छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

राजनांदगांव जिले का मामला: उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आशीष गंगवानी की दमदार पैरवी पर हाईकोर्ट ने अवैध ट्रांसफर आदेश किया रद्द

राजनांदगांव। जिले से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रकरण में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस पद का संबंधित जिले में अस्तित्व ही नहीं है, वहां किसी कर्मचारी का तबादला करना विधि सम्मत नहीं माना जा सकता।

यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति पी.पी. साहू की एकलपीठ द्वारा पारित किया गया।

पूरा मामला क्या है?

याचिकाकर्ता बीर सिंह साहू, जो जिला राजनांदगांव में समाज कल्याण विभाग में कलाकार पद पर कार्यरत हैं, का स्थानांतरण दिनांक 22 अप्रैल 2025 को राजनांदगांव से नवगठित जिला खैरागढ़-गंडई-छुईखदान कर दिया गया था।

लेकिन नवीन जिले की स्वीकृत पद संरचना में कलाकार पद का कोई अस्तित्व नहीं है। वहां केवल उपनिदेशक, सहायक श्रेणी तृतीय और चपरासी के पद स्वीकृत हैं। ऐसे में कलाकार पद पर स्थानांतरण आदेश से याचिकाकर्ता के समक्ष सेवा संबंधी गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था।

अधिवक्ता आशीष गंगवानी की प्रभावशाली दलील

पीड़ित कर्मचारी ने अधिवक्ता आशीष गंगवानी से संपर्क कर अपनी समस्या रखी। अधिवक्ता गंगवानी ने प्रकरण का विधिक परीक्षण कर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय के अधिवक्ता गंगवानी ने तर्क दिया कि:

नवीन जिला खैरागढ़-गंडई-छुईखदान की पद संरचना में कलाकार का पद स्वीकृत नहीं है।

अस्तित्वहीन पद पर स्थानांतरण प्रशासनिक और विधिक दोनों दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है।

इस आदेश से याचिकाकर्ता के सेवा अधिकारों का हनन हो रहा है।

न्यायालय ने इन तर्कों से सहमति जताते हुए शासन के विवादित स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया और याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की।

फैसले का व्यापक महत्व

यह निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के पालन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का यह स्पष्ट संदेश है कि शासन द्वारा स्थानांतरण आदेश जारी करते समय संबंधित जिले की स्वीकृत पद संरचना की जांच अनिवार्य है।

राजनांदगांव जिले से जुड़े इस प्रकरण में अधिवक्ता आशीष गंगवानी की प्रभावी पैरवी ने न केवल याचिकाकर्ता को न्याय दिलाया, बल्कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल भी बन सकता है।

जहां पद ही नहीं, वहां ट्रांसफर कैसे? — अधिवक्ता आशीष गंगवानी की पैरवी पर उच्च न्यायालय ने रद्द किया शासन का आदेश

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