मध्य प्रदेश

पांच साल का कार्यकाल सरकार कर्ज ले रही बीस साल के लिए

भोपाल

मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो चुकी है इस बीच राज्य सरकार 26 मार्च को एक बार फिर खुले बाजार से दो हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है। यह कर्ज राज्य सरकार बीस वर्ष में लेगी। खास बात यह है कि किसी भी सरकार का कार्यकाल पांच साल का होता है लेकिन सरकार बीस साल की अवधि के लिए कर्ज ले रही है। याने कर्ज अभी की सरकार लेगी और इसे अगले बीस साल तक सत्ता में रहने वाली सरकारें चुकाएगी।

मध्यप्रदेश सरकार ने देशभर की वित्तीय संस्थाओं से दो हजार करोड़ के कर्ज के लिए प्रस्ताव बुलाए है। यह कर्ज रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया के मुंबई आफिस के जरिए लिया जाएगा। 26 मार्च को वित्तीय संस्थाएं आॅनलाईन रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया के कोर बैंकिंग साल्युशन ई कुबेर सिस्टम के जरिए लेगी। कर्ज के लिए वित्तीय संस्थाएं सुबह साढ़े दस बजे से साढ़े ग्यारह बजे के बीच इलेक्ट्रानिक रुप से बिड में भाग लेंगी और राज्य सरकार को कर्ज देने के लिए अपनी प्रतिर्स्धात्मक दरें देंगी। जो वित्तीय संस्थाएं राज्य सरकार की शर्त पर सबसे कम ब्याज दर पर कर्ज देने को तैयार होंगी उन प्रस्तावों का चयन किया जाएगा और सफलतम बिडर्स से 27 मार्च को राज्य सरकार दो हजार करोड़ रुपए की राशि कर्ज के रुप में ले लेगी। कर्ज लेने के बाद बीस साल में इसकी अदायगी की जाएगी। पूरा कर्ज 27 मार्च 2044 तक जमा किया जाएगा।  हर साल अर्धवार्षिक किस्त के रूप में सितंबर और मार्च में कर्ज की अदायगी की जाएगी।

तीन लाख 31 हजार करोड़ का पहले से कर्ज
सरकार पर पहले से तीन लाख 31 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। इसमें बाजार से ऋण के रुप में दो लाख 817 करोड़ रुपए लिये गए है।  पावर बांड सहित अन्य बांड के जरिए 6 हजार 624 करोड़ रुपए लिए गए है।  वित्तीय संस्थाओं से लोन के रुप मेंं 14 हजार 620 करोड़ रुपए सरकार ले चुकी है।  केन्द्र सरकार से लिए गए लोन एवं एडवांस के रुप में 52 हजार 617 करोड़ रुपए का कर्ज ले रखा है। अन्य दायित्व के रु में 18 हजार 472 करोड़ रुपए कर्ज ले रखा है।  राष्टÑीय बचत योजना के फंड और अन्य स्पेशल सिक्योरिटी की राशि में से केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार को 38 हजार 498 करोड़ रुपए दे रखे है।

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