DPR छत्तीसगढ समाचाररायपुर जिला

CG : विशेष लेख : ​डिजिटल लॉकर में भविष्य, ‘क्रेडिट बैंक’ में जमा होगी पढ़ाई

छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में केंद्र की बड़ी सौगात

  •          विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक

   रायपुर, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छत्तीसगढ़ को मिली सबसे बड़ी सौगातों में से एक—’एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (ABC) और डिजीलॉकर एकीकरण योजना ने राज्य के उच्च शिक्षा परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से सत्र 2023-24 से अनिवार्य रूप से लागू हुई यह योजना वर्ष 2026 में पूरी तरह परिपक्व हो चुकी है। अब राज्य का हर छात्र अपनी जेब में डिजिटल यूनिवर्सिटी लेकर घूम रहा है।

​क्या है यह ‘क्रेडिट बैंक’ और कैसे बदलेगी जिंदगी?

    ​कल्पना कीजिए एक ऐसे बैंक की, जहाँ पैसा नहीं बल्कि आपकी पढ़ाई और कॉलेज के ‘क्रेडिट’ (अंक) जमा होते हैं। यदि किसी वजह से आपकी पढ़ाई बीच में छूट जाए, तो यह बैंक आपकी मेहनत को बेकार नहीं जाने देता।
​      मान लीजिए बस्तर के किसी कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र को पारिवारिक कारणों से सेकंड ईयर के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पहले की व्यवस्था में उसकी दो साल की पढ़ाई ‘जीरो’ मान ली जाती थी। अब पहले दो वर्षों में छात्र ने जो भी अंक या ‘क्रेडिट’ कमाए हैं, वे उसकी ABC ID के जरिए डिजिटल बैंक में सुरक्षित रहेंगे। दो या तीन साल बाद जब वह दोबारा पढ़ना चाहेगा, तो वह रायपुर, बिलासपुर या देश के किसी भी अन्य विश्वविद्यालय में सीधे ‘थर्ड ईयर’ में प्रवेश ले सकेगा। इसे ही “मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट” कहा गया है।

​छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रांति का ‘स्कोरकार्ड’

    ​यह एकीकृत डिजिटल सिस्टम न केवल छात्रों के दस्तावेजों को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें देशव्यापी स्तर पर अपनी पढ़ाई को सुगम बनाने की आजादी भी दे रहा है। वर्तमान में यह योजना छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है, जिसके दायरे में राज्य के 6.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं आ रहे हैं।
​     इस महा-अभियान में राज्य के अग्रणी विश्वविद्यालय जैसे पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रायपुर), अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर), और शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर) सहित सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालय पूरी सक्रियता के साथ भागीदार बन चुके हैं।

​शत-प्रतिशत केंद्रीय सहयोग

    तकनीक की यह इतनी बड़ी अवसंरचना (Infrastructure) छत्तीसगढ़ को पूरी तरह निःशुल्क मिली है। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और शिक्षा मंत्रालय द्वारा शत-प्रतिशत तकनीकी व वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिसके चलते राज्य सरकार पर आर्थिक भार पूरी तरह से शून्य है।

​डिजीलॉकर बना ‘सुरक्षा कवच’: गुम होने का डर खत्म

    ​अक्सर दुर्घटना या लापरवाही के कारण छात्रों की मूल अंकसूची (Marksheet) या डिग्रियां नष्ट हो जाती थीं, जिसके बाद उन्हें यूनिवर्सिटी के चक्कर काटने पड़ते थे। अब इस समस्या का स्थायी समाधान कर दिया गया है।
​विश्वविद्यालयों को सीधे ‘नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी’ (NAD) पोर्टल से जोड़ दिया गया है, जिससे छात्र की डिग्री और सर्टिफिकेट सीधे उसके डिजीलॉकर में अपलोड हो रहे हैं।
 ये डिजिटल दस्तावेज कानूनी रूप से उतने ही मान्य हैं जितनी मूल हार्ड कॉपी। यानी नौकरी के इंटरव्यू में अब भारी-भरकम फाइल ले जाने की जरूरत नहीं, सिर्फ मोबाइल ही काफी है।

​’ग्लोबल’ हो रहा है छत्तीसगढ़ का युवा

    ​इस योजना ने सुदूर वनांचल जैसे सुकमा, बीजापुर या सरगुजा के कॉलेजों को भी नेशनल पोर्टल से सीधे जोड़कर अमीर और गरीब छात्र के बीच का डिजिटल फासला पूरी तरह खत्म कर दिया है।
    ​’ABC ID’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ का युवा अब सिर्फ अपने राज्य तक सीमित नहीं है। उसके क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा ने उसे पूरे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों से जोड़ दिया है। यह सिर्फ कागजों का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के 6.5 लाख युवाओं के सपनों को मिला एक नया ‘डिजिटल पंख’ है।

lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
ऐप पर पढ़ें