
ASUS ने किया साफ़ इनकार: क्या सच में बनाएगी मेमोरी चिप्स? जानें पूरी सच्चाई | DDR5 कीमतें बढ़ने की वजह
DDR5 मेमोरी संकट पर Asus की दो-टूक: RAM मैन्युफैक्चरिंग की अफवाह निकली झूठी
इन दिनों कंप्यूटर और लैपटॉप बनाने के लिए ज़रूरी डीडीआर5 मेमोरी चिप्स की कीमत आसमान छू रही है। बाजार में इनकी इतनी कमी है कि थोक कीमतें तो चार गुना हो गई हैं, और रिटेल में तो ग्राहकों को और भी ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं। ऐसे में ये खबर चौंकाने वाली लगी कि टेक दिग्गज कंपनी ASUS इस संकट से निपटने के लिए खुद मेमोरी चिप्स बनाने का प्लान बना रही है। लेकिन सच्चाई कुछ और है।
फैक्ट चेक: ASUS ने खुद किया खंडन
इस खबर की जड़ एक ईरानी प्रकाशन की रिपोर्ट थी, जिसमें कहा गया था कि ASUS अगले साल के मध्य तक अपनी मेमोरी शिप करना शुरू कर देगी। हालाँकि, ताइवान की प्रतिष्ठित सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (CNA) से बात करते हुए ASUS ने इस अफवाह का साफ़-साफ़ खंडन किया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसकी “मेमोरी वेफर फैब (चिप निर्माण इकाई) में निवेश करने की कोई योजना नहीं है।”
तो ASUS का असली प्लान क्या है?
ASUS ने CNA को बताया कि वह इस मेमोरी संकट से निपटने के लिए दूसरे, ज्यादा व्यावहारिक तरीके अपनाएगी। कंपनी का कहना है कि वह अपने मौजूदा मेमोरी आपूर्तिकर्ताओं के साथ रिश्ते और मजबूत करेगी। बाजार की मांग के हिसाब से अपने उत्पादों के जीवन-चक्र और उनकी specifications को ठीक करेगी।
यानी, ASUS खुद चिप्स बनाने की जटिल और लंबी प्रक्रिया में नहीं पड़ेगी, बल्कि दूसरे निर्माताओं के साथ मिलकर और स्मार्ट प्रबंधन से इस समस्या से निपटेगी।

सबसे पहले बात उस अफवाह की। ईरानी टेक मैगजीन ‘सख्तअफजार’ ने दावा किया कि आसुस 2026 की दूसरी तिमाही से अपना RAM शिप करना शुरू कर देगी। वजह? उनके मुताबिक, आसुस को अपने मदरबोर्ड, ग्राफिक्स कार्ड और लैपटॉप जैसे प्रोडक्ट्स के लिए इतनी मेमोरी चाहिए कि खुद बनाना फायदेमंद होगा। लॉजिक तो बनता है – लंबे समय में पैसे बचेंगे, सप्लाई चेन मजबूत होगी। लेकिन यार, रियलिटी चेक: मेमोरी फैक्ट्री लगाने में कम से कम दो साल लगते हैं, वो भी अगर आपके पास पहले से टेक्नॉलजी और एक्सपीरियंस हो। आसुस के पास DRAM IP या चिप मैन्युफैक्चरिंग का कोई पुराना रेकॉर्ड नहीं है। अगले साल शिपिंग शुरू करना? ये तो नामुमकिन लगता है!
और हां, आसुस असल में ऐसी कंपोनेंट्स नहीं बनाती। वो तो ज्यादातर दूसरे मैन्युफैक्चरर्स से चिप्स खरीदकर अपने प्रोडक्ट असेंबल करती है। मदरबोर्ड या कीबोर्ड बनाना अलग बात है, लेकिन माइक्रोचिप्स का पूरा प्रोडक्शन? वो एकदम अलग लीग है। हमने fact check किया – Tom’s Hardware और Wccftech जैसी साइट्स पर ये अफवाह फैली, लेकिन मूल स्रोत ‘सख्तअफजार’ है, जो पहले AMD Ryzen 8000G के स्पेक्स लीक करके क्रेडिबल साबित हुई थी। फिर भी, इस बार की रिपोर्ट में कोई ठोस सोर्स नहीं दिया गया, सिर्फ ‘स्वामित्व वाली रिपोर्ट्स’ का हवाला। और तो और, पोस्ट में मेमोरी मॉड्यूल और IC को एक ही चीज मान लिया गया, जो टेक्निकल गलती है।
आखिर मेमोरी संकट कब तक रहेगा?
उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी जल्द खत्म होने वाली नहीं है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजार में सामान्य हालात 2026 के अंत से 2028 के बीच ही लौटने की उम्मीद है। इसकी एक वजह यह भी है कि AI और अन्य टेक्नोलॉजी की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है, जिससे मेमोरी चिप्स की खपत भी बढ़ गई है।