• जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ BJP प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल को CM ने किया सम्मानित

    भोपाल

    भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल का आज जन्मदिन है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पार्टी नेताओं ने उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया  पर संदेश साझा करते हुए लिखा कि खंडेलवाल के नेतृत्व में भाजपा और अधिक सशक्त व संगठित होकर जनसेवा के नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। उन्होंने बाबा महाकाल से उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना की।

    वहीं, भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने भी हेमंत खंडेलवाल को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “त्वं जीव शतं वर्धमानः” संगठननिष्ठा और अनुशासन के प्रतीक, सादगी और सेवा के पर्याय, कुशल संगठनकर्ता, भाजपा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष आदरणीय श्री हेमंत खंडेलवाल जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। मां ताप्ती से आपके स्वस्थ, सुदीर्घ, सफल एवं सुयशपूर्ण जीवन की कामना है।
      

  • जेल ब्रेक कांड से जुड़े आरोपी के बेटे को पिस्टल के साथ पकड़ाया, ATS ने जांच तेज की

    खंडवा
     खंडवा शहर में दो स्थानों से अवांछनीय गतिविधियों की शंका में महाराष्ट्र एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) की टीम ने दो युवकों को पकड़ा है। चर्चा है कि मंगलवार तड़के सिमी के पूर्व पदाधिकारी अकील खिलजी के पुत्र जलील खिलजी व जमील पुत्र मोहम्मद खलील को एटीएस ने दबोचा है।

    बताया जा रहा है कि जिस वक्त जलील खिलजी को एटीएस ने उठाया तब उनके साथ खंडवा के पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। टीम ने शहर की गुलमोहर कॉलोनी और कहारवाड़ी के चार युवकों को पकड़ा था। पूछताछ के बाद दो युवकों को छोड़ दिया जबकि एक को अपने साथ ले गए। जलील के साथ जुनेद पुत्र खलील चौहान को भी महाराष्ट्र एटीएस अपने साथ ले गई।

    सोमवार-मंगलवार दो दिन रहकर महाराष्ट्र एटीएस ने खंडवा के चार युवकों को उठाया और पूछताछ की। चाराें युवक शहर के गुलमोहर कॉलोनी और कहारवाड़ी क्षेत्र के थे। इस दौरान एटीएस ने जलील खिलजी के साथ जुनेद पिता खलील चौहान को भी उठाया था। जुनेद के पिता खलील ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक से शिकायत की कि उन्हें बिना सूचना दिए पुलिस उनके बेटे को उठाकर ले गई हैं। उसे बाजार से बोलेरो वाहन में बैठाया और कहीं गुप्त जगह पर ले गए है। खलील ने कहा कि बेटे जुनेद के साथ कोई भी गंभीर घटना या दुर्घटना हो सकती है। उसे झूठे केस में भी फंसा सकते हैं।

    आरोपी जलील के कब्जे से पिस्टल, 7 कारतूस बरामद

    इधर, कोतवाली टीआई अशोकसिंह चौहान के मुताबिक, महाराष्ट्र एटीएस ने शहर के कुछ युवकों से पूछताछ की थी। इनपुट मिलने के आधार पर एटीएस खंडवा पहुंची थी। एटीएस ने जलील पिता अकील खिलजी (34) निवासी गुलमोहर कॉलोनी से पूछताछ की थी।

    एटीएस के जाने के बाद मंगलवार रात 11 बजे सूचना मिली कि सियाराम चौक स्थित मालगोदाम शेड में एक युवक बैठा है, जिसके पास पिस्टल हैं। पुलिस मौके पर पहुंची तो वह युवक जलील खिलजी निकला। तलाशी लेने पर एक पिस्टल, एक मैगजीन और 7 कारतूस मिले।

    आरोपी को थाने लेकर आए, आज बुधवार सुबह उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट में केस दर्ज किया हैं। आरोपी का पूर्व का भी आपराधिक रिकॉर्ड है। जिसमें आर्म्स एक्ट सहित विस्फोटक सामग्री मिलने जैसे केस हैं। आरोपी जलील खिलजी को आज न्यायालय में पेश करेंगे।

    बिना कोई सूचना दिए बेटे को ले गए

    घटना के बाद जुनेद के पिता खलील ने कोतवाली पुलिस व पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित सूचना देकर उसके पुत्र को बिना किसी कारण व सूचना दिए बाजार से बोलेरा वाहन में बैठाकर गुप्त स्थान पर पुलिस ले जाने की शिकायत की है। खलील ने कहा कि मुझे आशंका है कि मेरे पुत्र मोहम्मद जुनेद के साथ कोई भी गंभीर घटना या दुर्घटना, कारित कर सकते है या उसे झूठे केस में भी फंसा सकते हैं।

    मैंने शहर के थाना सिटी कोतवाली, थाना मोघट और थाना पदमनगर खंडवा व अन्य स्थानो पर भी अपने पुत्र की जानकारी प्राप्त करना चाही, लेकिन उनके द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गई। मेरे बेटे का अपहरण किया गया है। यदि उसके साथ कोई भी घटना या दुर्घटना घटित होती है तो उसके लिए पुलिस जिम्मेदार होगी। हालांकि इस मामले को लेकर खंडवा पुलिस कोई जानकारी देने या युवकों को उठाने की पुष्टि नहीं कर रही है।

  • छत्तीसगढ़ में दर्दनाक हादसा, श्रद्धालुओं पर गाड़ी चढ़ने से कई घायल

    जशपुर 

    छत्तीसगढ़ में जशपुर जिले के बगीचा में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान एक वाहन की चपेट में आने से एक महिला सहित तीन लोगों की मौत हो गई और करीब 22 लोग घायल हो गए। हादसा बगीचा चरईडांड स्टेट हाईवे पर मंगलवार देर रात करीब 12 बजे हुआ। एक बोलेरो अनियंत्रित होकर श्रद्धालुओं को कुचलती चली गई।

    प्रत्यक्षदर्शी केशव यादव ने बताया कि बोलेरो रायकेरा की ओर से आ रही थी। लगभग डेढ़ सौ लोग विसर्जन जुलूस में शामिल थे। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और पूरे इलाके में अफरा तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। आक्रोशित भीड़ ने चालक की मौके पर जमकर पिटाई कर दी जबकि बोलेरो में सवार अन्य लोग मौके से फरार हो गए।

    घटना की सूचना मिलते ही जनपद उपाध्यक्ष अरविंद गुप्ता जनप्रतिनिधि शंकर गुप्ता और बगीचा एसडीओपी दिलीप कोसले व पुलिस की टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे और मिलकर बचाव कार्य में जुट गए। कुछ घायलों को गांव के अन्य लोगों ने अपनी सुविधा से इलाज के लिए रवाना किया।

    घायलों को तत्काल 108 की मदद से बगीचा अस्पताल लाया गया। कांसाबेल,कुनकुरी, सन्ना समेत जिलों के अन्य अस्पतालों से 108 संजीवनी बुलाया गया और तत्काल घायलों को रेफर किया गया। एसडीओपी दिलीप कोसले, एसडीएम प्रदीप राठिया, तहसीलदार महेश्वर उईके और पुलिस बल मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव में सक्रिय रहे, वहीं देर रात एक बजे एसएसपी शशि मोहन सिंह ने भी अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना। उन्होंने बताया कि हादसे में लगभग दो दर्जन लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

    जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास देर रात दो बजे बगीचा अस्पताल पहुंचे जहां उन्होंने घायलों व मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने बताया कि जो गंभीर हैं उन्हें अंबिकापुर रेफर किया गया है मॉनिटरिंग के लिए दो नायब तहसीलदार व मेडिकल ऑफिसर को अंबिकापुर भेजा गया है,घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था कराई जा रही है।

    सीएमएचओ जीएस जात्रा ने बगीचा स्वास्थ्य अमले को अलर्ट करते हुए तत्काल घायलों के इलाज की पहल की। उन्होंने बताया कि घटना में 22 लोग घायल हुए हैं जिनका उपचार करते हुए लगभग 20 लोगों को रैफर किया गया है। घायलों में फकीर यादव,नीलू यादव,निरंजन राम पिता अर्जुन राम,संदीप यादव नारायण , देवंती , गुलापी बाई, याहूसु लकड़ा,संतोष प्रजापति,हेमंत यादव,उमा यादव,भुवनेश्वरी यादव,चंदा बाई, पिंकी, लीलावती प्रजापति,डमरूधर यादव,गायत्री यादव,आरती यादव,परमानंद यादव,अभिमन्यु,हेमानंद व चालक सुखसागर समेत अन्य शामिल हैं।

    मृतकों में अरविंद (19) विपिन कुमार प्रजापति (17) एवं खिरोवती यादव (32) हैं जिनके पोस्टमार्टम की प्रक्रिया आज की जाएगी। जशपुर विधायक रायमुनि भगत देर रात बगीचा अस्पताल पहुंचीं जहां उन्होंने घायलों से मुलाकात कर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। पुलिस ने बोलेरो वाहन को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

  • विकसित भारत के लिए आदिवासी सशक्तिकरण पर जोर, डॉ. डहरिया ने किया अभियान का उद्घाटन

       रायपुर

    देश की आजादी के बाद यह पहला अवसर है जब किसी सरकार ने जनजातीय समाज के जीवन स्तर को उपर उठाने के लिए देशव्यापी अभियान छेड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार जैसे मूलभुत सुविधाओं से जोड़ने और इनका लाभ दिलाने के लिए आदि कर्मयोगी अभियान की शुरूआत की है। यह अभियान देशभर के 30 राज्यों में संचालित किया जा रहा है। यह अभियान देश भर के 550 से ज्यादा जिलों और 1 लाख से अधिक आदिवासी बहुल गांवों में बदलाव के लिए काम करेगी। 

    बता दें कि जब भारत 2047 में अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरा करेगा। उस समय तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए यह जरूरी है कि समाज का कोई भी वर्ग पीछे न छूटे। आदिवासी समाज को आगे बढ़ाए बिना यह सपना अधूरा रहेगा। आदि कर्मयोगी अभियान इस अंतर को भरने के लिए एक ठोस कदम है। यह अभियान शासन और समाज के बीच की दूरी को कम करेगा, पारदर्शिता लाएगा और योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाएगा।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अभियान को सेवा पर्व का रूप दिया है। उनका कहना है कि यह केवल योजनाओं की जानकारी देने का प्रयास नहीं, बल्कि समाज और शासन को जोड़ने वाला पुल है। छत्तीसगढ़ में इस अभियान के लिए वृहद स्तर पर आदिकर्म योगियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये कर्मयोगी जनजातीय परिवारों से घर-घर संपर्क कर उनकी आवश्यकताओं और जरूरतों को समझेंगे तथा केंद्र और राज्य सरकार  की योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करेंगे, राज्य और जिला स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग की जाएगी। राज्य सरकार के सभी विभागों के अधिकारी इस कार्य में संवेदनशीलता के साथ सीधे जुड़ेंगे।

    आदिकर्मयोगी अभियान का महत्व राष्ट्रीय स्तर पर इसलिए भी है क्योंकि भारत की जनजातीय आबादी लगभग 10 करोड़ से अधिक है। इतने बड़े समुदाय को मुख्यधारा में लाए बिना 2047 तक विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा। यह अभियान प्रधानमंत्री की उस सोच से जुड़ा है, जिसमें हर क्षेत्र, हर समाज और हर नागरिक को विकसित भारत” की यात्रा में समान अवसर देना है। भारत का विकास केवल शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह सकता। एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र वही कहलाएगा, जहाँ समाज के हर तबके को समान अवसर मिले और उसकी संस्कृति को उचित सम्मान दिया जाए। इसी सोच को मूर्त रूप ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के जरिए दिया जा रहा है। यह वस्तुतः जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है।

    छत्तीसगढ़ देश का वह राज्य है जहाँ सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या निवास करती है। इसीलिए इस अभियान का यहां विशेष महत्व है। आदिवासी समाज की असली चुनौती यही रही है कि अनेक योजनाएँ होते हुए भी उनकी जानकारी और लाभ ज़रूरतमंदों तक समय पर नहीं पहुँच पाते। ऐसे में लाखों कर्मयोगी स्वयंसेवक योजना और समाज के बीच सेतु बन सकेंगे। यह अभियान राज्य के 28 जिलों और 138 विकासखंडों के 6 हजार 650 गांवों में 1 लाख 33 हजार से अधिक वालंटियर्स तैयार करने का लक्ष्य रखा है। छत्तीसगढ़ में यह अभियान 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक पूरे राज्य में ग्राम पंचायत स्तर पर सेवा पखवाड़ा के रूप में मनाया जाएगा। 

    आदिम जाति कल्याण मंत्री राम विचार नेताम में अधिकारियों को पंचायतों में आदि सेवा केंद्र स्थापित करने और जनजातीय परिवारों को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, छात्रवृत्ति, रोजगार, कौशल विकास जैसी सुविधाओं के लिए मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा है कि इस अभियान को सेवा पर्व के रूप में मनाया जाए और जनजातीय योजनाओं को घर-घर तक पहुँचाने का ठोस प्रयास किया जाए।

    आदि कर्मयोगी अभियान के पीछे एक गहरी सामाजिक सोच है। जब कोई स्थानीय युवा, महिला या स्वयंसेवक अपने ही गाँव में जाकर योजनाओं की जानकारी देता है, तो लोग उस पर भरोसा करते हैं और यह विश्वास ही बदलाव की असली ताकत है। अभियान का असर शिक्षा और स्वास्थ्य से लेकर आजीविका तक हर क्षेत्र में दिखेगा। जब एक वालंटियर किसी परिवार को यह बताता है कि उनकी बेटी को छात्रवृत्ति मिल सकती है, या बुजुर्ग को पेंशन का हक़ है, तो यह केवल सूचना नहीं होती, बल्कि उस परिवार की ज़िंदगी बदलने वाला अवसर होता है।

  • डैम टूटने से छत्तीसगढ़ में हाहाकार, कई लोग बह गए और गांव जलमग्न, 8 बह गए, 4 की मौत

    रायपुर 

    छत्‍तीसगढ़ में भी लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है. इस वजह से नदी-नाले उफान पर हैं. डैम भी पानी से लबालब हो चुके हैं. इस बीच, प्रदेश के बलरामपुर में बांध टूटने से 4 घर बह गए, जिसकी चपेट में 8 लोग आए. इनमें से 4 की लाश बरामद हो गई है. बाकी की तलाश जारी है.

    बलरामपुर जिले के तातापानी पुलिस चौकी क्षेत्र अंतर्गत स्थित लुतिया डैम मंगलवार की रात करीब 11 बजे टूट गया। बांध टूटने से दो मकान पूरी तरीके से बाढ़ में बह गए, दोनों मकान में 8 लोग सोए थे, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 लोग अब भी लापता हैं। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। पुलिस और प्रशासन की टीम लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है।

     2 लोगों की लाश को मौके से बरामद

    बलरामपुर जिले में लगातार तेज बारिश होने के कारण लुतिया डेम रात 11 बजे के करीब टूट गया। बताया गया है कि पहाड़ में तीज बारिश होने के कारण पहाड़ की झरने का पानी बांध में आ रहा था और उसके बाद बांध लबालब भर गया। देखते ही देखते पूरा बांध टूट गया, लेकिन इस दौरान पहले से यहां पर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया था और न ही जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे हुए थे।

    लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर… केलो डेम के चार गेट खोले गए, IMD ने यलो अलर्ट किया जारी

    यही वजह है कि यहां पर ऊंचाई में मकान बनाकर रह रहे दो परिवार के लोग गहरी नींद में जब सोए हुए थे, तब बांध के पानी की वजह से आने वाले बाढ़ में वे बह गए, घर का नामोनिशान मिट गया। रात 3 बजे के करीब कलेक्टर राजेंद्र कटारा और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और उन्होंने रेस्क्यू टीम के माध्यम से 2 लोगों की लाश को मौके से बरामद किया। इसमें 60 वर्षीय महिला बसतिया और उसकी बहू 26 वर्षीय रजंती शामिल है।

    3 अस्पताल में भर्ती

    प्रशासन द्वारा तीन लोगों को गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। वहीं जब सुबह होने लगी तब एक व्यक्ति का और लाश मिला है, यानी अब तक कुल 3 लोगों की लाश बरामद हो गई है। वही बताया जा रहा है कि अभी 3 लोग लापता है और उनकी तलाश एसडीआरएफ की टीम के द्वारा की जा रही है।

    निचले इलाके में भरा पानी, बहे ग्रामीण

    बांध टूटने के कारण पानी निचले इलाके में पहुंच गया। बाढ़ की चपेट में 4 घर आ गए। इन घरों में रहने वाले 8 ग्रामीण तेज पानी में बह गए। घटना की सूचना ग्रामीणों ने जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंहदेव को दी।

    उन्होंने कलेक्टर और एसपी को हादसे की जानकारी दी। धीरज सिंहदेव करीब 12.30 बजे घटनास्थल पर पहुंचे। देर रात कलेक्टर राजेंद्र कटारा और एसपी वैभव बैंकर सहित प्रशासनिक अधिकारी, रेस्क्यू टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

    सैकड़ों लोग खोजबीन में जुटे जहां बांध बहा है, वहां से कन्हर नदी की दूरी करीब पांच किलोमीटर है। बाढ़ में बहे लाेगाें की खोजबीन में सैकड़ों लोग जुटे हैं। अब तक लापता लोगों का पता नहीं चला है। अन्य ग्रामीणों के घर बहे, लेकिन इनके सदस्य बच गए।

    बाढ़ की चपेट में आकर ग्रामीणों की सैकड़ों एकड़ में लगी धान और टमाटर सहित अन्य फसलें भी बर्बाद हो गई हैं। बाढ़ की चपेट में आकर ग्रामीणों के कई मवेशी भी बह गए हैं। कुछ की खूंटे में बंधी हालत में मौत हो गई।

    कई बांध लबालब, प्रशासन ने किया सतर्क

    बलरामपुर जिले में इस साल औसत से 59 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके कारण जिले के सभी बांध लबालब भर गए हैं और नदी, नाले भी उफान पर हैं। इसे देखते हुए पुराने बांध के नीचे रहने वालों को सतर्क भी किया गया है।

    डेम में रिसाव हो रहा था लेकिन नहीं दिया ध्यान

    : डेम फूटने से आई बाढ़ में कई मवेशी भी बह गए हैं। दूसरी तरफ स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से डेम में रिसाव हो रहा था लेकिन इसके बाद भी जल संसाधन विभाग के अधिकारी इसका मरम्मत नहीं कर रहे थे जबकि इस साल लगातार पिछले दो महीना से अत्यधिक बारिश हो रही है उसके बावजूद जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने यहां पर पहले से कोई अलर्ट जारी नहीं किया था और न ही मुनादी कराया था अगर ऐसा किया गया होता तो लोगों की जान नहीं गई होती।

    बताया गया है की डेम का निर्माण पहाड़ी के नीचे किया गया है और इसका निर्माण 50 साल पहले किया गया था लेकिन जल संसाधन विभाग के अधिकारी वास्तविक रूप से इस डेम का मरम्मत नहीं कर रहे थे सिर्फ कागजों में ही हर साल मरम्मत किया जाता था। यही वजह है कि इस साल डेम तेज बारिश के बीच बह गया।

  • स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों की ली समीक्षा बैठक

    हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी में सुधार के लिए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने दिए निर्देश

    शिक्षा मंत्री यादव ने कहा: छात्रों के परिणाम सुधार के लिए ठोस प्रयास जरूरी

    रायपुर में शिक्षा मंत्री ने हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी सुधार को बताया प्राथमिकता

    स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों की ली समीक्षा बैठक

    रायपुर

    स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव ने आज लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने कहा कि इस वर्ष हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी परीक्षाओं के परिणामों में सुधार लाने के लिए अभी से ठोस और प्रभावी प्रयास किए जाएं। इसके लिए स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा पठन-पाठन की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाए। मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि आवश्यकता पड़ने पर शिक्षकों को प्रशिक्षण एवं समुचित सलाह उपलब्ध कराई जाए।

    बैठक में सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी सचिव स्कूल शिक्षा एवं लोक शिक्षण संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने विभागीय संरचना, शासकीय स्कूलों और छात्रों की संख्या, शिक्षकों की स्थिति, शैक्षणिक पद, बजट प्रावधान, अधोसंरचना तथा विद्यार्थियों के लिए संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। मंत्री यादव ने निःशुल्क गणवेश, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, शिक्षा का अधिकार अधिनियम और निःशुल्क सरस्वती साइकिल योजना की जानकारी लेकर इन योजनाओं को सुचारू रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान को भी पूरी गंभीरता से लागू करने पर जोर दिया।

    यादव ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में सामुदायिक सहयोग बेहद आवश्यक है। इसके लिए स्कूलों में सामाजिक अंकेक्षण आयोजित किए जाएं, ताकि समाज की भागीदारी से शिक्षा व्यवस्था और सुदृढ़ हो सके। उन्होंने राज्य में आयोजित रजत जयंती समारोह के अवसर पर प्रस्तावित गतिविधियों पुस्तक वाचन दिवस, बाल पंचायत, एल्युमिनी मीट, शिक्षक दिवस और प्रदर्शनीक के आयोजन की रूपरेखा पर भी अधिकारियों से चर्चा की।

    शिक्षा मंत्री ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने जिलों से शिक्षकों की संपूर्ण जानकारी, पदस्थापना तथा रिक्त पदों का विवरण संचालनालय को प्रस्तुत करें। इससे स्कूलों की स्थिति में सुधार हेतु आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में सैनिक स्कूलों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। बैठक में लोक शिक्षण संचालनालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • ऑल सीजन टेंट सिटी के साथ साहसिक गतिविधियों का रोमांच- अपर मुख्य सचिव शुक्ला

    मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा गांधीसागर एवं कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट एंड फेस्टिवल का आयोजन

    भोपाल
    मध्यप्रदेश अब पर्यटकों को देने जा रहा है ऐसा सफर, जिसकी प्रतीक्षा लंबे समय से थी। जंगल की रोमांचक रातें, नदी और बैकवाटर्स की शांति और आसमान को छूती साहसिक गतिविधियां, ये सब मिलकर जल्द शुरू करने जा रहे हैं पर्यटन का नया अध्याय। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड, ईको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से इस वर्ष दो महत्वपूर्ण आयोजनों का शुभारंभ करने जा रहा है। “गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट” का चतुर्थ संस्करण 12 सितंबर 2025 से मंदसौर जिले के गांधीसागर डैम पर और “कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट” का द्वितीय संस्करण 5 अक्टूबर 2025 से श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान के समीप आयोजित होगा।

    पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि गांधीसागर और कूनो जैसे फॉरेस्ट रिट्रीट केवल पर्यटन आयोजन नहीं हैं, बल्कि ये हमारे प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर, सांस्कृतिक समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रयास हैं। गांधीसागर और कूनो ईको-टूरिज्म व साहसिक पर्यटन के केंद्र के रूप में उभरे हैं। गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट का उद्देश्य प्रदेश को एडवेंचर टूरिज्म के मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाना है, वहीं कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट हमारे लिए वेलनेस और वन्यजीव पर्यटन का हब है। इन आयोजनों से न केवल देश-विदेश से पर्यटक आकर्षित होंगे बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। 

      अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा गांधीसागर और कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट, अनुभव-आधारित पर्यटन के उदाहरण हैं। इन आयोजनों में आने वाले मेहमान उच्च स्तरीय और सर्व सुविधा युक्त ग्लेम्पिंग का आनंद उठाएंगे और जल, थल एवं वायु आधारित साहसिक गतिविधियों जैसे पैरासेलिंग, पैरामोटरिंग, जेट स्की, हॉट एयर बैलूनिंग, जंगल सफारी, नाइट वॉक और स्टार गेज़िंग का रोमांचक अनुभव प्राप्त करेंगे। ऑल सीजन टेंट सिटी के साथ ही बोट सफारी, बोट स्पा, योग एवं वेलनेस- सत्र, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पर्यटकों को प्रदेश की संस्कृति और जीवन शैली से निकटता से जोड़ेंगी। इन आयोजनों को हमने इस तरह से आयोजित किया है कि पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाए। 

    गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट एंड फेस्टिवल (12 सितंबर 2025 से)
    चंबल नदी पर बने गांधीसागर डैम के मनोहारी बैकवाटर क्षेत्र को एडवेंचर हब बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा यह आयोजन शुरू किया गया था, जो अब देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।

    मुख्य आकर्षण: प्राकृतिक सौंदर्य से घिरी ग्लेम्पिंग साइट (50 लग्जरी ऑल सीजन टेंट सिटी) जल, थल और वायु आधारित साहसिक गतिविधियां पैरासेलिंग, पैरामोटरिंग, जेट स्की, ज़ोरबिंग आदि बोट सफारी एवं बोट स्पा जंगल सफारी स्थानीय व्यंजन, इनडोर स्पोर्ट्स एवं मनोरंजन सुविधाएं प्रकृति संरक्षण और स्थानीय हस्तशिल्प पर केंद्रित कार्यशालाएं बटरफ्लाई गार्डन रॉक गार्डन।

    उद्देश्य एवं लाभ : मध्यप्रदेश में पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ ही यह पहल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इन आयोजनों के माध्यम से नेचर एवं एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोमांचक गतिविधियों का अनुभव करने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। साथ ही, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ नई पीढ़ी में अपनी धरोहर और प्राकृतिक संपदा के प्रति जागरूकता भी विकसित होगी।

    कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट एंड फेस्टिवल (5 अक्टूबर 2025 से)
    चीतों की वापसी के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी रहा कूनो राष्ट्रीय उद्यान अब इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक धरोहर का संगम प्रस्तुत करने जा रहा है। यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के साथ पर्यटन को नई पहचान देगा।

    मुख्य आकर्षण : जल, थल और वायु आधारित साहसिक गतिविधियां, कला, शिल्प, लोक संगीत और नृत्य का आयोजन, प्राकृतिक सौंदर्य के बीच ग्लेम्पिंग साइट (25 लग्जरी ऑल सीजन टेंट सिटी), रोमांचक जंगल सफारी एवं नाइट वॉक, योग, ध्यान एवं वेलनेस सत्र, विलेज टूर और विभिन्न कार्यशालाएं, हॉट एयर बैलूनिंग, स्टार गेजिंग का अनुभव एवं चीता इंटरप्रिटेशन सेंटर आदि हैं।

    उद्देश्य एवं लाभ : मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाला कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट प्रदेश के पर्यटन को नई दिशा देने वाला है। यह आयोजन वन्यजीवन, इको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देता है और चीता पुनर्वास जैसे ऐतिहासिक प्रयास को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करता है। इसके माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर निर्मित होंगे। साथ ही यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सतत पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, जो प्रदेश को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाएगी।

  • रायपुर: कृषि और जल योजनाओं में सुधार पर अधिकारियों को शिक्षा मिली

    रायपुर : किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने और जल जीवन मिशन के कार्यों में गुणवत्ता लाने के दिए गए निर्देश

    किसानों को सस्ता खाद और जल जीवन मिशन में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

    रायपुर: कृषि और जल योजनाओं में सुधार पर अधिकारियों को शिक्षा मिली

    स्वास्थ्य और शिक्षा सहित जिले के विकास में हो डीएमएफ की राशि का सदुपयोग

    दिशा समिति और डीएमएफ के शासी समिति की बैठक संपन्न

    रायपुर

    जिला खनिज संस्थान न्यास और जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक आज जिला कार्यालय कोंडागांव के सभाकक्ष में संपन्न हुई, जिसमें बस्तर सांसद महेश कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष और कोंडागांव विधायक सुलता उसेंडी और विभिन्न जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। बैठक में डी एम एफ की राशि का समुचित उपयोग जिले के निवासियों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सहित क्षेत्र के विकास कार्य में व्यय पर जोर दिया गया। वहीं किसानों को उचित मूल्य पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जल जीवन मिशन के कार्यों में गुणवत्ता लाने हेतु संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, पुलिस अधीक्षक वाय अक्षय कुमार सहित जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण मौजूद रहे। 

    सांसद महेश कश्यप ने कहा कि जिले में स्कूल आंगनबाड़ी भवन के मरम्मत या नए भवनों के कार्यों को प्राथमिकता दें। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए यह बहुत जरूरी है। उन्होंने धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत शीघ्र सभी विभागों से प्रस्ताव तैयार करने हेतु निर्देशित किया। साथ ही आदि कर्म योगी अभियान के क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने सांसद खेल महोत्सव के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंशानुरूप खेलो इंडिया और फिट इंडिया अभियान के तहत राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतियोगिता का आयोजन शुरू किया जा रहा है, जो कि तीन माह तक चलेगा। सांसद भोजराज नाग ने कहा कि डीएफएम की राशि का समुचित उपयोग सुनिश्चित करें। दुरूपयोग न हो जिले के शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सदुपयोग करें। 

    कोंडागांव विधायक सु लता उसेंडी ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई का समुचित उपयोग के निर्देश दिए। किसानों को नर्सरी विकसित करने हेतु प्रशिक्षण दिलाएं। केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण  की समीक्षा दौरान कहा कि आवास निर्माण में प्रगति लाने जनप्रतिनिधि भी आगे आएं। साथ माओवाद पीड़ित और प्रभावितों के लिए स्वीकृत आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण कराएं।

    बैठक में कृषि विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया कि किसानों को खाद उचित मूल्य पर उपलब्ध हो यह सुनिश्चित करें। जिले में जल जीवन मिशन के प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए लोक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया कि जल जीवन मिशन के कार्यों में गुणवत्ता लाएं और गांव के शत प्रतिशत घरों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करें। 

    महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए जिले में कुपोषण को दूर करने हेतु स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से अभियान चलाने की बात कही गई। स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान जिले में स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति की जानकारी लेते हुए मलेरिया मुक्त अभियान के लिए जनजागरुकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।  जिले में शिक्षा विभाग के स्कूल भवनों की स्थिति की गहन समीक्षा की गई और मरम्मत और नए भवन हेतु प्रस्ताव भेजने को कहा गया। साथ आश्रम छात्रावासों में सभी व्यवस्था दुरुस्त करने तथा कन्या छात्रावासों में सीसीटीवी और महिला सुरक्षा गार्ड एवं स्वास्थ्य कर्मी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। जनप्रतिनिधि भी आश्रम छात्रावासों का नियमित निरीक्षण करें।

    बैठक में इसके अलावा मनरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन,  लखपति दीदी, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, संसद आदर्श ग्राम, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान,  भारत नेट, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, ग्राम सड़क योजना, केशकाल बायपास  सहित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।

  • मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों के विकास के लिए योजना तैयार, उप मुख्यमंत्री ने दी दिशा

    भोपाल

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर तथा गजरा राजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर एवं जय आरोग्य अस्पताल के उन्नयन एवं विस्तार योजना की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि चिकित्सकीय आवश्यकताओं और भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेजों और संबद्ध अस्पतालों का विस्तार एवं उन्नयन आवश्यक है। इसके लिए ठोस और व्यवहारिक योजना शीघ्र तैयार की जाये, ताकि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने वर्तमान आधारभूत संरचनाओं की स्थिति का आकलन करने के लिए निर्माण एजेंसी और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम गठित कर विस्तृत निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर प्रस्ताव को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाये।

    ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज और जय आरोग्य हॉस्पिटल की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सीसीएचबी का उन्नयन कर इसे 200 बेड क्षमता का बनाया जाये। उन्होंने निर्देश दिए कि छात्रावास एक ही परिसर में निर्मित हों और उपलब्ध स्पेस का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने एमपीबीडीसी द्वारा तैयार किए गए विस्तार और पुनर्विकास मॉडल का अवलोकन भी किया और आवश्यक सुझाव दिए।

    जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचन्द्र बोस मेडिकल कॉलेज की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की क्षमता 240 से बढ़ाकर 400 बेड की जाये। उन्होंने अस्पताल की कुल क्षमता को 1000 बेड तक विस्तार करने के निर्देश दिए। साथ ही चिकित्सकों और कार्मिकों के लिए आवासीय ब्लॉकों के निर्माण को भी योजना में शामिल करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अधोसंरचना विकास के साथ उसके रख-रखाव की व्यवस्था को भी प्रस्तावित योजना में सुनिश्चित किया जाये। बैठक में संचालक (प्रोजेक्ट) लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा नीरज कुमार सिंह, एमडी एमपीबीडीसी सिबी चक्रवर्ती सहित पीआईयू और एमपीबीडीसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • स्वदेशी चिप्स से भारत की नई चमक, CM विष्णु देव साय ने किया जोर

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के अनुरूप आज भारत ने तकनीक के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है। Semicon India 2025 सम्मेलन में देश का पहला स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर ‘विक्रम’ लॉन्च किया गया है। यह उपलब्धि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार क्षमता का सशक्त प्रमाण है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘विक्रम’ प्रोसेसर का निर्माण पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। यह प्रोसेसर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के स्पेस लॉन्च व्हीकल्स के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इससे न केवल भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी को मजबूती मिलेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत अपनी तकनीकी श्रेष्ठता का परिचय देगा।

    मुख्यमंत्री साय ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की दृढ़ इच्छाशक्ति और निर्णायक नेतृत्व का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में भारत ने अर्धचालक निर्माण (Semiconductor Manufacturing) के क्षेत्र में जिस तीव्रता से प्रगति की है, वह विकसित भारत की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि भारत की युवा इंजीनियरिंग प्रतिभा और वैज्ञानिक समुदाय की मेहनत का भी परिणाम है। आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के अनुरूप स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर का निर्माण यह संदेश देता है कि भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता और वैश्विक तकनीकी नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को यह सफलता और अधिक गति प्रदान करेगी। स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान बल्कि रक्षा, संचार और अन्य उच्च तकनीकी क्षेत्रों में भी उपयोगी सिद्ध होगा। यह भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव जी को हार्दिक बधाई और अभिनंदन दिया। उन्होंने कहा कि यह सफलता स्वर्णिम भारत की नई पहचान है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

  • मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से नई दिल्ली में मुलाकात की

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से की सौजन्य भेंट

    नक्सल उन्मूलन अभियान और बस्तर में राहत कार्यों की दी जानकारी

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान एवं विकास कार्यों से संबंधित जानकारी साझा की।

    मुख्यमंत्री साय ने बताया कि दिसंबर 2023 से अब तक सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति के परिणामस्वरूप 453 माओवादी न्यूट्रलाइज हुए हैं, 1616 गिरफ्तार किए गए हैं और 1666 ने आत्मसमर्पण किया है। इस अवधि में 65 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं। सड़क, पुल-पुलिया और मोबाइल नेटवर्क जैसी आधारभूत सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार हुआ है।

    मुख्यमंत्री साय ने बस्तर में आई बाढ़ और चल रहे राहत कार्यों की जानकारी भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को दी। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवार तक मदद पहुंचाना और उनका पुनर्वास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में नक्सल उन्मूलन के साथ ही विकास और शांति की स्थापना के लिए हमारी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

  • चतुर्थ समयमान वेतन का लाभ अब नागरिक आपूर्ति निगम के कर्मचारियों को भी

    भोपाल
    राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के कर्मचारियों को भी चतुर्थ समयमान वेतनमान मिलेगा। गृह भाड़ा भत्ता सरकार द्वारा घोषित दरों के अनुसार दिया जाएगा। सेवा में रहते हुए मृत्यु होने पर स्वजन को अनुग्रह राशि अब अधिकतम सवा लाख रुपये तक दी जाएगी।

    निगम में सेवा पदोन्नति नियम-2025 का भी प्रविधान किया जाएगा। यह निर्णय मंगलवार को मंत्रालय में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की अध्यक्षता में हुई निगम के संचालक मंडल की बैठक में लिया गया।

    विभागीय मंत्री ने बताया कि भंडार गृहों की निगरानी के लिए एप बनाने का निर्णय लिया गया है। इससे भंडारित अनाज की मात्रा, गुणवत्ता, आदि का सत्यापन किया जा सकेगा। अधिकारी भंडार गृह का निरीक्षण करने का फोटो ऐप में अपलोड करेंगे। जियो टैगिंग भी रहेगी। बैठक में धान का उपार्जन शुरू होने के पहले सभी भंडार गृहों का रखरखाव सुनिश्चित करने, रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया को समय-सीमा में पूरा करने और दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों का परीक्षण गंभीरता से करने के निर्देश दिए गए।

    उपार्जन में सक्रिय योगदान करने वालों को प्रोत्साहन राशि
    उपार्जन कार्य में सक्रिय योगदान के आधार पर निगम के अधिकारी और कर्मचारियों को एक माह का मूल वेतन प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाएगा। जो महाप्रबंधक थर्ड पार्टी इन्सपेक्शन की कार्रवाई समय पर नहीं कर रहे हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। खाद्य भवन के निर्माण समय-सीमा में पूरा कराया जाए।

  • कान्हा सफारी में नहीं लगेगी लंबी लाइन, ऑनलाइन टिकट और नया गेट से होगी एंट्री

    मंडला 
     दुनियाभर में बाघों के आशियाने के लिए मशहूर और मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व कान्हा नेशनल पार्क में अब पर्यटकों की एंट्री के लिए एक और गेट तैयार. बारिश के बाद 01 अक्टूबर से फिर से नेशनल पार्क शुरू होगा तो पर्यटकों को ये सुविधा मिलेगी. अभी एकमात्र गेट से ही पर्यटकों को प्रवेश दिया जाता था. दूसरा गेट ज्यादा सुविधाजनक है. नेशनल पार्क के इस फैसले से स्थानीय लोगों के साथ ही, जिप्सी सफारी संचालकों, गाइड और होम स्टे संचालकों में खुशी की लहर है. अब पर्यटक कान्हा की सुंदर वादियों समेत वन्य जीवों खासकर टाइगर्स का दीदार इस गेट से भी कर सकेंगे. इससे यहां रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

    अब खटिया गेट के साथ ही सरही गेट भी खुला रहेगा

    गौरतलब है कान्हा नेशनल पार्क में अभी तक तक खटिया गेट से ही पर्यटकों को प्रवेश दिया जाता था. लेकिन अब सरही गेट से भी पर्यटकों को प्रवेश दिया जा सकता है. प्रबंधन के इस फैसले से खुश होकर होम स्टे संचालकों के साथ सफारी करवाने वाले व गाइड ने एक साथ मिलकर नेशनल पार्क के फील्ड मैनेजर को धन्यावाद पत्र सौंपा. इन संचालकों का कहना है कि वर्ष 2008 से सरही गेट की शुरुआत हुई थी लेकिन टिकट और अन्य ऑनलाइन बुकिंग खटिया गेट से की जाती थी, जिससे हमारा रोजगार प्रभावित हो रहा था.

    दूसरे गेट से एंट्री की परमिशन मिलते ही खुशी की लहर

    गाइड के साथ ही जिप्सी संचालकों, होम स्टे संचालकों का कहना है कि वे लोग तभी से आर्थिक रूप से परेशान थे. सरही होमस्टे के संचालक दीपक यादव ने बताया "अब कान्हा नेशनल पार्क के ऑनलाइन पोर्टल में सरही गेट को भी शामिल किया गया. इससे लोगों को रोजगार तो मिलेगा ही, साथ ही जंगल की सुरक्षा भी होगी." कान्हा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर रविन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया "कुछ समय से मांग हो रही थी सरही गेट के वाहन भी दूसरे गेट जैसे खटिया गेट से ही जाते थे. सरही गेट के गाइड औऱ जनप्रतिनिधियों की मांग थी कि जो वाहन इस गेट के हैं, उनका प्रवेश इसी गेट से किया जाए. इसे अनुमति दे दी गई है." 

    दुनिया में क्यों मशहूर है कान्हा टाइगर रिजर्व

    गौरतलब है कि बाघों के दीदार और इनकी आबादी के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में पहला स्थान रखता है. कान्हा टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या देश में सबसे ज्यादा है. कान्हा टाइगर रिजर्व में चीतल, गौर, सांभर, बार्किंग डीयर सहित कई अन्य शाकाहारी जानवरों की संख्या सबसे ज्यादा है. इस बात को वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में दर्शाया गया था. रिपोर्ट में ये भी बताया गया था कि कान्हा टाइगर रिजर्व की जैवविविधता सबसे बेहतर है. इसके साथ ही कान्हा टाइगर पूरी दुनिया में बाघों के लिए विख्यात है. यहां देश के साथ ही विदेश से भी लोग बाघों का दीदार करने आते हैं. यहां जंगल सफारी का अलग ही क्रेज है.

    2074 वर्ग किमी में फैला है कान्हा टाइगर रिजर्व

    कान्हा नेशनल टाइगर रिजर्व का कोर और बफर एरिया का विस्तार 2074.31 वर्ग किलोमीटर तक है. यहां बाघों के अलावा बाराहसिंघा, सांभर, चीतल, गौर, बार्किंग डीयर, लंगूर, जंगली सूअर समेत कई वन्य प्राणियों की संख्या अधिक है. चूंकि यहां शाकाहारी जानवरों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए मांसाहारी जानवरों के लिए खासकर बाघों के लिए ये नेशनल पार्क सबसे उपयुक्त माना गया है. यहां के वन्य प्राणियों खासकर बाघों का दीदार करने के लिए फिल्मी सितारे और अन्य सेलिब्रिटी लगातार आते रहते हैं. मशहूर किक्रेटर महेंद्र सिंह धोनी और अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा जैसे कई नामचीन लोग यहां का दौरा कर चुके हैं.

    कान्हा टाइगर रिजर्व में कुल 3 गेट, अब 2 गेट से एंट्री

    कान्हा नेशनल पार्क में मुख्य रूप से तीन एंट्री गेट हैं. मैन गेट खटिया है. इसके साथ ही मुक्की और सरही गेट हैं. खटिया गेट जबलपुर से आने वालों के लिए सुविधाजनक है, जबकि मुक्की गेट रायपुर और नागपुर से आने वालों के लिए बेहतर है. अभी तक खटिया गेट से ही लोगों को एंट्री मिलती थी लेकिन अब सरही गेट से 01 अक्टूबर से पर्यटकर प्रवेश कर सकेंगे. सरही गेट शुरू होने से विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले पर्यटकों को घूमकर खटिया गेट जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

    कैसे पहुंचें कान्हा नेशनल चाइगर पार्क

    गौरतलब है कि ये नेशनल पार्क अन्य टाइगर रिजर्व की तरह ही 1 अक्टूबर से 30 जून तक खुला रहता है. बारिश के मौसम में ये बंद रहता है. ये टाइगर रिजर्व मंडला और बालाघाट जिलों में स्थित है. कान्हा नेशनल पार्क जबलपुर, खजुराहो, नागपुर, मुक्की और रायपुर से सड़क के माध्यम से सीधा जुड़ा हुआ है. दिल्ली से राष्ट्रीय राजमार्ग 2 से आगरा, राष्ट्रीय राजमार्ग 3 से ब्यावरा, राष्ट्रीय राजमार्ग 12 से भोपाल के रास्ते जबलपुर पहुंचा जा सकता है. राष्ट्रीय राजमार्ग 12 से मांडला जिला रोड से कान्हा पहुंचा जा सकता है. 

  • ग्रामीणों को मिला रोजगार का नया साधन, दरिमा में 35 लोगों ने सीखा निर्माण कार्य का कौशल

    अम्बिकापुर

    ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार निर्मित करने की दिशा में सरगुजा जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। अंबिकापुर के दरिमा ग्राम पंचायत में जिला प्रशासन एवं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के संयुक्त तत्वावधान में 30 दिवसीय राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण में 16 महिलाओं को रानी मिस्त्री तथा 19 पुरुषों को राजमिस्त्री का हुनर सिखाया गया। कुल 35 प्रतिभागियों ने व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान अर्जित किया।

    आयोजित समापन समारोह में कलेक्टर श्री विलास भोसकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार, अग्रणी बैंक प्रबंधक श्री विकास यादव, सेंट्रल बैंक के रिजनल हेड श्री रणधीर सिंह, आरसेटी डायरेक्टर श्री श्याम किशोर गुप्ता, जनपद पंचायत सीईओ श्री राजेश सेंगर, साक्षर भारत जिला परियोजना अधिकारी श्री गिरीश गुप्ता और प्रशिक्षण समन्वयक सुश्री तमना निशा मौजूद रहीं।

    समापन समारोह में कलेक्टर श्री भोसकर ने प्रशिक्षार्थियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनके अनुभव और सीखी गई तकनीकों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक प्रशिक्षण से कार्यकुशलता बेहतर होती है। इससे न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि काम की गुणवत्ता और गति भी सुधरती है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आपके पंचायत में सर्वाधिक आवास स्वीकृत हुए हैं। इन्हें समय पर पूरा करना अब आपकी जिम्मेदारी है। यह प्रशिक्षण आपको केवल श्रमिक नहीं, बल्कि कुशल मिस्त्री बनाता है। इस प्रशिक्षण से गांव में ही पर्याप्त काम और सम्मानजनक आमदनी का अवसर मिलेगा।

    प्रशिक्षणार्थियों ने बताया कि पहले वे सामान्य मजदूरी करते थे, लेकिन प्रशिक्षण के बाद उन्होंने नाप-जोख, ईंट की चिनाई, प्लास्टरिंग, लेवलिंग, लेआउट और भवन निर्माण की नई तकनीकें सीखीं। अब वे आत्मविश्वास के साथ स्वयं को कुशल राजमिस्त्री कह सकते हैं।

    समापन कार्यक्रम के अवसर पर सभी प्रतिभागियों को राजमिस्त्री के टूल किट भी वितरित किए गए। इनमें भवन निर्माण कार्य हेतु आवश्यक औजार शामिल थे।

    इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण अब अपने सीखे हुए कौशल का उपयोग स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्यों में करेंगे। इससे न केवल उन्हें रोजगार मिलेगा, बल्कि गांव की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। जिला प्रशासन की इस पहल ग्रामीण आत्मनिर्भर और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

  • हमीदिया और जेपी अस्पताल: 9 तरह के जानवरों के काटने के केस, रेबीज से बचाव केवल वैक्सीन

    भोपाल 

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह एडवाइजरी जारी की है। दूसरी ओर, भोपाल में साल 2025 के शुरुआती 6 माह में 13 हजार से अधिक लोगों को 9 तरह के जानवरों ने काटा है।यह उन लोगों की संख्या है जो एनिमल बाइट के बाद इलाज के लिए जेपी अस्पताल या हमीदिया अस्पताल पहुंचे थे। इनके अलावा एक बड़ी संख्या उन मरीजों की भी है, जो रिपोर्टेड नहीं हुए यानी इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में गए। जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने कहा- रेबीज 100% रोकी जा सकने वाली बीमारी है। कई लोग काटने को हल्के में लेते हैं और वैक्सीन नहीं लगवाते। यही लापरवाही मौत का कारण बन सकती है। अस्पताल में पर्याप्त संख्या में एंटी रेबीज वैक्सीन मौजूद है।

    सबसे ज्यादा कुत्तों के काटने के मामले साल 2025 में जून माह तक जेपी और हमीदिया अस्पतालों में कुल 12,078 पुरुष और 9,286 महिलाएं एनिमल बाइट का शिकार बनीं। इनमें से सबसे ज्यादा मामले कुत्तों के काटने के सामने आए। अकेले कुत्तों के काटने के 10,848 पुरुष और 8,497 महिलाएं रिपोर्ट हुईं, यानी कुल मिलाकर 19 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि रेबीज संक्रमण का सबसे बड़ा खतरा कुत्तों से ही है।

    बंदर, चमगादड़ और अन्य जानवर भी बने खतरा कुत्ते और बिल्लियों के बाद भी कई अन्य जानवर इंसानों को काटने के मामलों में सामने आए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, बंदरों के काटने के 213 केस दर्ज हुए, जबकि चूहों के काटने के 249 मामले सामने आए। इसके अलावा चमगादड़ (10 केस), गिलहरी (16 केस) और खरगोश (5 केस) के मामले भी रिपोर्ट हुए। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बाइट कम संख्या में भले हों, लेकिन संक्रमण का खतरा इनमें भी उतना ही गंभीर रहता है।

    रेबीज मौतों का 36% हिस्सा अकेले भारत से WHO के अनुसार, रेबीज एक टीके से रोकी जा सकने वाली वायरल बीमारी है, जो दुनिया के 150 से अधिक देशों और क्षेत्रों में पाई जाती है। भारत रेबीज से प्रभावित देशों में शामिल है। विश्व भर में होने वाली रेबीज मौतों का लगभग 36 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत से सामने आता है।

    भारत में रेबीज का वास्तविक बोझ पूरी तरह ज्ञात नहीं है, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हर साल लगभग 18,000 से 20,000 मौतें इस बीमारी के कारण होती हैं। रिपोर्टेड मामलों और मौतों में से 30 से 60% पीड़ित बच्चे (15 वर्ष से कम आयु) होते हैं। अक्सर बच्चों को काटे जाने की घटनाएं नजरअंदाज या रिपोर्ट नहीं की जातीं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

    2024 में डॉग बाइट के 37 लाख केस, 54 मौतें जुलाई माह में लोकसभा में एक लिखित उत्तर में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने जानकारी दी कि कुत्तों के काटने और संदिग्ध मानव रेबीज से हुई मौतों का आंकड़ा राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एकत्र किया जाता है।

    यह आंकड़े राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) संकलित करता है। एनसीडीसी के आंकड़ों के मुताबिक- वर्ष 2024 में कुल 37,17,336 कुत्तों के काटने के मामले सामने आए, जबकि संदिग्ध मानव रेबीज से कुल 54 मौतें दर्ज की गईं।

    3 माह तक वायरस रह सकता है निष्क्रिय रेबीज किसी व्यक्ति के शरीर में 1 से 3 महीने तक निष्क्रिय रह सकता है। इसका सबसे पहला संकेत है बुखार का आना है। फिर घबराहट होना, पानी निगलने में दिक्कत होना, लिक्विड के सेवन से डर लगना, तेज सिरदर्द, घबराहट होना, बुरे सपने और अत्यधिक लार आना शामिल हैं।

    एंटी रेबीज वैक्सीन वायल की खपत बढ़ी राजधानी में साल 2020 से 21 में 5 हजार 523 एंटी रेबीज वैक्सीन वायल की खपत हुई थी। जो साल 2021 से 22 में बढ़कर 7415 और साल 2022 से 23 में 10446 हो गई। इसके अलावा साल 2020 से 21 में केवल 5 वायल रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की खपत हुई थी। जो 2021 से 22 में बढ़कर 51 और साल 2023 से 24 में 65 वायल तक पहुंच गई है।

  • निवेश एवं सर्वांगीण विकास पर होगा फोक्स- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    नई बजटिंग प्रणाली से होगा मध्यप्रदेश का सर्वांगीण विकास- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट वाला पहला राज्य बनेगा मध्यप्रदेश

    निवेश एवं सर्वांगीण विकास पर होगा फोक्स- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से औद्योगिकीकरण और विकास की नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार का फोकस केवल आर्थिक वृद्धि पर ही नहीं, बल्कि रोज़गार सृजन, आधारभूत संरचना निर्माण और सामाजिक न्याय पर भी है। इसी दिशा में सरकार ने मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये बजट को अगले 5 वर्ष में दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इससे हर क्षेत्र में निवेश और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति मिलेगी। साथ ही बढ़ते बजट   प्रावधान में विभागों के बजट पर अनुशासन लगाने की महत्वपूर्ण पहल भी की जा रही है।

    इसी कड़ी में अब राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक विकास की ठोस रणनीति तैयार करते हुए शून्य आधारित बजटिंग (Zero Based Budgeting) और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि यह पहल “विकसित मध्यप्रदेश 2047” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में ठोस आधार बनेगी और देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श साबित होगी। देवड़ा ने कहा “शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट से न केवल प्रदेश की योजनाओं का ठोस मूल्यांकन होगा, बल्कि प्रत्येक खर्च का सीधा संबंध समाज की आवश्यकताओं और राज्य की प्राथमिकताओं से जोड़ा जा सकेगा। यह कदम मध्यप्रदेश को विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश 2047 की दिशा में सबसे मजबूत आधार प्रदान करेगा।”

    महत्वपूर्ण है यह पहल

    अब तक अधिकांश राज्यों में पारंपरिक बजटिंग पद्धति लागू होती रही है, जिसमें पिछले वर्षों का व्यय आधार बनते थे। इसके विपरीत 'जीरो बेस्ड बजटिंग' में हर योजना को शून्य से शुरू कर उसकी उपयोगिता सिद्ध करनी होगी। इससे अप्रभावी योजनाएँ स्वतः समाप्त होंगी और संसाधनों का इष्टतम उपयोग संभव होगा।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने इस प्रणाली को अपनाया है, जहाँ इससे गुड गवर्नेंस और फाइनेंशियल डिसिप्लिन को मजबूती मिली है। अब मध्यप्रदेश इस दिशा में भारत में अग्रणी राज्य बनकर अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल पेश कर रहा है।

    रोलिंग बजट से लगातार “फॉरवर्ड लुकिंग” दृष्टि

    रोलिंग बजट पद्धति से 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लिए बजट बनेगा और हर वर्ष इसकी समीक्षा कर नए अनुमानों को जोड़ा जाएगा। इससे योजनाएँ हमेशा आगे की ओर देखने वाली होगी और अल्पकालिक दबाव से मुक्त होकर दीर्घकालिक विकास को गति मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल कॉर्पोरेट जगत में पहले से सफल साबित हो चुका है, और राज्य शासन में इसे लागू करना नीतिगत दूरदर्शिता का प्रतीक है।

    वित्तीय अनुशासन और सामाजिक न्याय

    वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 16% और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 23% बजट सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही वेतन, पेंशन , भत्तों की गणना में पारदर्शिता हेतु नई गाइडलाइन लागू होंगी। इसके अतिरिक्त ऑफ-बजट व्यय और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के वित्तीय प्रभाव को भी अब राज्य बजट में समाविष्ट किया जाएगा। यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन के साथ जनहित में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।

    राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महत्व

    देश के अन्य राज्यों में अभी भी पारंपरिक बजटिंग पद्धति पर निर्भरता बनी हुई है। मध्यप्रदेश का यह निर्णय वित्तीय सुधारों की दिशा में गेम-चेंजर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में केंद्र और अन्य राज्य भी इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

  • सीएम यादव आज करेंगे उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा, टेक्सटाइल सेक्टर मुख्य विषय

    भोपाल 

     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज तीन सितंबर को दिल्ली में होने वाले "इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन पीएम मित्रा पार्क" के इंटरैक्टिव सेशन में शामिल होंगे। इस अवसर पर केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह भी मौजूद रहेंगे। इंटरैक्टिव सेशन में टेक्सटाइल सेक्टर के निवेशकों और नीति-निर्माताओं की मौजूदगी में मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श होगा। केन्द्रीय मंत्री सिंह भारत के टेक्सटाइल सेक्टर की बढ़ती वैश्विक भूमिका और पीएम मित्रा पार्क की अहमियत पर अपने विचार रखेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों के साथ वन-टू-वन मीटिंग कर राज्य में उपलब्ध अधोसंरचना, नीतिगत सहयोग और नए अवसरों की जानकारी देंगे। साथ ही टेक्सटाइल हब के रूप में पहचान बना रहे मध्य प्रदेश की विशेषताओं से निवेशकों को अवगत कराएंगे। मुख्यमंत्री द्वारा यह भी बताया जाएगा कि कैसे पीएम मित्रा पार्क प्रदेश की औद्योगिक तस्वीर को बदलने वाला साबित होगा और रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों और उद्योगपतियों के साथ टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश संबंधी प्रस्तावों और संभावनाओं पर भी संवाद करेंगे।

    इंटरैक्टिव सेशन में वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी केंद्रीय योजनाओं और टेक्सटाइल क्षेत्र में बढ़ते वैश्विक अवसरों पर जानकारी देंगे। मध्य प्रदेश के उद्योग विभाग और टेक्सटाइल विभाग के अधिकारियों द्वारा निवेशकों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध संसाधनों, क्लस्टर आधारित विकास और विशेष पैकेज का प्रेजेंटेशन दिया जाएगा। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव और वस्त्र मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव रोहित कंसल भी अपने विचार साझा कर टेक्सटाइल उद्योग में नई संभावनाओं और केंद्र सरकार की नीतियों की जानकारी देंगे।

    मध्यप्रदेश के प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेन्द्र सिंह टेक्सटाइल सेक्टर में मध्य प्रदेश की नीतिगत पहल, निवेश प्रोत्साहन योजनाओं और औद्योगिक परिदृश्य की विस्तृत जानकारी देंगे। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में प्रस्तावित पीएम मित्रा पार्क आधुनिक टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से युक्त एकीकृत हब के रूप में विकसित किया गया है। यह पार्क कपड़ा उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार सृजन का आधार बनेगा।

     

  • एमपी के शिक्षकों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, 2 साल में TET पास करना हुआ अनिवार्य

    भोपाल 

    सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को लेकर नये नियम का फैसला सुना दिया है। जिसके बाद अकेले एमपी में तीन लाख शिक्षकों की चिंता बढा़ दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि जिनकी सेवा अवधि पांच साल से ज्यादा बाकी है, उन्हें दो साल में TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की परीक्षा पास करनी होगी। अगर इस नियम को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इनके प्रमोशन से लेकर नौकरी तक का अधिकार संकट में पड़ सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का सबसे ज्यादा असर भी मध्य प्रदेश के शिक्षकों पर पड़ेगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए ये निर्देश जारी किए हैं। बता दें कि इससे पहले नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने शिक्षकों को TET परीक्षा पास करने के लिए पांच साल का समय दिया था। इसे बाद में 4 साल के लिए और बढ़ाया गया था। NCTE के इस निर्णय के खिलाफ उम्मीद्वारों ने कोर्ट का रुख किया था।

    एमपी के शिक्षकों पर क्यों लटकी तलवार?

    दरअसल, 1984-1990 तक एमपी में शिक्षकों की भर्ती (Teachers Appointment) मिनी पीएससी के माध्यम से की जाती थी। बाद में इनकी नियुक्ति का अधिकार नगर निगम और पंचायतों को मिल गया। इस प्रक्रिया के तहत नियुक्त किए गए शिक्षकों को तब शिक्षाकर्मी कहा जाने लगा। वहीं 2018 में इनका संविलियन अध्यापकों के रूप में हुआ। लेकिन इनमें से किसी ने भी टेट पात्रता परीक्षा पास नहीं की है। 2018 के बाद से प्रदेशभर के शिक्षकों की भर्ती कर्मचारी चयन मंडल कर रहा है। इस नियुक्ति के तहत ही TET परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया।

    TET नहीं तो जाएगी नौकरी, नहीं होगा प्रमोशन

    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शिक्षकों को सेवा में बने रहने और प्रमोशन पाने के लिए TET परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा जिन शिक्षकों की सेवाएं अभी पांच साल से ज्यादा अवधि तक बची हैं, वे सभी इस दायरे में आते हैं। जो भी शिक्षक इस परीक्षा को पास नहीं करेगा, उसे कंपलसरी रिटायरमेंट लेना होगा या इस्तीफा देना होगा। कोर्ट ने टीईटी को दो साल में पास करने की समय सीमा तय कर दी है।

    इन्हें मिली राहत

    हालांकि बेंच ने ऐसे शिक्षकों को राहत दी है, जिनकी नौकरी 5 साल की बची है। लेकिन इन्हें प्रमोशन का अधिकार नहीं मिलेगा। लेकिन यदि ये शिक्षक प्रमोशन चाहते हैं, तो इन्हें TET परीक्षा पास करनी होगी।

    अल्पसंख्यक संस्थानों का मामला बड़ी बेंच को सौंपा

    इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक संस्थानों को लेकर फिलहाल इस नियम को लागू करने से राहत दी है। इन संस्थानों के लिए ये मामला बड़ी बेंच को सौंप दिया गया है। 2014 के फैसले में अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई से बाहर रखने पर सवाल उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि इससे समान और समावेशी शिक्षा को नुकसान पहुंचा है। कई दस्तावेजों से यह जानकारी मिली है कि स्कूल छूट पाने के लिए खुद को अल्पसंख्यक घोषित कर रहे हैं। जिससे बच्चों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।

    क्यों बदला नियम?

    अब तक कई राज्यों में, खासकर अल्पसंख्यक स्कूलों में, टीईटी की अनिवार्यता को दरकिनार किया जाता रहा था। 2014 में सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश ने अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई (शिक्षा का अधिकार कानून) से बाहर रखा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश में साफतौर पर कहा गया है कि आरटीई की छूट अब खत्म, यानी सभी स्कूलों को एक ही मानक पर खड़ा होना होगा। इस फैसले का सीधा मतलब है कि शिक्षण की गुणवत्ता पर अब कोई समझौता नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि 'बच्चों का शिक्षा पाने का अधिकार सर्वोपरि है। शिक्षकों को यह साबित करना होगा कि वे इस जिम्मेदारी के योग्य हैं।'

    किस पर लागू होगा फैसला?

     

    •     जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से ज्यादा बची है, उन्हें अगले दो साल में टीईटी पास करना ही होगा।
    •     जिनकी सेवा पांच साल से कम बची है, उन्हें छूट दी गई है। लेकिन प्रमोशन पाना है तो TET पास करना होगा।
    •     नगर निगम, पंचायत और अल्पसंख्यक स्कूलों के शिक्षक, सभी को इस दायरे में लाया गया है।
    •     लेकिन फिलहाल अल्पसंख्यक स्कूलों में इसे लागू नहीं किया गया है। अल्पसंख्यक स्कूल मामलों को बड़ी बेंच को सौंपा गया है।

    तीन लाख शिक्षकों पर संकट

    मध्यप्रदेश में ही करीब 3 लाख शिक्षक इस आदेश से सीधे प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से कई ऐसे हैं जो दो दशक से ज्यादा समय से पढ़ा रहे हैं, लेकिन कभी पात्रता परीक्षा देने की जरूरत महसूस नहीं की। अब वही शिक्षक नौकरी बचाने की चुनौती के सामने खड़े हैं।

    अब नौकरी बचाने पास करनी होगी TET

    भोपाल की एक शिक्षिका वंदना सिंह का कहना है कि हमने वर्षों तक बच्चों को पढ़ाया है, जब यहां TET पास करना अनिवार्य किया, तभी TET परीक्षा पास कर ली थी। अब ऐसे शिक्षक जिन्होंने TET पास नहीं की उन्हें नौकरी बचाने के लिए परीक्षा देनी पड़ेगी। यह आसान नहीं है, लेकिन मजबूरी है।

    गुणवत्ता सुधार की पहल

    • -सरकार और शिक्षा विशेषज्ञ इस फैसले को गुणवत्ता सुधार के नजरिए से देख रहे हैं।
    • -अब हर शिक्षक को अपनी योग्यता साबित करनी होगी।
    • -पढ़ाई में प्रोफेशनलिज़्म बढ़ेगा।
    • -बच्चों को प्रशिक्षित और दक्ष शिक्षक मिलेंगे।
    • शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भले ही शिक्षकों के लिए मुश्किल हो, लेकिन लंबे समय में यह स्कूल शिक्षा की रीढ़ को मजबूत करेगा।

    शिक्षक समुदाय की चिंता

    फैसले के बाद कई शिक्षक संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले से सेवा कर रहे शिक्षकों को अचानक परीक्षा में झोंकना अन्यायपूर्ण है। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार इसके लिए विशेष ट्रेनिंग, कोचिंग और सपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराए ताकि, वे दोबारा पढ़ाई में सक्षम हो सकें।

    फेल हुए तो जाएगी नौकरी, सफल हुए तो नई पहचान

    यह फैसला अब सिर्फ नियम नहीं, बल्कि नौकरी और भविष्य की लड़ाई बन गया है। जिन शिक्षकों ने सालों तक बिना टीईटी पढ़ाया, उन्हें अब परीक्षा देनी होगी। असफल होने पर उन्हें रिटायरमेंट तक नौकरी का अवसर नहीं मिलेगा। सफल होने पर यह उनके लिए नई पहचान और आत्मविश्वास का मौका होगा।

  • सिंहस्थ के लिए बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर कदम: इंदौर-उज्जैन रोड पर ग्रीन फील्ड मार्ग

    भोपाल
    मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में अहम फैसले लिए गए। तय हुआ कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में नल से शुद्ध जल पहुंचने के लिए लागू जल जीवन मिशन में अब पुनरीक्षित परियोजनाओं के लिए केंद्रांश ना मिलने के कारण पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। 8,358 पुनरीक्षित परियोजनाओं के लिए 2,813 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे इन परियोजनाओं से जुड़े सात लाख परिवारों को लाभ मिलेगा। यह प्रस्ताव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने रखा था, जिसके स्वीकृति दी गई।

    87 हजार करोड़ से अधिक की मिल चुकी है स्वीकृति
    26 सितंबर 2023 को प्रदेश के संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन का निर्णय लिया गया था। अब तक प्रदेश में 20,765 करोड़ रुपये की लागत की 27,990 एकल ग्राम नल जल योजना और 60,786 करोड़ रुपये लागत वाली 148 समूह जल प्रदाय योजनाओं की स्वीकृति दी गई हैं।
     
    15,947 एकल ग्राम योजनाएं पूरी हो चुकी हैं और शेष 12,043 के काम विभिन्न चरणों में हैं। विभिन्न कारणों से 8,358 योजनाओं के पुनरीक्षण की आवश्यकता हुई है। यदि पुनरीक्षण नहीं किया जाता है तो सात लाख परिवार घरेलू नल कनेक्शन से वंचित रह जाएंगे। इसे देखते हुए पुनरीक्षित लागत 9,027 करोड़ रुपये की स्वीकृति देने की अनुशंसा स्थायी वित्त समिति ने की। मूल स्वीकृत लागत 6,213.76 करोड़ रुपये है और जो वृद्धि हो रही है, वह राशि केंद्र सरकार से प्राप्त नहीं होगी, इसलिए 2,813.21 करोड़ रुपये का भार प्रदेश सरकार वहन करेगी।
     
    इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग पर फोरलेन, सर्विस रोड भी दिसंबर 2024 में स्वीकृत
        इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग (48.05 किमी) अब सर्विस रोड के साथ बनेगा। इसमें 34 अंडर पास, दो फ्लाइ ओवर, एक रेलवे ओवर ब्रिज, सात मध्यम पुल के साथ दो बड़े जंक्शन बनाए जाएंगे।
        परियोजना की लागत 2935.15 करोड़ रुपये आएगी। निर्माणकर्ता एजेंसी को 15 साल तक इसका रखरखाव करना होगा। यह मार्ग 2028 में होने वाले सिंहस्थ की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।
        साथ ही उज्जैन शहर में हरिफाटक रेलवे क्रासिंग पर 980 मीटर लंबाई के नए फोर लेन रेलवे ओवर ब्रिज (लागत 371 करोड़) निर्माण की स्वीकृति भी दी गई।

    दो लेन का बनेगा नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग
    नर्मदापुरम-टिमरनी (72.18 किलोमीटर) मार्ग का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी माडल पर करने की स्वीकृति दी गई। परियोजना में दो अंडर पास, चार बड़े पुल, 37 मध्यम पुल, 14 वृहद और 52 मध्यम जंक्शन निर्माण प्रस्तावित हैं। मार्ग निर्माण की लागत 972 करोड़ आएगी। कंपनी को 17 वर्ष तक रखरखाव का काम करना भी होगा।

  • नई बजटिंग प्रणाली से होगा मध्यप्रदेश का सर्वांगीण विकास

    शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट वाला पहला राज्य बनेगा मध्यप्रदेश
    निवेश एवं सर्वांगीण विकास पर होगा फोक्स

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से औद्योगिकीकरण और विकास की नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार का फोकस केवल आर्थिक वृद्धि पर ही नहीं, बल्कि रोज़गार सृजन, आधारभूत संरचना निर्माण और सामाजिक न्याय पर भी है। इसी दिशा में सरकार ने मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये बजट को अगले 5 वर्ष में दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इससे हर क्षेत्र में निवेश और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति मिलेगी। साथ ही बढ़ते बजट   प्रावधान में विभागों के बजट पर अनुशासन लगाने की महत्वपूर्ण पहल भी की जा रही है।

    इसी कड़ी में अब राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक विकास की ठोस रणनीति तैयार करते हुए शून्य आधारित बजटिंग (Zero Based Budgeting) और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि यह पहल “विकसित मध्यप्रदेश 2047” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में ठोस आधार बनेगी और देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श साबित होगी। श्री देवड़ा ने कहा “शून्य आधारित बजटिंग और त्रिवर्षीय रोलिंग बजट से न केवल प्रदेश की योजनाओं का ठोस मूल्यांकन होगा, बल्कि प्रत्येक खर्च का सीधा संबंध समाज की आवश्यकताओं और राज्य की प्राथमिकताओं से जोड़ा जा सकेगा। यह कदम मध्यप्रदेश को विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश 2047 की दिशा में सबसे मजबूत आधार प्रदान करेगा।”

    महत्वपूर्ण है यह पहल
    अब तक अधिकांश राज्यों में पारंपरिक बजटिंग पद्धति लागू होती रही है, जिसमें पिछले वर्षों का व्यय आधार बनते थे। इसके विपरीत 'जीरो बेस्ड बजटिंग' में हर योजना को शून्य से शुरू कर उसकी उपयोगिता सिद्ध करनी होगी। इससे अप्रभावी योजनाएँ स्वतः समाप्त होंगी और संसाधनों का इष्टतम उपयोग संभव होगा।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने इस प्रणाली को अपनाया है, जहाँ इससे गुड गवर्नेंस और फाइनेंशियल डिसिप्लिन को मजबूती मिली है। अब मध्यप्रदेश इस दिशा में भारत में अग्रणी राज्य बनकर अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल पेश कर रहा है।

    रोलिंग बजट से लगातार “फॉरवर्ड लुकिंग” दृष्टि
    रोलिंग बजट पद्धति से 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लिए बजट बनेगा और हर वर्ष इसकी समीक्षा कर नए अनुमानों को जोड़ा जाएगा। इससे योजनाएँ हमेशा आगे की ओर देखने वाली होगी और अल्पकालिक दबाव से मुक्त होकर दीर्घकालिक विकास को गति मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल कॉर्पोरेट जगत में पहले से सफल साबित हो चुका है, और राज्य शासन में इसे लागू करना नीतिगत दूरदर्शिता का प्रतीक है।

    वित्तीय अनुशासन और सामाजिक न्याय
    वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 16% और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 23% बजट सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही वेतन, पेंशन , भत्तों की गणना में पारदर्शिता हेतु नई गाइडलाइन लागू होंगी। इसके अतिरिक्त ऑफ-बजट व्यय और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के वित्तीय प्रभाव को भी अब राज्य बजट में समाविष्ट किया जाएगा। यह व्यवस्था वित्तीय अनुशासन के साथ जनहित में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।

    राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महत्व
    देश के अन्य राज्यों में अभी भी पारंपरिक बजटिंग पद्धति पर निर्भरता बनी हुई है। मध्यप्रदेश का यह निर्णय वित्तीय सुधारों की दिशा में गेम-चेंजर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में केंद्र और अन्य राज्य भी इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।