मध्य प्रदेश

कई जिलों में 4 अप्रैल को चुनाव प्रशिक्षण में शामिल होने वनकर्मियों को आदेश जारी

भोपाल

वन विभाग के एसीएस जेएन कंसोटिया ने एक सप्ताह पहले  चुनाव आयोग और हाईक ोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए लोकसभा चुनाव में वनकर्मियों को चुनाव ड्यूटी से दूर रखने के लिए सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखा था। टीकमगढ़ कलेक्टर ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए वनकर्मियों को चुनाव कार्य से मुक्त रखा। लेकिन शेष कलेक्टरों ने पत्र को गंभीरता से नहीं लिया और 4 अप्रैल को चुनाव प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए वनकर्मियों को आदेश जारी कर दिया गया है।

जिसकों लेकर वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में काफी रोष है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 62 वन मंडलों के अधिकारियों और कर्मचारियों को चुनावी प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी ने पत्र जारी कर दिया है। भोपाल, रायसेन, विदिशा, शहडोल, उमरिया, मुरैना सतना सहित अन्य जिलों के वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी में शामिल होने के लिए कहा गया है।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग की गाइडलाइन में स्पष्ट उल्लेख है कि वन्य प्राणी शाखा और वनों के संरक्षण में लगे मैदानी अमले को चुनाव कार्य से दूर रखा जाए। प्रदेश के अधिकांश जिलों के कलेक्टरों ने वन मंडलों के कर्मचारियों को चुनाव कार्य में लगाने का आदेश जारी किया था। कलेक्टरों के आदेश के खिलाफ वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग से चुनाव आयोग की गाइडलाइन का पालन करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखा था कि वन विभाग के मैदानी अमले को चुनाव कार्य से दूर रखा जाए।

वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम मोहन यादव से इस मामले में शिकायत की है। वन विभाग के कर्मचारी नेता अशोक पांडे ने बताया कि अगर एक सप्ताह के अंदर कलेक्टर अपना आदेश वापस नहीं लेते है तो विभाग के कर्मचारी एक बार फिर कोर्ट की शरण में जाएंगे।

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