एक्सक्लूसिवओपिनियनछत्तीसगढ़ब्यूरोक्रेसीराजनांदगांव जिला

एक ब्रम्हास्त्र चल चुका, शेष की प्रतीक्षा है – गांवों में कांग्रेस तो शहर में भाजपा मजबूत

लोकेश शर्मा

राजनांदगांव। शहरों में तो चुनावी रंग चढ़ चुका है। पोस्टर एवं झण्डे भी रिक्शे आदि में लगने लगे हैं। चुनाव प्रचार में एक नजर में भाजपा आगे नजर आ रही है। वैसे भी भाजपा संगठन प्रचार करने के तौर तरीके बखूबी जानता है वहीं उसके स्थानीय नेता भी इस वास्तविकता को स्वीकार करके चुनाव प्रचार में भिड़ गए हैं कि जब तक डॉ. रमन सिंह राजनांदगांव से जीतते रहेंगे तब तक उसका नम्बर नहीं लगने वाला है।

यह चुनावी तासीर शहर की है लेकिन ग्रामीण अंचल में अब तक चुनावी रंगत गायब है। इसका कारण यह है क्योंकि एक तो गांव के किसान हरूनहा धान की कटाई में व्यस्त हो गए हैं वहीं शेष ग्रामीण शहर के कपड़ा, किराना, राइस मिल, दाल मिल, बड़े सायकल दुकानों एवं शहर के अन्य बिजनेस प्रतिष्ठानों में कार्य कर रहे हैं। छुट्टी होने पर शाम रात को वह अपने घर में आ पाता है। अर्थात ग्रामीण मतदाताओं से शाम – रात तक भेंट मुलाकात प्रत्याशियों से हो सकती है।  

चुनाव के लिए मतदान होने में 6-7 दिन शेष है लेकिन अब तक कांग्रेस एवं भाजपा का घोषणा पत्र नहीं आया है। यद्यपि कांग्रेस ने किसानों की कर्ज माफी का ब्रम्हास्त्र तो चला दिया है। इससे भाजपा में अफरा तफरी मची हुई है और वह इसकी काट ढूंढने में लगी हुई है। वैसे भाजपा ने 75 हजार रूपए में मकान बनाने की सुविधा मुहैय्या कराने का गुब्बारा फोड़ दिया है। संभवत: भाजपा रेत, गिट्टी, छड़ आदि स्वयं उपलब्ध कराने की कवायद में है अन्यथा दो कमरों का पक्का मकान वर्तमान में तीन लाख रूपये से कम में नहीं बन सकता। ऐसा तभी होगा जब छ.ग. में भाजपा की सरकार आएगी।  दोनों ही पार्टियां ब्रम्हास्त्र के शेष तीरों को रोककर रखे हुए है तथा घोषणा पत्र की घोषणा पहले कौन करता है, यह देखने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वह एक दूसरे की घोषणा का काट ढूंढ सकें। एक बात तो तय है कि गांव में कांग्रेस को हराना टेढ़ी खीर है तो शहर में भाजपा के बहुमत को चुनौती देना कठिन नहीं तो मुश्किल अवश्य है। देखा जा रहा है कि इस बार के चुनाव में पूर्व की तरह घोषणा पत्र में इकट्ठी घोषणा करने के बदले किश्त में घोषणा की जा रही है ताकि माहौल के पक्ष में बनता रहे। पहले किसानों की कर्ज माफी का ब्रम्हास्त्र चलाया गया फिर कक्षाओं से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट तक अर्थात मेडिकल से लेकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई नि:शुल्क करने की घोषणा की गई। दरअसल कांग्रेस को लग रहा था कि युवा वर्ग को लुभाने के लिए कोई घोषणा नहीं हुई है अत: केजी से पीजी तक नि:शुल्क पढ़ाई की घोषणा की गई।

इधर राहुल गांधी के माध्यम से कुछ घोषणाओं को पुन: दुहराने के साथ ही कुछ नई घोषणाएं भी की गई। जैसे किसानों की पुन: कर्ज माफी, 20 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी, स्वास्थ्य बीमा की राशि 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने, धान खरीदी 3000 रूपये प्रति क्विंटल करने, सरकार बनते ही जाति जनगणना कराने, भूमिहीन किसानों को 7 हजार रू. की जगह प्रत्येक वर्ष 10,000/- रू. देने तथा तेन्दूपत्ता 4000/- रूपये प्रति मानक बोरा खरीदने की घोषणा शामिल है। दरअसल भाजपा कांग्रेस के किश्त में घोषणा करने की चालाकी को भांप नहीं पाई। इस तरह वह घोषणा पत्र जारी करने के मामले में पिछड़ गई। अब समय इतना कम बचा है कि ऐसा कतई नहीं लगता कि कुछ महत्वपूर्ण घोषणा करना शेष होगा।

किसानों का कर्ज इस बार भी माफ करने की घोषणा में भाजपा जाने क्यों पीछे रह गई जबकि इसी बिना पर पिछली बार कांग्रेस ने 68 सीटें जीतकर भाजपा को 15 सीटों पर समेट दिया था।
गठुला सोसायटी के प्रबंधक किशुन देवांगन के बताए अनुसार चुनावी माहौल में कर्ज माफी की आस में किसानों ने जमकर कर्ज लिया है। अकेले गठुला सोसायटी में 7 करोड़ का कर्ज बंटा है। अनुमान किया जाता है कि प्रदेश में 7 हजार करोड़ से लेकर 10 हजार करोड़ कर्ज बांटा गया है। अब इस कर्ज को किसानों को नहीं पटाना है। इसे पटाने की जिम्मेदारी अब सरकार की है। 

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