डोंगरगढ़ जनपद में बड़ा यू-टर्न! अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव वापस
भाजपा संगठन की समझाइश के बाद बदले समीकरण, सदस्यों ने कलेक्टर को दिया आवेदन
राजनांदगांव। डोंगरगढ़ जनपद पंचायत की राजनीति में बड़ा मोड़ सामने आया है। जनपद पंचायत अध्यक्ष लता अजय सिन्हा और उपाध्यक्ष हिराराम वर्मा के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव अब वापस ले लिया गया है। जनपद के सदस्यों ने आपसी सहमति से इस प्रस्ताव को निरस्त करने के लिए कलेक्टर को आवेदन सौंप दिया है।
जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले जनपद पंचायत के कई सदस्यों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए आवेदन दिया था। इस घटनाक्रम के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी और मामला भाजपा संगठन तक पहुंच गया था।
भाजपा संगठन ने बुलाई बैठक
बताया जा रहा है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भाजपा जिला संगठन ने डोंगरगढ़ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और नेताओं को बुलाकर बैठक की। बैठक में भाजपा जिला अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत, संतोष अग्रवाल, सौरभ कोठारी, भरत वर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बैठक में संगठन की अनुशासन नीति और पार्टी की रणनीति को लेकर चर्चा हुई और नेताओं को समझाइश दी गई कि इस प्रकार की कार्रवाई से संगठन की छवि प्रभावित होती है।
सदस्यों ने वापस लिया अविश्वास प्रस्ताव
बैठक के बाद जनपद पंचायत के सभी संबंधित सदस्यों ने आपसी सहमति से अविश्वास प्रस्ताव को वापस लेने का निर्णय लिया। इसके बाद सभी हस्ताक्षरित सदस्यों ने कलेक्टर राजनांदगांव को आवेदन देकर पहले दिए गए प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग की है। वायरल हुए पत्र में भी यह स्पष्ट लिखा गया है कि सदस्यों की आपसी सहमति से अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन वापस लिया जा रहा है।
जिले की राजनीति में चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन के हस्तक्षेप के बाद ही यह बड़ा यू-टर्न देखने को मिला है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस आवेदन पर क्या निर्णय लेता है और आने वाले समय में डोंगरगढ़ जनपद पंचायत की राजनीति किस दिशा में जाती है।
भाजपा जिला अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत ने कहा कि संगठन के खिलाफ रणनीति बनाने की मंशा को देखते हुए संबंधित नेताओं को बुलाकर समझाइश दी गई। संगठन के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में सभी जनप्रतिनिधियों को पार्टी की अनुशासन नीति का पालन करने की सलाह दी गई। इसके बाद सभी ने एकमत होकर अविश्वास प्रस्ताव वापस लेने का निर्णय लिया और कलेक्टर को आवेदन सौंप दिया।
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