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राष्ट्र और समाज के हित में एकता जरूरी: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज में विचारों का अलग-अलग होना स्वाभाविक है, लेकिन राष्ट्र और समाज के हित में सबका मन एक होना चाहिए। तभी एक वैभवशाली राष्ट्र का निर्माण संभव है।


बाबरी मस्जिद को लेकर बयान, बताया राजनीतिक साजिश

बंगाल में बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर के बयान पर संघ प्रमुख ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद को फिर से बनाने की कोशिश एक राजनीतिक साजिश है, जिसका उद्देश्य पुराने विवाद को दोबारा शुरू करना है। यह सब वोटों के लिए किया जा रहा है, जिससे न मुसलमानों का भला होगा और न ही हिंदुओं का। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए।


सरकारी धन से धार्मिक स्थल नहीं बनने चाहिए

सरकारी धन से धार्मिक स्थलों के निर्माण के सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि सरकार को मंदिर या किसी भी धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं करना चाहिए। यही नियम है। उन्होंने सोमनाथ मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि उसका निर्माण सरदार वल्लभभाई पटेल के समय हुआ था, लेकिन उसमें सरकारी धन का उपयोग नहीं किया गया था।


राम मंदिर का निर्माण जनभागीदारी से हुआ

राम मंदिर के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। अदालत के निर्देश पर सरकार ने ट्रस्ट बनाया, लेकिन मंदिर निर्माण के लिए सरकारी धन नहीं दिया गया। राम मंदिर का निर्माण जनता के योगदान से हुआ।


संघ को लेकर समाज में कुछ गलतफहमियां: भागवत

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भ्रामक अभियानों के कारण समाज के एक वर्ग में संघ को लेकर गलतफहमियां हैं। लोग संघ को भाजपा से जोड़कर देखने की कोशिश करते हैं, जो सही नहीं है। संघ को केवल देखकर नहीं, बल्कि महसूस करके समझा जा सकता है।


कोलकाता में व्याख्यान शृंखला को किया संबोधित

मोहन भागवत ने रविवार को कोलकाता के साइंस सिटी सभागार में आयोजित व्याख्यान शृंखला “संघ के 100 वर्ष – नए क्षितिज” के प्रथम सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संघ के नाम से पूरी दुनिया परिचित है, लेकिन उसके कार्यों को लेकर सही जानकारी सभी को नहीं है।


देशभर में 1.20 लाख प्रकल्पों के माध्यम से सेवा कार्य

सरसंघचालक ने बताया कि संघ देशभर में एक लाख 20 हजार प्रकल्पों के माध्यम से समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए कार्य कर रहा है। वास्तविकता को लोगों तक पहुंचाने के लिए चार शहरों में व्याख्यान और संवाद सत्र आयोजित किए गए हैं।


संघ की स्थापना का उद्देश्य सर्वांगीण उत्थान

संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस किसी के विरोध, प्रतिस्पर्धा या उपलब्धि के लिए नहीं बना, बल्कि हिंदू समाज के सर्वांगीण उत्थान के उद्देश्य से अस्तित्व में आया।


हिंदू समाज को संगठित करना समय की मांग

संघ प्रमुख ने कहा कि देश की तत्कालीन परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं। भारत ने लगातार बाहरी आक्रमण झेले और अंग्रेजों से पहले भी गुलामी का दंश सहा। ऐसे में हिंदू समाज को संगठित करने की आवश्यकता महसूस हुई और समाज के आचरण को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए कार्यकर्ताओं का संगठन तैयार किया गया।


आरएसएस का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं

उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। संघ हिंदू समाज के कल्याण और संरक्षण के लिए कार्य करता है। उन्होंने कहा कि संघ का कोई शत्रु नहीं है, लेकिन कुछ लोगों के संकीर्ण स्वार्थ संगठन के बढ़ने से प्रभावित हो सकते हैं। भागवत ने कहा कि भारत एक बार फिर विश्वगुरु बनेगा और समाज को इसके लिए तैयार करना संघ का कर्तव्य है।