मध्य प्रदेश

17 बार लोकसभा चुनाव हुए, 2019 में चुनी गई सबसे अधिक 78 महिला सांसद

भोपाल

भारतीय राजनीति में आधी आबादी अर्थात महिलाओं का सितारा बुलंदी पर है। लोकसभा निर्वाचन से लेकर ग्राम पंचायत, नगर परिषद के चुनाव में भी महिलाएं अब बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने लगी है। सरकारी नौकरियों से लेकर निजी मल्टी नेशनल कम्पनियों में महिलाएं की संख्या तेजी से बढ़ी है। अनेक मल्टी नेशनल कम्पनी की प्रमुख अब महिलाएं ही है। देश ने महिला राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तथा लोकसभा स्पीकर भी देखे है, जिनका कार्यकाल बेहद सफलता भरा रहा है।

यदि बात की जाए लोकसभा में महिला सांसदों के प्रतिनिधित्व की तो पहली लोकसभा 1952 से लेकर 17वीं लोकसभा साल 2019 तक तो हम पायेंगे कि महिला सांसदों की संख्या एक-दो लोकसभा चुनाव को छोड़कर क्रमशः बढ़ती ही गई है। लेकिन फिर भी औसतन 6.9 फीसदी महिलाएं ही लोकसभा पहुँच पाती हैं। वर्ष 1952 के पहले आम चुनाव के बाद अब तक सबसे अधिक 78 महिलाएं साल 2019 के लोकसभा चुनाव में चुनकर लोकसभा पहुँची है। जबकि 724 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था। इस प्रकार उनकी जीत का प्रतिशत 10.77 तथा सदन में महिला सांसदों का प्रतिशत 14.36 रहा, जो पिछले 70 साल में सर्वाधिक है। इस प्रकार वर्ष 2019 के आम निर्वाचन में चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या भी सर्वाधिक रही है। महिला सांसदों का सबसे कम प्रतिनिधित्व वर्ष 1977 में छटवीं लोकसभा में 19 रहा है। तब 3.5 प्रतिशत महिलाएं ही निर्वाचित होकर लोकसभा पहुँच पाई थी। उस दौरान विपक्षी दलों के गठबंधन की जनता पार्टी की सरकार बनी थी।

लोकसभा का पहला आम चुनाव सन 1952 में हुआ था। इस चुनाव में 43 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरी थीं, जिनमें से 22 अर्थात 51.16 प्रतिशत महिलाओं ने जीत का परचम लहराया था। तब संसद में उनकी भागीदारी 4.50 प्रतिशत रही थी। ग्यारहवीं लोकसभा के लिए साल 1996 में हुए निर्वाचन में महिला सांसदों के जीत का प्रतिशत 6.68 सबसे कम कहा जा सकता है। इस आम चुनाव में 599 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था, जिनमें से सिर्फ 40 ने चुनाव जीता। संसद में महिला सांसदों का प्रतिशत 7.37 प्रतिशत रहा था। यह लोकसभा के निर्वाचन के इतिहास में महिला प्रत्याशियों की जीत का सबसे कम प्रतिशत रहा है।

इसी प्रकार दूसरी लोकसभा के लिए 1957 में हुए आम चुनाव में 45 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरी थी। तब 22 ने विजय पताका फहराई थी। उस समय उनकी जीत का प्रतिशत 48.89 तथा सदन में महिला सांसदों का प्रतिशत 4.45 रहा था। तीसरी लोकसभा के आम चुनाव में चुनी गई महिला सांसदों की संख्या में थोड़ी वृद्धि हुई, तब 31 महिलाएं संसद पहुँची थी। चौथी लोकसभा (1967) में यह संख्या घटकर 29 तथा पांचवी लोकसभा (1971) में 28 रह गई थी। छटवीं लोकसभा में संख्या कम रहने के बाद सातवीं लोकसभा के आम चुनाव में उम्मीदवार रही 143 में से 28 महिला सांसद चुनकर संसद पहुँची। हालांकि संसद में महिला सासंदों का प्रतिशत 5.29 ही रहा।

आठवीं लोकसभा के लिए साल 1984 में हुए आम निर्वाचन में 162 महिलाएं उम्मीदवार बनी। इनमें से 43 सफल रही। इनके जीत का प्रतिशत 26.54 तथा संसद में महिला सांसदों का प्रतिशत 7.95 रहा। इस चुनाव के बाद नौवी लोकसभा के चुनाव में महिला उम्मीदवारों और जीतने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती चली गई। हालांकि नौवीं लोकसभा में 29 महिला सांसद ही चुनी गई थी, लेकिन 1991 में दसवीं लोकसभा के चुनाव में 330 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा और 39 विजयी भी रही। उनके जीत का प्रतिशत 11.81 रहा, जबकि महिला सांसदों का प्रतिशत 7.30 रहा था।

ग्यारहवीं लोकसभा में पूर्व की अपेक्षाकृत अधिक संख्या में 599 महिलाओं ने चुनाव में उम्मीदवारी की और इनमें से 40 चुनी भी गई। सन 1998 के 12वीं लोकसभा के निर्वाचन में 274 महिला उम्मीदवारों में से 43 ने विजयश्री अर्जित की। इनकी जीत का प्रतिशत 15.70 और सदन में महिला सांसदों का प्रतिशत 7.92 रहा। वर्ष 1999 के 13वीं लोकसभा के चुनाव में 284 महिला उम्मीदवारों में से 49 सफल रही। तब जीत का प्रतिशत 17.25 रहा। इसी क्रम में 14वीं लोकसभा के लिए 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में 355 महिला उम्मीदवारों में से 45 सफल रहीं। वर्ष 2009 में 15वीं लोकसभा के आम निर्वाचन में 556 महिला उम्मीदवारों में से 59 महिलाएं सांसद चुनी गई। इसी प्रकार 16वीं लोकसभा के लिए साल 2014 में हुए चुनावों में 668 महिला उम्मीदवारों में से 61 ने जीत की पताका फहराई। तब इनकी जीत का प्रतिशत 9.13 तथा संसद में महिला सांसदों का प्रतिशत 11.23 रहा था।

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