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CG : जिला अस्पताल में 4 घंटे बिजली गुल, टॉर्च की रोशनी में हुआ इलाज …

सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में सोमवार सुबह स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई। जिला अस्पताल में करीब चार घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रहने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान अस्पताल की पूरी चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित रही और डॉक्टरों को अंधेरे में इलाज करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, सुबह अचानक बिजली गुल हो जाने के बाद जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड सहित महिला और पुरुष वार्ड पूरी तरह अंधेरे में डूब गए। स्थिति इतनी खराब हो गई कि मरीजों की पर्चियां काटने से लेकर प्राथमिक उपचार तक का काम मोबाइल फोन की टॉर्च और बैटरी लाइट के सहारे करना पड़ा। अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में इस अव्यवस्था को लेकर नाराजगी देखने को मिली।

सबसे बड़ी समस्या तब सामने आई जब बिजली कटौती के बाद भी अस्पताल का जनरेटर समय पर चालू नहीं किया जा सका। बताया जा रहा है कि जनरेटर में डीजल उपलब्ध नहीं होने के कारण वह शुरू नहीं हो पाया, जिससे पूरा अस्पताल अंधेरे में डूबा रहा। इस लापरवाही ने अस्पताल प्रबंधन की तैयारी और आपातकालीन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब चार घंटे बाद, सुबह लगभग 11 बजे जनरेटर में डीजल भरने के बाद बिजली आपूर्ति बहाल की गई, जिसके बाद अस्पताल में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो सकी। इस दौरान मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी और कई जरूरी चिकित्सा कार्य बाधित हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बिजली संकट के बीच एक एम्बुलेंस अस्पताल परिसर में पहुंची, जिसमें मरीज नहीं था बल्कि डीजल के डिब्बे लाए गए। इसके बाद ही जनरेटर को चालू किया गया और बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी।

यह दृश्य अस्पताल की व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों की पोल खोलता नजर आया। मरीजों और उनके परिजनों ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में इस तरह की लापरवाही पहली बार नहीं हुई है। उनका कहना है कि पहले भी कई बार ऐसी स्थिति बन चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस सुधार नहीं किया गया। लोगों ने मांग की है कि अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए स्थायी और मजबूत व्यवस्था लागू की जाए। इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक बात यह रही कि अस्पताल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधीक्षक (सीएमएस) से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इससे प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र में इस तरह की लापरवाही गंभीर खतरे को जन्म दे सकती है। आपातकालीन स्थिति में यदि जनरेटर और बिजली दोनों काम न करें, तो मरीजों की जान पर बन सकती है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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