• भ्रष्टाचार और लापरवाही बर्दाश्त नहीं: शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव

    रायपुर : शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने मंत्रालय में ली समग्र शिक्षा विभाग की अधिकारियों की समीक्षा बैठक

    व्यावसायिक शिक्षकों की भर्ती में हुए गड़बड़ी की होगी पुलिस से जांच- शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव 

    भ्रष्टाचार और लापरवाही बर्दाश्त नहीं: शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव

    शिक्षा की गुणवत्ता सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता: शिक्षा मंत्री यादव

    रायपुर

     

    स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में समग्र शिक्षा विभाग के अधिकारियों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में राज्य में संचालित शैक्षणिक योजनाओं, कार्यक्रमों और गतिविधियों की समीक्षा की गई। मंत्री यादव ने कहा कि समग्र शिक्षा अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी अधिकारियों को गंभीरता और जिम्मेदारी से कार्य करना होगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य के सभी शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधार, विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों में वृद्धि तथा आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।मंत्री यादव ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना प्रदेश सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसमें ढिलाई, भ्रष्टाचार और गैर-जिम्मेदारी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में समग्र शिक्षा विभाग के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

    व्यावसायिक शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी पर नाराजगी व्यक्त की

    व्यावसायिक शिक्षकों की भर्ती में सबसे अधिक शिकायतें आने पर मंत्री ने नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षकों की भर्ती में किसी भी प्रकार का लेन-देन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर कठोर कार्यवाही होगी। गड़बड़ी की पुलिस से जांच कराने के निर्देश दिए। 

    भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सख्त रुख

    मंत्री यादव ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। विद्यार्थियों को वितरित की जाने वाली सामग्रियों की गुणवत्ता सर्वाेच्च स्तर की होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि घटिया या निकृष्ट सामग्री देने वाले आपूर्तिकर्ताओं को काली सूची में डाला जाए। उन्होंने वित्तीय अनुशासन पर बल देते हुए कहा कि बजट का समुचित एवं समय पर उपयोग किया जाए और उपयोगिता प्रमाण पत्र भारत सरकार को समय पर भेजा जाए, ताकि अनुदान की आगामी किश्त समय पर राज्य को प्राप्त हो सके।

    बैठक में स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी एवं समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक संजय झा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से योजनाओं व गतिविधियों की जानकारी दी। मंत्री यादव ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नवाचार और तकनीकी उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट कक्षाएँ, डिजिटल अधिगम, विज्ञान प्रयोगशालाएँ और पुस्तकालय जैसी सुविधाओं का अधिकतम उपयोग किया जाए ताकि विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा पद्धति से लाभान्वित हो सकें। साथ ही उन्होंने ऑनलाइन पाठ्यक्रम, डिजिटल अध्ययन सामग्री और शैक्षणिक अनुप्रयोगों के उपयोग से शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि करने के निर्देश दिए।

    बैठक में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों में शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ व्यावसायिक कौशलों के विकास, उन्हें रोजगार उन्मुख बनाने, समावेशी शिक्षा, बलवाड़ी, खेल एवं शारीरिक शिक्षा, वार्षिक शाला अनुदान, निपुण भारत मिशन, शाला त्यागी बच्चों की पुनर्वापसी, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, राष्ट्रीय आविष्कार अभियान, प्रधानमंत्री विद्यालय, विद्या समीक्षा केंद्र, मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान और रजत जयंती समारोह से जुड़ी गतिविधियों की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

    मंत्री यादव ने छात्रावासों, कन्या छात्रावासों और पोटा केबिनों में सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। हाल ही में पाकेला (छिंदगढ़ विकासखण्ड) के पोटा केबिन में भोजन में ज़हरीला पदार्थ मिलाने की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ शासन की छवि को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाती हैं। अतः जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

  • मैदानी अधिकारी–कर्मचारी फील्ड में जाकर बांधों एवं संबंधित संरचनाओं का करें सतत निरीक्षण– मुख्यमंत्री साय

    रायपुर : लुत्ती बांध के टूटने पर जताई गहरी नाराज़गी, इस तरह की गलती नहीं की जाएगी बर्दाश्त – मुख्यमंत्री साय

    सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता– मुख्यमंत्री साय

    मैदानी अधिकारी–कर्मचारी फील्ड में जाकर बांधों एवं संबंधित संरचनाओं का करें सतत निरीक्षण– मुख्यमंत्री साय

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की जल संसाधन विभाग के कामकाज की समीक्षा

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बलरामपुर–रामानुजगंज जिले में स्थित लुत्ती बांध के टूटने की घटना पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की गलती किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साय ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि मैदानी अधिकारी और कर्मचारी फील्ड में जाकर नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण यह स्थिति बनी है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सतत रूप से फील्ड में जाकर बांधों सहित अन्य संरचनाओं का निरंतर निरीक्षण करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग की गहन समीक्षा बैठक ली। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने, सभी बांधों की जलभराव क्षमता, वर्तमान सिंचाई स्थिति और आगामी परियोजनाओं की प्रगति आदि के सम्बन्ध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा–निर्देश दिए। साथ ही विशेष रूप से बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 का कड़ाई से पालन करने तथा जिला प्रशासन के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए।

    बैठक में मुख्यमंत्री साय ने लक्षित सिंचाई क्षमता और वास्तविक सिंचाई क्षमता के बीच अंतर को कम करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेषकर बस्तर और सरगुजा संभाग की अधूरी योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्माणाधीन वृहद परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर बल दिया, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।

    बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में 04 वृहद परियोजनाएँ, 357 लघु परियोजनाएँ और 300 एनीकेट, इस प्रकार कुल 661 कार्य प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 1036 जीर्णोद्धार कार्य भी चल रहे हैं। इस तरह कुल 1697 कार्य प्रगतिरत हैं, जिनमें लगभग ₹8966 करोड़ की राशि व्यय होगी।

    इस बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव रवि मित्तल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, प्रमुख अभियंता इंद्रजीत उईके तथा बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग मंडलों के मुख्य अभियंता सहित जल संसाधन विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • रायपुर को बड़ी सौगात: अब बिना जोखिम के होगी नदी पार, CM विष्णुदेव साय का ऐलान

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले– अब जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की जरूरत नहीं

    मुख्यमंत्री ने चार उच्च स्तरीय पुलों के निर्माण को दी मंजूरी

    रायपुर

    जशपुर जिले में आवागमन को सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा लगातार पहल की जा रही है। जिले में सड़क, पुल-पुलियों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने जिले में चार वृहद पुलों निर्माण के लिए कुल 13 करोड़ 46 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है।

    जिले के गुलझरिया-बम्हनी मार्ग पर श्री नदी पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुँच मार्ग के निर्माण की काफी अरसे से मांग की जा रही थी। बरसात के दिनों में ग्रामीणों को नदी पार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीनदी पर पुल निर्माण के लिए 3 करोड़ 66 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस पुल के निर्माण से गुलझरिया और बम्हनी के बीच बसे लगभग दर्जनभर गांवों के निवासियों का विकासखंड मुख्यालय दुलदुला तक पहुँचना सरल हो जाएगा। इससे छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच कनेक्टिविटी हेतु एक वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध हो सकेगा।

    इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री श्री साय ने जिले में अन्य तीन पुल निर्माण की भी स्वीकृति दी है। इनमें किलकिला से केराकछार मार्ग पर बेनसारी नाला में पुल निर्माण के लिए 1.71 करोड़ रुपये, कांसाबेल से शब्दमुंडा मार्ग पर मैनी नदी में पुराने जर्जर पुल की जगह नए पुल के निर्माण के लिए 3.49 करोड़ रुपये जिला मुख्यालय जशपुर में बांकी नदी पर जर्जर पुल के स्थान पर उच्च स्तरीय नए पुल के निर्माण 4 करोड़ 60 लाख रुपये की स्वीकृति शामिल है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि किसी भी जिले के विकास का आधार बुनियादी ढांचा होता है। जशपुर जिले में पिछले दो वर्षों के दौरान इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। सड़क और पुल-पुलिया निर्माण के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। 

  • वार्षिक भाड़ा मूल्य को संपत्ति के वर्तमान मूल्यों के अनुरूप अपडेट करने के दिए निर्देश

    रायपुर : विसंगतियां दूर करने संपत्ति कर सुधार अति आवश्यक : अरुण साव

    संपत्ति करों के युक्तियुक्तकरण के लिए उप मुख्यमंत्री ने सभी नगरीय निकायों की ली बैठक

    वार्षिक भाड़ा मूल्य को संपत्ति के वर्तमान मूल्यों के अनुरूप अपडेट करने के दिए निर्देश

    महापौर, आयुक्त, नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्ष तथा सीएमओ वर्चुअल बैठक में हुए शामिल

    रायपुर

    उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज नगरीय निकायों में संपत्ति करों के युक्तियुक्तकरण के लिए बैठक ली। मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित वर्चुअल बैठक में राज्य के सभी नगर निगमों के महापौर व आयुक्त तथा नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों के अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री साव के साथ नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. और संचालक आर. एक्का भी मंत्रालय से बैठक में ऑनलाइन जुड़े।

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक में कहा कि नगरीय निकायों के कार्यों से प्रदेश की छवि निर्मित होती है। शहर में नागरिकों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना संबंधित नगरीय निकाय की जिम्मेदारी है। उन्होंने महापौरों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अध्यक्षों से कहा कि शहर को आगे ले जाने का जिम्मा आप पर है। शहर में संपत्ति करों के मूल्यांकन और उनमें सुधार की शुरुआत अपने कार्यालयों और अपने घरों से करें। उन्होंने कहा कि वार्षिक भाड़ा मूल्य (ARV) को वर्तमान संपत्ति मूल्यों के अनुरूप अपडेट करने से राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी होगी। इससे कर भार सभी संपत्ति मालिकों पर समानुपातिक रूप से वितरित होगा। उन्होंने कहा कि अधिक राजस्व से निकाय वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनेंगे और उन्हें अनुदानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बढ़े हुए राजस्व से नागरिकों को तेजी से बेहतर जनसुविधाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

    उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय निकायों से कहा कि राज्य शासन की मंशा ई-गवर्नेंस मॉडल के माध्यम से नागरिकों को पारदर्शी और सुगम सेवाएं प्रदान करने की है। यह शहरों के चहुंमुखी विकास और त्वरित नागरिक सेवाओं के लिए जरूरी है। इससे साफ-सफाई, पानी और बिजली आपूर्ति की व्यवस्थाएं और बेहतर होंगी। साव ने बताया कि वर्ष 2016 के बाद से संपत्ति कर प्रणाली में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके चलते कई नगरीय निकायों में विसंगतियां उत्पन्न हो गई हैं। उन्होंने सभी महापौरों और अध्यक्षों से संपत्ति करों में सुधार के कार्यों को पूरी शिद्दत और गंभीरता से करने का आग्रह किया।

    साव ने बैठक में नगरीय निकायों को अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी निर्माण कार्यों को अच्छी गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को रोज प्रातः भ्रमण कर निर्माण और साफ-सफाई के कार्यों का निरीक्षण करने को भी कहा। उन्होंने निविदा प्रक्रिया में त्रुटि या लापरवाही पाए जाने पर संबंधितों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी। नगरीय प्रशासन विभाग की उप सचिव डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय और नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य भी बैठक में मौजूद थे।

  • बाढ़ पीड़ितों के लिए बड़ी राहत: राशन और इलाज के साथ अब जरूरी कागज़ात भी बनेंगे, CM साय का आदेश

    रायपुर

    बस्तर संभाग में पिछले सप्ताह हुई अतिवृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। अपने विदेश दौरे से लौट कर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा पहुंचकर संभागीय बैठक में जिला कलेक्टरों को राहत और बचाव कार्यो में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिये थे। अब मुख्यमंत्री के इस निर्देश पर तेजी अमल किया जा रहा है।  बाढ़ पीड़ित नागरिकों को जहां एक ओर राशन, ईलाज और दवाईयां के साथ-साथ गैस चुल्हे और सिंलेण्डर दिये गये हैं वहीं राहत शिविरों में उनके दैनिक जीवन की उपयोगी सभी व्यवस्थाएं भी की गई है। अब बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही नुकसान का वास्तविक आंकलन और अन्य जरूरी सहायता तथा मुआवजा देने की कार्यवाही पर भी तेजी से अमल किया जा रहा है। बाढ़ के पानी में खराब या नष्ट हो गये जरूरी दस्तावेजों को बनाने का काम भी राजस्व विभाग ने शुरू कर दिया हैं। बाढ़ की इस भीषण आपदा में छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय नेतृत्व में एक संवेदनशील पहल कर त्वरित राहत कार्य और सहायता-मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर पीड़ित परिवारों को एक बड़ी राहत दी है।

          बाढ़ से प्रभावित गाँवों में राहत दल तेजी से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के लोहन्डीगुड़ा तहसील के मांदर गांव के प्रभावित किसानों को किसान किताब वितरित की जा रही है, जो बाढ़ के कारण बह गई थी। किसान किताब के मिलने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और भविष्य में किसी भी सहायता के लिए पात्र बनने में मदद करेगी। वहीं प्रभावितों को नवीन राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड एवं बैंक पासबुक तैयार कर प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला प्रशासन की टीमें नुकसान का आकलन करने के लिए घर-घर सर्वे कर रही हैं और पात्रता के अनुसार तत्काल राहत राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर कर भुगतान कर रही हैं।

          सरकार का ध्यान इस बात पर है कि किसी भी पीड़ित परिवार को उनकी जरूरत के समय अकेला न छोड़ा जाए। इसके लिए, मकान क्षति सहित पशु, फसल और घरेलू सामग्री की क्षति का विस्तृत ब्यौरा तैयार कर, हर एक प्रकरण पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है, ताकि जरूरतमंद प्रभावितों तक मुआवजा राशि सीधे और समय पर पहुँच सके।
    स्थानीय प्रभावित परिवारों ने सरकार की इस पहल की सराहना की है। एक प्रभावित ग्रामीण मुरहा पटेल ने कहा कि हमने सोचा था कि बाढ़ के बाद सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन सरकार की इस त्वरित मदद ने हमें फिर से जीवन को नये सिरे से शुरू करने की उम्मीद दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिला आधिकारियों की इस पहल को प्रशासन की ओर से एक मजबूत और मानवीय दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। जो यह दर्शाता है कि आपदा की घड़ी में सरकार न सिर्फ राहत कार्य बल्कि पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस तरह के प्रयास बाढ़ पीड़ितों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से सहारा देते हैं, जिससे उन्हें जीवन को सामान्य पटरी पर लाने में मदद मिलती है।

  • गणेश उत्सव में झलकी देशभक्ति, ऑपरेशन सिंदूर थीम पर बोले मुख्यमंत्री– युवाओं का उत्साह सराहनीय

    युवाओं का राष्ट्रप्रेम काबिले-तारीफ, गणेश उत्सव में दिखा ऑपरेशन सिंदूर का जज़्बा: CM डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गणेश उत्सव कार्यक्रम में हुए शामिल

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल के गुलमोहर कॉलोनी में शिवाजी फाउंडेशन और श्रीगणेश उत्सव समिति के गणेश चतुर्थी कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुलमोहर गणेश उत्सव समिति द्वारा ऑपरेशन सिंदूर की थीम पर केंद्रित प्रदर्शनी और झांकी देखी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि युवाओं में राष्ट्र प्रेम की भावना सराहनीय है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  ने आपरेशन सिंदूर के माध्यम से पड़ोसी शत्रु ही नहीं बल्कि विश्व को भारत की शक्ति से परिचित करवाया है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पगड़ी और पुष्प मालाओं से स्वागत कर स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री और समिति के संरक्षक नरेंद्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूजा अर्चना कर आरती की। युवाओं ने गजानन विघ्नहर्ता गणेशजी की आराधना और समूह नृत्य प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। 

  • CM साय का संदेश: संस्कृति और परंपरा से जुड़े रहना ही असली धरोहर की सुरक्षा

    रायपुर : संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी बल्कि नैतिक कर्तव्य भी – मुख्यमंत्री साय

    करमा तिहार के रंग में डूबा मुख्यमंत्री निवास

    मुख्यमंत्री करमा तिहार 2025 कार्यक्रम में हुए शामिल, करमा दलों को सम्मानित कर किया प्रोत्साहित

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ आदिवासी कंवर समाज युवा प्रभाग रायपुर द्वारा आयोजित प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत – 2025 करमा तिहार कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की। 
    मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। इस संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। ऐसे पर्व और परंपराएँ समाज को एकजुट होने का अवसर देती हैं, जिससे स्नेह, सद्भाव एवं सौहार्द की भावना विकसित होती है।

    संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी बल्कि नैतिक कर्तव्य भी – मुख्यमंत्री साय

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि कंवर समाज के युवाओं द्वारा राजधानी रायपुर में करमा तिहार का आयोजन किया जा रहा है। हमारी आदिवासी संस्कृति में अनेक प्रकार के करमा तिहार मनाए जाते हैं। आज एकादशी का करमा तिहार है, जो हमारी कुंवारी बेटियों का पर्व है। इस करमा तिहार का उद्देश्य है कि हमारी बेटियों को उत्तम वर और उत्तम गृहस्थ जीवन मिले। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर बेटियाँ अच्छे वर और अच्छे घर की कामना करती हैं। इसके बाद दशहरा करमा का पर्व आता है, जिसमें विवाह के पश्चात पहली बार जब बेटी मायके आती है, तो वह उपवास रखकर विजयादशमी का पर्व मनाती है। इसी प्रकार जियुत पुत्रिका करमा मनाया जाता है, जिसमें माताएँ पुत्र-पुत्रियों के दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं। यह एक कठिन व्रत होता है, जिसमें माताएँ चौबीस घंटे तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए उपवास करती हैं।

    संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी बल्कि नैतिक कर्तव्य भी – मुख्यमंत्री साय

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यदि छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां अंग्रेजों के विरुद्ध 12 आदिवासी क्रांतियाँ हुईं। हमारी सरकार नया रायपुर स्थित ट्राइबल म्यूजियम में आदिवासी संस्कृति के महानायकों की छवि को आमजन की जागरूकता के लिए प्रदर्शित करने मॉडल के रूप में उकेरा जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को आमंत्रित किया जा रहा है। उनके करकमलों से इस म्यूजियम का शुभारंभ किया जाएगा।

    संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी बल्कि नैतिक कर्तव्य भी – मुख्यमंत्री साय

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार आदिवासी समाज के सशक्तिकरण पर विशेष जोर देती रही है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने आजादी के लगभग 40 वर्षों बाद आदिवासी विभाग का पृथक मंत्रालय बनाकर आदिवासी समाज के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हीं के बताए मार्ग पर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आदिवासी समाज के बेहतरी एवं समग्र विकास के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं विशेष पिछड़ी जनजाति समाज के लिए पीएम जनमन योजना का संचालन कर रहे हैं, जिससे हितग्राहियों को शत-प्रतिशत योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन सिंह ने बस्तर, सरगुजा एवं मध्य क्षेत्र प्राधिकरण का गठन कर विकास को गति प्रदान करने का कार्य किया।

    मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि युवा आदिवासियों को स्वरोजगार से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से हमने नई उद्योग नीति बनाई है, जिसमें बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्रों के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आदिवासी बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो। इसके लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना राज्य में ही की जा रही है।

    वन मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी आदिवासी संस्कृति अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली परंपरा रही है। इसी परंपरा के निर्वहन में आज हम करमा तिहार मना रहे हैं। हमारी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। साय जी के नेतृत्व में ही बस्तर संभाग में बस्तर पांडुम के नाम से ओलंपिक का आयोजन किया गया, जिसकी चर्चा पूरे भारत में हुई। कश्यप ने इस अवसर पर समस्त छत्तीसगढ़वासियों को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

    संरक्षक, अखिल भारतीय कंवर समाज विकास समिति पमशाला, जशपुर, श्रीमती कौशिल्या साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज और प्रकृति एक-दूसरे के अभिन्न अंग हैं। आदिवासी समाज के लिए प्रकृति सदैव आराध्य रही है। करमा पर्व प्रकृति प्रेम का पर्व है। हमारी संस्कृति अत्यंत गौरवशाली रही है और उसका संरक्षण तथा समय के साथ संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि समाज की महिलाएँ आगे आकर इस संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने सभी को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

    इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक राम कुमार टोप्पो, विधायक आशाराम नेताम, विधायक प्रबोध मिंज, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम राम सेवक सिंह पैकरा, केशकला बोर्ड की अध्यक्ष सुमोना सेन, सभापति जिला पंचायत धमतरी टीकाराम कंवर, प्रदेश अध्यक्ष कंवर समाज हरवंश सिंह मिरी, अध्यक्ष कंवर समाज रायपुर महानगर मनोहर सिंह पैकरा सहित कंवर समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

  • जंगल से तेंदुआ निकला, सुरक्षा कारणों से स्कूल- कॉलेज बंद

    इटारसी
    मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले के इटारसी में तेंदुओं की दहशत से लोग परेशान हैं। अलग-अलग जगहों पर तेंदुए रहवासी इलाकों में पहुंच रहे हैं। पथरौटा स्थित पॉवर ग्रिड परिसर में एक शावक की करंट लगने से मौत हो गई थी। उसके बाद से दो तेंदुए लगातार इलाके में मूवमेंट कर रहे हैं। जिसके कारण स्कूल प्रबंधन ने फैसला लेते हुए 4 से 13 सितंबर तक स्कूल बंद रखने का फैसला लिया है।

    दरअसल, तेंदुआ तवा बफर रेंज के धांसई में 3 दिनों से घुसकर ग्रामी मुर्गों को निशाना बना रहा है। ग्रामीण तेंदुए के डर से घर के बाहर निकलने में डर रहे हैं। तेंदुए के मूवमेंट पर टीम नजर रख रही है। इटारसी के पथरौटा मादा तेंदुआ दिखाई दे रही थी, लेकिन शावक की मौत के बाद से वह और आक्रमक हो गई है। जिसको देखते हुए स्कूल को 4 से 13 सितंबर ऑनलाइन क्लासेस चलेंगी।

    इधर, स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग की टीम तेंदुए को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। वन विभाग का कहना है कि बारिश के कारण पिंजरा नहीं लग पाया है। एक पिंजरा हिरनचापड़ा में फंसा है और दूसरा नर्मदापुरम में है। जिसे जल्द से जल्द लाने का इंतजाम किया जा रहा है। 

  • खुशखबरी! ग्लूटेन एलर्जी वाले अब खा सकेंगे नई तरह की गेहूं की रोटी

    नर्मदापुरम
    ग्लूटेन (प्रोटीन) एलर्जी के मरीजों के लिए गेहूं के आटे से बनी रोटियां खाना मुश्किल होता है। मध्य प्रदेश सरकार पवारखेड़ा अनुसंधान केंद्र की अखिल भारतीय गेहूं परियोजना में गेहूं का नया बीज तैयार करवा रही है। इसके आटे से रोटियां खाने से मरीजों को एलर्जी नहीं होगी। वैज्ञानिकों ने इस पर शोध शुरू कर दिया है। तीन साल की फील्ड ट्रायल के बाद गेहूं की नई किस्म तैयार हो जाएगी। गेहूं में ग्लूटेन की मात्रा बहुत कम करने के लिए अनुसंधान केंद्र के वैज्ञनिकों ने देशभर से विभिन्न किस्मों के गेहूं के सैंपल लिए हैं। इन सैंपलों को जबलुपर के फूड साइंस प्रयोगशाला में भेजा गया है। यहां सबसे कम ग्लूटेन वाली किस्मों को चिनिह्त किया जाएगा। इनकी स्क्रेनिंग कर वैज्ञानिक देखेंगे कि बीजों में ग्लूटेन प्रोटीन को और कम कैसे किया जाए। इस पर विभिन्न प्रकार के प्रयोग करेंगे। वैज्ञानिको की देखरेख में अनुसंधान केंद्र के खेतों में अलग-अलग वैरायटी को लगाया जाएगा।
     
    यह देखा जाएगा कि हर साल बनाए गए बीज से कितना ग्लूटेन कम हुआ। इसका आंकलन भी होगा। तीन सालों तक यह शोध होने के बाद सबसे कम ग्लूटेन के गेहूं का बीज तैयार होगा। केंद्र इसे सरकार को देकर पेटेंट कराएगा। इसके बाद गेहूं बाजार से किसानों तक पहुंचेगा। अनुसंधान केंद्र के वैज्ञनिकों के मुताबिक लगभग 20 हजार लोगों में किसी एक को ग्लूटेन एलर्जी होती है। गेहूं में ग्लूटेन होता है। इसकी रोटी खाते ही मरीज के पेट की छोटी आंत में एलर्जी होने लगती है। इससे कई तरह की परेशानी सामने आती हैं।

    अभी तक नहीं हुआ ग्लूटेन पर कोई शोध
    वैज्ञानिकों के मुताबिक देश में ग्लूटेन एलर्जी के मरीजों की संख्या कम होने के कारण यह रिकार्ड नहीं की गई है। मरीजों के लिए कम ग्लूटेन के गेहूं को लेकर अभी तक प्रदेश और देश में कोई शोध नहीं हुआ है। मध्य प्रदेश में पवारखेड़ा अनुसंधान केंद्र में पहली बार इस पर काम कर रहा है। तीन साल के फील्ड ट्रायल के बाद इसे तैयार किया जाएगा। और किसानों को उगाने के लिए दिया जाएगा।

    अनुसंधान केंद्र ने देश को दी 56 गेहूं की किस्म
    जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के प्रदेश में सागर, जबलपुर, पवारखेड़ा में तीन अनुसंधान केंद्र हैं। इसमें पवारखेड़ा का अनुसंधान केंद्र की स्थापना 1903 में की गई थी। केंद्र की अखिल भारतीय गेहूं परियोजना ने अभी तक देशभर में मिलने वाले 56 प्रकार के गेहूं की प्रजातियां विकसित कर किसानों को दी हैं। जिनका किसान उपयोग कर रहे हैं।

    गेहूं का नया बीज तैयार कर रहे
    केके मिश्रा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी अखिल भारतीय गेहूं परियोजना पवारखेड़ा नर्मदापुरम  ने बताया- ग्लूटेन के मरीजों के लिए गेहूं का नया बीज तैयार कर रहे हैं। इसमें ग्लूटेन की मात्रा सबसे कम होगी। इसको खाने से मरीज को एलर्जी नहीं होगी। विभिन्न किस्मों के गेहूं के सैंपल प्रयोगशाला भेजे गए हैं। कम ग्लूटेन वाले किस्मों पर तीन साल तक फील्ड ट्रायल कर नया गेहूं का बीज बनाया जाएगा।

  • गुजरात-एमपी हाईवे प्रोजेक्ट: 14 गांव प्रभावित, सड़क से बढ़ेगी संपर्क सुगमता

    धार
    एमपी में 70 किलोमीटर का नेशनल हाईवे अभी उज्जैन से बदनावर के नागेश्वर धाम तक बना है। अब दूसरे चरण का कार्य बदनावर से टिमरवानी तक 80 किमी का काम शुरू होने वाला है। यह मार्ग भी 552 डी के अंतर्गत ही आएगा तथा इसका निर्माण भी नेशनल हाईवे द्वारा किया जाएगा। इसके टेंडर हो चुके हैं अक्टूबर माह में इस रोड़ का कार्य शुरू हो जाएगा। 1900 करोड़ी की लागत से बन रहा यह नेशनल हाईवे गुजरात से जुड़ेगा तथा इसके बनने से उज्जैन से टिमरवानी की दूरी भी कम हो जाएगी व आवागमन भी सुगम हो होगा। इसका निर्माण सिंहस्थ के पहले किया जाएगा। ताकि गुजरात से आने वाले श्रद्धालुओं को इसका फायदा मिल सके तथा भैंसोला में बन रहा पीएम मेगा टेक्सटाईल पार्क भी इस रोड़ से जुड जाए।
     
    14 गांव की जमीन होगी अधिग्रहित
    फोरलेन निर्माण के लिए बदनावर तहसील के पश्चिम क्षेत्र की करीब 14 गांवों की भूमि अधिग्रहण की तैयारी शुरू हो गई है। इसके निर्माण के लिए कुल 155.579 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित करेंगे। इसमें सरकारी व निजी भूमि शामिल हैं। भूमि अधिग्रहण के लिए सूची भी प्रकाशित हो चुकी है। इससे संबंधित गांवों के किसानों में भी हलचल तेज हो गई है। यह फोरलेन उज्जैन से सीधा दिल्ली मुंबई एट लेन एक्सप्रेस वे से सीधा जुड़ जाएगा।
     
    जीतू पटवारी के वाहन पर पथराव, बाल-बाल बचे, गाड़ी के कांच फूटे
    तहसीलदार सुरेश नागर के मुताबिक, बदनावर से टिमरवानी तक फोरलेन सड़क बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बदनावर तहसील के 14 गांवों की भूमि से यह फोरलेन निकलेगा। इसके लिए ग्राम व भूमि प्रस्तावित है। संबंधित गांवो के हल्का पटवारी व राजस्व अमले को भूमि की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है।

    औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा फायदा
    अभी तक मालवांचल से गुजरात जाने के लिए इंदौर-अहमदाबाद मार्ग ही प्रमुख है। अब इस मार्ग के फोरलेन बनाए जाने से यातायात इस पर अधिक डायवर्ट होगा। इससे समय की बचत होगी। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बदनावर के लोग भी गुजरात इसी मार्ग से होकर जाते हैं। भैंसोला में बड़ा पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क बन रहा है, जबकि छायन में कपड़ा कारखाना शुरू हो चुका है। इसी तरह दोतरिया में भी एक फैक्टरी की नींव रखी जा चुकी है। इन उद्योगों के लिए आवागमन में भी इस मार्ग के चौड़ीकरण से यातायात सुगम होगा।

  • इंदौर अस्पताल में भयानक हादसा: दो नवजातों पर चूहों ने किया हमला

    इंदौर
    मध्य प्रदेश में इंदौर के एमवाय अस्पताल (महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय) के एनआईसीयू वार्ड में भर्ती दो नवजात शिशुओं की मौत से हड़कंच मच गया है। एक तरफ परिजन ने नवजातों की मौत का कारण चूहों का काटना बताया है, जबकि अस्पताल प्रशासन इसे गंभीर बीमारियों और संक्रमण का नतीजा बता रहा है। मामला तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संज्ञान लिया है और अस्पताल पहुंचे। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं और कहा है कि सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।

    पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
    बता दें कि यह पहला मामला नहीं है, जब अस्पताल की तरफ से ऐसी लापरवाही देखने को मिली है। इससे पहले भी ऐसा हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने गलतियों से सबक नहीं सीखा। चार साल पहले, यानी मई 2021 में एमवाय अस्पताल की पहली मंजिल पर नवजात शिशु नर्सरी में भर्ती एक नवजात के पैर का अंगूठा और एड़ी को चूहों ने कुतर दिया था।  
    इससे शिशु की जान खतरे में आ गई। इसके बाद नवजात के घरवालों ने हंगामा भी किया था। शिशु प्री-मेच्योर था और उसका वजन 1.4 किग्रा था। देखरेख के लिए उसे नर्सरी में वार्मर पर रखा गया था। बच्चे की मां दूध पिलाने पहुंची थी, तब मामले का खुलासा हुआ था।

    जीतू पटवारी ने उठाए सवाल
    मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में नवजातों की मौत के मामले में कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने जमकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, 'बीजेपी के 22 साल का यह असली चेहरा है। एमवाय में चूहों की हरकत यह पहली बार नहीं हुई। नवजातों को चूहों ने नहीं, भ्रष्टाचारी प्रशासन ने क्षति पहुंचाई है। जितना दोषी वह चूहा है, उससे ज्यादा दोषी यह तंत्र और व्यवस्था है।' वहीं राहुल गांधी ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह घटना रूह कंपाने वाली है। उन्होंने कहा कि एक मां की गोद से उसका बच्चा छिन गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि सरकार ने अपनी सबसे बुनियादी जिम्मेदारी नहीं निभाई।
     
    अस्पताल प्रशासन ने लिया एक्शन
    नवजातों की मौत के बाद लापरवाही बरतने वाली नर्स श्वेता चौहान और आकांशा बेंजामिन को सस्पेंड कर दिया गया है, साथ ही नर्सिंग सुप्रीडेंट मारग्रेट जोसेफ को भी हटा दिया गया है। इसके अलावा प्रभारी एचओडी डा. मनोज जोशी, आईसीयू इंचार्ज नर्स प्रवीणा सिंह, कलावती भलावी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस मामले में डॉ. एसबी बंसल की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी भी बनाई है।

  • इंदौर का मौसम अलर्ट: तीन दिन तक बना रहेगा बारिश का दौर

    इंदौर
    इंदौर में देर रात से शुरू हुआ बारिश का दौर अभी तक जारी है। इस महीने में लगातार तेज बारिश का यह पहला दौर है, जब शहर पूरी तरह पानी से तरबतर हो गया है। बारिश की वजह से कई इलाकों में पानी भर गया है और कुछ जगह तो सड़के जलमग्न हो गई हैं। सड़कों पर जमा हुए पानी की वजह से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    जानकारी के अनुसार इंदौर शहर में 24 घंटे के अंदर करीब 127 मिमी से ज्यादा बारिश हुई है। वहीं इंदौर में सबसे ज्यादा बारिश देपालपुर इलाके में होना बताया जा रहा है। यहां करीब 170 मिमी बारिश हुई। पिछले महीने में हुई कम बारिश से शहर के लोग परेशान था, जिसे इस झड़ी ने पूरा कर दिया है।
     
    बुधवार को शहर में बादल छाए और दोपहर में रिमझिम फुहारों के साथ हल्की बारिश रुक-रुककर हुई। शाम चार बजे बाद शहर में तेज बारिश हुई। एयरपोर्ट क्षेत्र में रात 8.30 बजे तक 22 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं रीगल क्षेत्र में रात 10 बजे तक 16 मिमी बारिश दर्ज की गई।

    भोपाल स्थित मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इंदौर में आज मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। वर्तमान में एक द्रोणिका जैसलमेर, कोटा, गुना व दमोह से गुजर रही है। वहीं विदर्भ पर ऊपरी हवा का चक्रवात बना हुआ है। इस वजह से अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से नमी आ रही है। वहीं एक कम दबाव का क्षेत्र उड़ीसा और उससे लगे क्षेत्र झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ होते हुए मप्र की ओर आएगा।

    इसके प्रभाव से इंदौर में अगले दो से तीन तेज बौछारों से शहर तरबतर होगा। बुधवार को शहर में अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य एक डिग्री सेल्सियस अधिक 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

  • एक बगिया, मां के नाम: मोहन सरकार दे रही सब्सिडी, जानें कैसे मिलेगा पैसा और लाभ

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए एक और अच्छी खबर है। लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त का पैसा तो लाभार्थियों के खाते में आने ही वाला है। हालांकि वे मोहन यादव सरकार की एक और योजना का फायदा उठा सकती हैं। प्रदेश में 'एक बगिया मां के नाम' से योजना चल रही है। इस योजना के तहत फलदार पेड़ लगाने के लिए सरकार की ओर से सब्सिडी दी जा रही है। यह पैसा सीधे महिलाओं के खाते में भेजा जा रहा है।

    महिला सशक्तिकरण को लेकर मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव द्वारा महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में एक बगिया मां के नाम की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा अपनी निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। इस काम में मदद के लिए सरकार कंटीले तार की फेंसिंग, पौधे खरीदने, खाद, गड्ढे खोदने के साथ सिंचाई के लिए 50000 लीटर का जल कुंड बनाने के लिए पैसा दिया जा रहा है। इस योजना से जुड़ने के लिए 15 सितंबर तक का समय है।

    31,300 महिलाओं को किया जाएगा शामिल
    'एक बगिया मां के नाम' योजना का शुरुआती लक्ष्य 31,300 महिलाओं को लाभ पहुंचाने का रखा गया है। हालांकि महिलाओं में इस योजना को लेकर इस कदर जोश है कि 40,406 महिलाओं ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। निजी भूमि पर बगिया बनाने की योजना 15 अगस्त से शुरू हुई है और 15 सितंबर तक चलेगी। इस योजना के तहत 30 लाख फलदार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य है।

    अभी तक कितने आवेदन को मिली मंजूरी
    मोबाइल एप के जरिए महिलाओं का चयन किया जा रहा है। इस एप को मनरेगा परिषद द्वारा MPSEDC के माध्यम से तैयार किया गया है। अभी तक 10,162 महिलाओं को इस योजना के तहत मंजूरी मिल गई है। मतलब इन महिलाओं के खाते में पैसा आने की राह खुल गई है। इस योजना के लिए मध्य प्रदेश सरकार 1000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस योजना में सभी जिलों के अंतर्गत आने वाले 313 ब्लॉक की 9662 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 10,162 गांवों में सर्वे कर 40,406 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इस योजना के अंतर्गत हर ब्लॉक से कम से कम 100 हितग्रहियों को चुना जाएगा। साल में दो बार महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

    योजना के लिए पात्रता
    इस योजना के तहत चुनी गई महिलाओं को बगिया लगाने के लिए कम से कम 0.5 एकड़ और अधिकतम 1 एकड़ जमीन होनी चाहिए। इससे ज्यादा या कम जमीन पर बाग लगाने वाली महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

    खंडवा जिला नंबर वन
    बगिया विकसित करने में वर्तमान में खंडवा जिला सबसे आगे है, जबकि सिंगरौली जिला प्रदेश में दूसरे नंबर है। आज 3 सितंबर तक खंडवा, सिंगरौली, बैतूल, देवास और आगर मालवा जिले टॉप-5 में शामिल थे। वहीं टॉप 5 ब्लॉक की बात करें तो खंडवा, चितरंगी, पंधाना, पुनासा और खालवा शामिल है।

    कब आएगी लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त
    मध्य प्रदेश की महिलाओं को हर महीने लाडली बहना योजना के तहत मिलने वाले पैसों का इंतजार रहता है। लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त को लेकर अभी आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि 10 सितंबर के बाद पैसा खाते में आ सकता है। इस महीने महिलाओं के खाते में 1250 रुपये ही आएंगे।

     

  • यात्रा होगी आसान, 14 गांवों से जमीन अधिग्रहित कर बनेगा गुजरात-MP 4-लेन हाईवे

    उज्जैन 

    एमपी में 70 किलोमीटर का नेशनल हाईवे अभी उज्जैन से बदनावर के नागेश्वर धाम तक बना है। अब दूसरे चरण का कार्य बदनावर से टिमरवानी तक 80 किमी का काम शुरू होने वाला है। यह मार्ग भी 552 डी के अंतर्गत ही आएगा तथा इसका निर्माण भी नेशनल हाईवे द्वारा किया जाएगा। इसके टेंडर हो चुके हैं अक्टूबर माह में इस रोड़ का कार्य शुरू हो जाएगा।

    1900 करोड़ी की लागत से बन रहा यह नेशनल हाईवे गुजरात से जुड़ेगा तथा इसके बनने से उज्जैन से टिमरवानी की दूरी भी कम हो जाएगी व आवागमन भी सुगम हो होगा। इसका निर्माण सिंहस्थ के पहले किया जाएगा। ताकि गुजरात से आने वाले श्रद्धालुओं को इसका फायदा मिल सके तथा भैंसोला में बन रहा पीएम मेगा टेक्सटाईल पार्क भी इस रोड़ से जुड जाए।

    14 गांव की जमीन होगी अधिग्रहित

    फोरलेन निर्माण के लिए बदनावर तहसील के पश्चिम क्षेत्र की करीब 14 गांवों की भूमि अधिग्रहण की तैयारी शुरू हो गई है। इसके निर्माण के लिए कुल 155.579 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित करेंगे। इसमें सरकारी व निजी भूमि शामिल हैं। भूमि अधिग्रहण के लिए सूची भी प्रकाशित हो चुकी है। इससे संबंधित गांवों के किसानों में भी हलचल तेज हो गई है। यह फोरलेन उज्जैन से सीधा दिल्ली मुंबई एट लेन एक्सप्रेस वे से सीधा जुड़ जाएगा। 

    तहसीलदार सुरेश नागर के मुताबिक, बदनावर से टिमरवानी तक फोरलेन सड़क बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बदनावर तहसील के 14 गांवों की भूमि से यह फोरलेन निकलेगा। इसके लिए ग्राम व भूमि प्रस्तावित है। संबंधित गांवो के हल्का पटवारी व राजस्व अमले को भूमि की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है।

    औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा फायदा

    अभी तक मालवांचल से गुजरात जाने के लिए इंदौर-अहमदाबाद मार्ग ही प्रमुख है। अब इस मार्ग के फोरलेन बनाए जाने से यातायात इस पर अधिक डायवर्ट होगा। इससे समय की बचत होगी। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बदनावर के लोग भी गुजरात इसी मार्ग से होकर जाते हैं।

    भैंसोला में बड़ा पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क बन रहा है, जबकि छायन में कपड़ा कारखाना शुरू हो चुका है। इसी तरह दोतरिया में भी एक फैक्टरी की नींव रखी जा चुकी है। इन उद्योगों के लिए आवागमन में भी इस मार्ग के चौड़ीकरण से यातायात सुगम होगा।

  • महिलाओं की शक्ति और हरित पर्यावरण: ‘एक बगिया मां के नाम’ परियोजना बनी मिसाल

    पर्यावरण और महिलाओं का विकास साथ-साथ, 'एक बगिया मां के नाम' योजना का असर

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एक बगिया माँ के नाम परियोजना मध्यप्रदेश में पर्यावरण सुधार के साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बन रही है। राज्य शासन ने महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में 'एक बगिया मां के नाम' परियोजना प्रारंभ की है। इसके अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अपनी निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। माँ की बगिया विकसित करने के प्रति समूह की महिलाओं में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है।

    अब तक 10 हजार 162 महिलाओं को 'माँ की बगिया' स्वीकृति की चुकी है। परियोजना के अंतर्गत प्रदेश सरकार द्वारा 1000 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है। इसके अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को पौधों की सुरक्षा से लेकर कटीले तार की फेंसिंग, पौधे खरीदने, खाद, गड्‌ढे खोदने के साथ ही सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि भी उपलब्ध कराई जा रही है। फलोद्यान की बगिया विकसित करने में वर्तमान में सिंगरौली जिला सबसे आगे है। खंडवा जिला प्रदेश में दूसरे नंबर है।

    40 हजार से अधिक पंजीयन

    योनजा का लाभ लेने के लिए स्व-सहायता समूह की महिलाओं का चयन एक बगिया मां के नाम ऐप से किया जाता है। ऐप का निर्माण मनरेगा परिषद द्वारा कराया गया है। परियोजना के अंतर्गत प्रदेश समूह की 31 हजार 300 महिलाओं को लाभांवित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐप पर 40 हजार 406 महिलाओं ने 'एक बगिया मां के नाम' पर पंजीयन कराया है, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक है।

    9 हजार 662 ग्राम पंचायतें हैं शामिल

    एक बगिया मां के नाम परियोजना में प्रदेश के सभी जिलों के अंतर्गत आने वाले 313 ब्लॉक की 9 हजार 662 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 10 हजार 162 गांवों में सर्वे कर 40 हजार 406 महिलाओं का पंजीयन किया गया है। परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक से न्यूनतम 100 हितग्राहियों का चयन किया गया है। वर्ष में दो बार महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

     ड्रोन से निगरानी

    एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत किए जा रहे पौधरोपण कार्य की मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक डेव्हलेपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा ड्रोन के माध्यम से मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे चयनित जमीन, गड्‌ढे सहित पौधों की यथास्थिति के बारे में आसानी से जानकारी प्राप्त हो सकेगी।

    अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग

    प्रदेश में पहली बार पौधरोपण के लिए सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से पौधरोपण के लिए जमीन का चयन वैज्ञानिक पद्धति से किया गया है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहाँ पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है।

    30 लाख फलदार पौधे लगाए जाएंगे

    “एक बगिया मां के नाम’’ परियोजना अंतर्गत प्रदेश की 31 हजार 300 स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाएं जाएंगे, जो समूह की महिलाओं की आर्थिक समृद्धि का आधार बनेंगे।

    डैशबोर्ड से पर्यवेक्षण

    पौधरोपण का कार्य सही ढंग से हो रहा है या नहीं, इसके पर्यवेक्षण के लिए अलग से एक डैशबोर्ड बनाया गया है। इसके माध्यम से प्रतिदिन जिलों में हो रहे कार्यों की निगरानी की जा रही है। प्रदर्शन के आधार पर प्रथम 3 जिले, 10 जनपद पंचायत व 25 ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत किया जाएगा।

    न्यूनतम 0.5, अधिकतम 1 एकड़ जमीन होना अनिवार्य

    एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। 

  • IIT इंदौर की इनोवेशन: पानी और वाष्प से तैयार होगी बिजली, ऊर्जा उत्पादन में नई क्रांति

     इंदौर

    मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी (आईआईटी) अपनी तकनीकी क्षमता और नई खोजों के चलते देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में प्रसिद्ध और चर्चित रहता है। इंदौर आईआईटी की चर्चा एक बार फिर हुई है। इस बार जो खोज यहां की गई है, वो आने वाले समय में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है। यहां के प्रोफेसरों की निगरानी में छात्रों ने ऐसा उपकरण तैयार किया है, जो सूरज की रोशनी के बिना, किसी भी प्रकार की बैटरी या किसी अन्य मशीन के बिना ही बिजली उत्पादन करने में सक्षम है। बिजली उत्पादन के लिए इस उपकरण को सिर्फ पानी और हवा की आवश्यक्ता होगी। यानी ये सिर्फ इन दो चीजों की सहायता से बिजली पैदा करता है।

    आईआईटी इंदौर की सस्टेनेबल एनर्जी एंड एन्वायरन्मेंटल मटेरियल्स लैब में तैयार इस उपकरण को खास तरह के मेम्ब्रेन से बनाया गया है। इसमें ग्रैफीन ऑक्साइड और ज़िंक-इमिडाज़ोल नामक पदार्थ का इस्तेमाल हुआ है। जब इस मेम्ब्रेन को पानी में आंशिक रूप से डुबो दिया जाता है तो पानी धीरे-धीरे ऊपर की ओर चढ़ने लगता है और वाष्पित होता है। इसी प्रक्रिया के दौरान मेम्ब्रेन के दोनों सिरों पर पॉजिटिव और नेगेटिव आयन अलग हो जाते हैं और वहां से स्थिर बिजली पैदा होने लगती है।

    खारे या गंदे पानी से भी बिजली बना देगा

    इतना ही नहीं, यह उपकरण साफ पानी के साथ-साथ खारे या गंदे पानी में भी लंबे समय तक काम करता रहता है। परीक्षण के दौरान पाया गया कि सिर्फ तीन गुणा दो सेंटीमीटर के एक छोटे से मेम्ब्रेन से 0.75 वोल्ट तक बिजली पैदा की जा सकती है। अगर ऐसे कई मेम्ब्रेन को जोड़ा जाए तो बिजली की मात्रा और बढ़ाई जा सकती है। यही वजह है कि इसे उन जगहों पर बेहद उपयोगी माना जा रहा है, जहां बिजली आसानी से उपलब्ध नहीं होती। जंगलों और खेतों में लगे सेंसर हों, ब्लैकआउट के समय रोशनी की जरूरत हो या फिर दूर-दराज़ के क्लीनिकों में छोटे मेडिकल उपकरणों को चलाना हो, यह तकनीक हर स्थिति में मददगार साबित हो सकती है।

    जानें इसकी खूबियां

    इसकी सबसे बड़ी खूबी तो ये है कि, ये हल्का है, आसानी से कहीं भी ले जाने में बेहद आसान है। घर के अंदर या बाहर, दिन और रात हर समय काम करने में भी सक्षम है। आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी के अनुसार, जल वाष्पीकरण जैसी सामान्य प्रक्रिया को ऊर्जा उत्पादन का साधन बनाना समाज के लिए बड़ा योगदान है। उनका मानना है कि यह तकनीक ग्रामीण और वंचित इलाकों में जीवन को आसान बना सकती है और स्वच्छ ऊर्जा का नया रास्ता दिखाती है।

    शांत तरीके से बिजली बनाएगा उपकरण

    वहीं इस शोध का नेतृत्व कर रहे प्रोफेसर धीरेंद्र राय का कहना है कि ये ऐसा सेल्फ-चार्जिंग स्रोत है, जो पानी और हवा से चलता है। जब तक वाष्पीकरण जारी रहेगा, ये उपकरण लगातार शांत तरीके से बिजली बनाता रहेगा। उनकी टीम अब इसे और सस्ता और बड़े पैमाने पर बनाने की दिशा में काम करने जा रही है, ताकि इस तकनीक को जल्द से जल्द देश के उन गांवों तक पहुंचाया जा सके जहां अबतक मौजूदा बिजली पहुंचा पाना संभव नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि, भविष्य में इस उपकरण का इस्तेमाल और भी रोचक तरीकों से किया जा सकेगा।

    भारतीय वैज्ञानिकों का दम

    शोधकर्ताओं की मानें तो आने वाले समय में ये तकनीक ऊर्जा बनाने वाले स्मार्ट कपड़ों या खुद से चलने वाली दीवारों जैसी नई संभावनाओं के रूप में भी सामने आ सकती है। ये खोज साफ दिखाती है कि, भारतीय वैज्ञानिक अब ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोगों की जिंदगियों में बदलाव लाने का कारण है।

  • लाड़ली बहना योजना 28वीं किस्त: जानिए खाते में आने वाले पैसे और तारीख की पूरी जानकारी

    भोपाल 

    लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है. इसके तहत हर महीने लाड़ली बहनों के खाते में 1250 रुपए ट्रांसफर किए जाते हैं. पिछले महीने रक्षाबंधन के अवसर पर तो यह राशि बढ़ाकर 1500 रुपए ट्रांसफर की गई थी. वहीं, अब लाड़ली बहनों को सितंबर में मिलने वाली किस्त का इंतजार है. आइए जानते हैं कब आ सकती है लाड़ली बहना की सितंबर वाली किस्त और अब कब मिलेंगे 1500 रुपए…

    कब से मिलेंगे 1500 रुपए
    दरअसल, लाड़ली बहनों को मिलने वाली 1250 रुपए की राशि बहुत जल्द 1500 रुपए होने वाली है. इस बात का ऐलान खुद सीएम मोहन यादव ने किया है. उन्होंने कहा कि दिवाली के दौरान पड़ने वाले भाई दूज से उनकी राशि बढ़ा दी जाएगी. इसके बाद से उनके खाते में हर महीने 1500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे.

    सीएम मोहन ने दी जानकारी
    मध्यप्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग के सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो शेयर हुआ है. जिसमें सीएम मोहन ने इस बात की जानकारी दी है कि इस बार दीपावली 18 अक्टूबर को है यानी की एक महीने बाद लाड़ली बहना योजना की किस्त में 250 रूपये की बढ़ोत्तरी कर दी जाएगी. वहीं, कल बुंदलेखंड में एक कार्यक्रम के दौरान भी सीएम मोहन ने कहा था कि भाई दूज पर उन्हें 1500 रुपए दिए जाएंगे.

    कब आएगी सितंबर वाली किस्त
    लाड़ली बहनों के खाते में अक्टूबर से तो बढ़कर पैसे आएंगे ही, लेकिन इससे पहले उन्हें सितंबर में आने वाली किस्त का बेसब्री से इंतजार है. अब तक इस योजना की 27 किस्त जारी की जा चुकी है. वहीं, 28वीं किस्त आने वाली है. पिछने महीने  27वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले 7 अगस्त को जारी की गई थी. हालांकि, आमतौर पर हर महीने लाड़ली बहना की किस्त 10 से 15 तारीख के बीच आती है. ऐसे में संभावना है कि इस बार भी लाड़ली बहनों की किस्त इसी टाइम पर जारी हो सकती है. हालांकि अभी इसकी तारीखों को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं है. हम यहां आपको संभावित तिथि के बारे में बताएं हैं. 

    दिवाली बाद बहनों को मिलेंगे हर माह 1500 रुपए

    मोहन सरकार ने ऐलान किया है कि दिवाली के बाद भाई दूज से योजना की राशि में 250 रु का इजाफा किया जाएगा । इसके बाद बहनों को हर माह 1250 की जगह 1500 रुपए मिलेंगे। इसके अलावा अगले तीन साल में 2028 तक 3000 रुपए बहनों के खाते में भेजने का लक्ष्य है। वर्तमान में योजना के तहत 1250 रूपये प्रति माह की राशि लाड़ली बहनों को दी जा रही है। अबतक 27 किस्तें बहनों के खाते में भेजी जा चुकी है और अब 28वीं किस्त का इंतजार है। आमतौर पर हर महीने की 10 से 15 तारीख के बीच किस्त जारी की जाती है, ऐसे में संभावना है कि इस बार भी इसी टाइम पर पैसे जारी हो सकती है। हालांकि अभी फाइनल तारीख को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी सामने नहीं आई है।

    वर्तमान में लाड़ली बहना योजना में मिलते है हर माह 1250 रू

        लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।

        इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।

        इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।

        अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।

        लाड़ली बहनों को जून 2023 से अगस्त 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 27 किश्तों का अंतरण किया गया है।प्रदेश की लाड़ली बहनों को अब तक 41 हजार करोड़ से अधिक का लाभ मिल चुका है।

        इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया।

    लाड़ली बहना योजना में ये अपात्र

        महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।

        जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।
        अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।

        जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने 1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।

        जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष,
        संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।

        जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो।

    लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम

        लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।

        वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर
        क्लिक करें।

        दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।

        कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।
        मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।

        ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

  • श्रेष्ठ कार्य करने वाले शिक्षकों के लिए खास अवसर, राज्यपाल और CM डॉ. यादव करेंगे सम्मानित

    • श्रेष्ठ कार्य करने वाले शिक्षकों के लिए खास अवसर, राज्यपाल और CM डॉ. यादव करेंगे सम्मानित
    • प्रशासन अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागार में होगा गरिमापूर्ण आयोजन

    भोपाल 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर भोपाल में होने वाले राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में श्रेष्ठ कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करेंगे। साथ ही कक्षा एक से कक्षा 8 तक के 55 लाख विद्यार्थियों के बैंक खातों में शाला गणवेश की 330 करोड़ रूपये की राशि का अंतरण सिंगल क्लिक के माध्यम से किया जायेगा।

    समारोह शुक्रवार को प्रात: 10:30 बजे भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार, आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित होगा। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, जनजातीय कार्य, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन मंत्री कुवर विजय शाह, खेल एवं युवा कल्याण सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण श्रीमती कृष्णा गौर भी उपस्थित रहेंगी।

    स्कूल शिक्षा मंत्री ने दी बधाई

    स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिये चयनित शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा है कि जिन शिक्षकों का उनके श्रेष्ठ कार्यों की वजह से सम्मान हो रहा है, उनसे प्रदेश के अन्य शिक्षकों को भी प्रेरणा मिलेगी।

    सम्मानित होने वाले शिक्षक

    शिक्षक दिवस पर सम्मानित शिक्षकों में प्राथमिक, माध्यमिक श्रेणी के 8 और उच्चतर माध्यमिक श्रेणी के 6 शिक्षक शामिल हैं। गत वर्ष 2024 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को भी सम्मानित किया जायेगा। पुरस्कृत शिक्षकों को 25 हजार रुपये की सम्मान निधि, शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया जायेगा। जिन प्राथमिक शिक्षकों को सम्मानित किया जायेगा, उनमें शासकीय प्राथमिक शाला बिसोनिया, गुना के जितेन्द्र शर्मा, शासकीय उ.मा.वि. क्रमांक-2, शाजापुर के दिलीप जायसवाल, ई.पी.ई.एस., भाटीवाड़ा, सिवनी के दिलीप कटरे, शासकीय प्राथमिक विद्यालय, बसिया, दमोह के श्रीकांत कुर्मी, शासकीय उ.मा.वि., रुस्तमपुर, खण्डवा की माध्यमिक शिक्षक श्रीमती श्रद्धा गुप्ता, शासकीय माध्यमिक विद्यालय, सतौआ, दमोह के मोहन सिंह गौंड, शासकीय माध्यमिक शाला, चंदेसरा, उज्जैन के अपूर्व शर्मा और शासकीय माध्यमिक शाला, उबालाद, अलीराजपुर के उच्च श्रेणी शिक्षक धनराज वाणी शामिल हैं। ये चयनित शिक्षक कक्षा-1 से 8 की कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

    कक्षा-9 से 12 में चयनित शिक्षक

    राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिये कक्षा-9 से 12 में पढ़ाने वाले चयनित शिक्षकों में माध्यमिक शिक्षक शासकीय उत्कृष्ट उ.मा.वि., बाग, जिला धार की श्रीमती राधा शर्मा, शासकीय उ.मा.वि., मेडिकल कॉलेज, जबलपुर के डॉ. नरेन्द्र कुमार उरमलिया, शासकीय उ.मा. संभागीय ज्ञानोदय विद्यालय, तिलीवार्ड, सागर के महेन्द्र कुमार लोधी, शासकीय उ.मा.वि., जावरा, रतलाम की उच्च माध्यमिक शिक्षक श्रीमती विनीता ओझा और माध्यमिक शिक्षक शासकीय हाई स्कूल, पांदा, जिला राजगढ़ डॉ. सरिता शर्मा को सम्मानित किया जायेगा।

    वर्ष 2024 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक

    वर्ष 2024 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों को राज्य स्तरीय समारोह में शॉल-श्रीफल, स्मृति चिन्ह और 5 हजार रुपये सम्मान निधि भेंट कर सम्मानित किया जायेगा। इनमें शासकीय माध्यमिक शाला लिधौरा, ब्लॉक बटियागढ़, दमोह के माधव प्रसाद पटेल और शासकीय हाई स्कूल, मंदसौर की शिक्षक श्रीमती सुनीता गोधा शामिल हैं।

    जिला स्तर पर भी होगा शिक्षक सम्मान समारोह

    प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित होगा। समारोह में जिले में श्रेष्ठ कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान किया जायेगा। समारोह में गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहेंगे।

    पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन पर शिक्षक दिवस

    पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितम्बर को देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। शिक्षक दिवस उन समर्पित शिक्षकों का सम्मान और सराहना करने का दिन है, जिनका व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। शिक्षक मार्गदर्शक और प्रेरक की भूमिका निभाते हैं।

     

  • MP मैहर में बड़ी कार्रवाई: युवा मोर्चा अध्यक्ष पकड़े गए, 8 पेटी शराब जब्त

    मैहर
    सतना जिला के कोठी मंडल के भाजपा युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष अभिनव गौतम को बुधवार की रात मैहर जिला के रामनगर थाना क्षेत्र में आठ पेटी अवैध शराब व कफ सिरप के साथ पकड़ गया है। यह पूरी कार्रवाई रामनगर थाना पुलिस द्वारा कि गई है। दरअसल रामनगर थाना पुलिस ने शराब तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें भाजपा युवा मोर्चा कोठी मंडल अध्यक्ष अभिनव गौतम भी शामिल है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक कार और आठ पेटी अवैध शराब जब्‍त की है। सभी आरोपितों को न्यायालय में पेश कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी को बचाने के लिए एक बड़े भाजपा नेता ने पुलिस पर भारी दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन रामनगर पुलिस ने दबाव को नजरअंदाज करते हुए कार्रवाई पूरी की।

    भाजपा नेत्री का बेटा व स्वयं भी युवा मोर्चा का पदाधिकारी
    पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में भाजपा नेत्री मधु गौतम का बेटा अभिनव गौतम भी है, जो वर्तमान में युवा मोर्चा कोठी मंडल अध्यक्ष के पद पर है। उसके साथ तीन अन्य साथी भी पकड़े गए हैं। इनमें राजेश गुप्ता नाम का व्यक्ति भी शामिल है, जिसके खिलाफ पूर्व में धारा 34/2 के तहत मामला दर्ज हुआ था, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

    विपक्षी दलों के तीखे आरोप
    वहीं, इस पूरे मामले पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि भाजपा के बड़े नेताओं के संरक्षण में अपराध फल-फूल रहा है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि गिरफ्तारी के बावजूद भाजपा संगठन ने अब तक अपने युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष पर कोई कार्यवाही नहीं की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार क्षेत्र में लगातार फल-फूल रहा है और इसमें कई प्रभावशाली लोग सीधे या परोक्ष रूप से शामिल हैं। पुलिस की कार्रवाई को लोगों ने सराहा है, लेकिन यह भी अपेक्षा जताई कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। 

  • अब सीधे विश्वविद्यालयों को मिलेगी विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति

    आयुक्त श्री सुमन की अध्यक्षता में हुई पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक

    भोपाल 
    विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्रवृत्ति की राशि अब सीधे उस विश्वविद्यालय या संस्थान के खाते में डाली जाएगी, जिसमें छात्र अध्ययनरत है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त श्री सौरभ कुमार सुमन ने बताया कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को उनकी छात्रवृत्ति का लाभ समय पर मिल सकेगा।

    छात्रों के हित में ये फैसला पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त श्री सौरभ कुमार सुमन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में लिया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई बैठक में योजनाओं की प्रगति और लंबित मामलों की समीक्षा की गई। आयुक्त श्री सुमन ने छात्रवृत्ति से संबंधित लंबित प्रकरणों पर शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चयनित नर्सिंग कॉलेजों में अध्ययनरत पात्र छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति मिले, इसके लिए विशेष ध्यान दिया जाए।

    आयुक्त श्री सुमन ने सी.एम. हेल्पलाइन के प्रकरणों के निराकरण में विभाग की बेहतर स्थिति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने उच्च न्यायालय में लंबित अवमानना प्रकरणों में शीघ्र जवाब दावा प्रस्तुत कर विभाग का पक्ष मजबूती से रखने के निर्देश भी दिए। बैठक में संयुक्त संचालक श्री भूपेन्द्र कुमार गोयल, उप संचालक (वित्त) श्रीमती जयश्री राठौर और जिलों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।