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Milk Production: अप्रैल-मई की तपती धुप में गाय-भैसो को खिलाये ये स्पेशल चारा, नहीं घटेगा दूध उत्पादन, देखे A1 फार्मूला

Milk Production: अप्रैल की शुरुआत के साथ ही तापमान बढ़ने लगता है, जिसका सीधा असर पशुधन पर पड़ता है। विशेष रूप से, हरे चारे की कमी के कारण दूध उत्पादन में गिरावट आती है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए, समय पर तैयारियां करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

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Milk Productio: पशु वैज्ञानिक के अनुसार क्या खिलाये

पशु वैज्ञानिक की सलाह दी कि वे हरे चारे वाली फसलों—जैसे मक्का, ज्वार, सूडान घास और हाइब्रिड ज्वार की बुवाई अप्रैल के पहले सप्ताह तक पूरी कर लें। इससे यह सुनिश्चित होता है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक खेतों में हरे चारे की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध हो जाएगी। उन्होंने आगे बताया कि 28 मार्च को हुई बारिश ने खेतों में मिट्टी की नमी को पर्याप्त स्तर पर बनाए रखा है, जो फसलों के लिए काफी साबित हो सकती है; परिणामस्वरूप, अतिरिक्त सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

Milk Productio: बाजार में हरे चारे की कमी के समय,

जिन किसानों के पास अपना चारा तैयार होता है, वे आर्थिक नुकसान से बचने में सफल रहते हैं। हरे चारे की उपलब्धता पशुधन के पोषण स्तर में सुधार करती है, जिससे उनका समग्र स्वास्थ्य बेहतर होता है और दूध उत्पादन में वृद्धि होती है। इसके अलावा, यह दूध में वसा (Fat) और SNF (सॉलिड्स-नॉट-फैट) के स्तर को भी बेहतर बनाता है, जिससे पशुपालक बाजार में अपने दूध की बेहतर कीमतें प्राप्त कर पाते हैं।

Milk Productio: जिन पशुओं को संतुलित आहार मिलता है

उनका उत्पादन उन पशुओं की तुलना में अधिक होता है जिन्हें संतुलित आहार नहीं मिलता। बेगूसराय स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (Agricultural Science Centre) में कार्यरत पशु वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार ने पशुपालकों को सलाह दी कि यदि अप्रैल के पहले सप्ताह के दौरान उनके पशु ‘हीट’ (गर्भाधान के लिए तैयार) में आते हैं, तो उन्हें 50 से 100 ग्राम खनिज मिश्रण का पूरक आहार अवश्य दिया जाना चाहिए।

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Milk Productio: टीकाकरण करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण

इसके अतिरिक्त, पशुधन के स्वास्थ्य को बनाए रखने और उनकी प्रजनन क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि थोड़ी सी योजना और समय पर की गई तैयारियों की मदद से, पशुपालक गर्मियों के मौसम में भी दूध उत्पादन को बनाए रख सकते हैं और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।

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