, जबकि अप्रैल और जुलाई में भुगतान 8 तारीख से ही शुरू हो जाएंगे

  • भारत में श्रम सुधार 2026: चार श्रम संहिताएं, EPFO 3.0 और मजदूरी-सामाजिक सुरक्षा में बड़ा बदलाव

    भारत में लंबे समय से अटके श्रम सुधार अब अपने सबसे अहम मोड़ पर पहुँच चुके हैं। करीब पाँच साल के इंतजार के बाद केंद्र सरकार ने संकेत दे दिए हैं कि 2026 में चारों श्रम संहिताओं (Labour Codes) का पूर्ण कार्यान्वयन ज़मीनी स्तर पर शुरू होगा।सरकार द्वारा हाल ही में प्रकाशित विस्तृत नियमों में सभी श्रमिकों के लिए वैधानिक न्यूनतम मजदूरी और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा का वादा किया गया है। ये चार श्रम संहिताएँ देश के 29 पुराने श्रम कानूनों को समेटकर एक सरल और आधुनिक ढांचे में बदल देती हैं, जो आज की आर्थिक और रोजगार संबंधी वास्तविकताओं को बेहतर तरीके से दर्शाता है।

    EPFO 3.0: भविष्य निधि सेवाओं में बड़ा डिजिटल अपग्रेड

    • पीएफ निकासी को और तेज़ व सरल बनाना
    • कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-1995) के तहत पेंशन निर्धारण को आसान करना
    • कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI-1976) के तहत बीमा दावों का शीघ्र निपटान

    सरकार का कहना है कि EPFO 3.0 से सेवा की गति, पारदर्शिता और सदस्य संतुष्टि में बड़ा सुधार होगा।2025 रहा परिवर्तनकारी वर्ष”: श्रम मंत्री का दावा केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने 2025 को भारत की श्रम व्यवस्था के लिए एक “वास्तव में परिवर्तनकारी वर्ष” बताया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने कहा कि 21 नवंबर 2025 को चारों श्रम संहिताओं का प्रभावी होना एक बड़ी उपलब्धि रही। उनका कहना है कि 2026 का फोकस होगा

    • टेक्नोलॉजी आधारित सेवा डिलीवरी
    • ज़मीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन
    • श्रम संहिताओं के तहत बनाए गए नियमों का संचालन

    मांडविया के अनुसार, ये नियम कानूनों को सिर्फ कागज़ तक सीमित न रखकर कार्यस्थल पर वास्तविक परिणाम देने का माध्यम बनेंगे, जिससे श्रमिकों और नियोक्ताओं – दोनों को स्पष्टता मिलेगी।भारत के श्रम इतिहास का सबसे बड़ा सुधारसरकार का दावा है कि ये सुधार भारत को अधिक औपचारिक और समावेशी श्रम बाजार की ओर तेज़ी से ले जाएंगे।मंत्री मांडविया ने इन्हें भारत के श्रम कानून इतिहास का सबसे व्यापक सुधार बताया है, जिनका उद्देश्य है: श्रमिक कल्याण में सुधार

    असंगठित क्षेत्र का औपचारिकीकरण ,रोजगार के नए अवसर पैदा करना रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा का विस्तारश्रम सुधारों के साथ-साथ सरकार ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना भी शुरू की है, जिसका अनुमानित बजट करीब 1 लाख करोड़ रुपये है। इस योजना का लक्ष्य अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ नौकरियों को प्रोत्साहन देना है।सामाजिक सुरक्षा कवरेज में भी बड़ा इज़ाफा हुआ है सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कवरेज पहले: लगभग 19% अब: 64% से अधिक इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ (ISSA) ने भी मान्यता दी है।

    डिजिटल लेबर इंफ्रास्ट्रक्चर ने बदली तस्वीर

    ई-श्रम पोर्टल राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सेवाओं की पहुंच को काफी मजबूत किया है। इन पहलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। EPFO 3.0 इसी डिजिटल बदलाव का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। ट्रेड यूनियनों का विरोध और आम हड़ताल की तैयारी हालाँकि, ये सुधार विवादों से अछूते नहीं हैं। कई केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने श्रम संहिताओं को श्रमिक-विरोधी बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की है 22 दिसंबर 2025 को हुई बैठक में संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच ने 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया यूनियनों का आरोप है कि ये संहिताएँ श्रमिक अधिकारों और सुरक्षा पर व्यापक हमला हैं। इस हड़ताल को 9 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलन में औपचारिक मंज़ूरी दी जाएगी।

    उद्योग जगत की राय: “एक मील का पत्थर

    वहीं, उद्योग जगत इन सुधारों को सकारात्मक रूप में देख रहा है। सीआईआई और एम्प्लॉयर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया से जुड़े उद्योगप्रतिनिधियों का कहना है कि 2025 श्रम सुधारों के लिए एक निर्णायक वर्ष रहा है और नए नियम निवेश, रोजगार और औद्योगिक स्थिरता को बढ़ावा देंगे।

    आगे की राह

    जैसे-जैसे 2026 नजदीक आ रहा है, भारत के श्रम सुधार एक निर्णायक चौराहे पर खड़े हैं। सरकार डिजिटल सिस्टम और रोजगार योजनाओं के दम पर कार्यान्वयन को आगे बढ़ा रही है, जबकि ट्रेड यूनियनें इसे श्रमिक अधिकारों के लिए खतरा मान रही हैं। आने वाला साल तय करेगा कि ये सुधार ज़मीनी स्तर पर कितना प्रभाव डाल पाते हैं।

  • ISRO LVM3 ने रचा इतिहास: BlueBird Block-2 सैटेलाइट सफलतापूर्वक LEO में स्थापित

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार सुबह 24 दिसंबर 2025 को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली। इसरो के शक्तिशाली प्रक्षेपण यान लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (LVM3) ने ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को सफलतापूर्वक निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में स्थापित कर दिया।सुबह 8:55 बजे, श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से एलवीएम3 ने उड़ान भरी और मात्र 15 मिनट के भीतर उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में सटीक रूप से स्थापित कर दिया। यह मिशन तकनीकी सटीकता और समयबद्ध निष्पादन का शानदार उदाहरण रहा। दो बड़ी उपलब्धियाँ एक ही मिशन मेंइस मिशन के साथ इसरो ने दो ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम किए—

    भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान

    डॉ. नारायणन के अनुसार, इस मिशन के साथ भारत अब तक 34 देशों के लिए 434 उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च कर चुका है। यह आंकड़ा भारत को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष बाजार में एक मजबूत और भरोसेमंद भागीदार के रूप में स्थापित करता है।

    प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर सोशल मीडिया के माध्यम से इसरो की टीम को बधाई दी। उन्होंने लिखा:“भारत के युवाओं की शक्ति से प्रेरित हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। एलवीएम3 की भारी-भार वहन क्षमता गगनयान जैसे भविष्य के मिशनों, वाणिज्यिक प्रक्षेपण सेवाओं और वैश्विक साझेदारियों को और मजबूत करेगी।”

    क्या है ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह?

    ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 को अमेरिका की कंपनी AST SpaceMobile ने विकसित किया है। यह अगली पीढ़ी के संचार उपग्रहों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सीधे सामान्य स्मार्टफोन तक सैटेलाइट-आधारित मोबाइल नेटवर्क पहुँचाना है। इसरो के अनुसार:

    • यह उपग्रह 4G और 5G वॉयस, वीडियो कॉल, मैसेजिंग, डेटा और स्ट्रीमिंग की सुविधा देगा
    • इसमें 223 वर्ग मीटर का फेज़्ड ऐरे एंटीना है
    • यह अब तक LEO में तैनात किया गया सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार उपग्रह है

    इसका लक्ष्य है — हर व्यक्ति को, हर जगह, हर समय कनेक्टिविटी

    एलवीएम 3 की लगातार सफलता

    यह मिशन:

    • श्रीहरिकोटा से 104वां प्रक्षेपण
    • एलवीएम-3 का 9वां सफल मिशन
    • और तीसरा समर्पित वाणिज्यिक मिशन था

    खास बात यह रही कि इसरो ने केवल 52 दिनों के अंतराल में एलवीएम-3 के दो सफल प्रक्षेपण किए, जो विभिन्न इसरो केंद्रों के बीच बेहतरीन समन्वय को दर्शाता हैएलवीएम3-एम6 मिशन न केवल इसरो की तकनीकी क्षमता का प्रमाण है, बल्कि यह भारत को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करता है। यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में गगनयान, बड़े वाणिज्यिक प्रक्षेपण और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है।