11 मार्च 2026 को क्या है, 11 March 2026 Ko Kya Hai: शीतला अष्टमी, कालाष्टमी और बुधवार — जानें पूरा पंचांग, व्रत, त्योहार और शुभ मुहूर्त
11 मार्च 2026 को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का सूर्योदय होगा और पूरे दिन यही तिथि रहेगी इसलिए इसी दिन शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। इसके साथ ही मासिक कालाष्टमी का व्रत भी 11 मार्च 2026 को ही रखा जाएगा। यानी इस दिन एक साथ दो बड़े व्रत और त्योहार आ रहे हैं।
पहला त्योहार शीतला अष्टमी (बसौड़ा) 2026
हर वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को देवी शीतला की पूजा की जाती है जिसे शीतला अष्टमी कहा जाता है। इस दिन भक्त माता शीतला की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उन्हें ठंडे भोजन का भोग लगाते हैं। मान्यता है कि इससे घर-परिवार को रोगों से रक्षा मिलती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
शीतला अष्टमी को बसौड़ा भी कहते हैं। इस दिन एक खास परंपरा है कि एक दिन पहले यानी सप्तमी को ही खाना बनाकर रख लिया जाता है और अष्टमी के दिन वही बासी भोजन खाया जाता है और माता को भी बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। यह परंपरा इसलिए है क्योंकि इस दिन चूल्हा नहीं जलाते।
संक्षिप्त जानकारी — 11 मार्च 2026 का पंचांग
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तारीख | 11 मार्च 2026 |
| दिन | बुधवार |
| हिंदू माह | चैत्र मास, कृष्ण पक्ष |
| तिथि | अष्टमी |
| मुख्य व्रत-त्योहार | शीतला अष्टमी (बसौड़ा) + कालाष्टमी |
| नक्षत्र | ज्येष्ठा |
| योग | वज्र योग |
| शक संवत | विश्ववासु 1947 |
| विक्रम संवत | कालयुक्त 2082 |
| सूर्योदय | सुबह 6:37 बजे |
| सूर्यास्त | शाम 6:26 बजे |
| बुध ग्रह और भगवान विष्णु | बुधवार को इनका प्रभाव |
शीतला अष्टमी की पूजा विधि
शीतला अष्टमी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माता शीतला की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएँ। एक दिन पहले बनाया हुआ बासी भोजन जैसे पूरी, हलवा, चावल, दही का भोग माता को अर्पित करें। माता की आरती करें और शीतला अष्टमी की कथा सुनें। परिवार के सुख, स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा की कामना करें।
शीतला माता की व्रत कथा — यह ज़रूर पढ़ें
शीतला माता से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार — किसी गाँव में एक बुढ़िया रहती थी जो शीतला माता की परम भक्त थी। हर बार शीतला अष्टमी पर वह माता की पूजा करती और सभी नियमों का पालन करती। गाँव में अन्य कोई भी शीतला देवी की पूजा नहीं करता था। एक दिन पूरे गाँव में भीषण आग लग गई लेकिन उस बुढ़िया का मकान सुरक्षित रहा। जब लोगों ने इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि वह शीतला माता की भक्त है इसलिए अग्नि भी उसका अहित नहीं कर पाई। यह सुनकर गाँव के सभी लोग देवी शीतला की पूजा करने लगे।
दूसरा व्रत — कालाष्टमी 2026: काल भैरव की उपासना
हिंदू धर्म में कालाष्टमी का विशेष महत्व है। हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की उपासना की जाती है। मार्च 2026 में पड़ने वाली कालाष्टमी इसलिए भी खास है क्योंकि यह चैत्र मास की पहली कालाष्टमी है।
मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन सच्चे मन से पूजा करने से शत्रु बाधा कम होती है, ग्रह दोष शांत होते हैं, जीवन में आने वाली परेशानियाँ दूर होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
कालाष्टमी की पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान भैरव की विधि-विधान से पूजा करें। सबसे पहले घर के मंदिर में भगवान भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान भैरव को सरसों का तेल, काले तिल और उड़द की दाल चढ़ाएँ। रात को भैरव चालीसा का पाठ करें। भगवान भैरव के प्रिय वाहन कुत्ते को भोजन खिलाएँ।
विश्लेषण — 11 मार्च 2026 के दोनों व्रतों की तुलना
| विवरण | शीतला अष्टमी | कालाष्टमी |
|---|---|---|
| देवता | माता शीतला | काल भैरव (शिव रूप) |
| भोग | बासी भोजन, ठंडा खाना | सरसों तेल, काले तिल |
| लाभ | रोगों से रक्षा, सुख-समृद्धि | शत्रु बाधा दूर, ग्रह दोष शांत |
| विशेष परंपरा | चूल्हा नहीं जलाते | रात को पूजा का विशेष महत्व |
| किसके लिए | पूरे परिवार के लिए | विशेषकर पुरुषों के लिए |
| मंत्र | ॐ श्रीं शीतलायै नमः | ॐ भैरवाय नमः |
11 मार्च 2026 — राहुकाल और शुभ मुहूर्त
11 मार्च 2026 को बुधवार है। बुधवार के दिन बुध ग्रह और भगवान विष्णु का प्रभाव रहता है। बुधवार को व्यापार, पढ़ाई और नई शुरुआत के लिए अच्छा दिन माना जाता है। पूजा-पाठ के लिए सुबह सूर्योदय के बाद का समय सबसे शुभ रहेगा।
मार्च 2026 के अन्य महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार
| तारीख | दिन | त्योहार/व्रत |
|---|---|---|
| 10 मार्च | मंगलवार | शीतला सप्तमी |
| 11 मार्च | बुधवार | शीतला अष्टमी + कालाष्टमी |
| 14 मार्च | शनिवार | बैंक बंद (दूसरा शनिवार) |
| 18/19 मार्च | बुध/गुरु | भूतड़ी अमावस्या |
| 25 मार्च | बुधवार | चैत्र नवरात्रि प्रारंभ |
| 31 मार्च | मंगलवार | वित्तीय वर्ष समाप्त |
11 मार्च धर्म और आस्था का संगम
11 मार्च 2026 एक बेहद खास दिन है। एक ही दिन में शीतला अष्टमी और कालाष्टमी दोनों व्रत पड़ रहे हैं। माता शीतला की पूजा से परिवार को रोगों से रक्षा मिलती है और काल भैरव की उपासना से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं। इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।




