ब्रेकिंग न्यूज़

Kerala Election Results 2025 LIVE: LDF-UDF-BJP में कांटे की टक्कर, 2026 चुनाव का सेमीफाइनल

केरल में स्थानीय निकाय चुनावों को हमेशा विधानसभा चुनाव से पहले का “सेमीफाइनल” माना जाता है, और इस बार भी नतीजों पर पूरे राज्य की नजर टिकी हुई है। आज केरल के 244 मतगणना केंद्रों और सभी 14 जिला कलेक्ट्रेट में वोटों की गिनती चल रही है। इन नतीजों से यह साफ संकेत मिलेगा कि 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जनता का मूड किस ओर जा रहा है।

इस बार के स्थानीय निकाय चुनावों में राज्य के 6 नगर निगम, 14 जिला पंचायत, 87 नगर पालिका, 152 ब्लॉक पंचायत और 941 ग्राम पंचायतों के लिए मतदान हुआ था। राज्य निर्वाचन आयुक्त ए. शाहजहां के मुताबिक, यह चुनाव 1995 के बाद सबसे ज्यादा मतदान वाला निकाय चुनाव रहा है, जो जनता की मजबूत भागीदारी को दिखाता है।

मतदान प्रतिशत ने तोड़ा रिकॉर्ड

राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, दो चरणों में हुए इन चुनावों में दूसरे चरण में 76.08 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि पहले चरण (9 दिसंबर) में 70.91 प्रतिशत वोट पड़े थे। कुल मिलाकर देखें तो पूरे राज्य में औसतन 73.69 प्रतिशत मतदान हुआ, जो केरल की राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है।

ये भी पढ़ेंDhurandhar Box Office Collection: रणवीर सिंह की फिल्म ने 8 दिनों में 225 करोड़ का आंकड़ा किया पार

केरल निकाय चुनाव परिणाम: लाइव अपडेट्स

सुबह 9:40 बजे: कोच्चि नगर निगम में भाजपा ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। आइलैंड नॉर्थ वार्ड से भाजपा उम्मीदवार पद्मकुमारी ने कांग्रेस नेता एंटनी कुरेथारा को हराकर जीत दर्ज की।

सुबह 9:15 बजे: कन्नूर के कूथुपरम्बा क्षेत्र में भाजपा ने अपना खाता खोला। पलापरम्बा वार्ड से भाजपा उम्मीदवार रमिता ने सीपीएम की पी. श्याजा को 271 वोटों से हराया।

सुबह 9:01 बजे: वायनाड के कलपेट्टा में पुलियारमाला वार्ड से भाजपा को जीत मिली। इस वार्ड में आरजेडी नेता एम.वी. श्रेयम्स कुमार का पैतृक घर स्थित है। भाजपा के रंजीत ने आरजेडी उम्मीदवार सानुश कुमार को शिकस्त दी।

सुबह 8:45 बजे: तिरुवनंतपुरम नगर निगम में एनडीए 7 सीटों पर आगे चल रहा है। एलडीएफ 3 सीटों पर और यूडीएफ 1 सीट पर बढ़त बनाए हुए है।

2020 के नतीजों से तुलना

अगर 2020 के स्थानीय निकाय चुनावों पर नजर डालें तो उस समय सत्ताधारी एलडीएफ ने शानदार प्रदर्शन किया था। एलडीएफ ने 5 नगर निगम, 43 नगरपालिकाएं, 11 जिला पंचायतें और 514 ग्राम पंचायतें जीती थीं। वहीं यूडीएफ को कन्नूर नगर निगम के साथ-साथ 41 नगरपालिकाओं, 3 जिला पंचायतों और 321 ग्राम पंचायतों में सफलता मिली थी।

एनडीए ने भी 2020 में 3 नगरपालिकाओं और 19 ग्राम पंचायतों में जीत दर्ज कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। कासरगोड और वायनाड जिला पंचायतों में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच मुकाबला बराबरी पर रहा था, जिसे लॉटरी के जरिए सुलझाया गया था। इसमें कासरगोड एलडीएफ को और वायनाड यूडीएफ के खाते में गया था।

ये भी पढ़ेंमध्यप्रदेश का नक्सलमुक्त होने का सफर: सीएम मोहन यादव की घोषणा, बालाघाट में दो नक्सलियों के सरेंडर ने दिलाई यह सफलता

पार्टियों की रणनीति और दावे

ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, एलडीएफ को भरोसा है कि वह त्रिशूर को छोड़कर बाकी सभी नगर निगमों पर अपना कब्जा बनाए रखेगी। साथ ही उसे उम्मीद है कि मलप्पुरम, वायनाड और एर्नाकुलम को छोड़कर अधिकतर जिला पंचायतों में भी उसकी सरकार बनेगी।

दूसरी ओर, यूडीएफ ने एर्नाकुलम, त्रिशूर और कन्नूर नगर निगम के अलावा छह जिला पंचायतों और 500 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में जीत का लक्ष्य तय किया है। इनमें एर्नाकुलम, पठानमथिट्टा, वायनाड और मलप्पुरम की जिला पंचायतें खास मानी जा रही हैं।

भाजपा के लिए ये चुनाव केरल की राजनीति में अपनी जड़ें मजबूत करने का बड़ा मौका हैं। पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भाजपा को उम्मीद है कि वह तिरुवनंतपुरम और त्रिशूर नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी। खासकर लोकसभा चुनावों में त्रिशूर सीट को लेकर बने आत्मविश्वास के बाद भाजपा पूरे राज्य की नगरपालिकाओं में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर फोकस कर रही है।

कुल मिलाकर, केरल निकाय चुनावों के ये नतीजे न सिर्फ स्थानीय सत्ता की तस्वीर दिखाएंगे, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हवा का रुख भी तय करेंगे।