पहला नवरात्रि कब है 2026: जानें घटस्थापना मुहूर्त, 9 देवियों के नाम, पूजा विधि और व्रत के नियम
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च 2026 गुरुवार को होगी और यह त्योहार 27 मार्च 2026 को राम नवमी के उत्सव के साथ समाप्त होगा। राम नवमी भगवान राम की जन्म जयंती है। सनातन धर्म में पूरे साल में चार नवरात्र आते हैं जिनमें से चैत्र और शारदीय नवरात्रि बेहद लोकप्रिय हैं। चैत्र नवरात्र का संबंध राम जन्मोत्सव से भी है। इन नौ पवित्र दिनों में माँ दुर्गा के नौ दिव्य रूपों की आराधना की जाती है और पूरे देश में घर-घर में माँ का आगमन होता है।
18 या 19 मार्च का भ्रम: जानें सही तारीख
18 और 19 मार्च को लेकर यह भ्रम इसलिए उत्पन्न होता है क्योंकि प्रतिपदा तिथि 18 मार्च की देर रात शुरू होती है लेकिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 19 मार्च की सुबह पड़ता है। हिंदू परंपरा में नवरात्रि तभी शुरू होती है जब घटस्थापना का अनुष्ठान उचित मुहूर्त के दौरान किया जा सके। इसलिए अधिकांश मंदिर और घर नवरात्रि का पहला दिन 19 मार्च 2026 को मनाएंगे। धर्माचार्यों और पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार नवरात्रि की सही और मान्य शुरुआत 19 मार्च 2026 को ही मानी जाएगी।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पहली नवरात्रि | 19 मार्च 2026 (गुरुवार) |
| अंतिम दिन | 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) |
| घटस्थापना मुहूर्त | सुबह 6:11 से 10:23 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 11:49 से 12:37 बजे तक |
| प्रतिपदा तिथि आरंभ | 19 मार्च सुबह 6:11 बजे |
| अष्टमी | 26 मार्च 2026 (गुरुवार) |
| संधि पूजा | 26 मार्च सुबह 11:24 से 12:12 बजे |
| राम नवमी | 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) |
| कन्या पूजन | 26 या 27 मार्च 2026 |
| पारण | 27 मार्च 2026 |
| विक्रम संवत | 2083 (हिंदू नव वर्ष) |
| दुर्लभ संयोग | अष्टमी और राम नवमी एक ही दिन |
घटस्थापना मुहूर्त 2026: सही समय पर करें कलश स्थापना
19 मार्च 2026 को घटस्थापना मुहूर्त सुबह 6:11 बजे से शुरू होकर 10:23 बजे तक रहेगा जो कुल 4 घंटे 12 मिनट का है। जो श्रद्धालु इस मुहूर्त में कलश स्थापना न कर पाएं वे अभिजीत मुहूर्त में भी घटस्थापना कर सकते हैं जो दोपहर 11:49 बजे से 12:37 बजे तक रहेगा। घटस्थापना शाम या रात को कभी नहीं करनी चाहिए। किसी भी पंचांग प्राधिकरण द्वारा शाम या रात को इसे करने की सिफारिश नहीं की जाती। सुबह के मुहूर्त को सबसे अधिक फलदायी माना जाता है इसलिए यदि संभव हो तो प्रातःकाल ही कलश स्थापना करें।
घटस्थापना की सरल विधि: कैसे करें कलश स्थापना
घटस्थापना जिसे कलश स्थापना भी कहते हैं, वह अनुष्ठान है जो नवरात्रि की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक है। इस समारोह में भक्त एक पवित्र घड़े यानी कलश को जल से भरकर उसे आम के पत्तों और नारियल से सजाते हैं। पहला कदम है पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करना। दूसरा कदम है मिट्टी की थाली में स्वच्छ मिट्टी फैलाकर उसमें जौ के बीज बोना। तीसरा कदम है कलश में गंगाजल भरकर उसमें एक सिक्का और सुपारी डालना। चौथा कदम है कलश के मुख पर पाँच आम के पत्ते रखना। पाँचवाँ कदम है लाल कपड़े में लिपटा नारियल कलश के ऊपर रखना और मौली बाँधना। कलश को उत्तर या पूर्व दिशा में रखें और मुहूर्त में माँ शैलपुत्री का मंत्र जपते हुए स्थापित करें।
नौ दिन नौ देवियाँ: रंग और मंत्र सहित पूरी सूची
पहले दिन 19 मार्च को घटस्थापना और माँ शैलपुत्री की पूजा होती है। दूसरे दिन 20 मार्च को माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। तीसरे दिन 21 मार्च को माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है। चौथे दिन 22 मार्च को माँ कूष्मांडा की पूजा होती है। पाँचवें दिन 23 मार्च को माँ स्कंदमाता की पूजा होती है। छठे दिन 24 मार्च को माँ कात्यायनी की पूजा होती है। सातवें दिन 25 मार्च को माँ कालरात्रि की पूजा होती है। आठवें दिन 26 मार्च को माँ महागौरी और दुर्गा अष्टमी तथा संधि पूजा होती है। नौवें दिन 27 मार्च को माँ सिद्धिदात्री की पूजा और राम नवमी मनाई जाती है।
नौ दिनों की पूरी तालिका
| दिन | तारीख | देवी | रंग | मंत्र |
|---|---|---|---|---|
| पहला | 19 मार्च (गुरु) | माँ शैलपुत्री | पीला | ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः |
| दूसरा | 20 मार्च (शुक्र) | माँ ब्रह्मचारिणी | हरा | ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः |
| तीसरा | 21 मार्च (शनि) | माँ चंद्रघंटा | स्लेटी | ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः |
| चौथा | 22 मार्च (रवि) | माँ कूष्मांडा | नारंगी | ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः |
| पाँचवाँ | 23 मार्च (सोम) | माँ स्कंदमाता | सफेद | ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः |
| छठा | 24 मार्च (मंगल) | माँ कात्यायनी | लाल | ॐ देवी कात्यायन्यै नमः |
| सातवाँ | 25 मार्च (बुध) | माँ कालरात्रि | नीला | ॐ देवी कालरात्र्यै नमः |
| आठवाँ | 26 मार्च (गुरु) | माँ महागौरी | गुलाबी | ॐ देवी महागौर्यै नमः |
| नौवाँ | 27 मार्च (शुक्र) | माँ सिद्धिदात्री | बैंगनी | ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः |
व्रत के नियम: क्या खाएं और क्या न खाएं
नवरात्रि व्रत में केवल सात्विक और शुद्ध आहार ग्रहण करते हैं। व्रत में सिंघाड़ा, साबूदाना और फल खाए जा सकते हैं। साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करें। प्याज, लहसुन और मांसाहारी भोजन से बचें। शराब, तम्बाकू और अनाज जैसे गेहूँ और चावल से बचें। बाल और नाखून काटने से बचें। व्रत के दौरान चैत्र नवरात्रि 2026 में केवल सात्विक और हल्के खाद्य पदार्थ ग्रहण किए जाते हैं जो शरीर और मन को शुद्ध करने में सहायक होते हैं। शकरकंद, कद्दू और आलू जैसी सब्जियाँ तथा दूध, दही, पनीर और मक्खन की अनुमति है। व्रत रखने से शरीर की शुद्धि होती है और माँ की भक्ति में मन एकाग्र होता है।
संधि पूजा 2026: सबसे महत्वपूर्ण 48 मिनट
26 मार्च 2026 को संधि पूजा सुबह 11:24 बजे से 12:12 बजे तक होगी। यह 48 मिनट की अवधि अष्टमी तिथि के समाप्त होने और नवमी तिथि के शुरू होने के बीच की महत्वपूर्ण संधि को चिह्नित करती है। यह माँ दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की पूजा का समय है जो राक्षसों चंड और मुंड के वध का स्मरण कराता है। इस समय 108 दीपक और फूल अर्पित किए जाते हैं जिसे नवरात्रि के दौरान ब्रह्मांडीय ऊर्जा का शिखर माना जाता है।
दुर्लभ संयोग 2026: अष्टमी और राम नवमी एक ही दिन
2026 में पंचांग में तिथियों के विशिष्ट संरेखण के कारण राम नवमी 26 मार्च 2026 गुरुवार को दुर्गा अष्टमी के साथ पड़ती है। यह शक्ति यानी दिव्य स्त्री शक्ति और विष्णु यानी दिव्य पुरुष ऊर्जा का एक दुर्लभ और शुभ संगम है। ऐसा संयोग कई दशकों में एक बार आता है और इस दिन की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस अवसर पर संधि पूजा अवश्य करें।
कन्या पूजन विधि: नवरात्रि का सबसे पावन अनुष्ठान
कन्या पूजन परंपरागत रूप से अष्टमी यानी 26 मार्च या नवमी यानी 27 मार्च को किया जाता है और अष्टमी को अधिक पसंद किया जाता है। कन्या पूजन में 2 से 10 वर्ष की आयु की 9 कन्याओं को माँ दुर्गा के नौ रूपों के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। उन्हें हलवा, पूरी, काले चने और खीर का भोग लगाया जाता है। उनके पैर धोए जाते हैं और यथाशक्ति भेंट दी जाती है। कन्या पूजन के बिना नवरात्रि का व्रत अधूरा माना जाता है।
चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व: हिंदू नव वर्ष की शुरुआत
चैत्र नवरात्रि 2026 हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत 2083 की शुरुआत का प्रतीक है और माँ दुर्गा के नौ दिव्य रूपों को समर्पित है। यह बुराई पर दैवीय ऊर्जा की विजय का प्रतीक है। चैत्र नवरात्रि को नए उद्यम शुरू करने, संपत्ति खरीदने, शिक्षा शुरू करने या महत्वपूर्ण जीवन निर्णय लेने के लिए सबसे शुभ अवधियों में से एक माना जाता है। पहला दिन 19 मार्च यानी हिंदू नव वर्ष विशेष रूप से अनुकूल है। यही कारण है कि इस नवरात्रि का महत्व शारदीय नवरात्रि से कम नहीं बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से और भी विशेष माना जाता है।
विश्लेषण तालिका: नवरात्रि 2026 का पूरा कैलेंडर
| तिथि | दिन | विशेष अवसर | रंग |
|---|---|---|---|
| 19 मार्च | गुरुवार | पहली नवरात्रि, घटस्थापना, हिंदू नव वर्ष | पीला |
| 20 मार्च | शुक्रवार | द्वितीया, माँ ब्रह्मचारिणी | हरा |
| 21 मार्च | शनिवार | तृतीया, माँ चंद्रघंटा | स्लेटी |
| 22 मार्च | रविवार | चतुर्थी, माँ कूष्मांडा | नारंगी |
| 23 मार्च | सोमवार | पंचमी, माँ स्कंदमाता | सफेद |
| 24 मार्च | मंगलवार | षष्ठी, माँ कात्यायनी | लाल |
| 25 मार्च | बुधवार | सप्तमी, माँ कालरात्रि | नीला |
| 26 मार्च | गुरुवार | अष्टमी, संधि पूजा 11:24-12:12, कन्या पूजन | गुलाबी |
| 27 मार्च | शुक्रवार | नवमी, राम नवमी, पारण, कन्या पूजन | बैंगनी |
नवरात्रि पारण: व्रत का समापन कैसे करें
नवरात्रि पारण नवमी यानी 27 मार्च को राम नवमी की पूजा के बाद व्रत तोड़कर की जाती है। पारण से पहले माँ सिद्धिदात्री की पूजा करें और अंतिम हवन करें। जौ के अंकुर उखाड़कर उन्हें पवित्र नदी या तालाब में प्रवाहित करें। इसके बाद कन्या पूजन करें और फिर हल्के भोजन से व्रत तोड़ें। पारण के बाद एकदम भारी भोजन न करें क्योंकि नौ दिन के व्रत के बाद पाचन तंत्र को धीरे-धीरे सामान्य होने की ज़रूरत होती है।
चैत्र नवरात्रि 2026 आपके पवित्र आध्यात्मिक अभ्यास को पुनः आरंभ करने का अवसर है। सही समय पर अनुष्ठान करने और विशेषज्ञ मार्गदर्शन का पालन करने से आप माँ दुर्गा का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। माँ दुर्गा को भव्य आयोजन की ज़रूरत नहीं। उन्हें चाहिए आपकी सच्ची श्रद्धा, आपका प्रेम और आपकी उपस्थिति। घटस्थापना की भक्ति से लेकर राम नवमी के भव्य उत्सव तक ये 9 दिन बीमारियों को ठीक करने, बाधाओं को दूर करने और समृद्धि प्रदान करने में इतने शक्तिशाली हैं। इस चैत्र नवरात्रि 2026 में माँ के नौ रूपों की आराधना करें और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद प्राप्त करें।






