बिहार / झारखण्डराज्‍य

गन्ना सेवा केंद्र से घटेगी लागत, बढ़ेगा उत्पादन और गुणवत्ता

पटना

 बिहार सरकार ने राज्य में गन्ना की खेती को आधुनिक बनाने के साथ ही छोटे और सीमांत किसानों की लागत कम करने के उद्देश्य से गन्ना उत्पादक वाले जिलों में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ (गन्ना सेवा केंद्र) स्थापित करने का निर्णय है लिया है । इसका मुख्य उद्देश्य मशीनीकरण को बढ़ावा देना, गन्ने की खेती में लागत को कम करना और उत्पादन को बढ़ाना है। विदित हो कि राज्य में गन्ना की खेती विस्तार करने के उद्देश्य से गन्ना उद्योग विभाग द्वारा कई योजनाएं शुरू की गई है, ताकि किसान गन्ना की खेती की तरफ आकर्षित हो सकें।

किसानों को फायदा
गन्ना की खेती को बढ़ावा देने के लिए गन्ना उद्योग विभाग द्वारा राज्य के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में गन्ना सेवा केंद्र की स्थापना करने का निर्णय लिया है, ताकि गन्ना की खेती करने के लिए किसान इस सेंटर से आधुनिक मशीनों को किराये पर ले सकेंगे। लघु एवं सीमांत किसानों को महंगी मशीन खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उनके जरूरत के समय इस सेंटर पर मशीनें उपलब्ध रहेंगी। बताया जाता है कि राज्य में ज्यादातर छोटे और सीमांत गन्ना किसान हैं, जिन्हें खेती के दौरान लंबे समय से विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ता है।

गन्ना किसानों की समस्या
जिसमें खेती की लागत बहुत अधिक होना और उत्पादन कम होना, अत्याधुनिक मशीनों का आभाव एवं मजदूरों के भरोसे ज्यादातर काम कराना शामिल है। गन्ना की खेती करने में भूमि की तैयारी से लेकर उसके बुवाई और कटाई जैसे काम हाथ से होने के कारण प्रति एकड़ लागत बहुत बढ़ जाती है। इसको देखते हुए गन्ना उद्योग विभाग ने जिलों में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। यहां उपलब्ध मशीनें गन्ना खेती के पूरे चक्र के लिए रहेंगी, जिससे की किसानों को मिट्टी की तैयारी करने से लेकर बीज उपचार, बुवाई, सिंचाई सहायता और कटाई में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही किसानों को प्रति एकड़ लागत कम होगी, समय पर खेती के काम होंगे और गन्ना का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ेंगे।

गन्ना सेवा केंद्र
ये सीएचसी आगे चलकर 'गन्ना सेवा केंद्र' के रूप में भी काम करेंगे। यह किसानों के लिए एक वन-स्टॉप समाधान होगा। यहां किसानों को खेती से जुड़ी सलाह, नई किस्मों की जानकारी, सरकारी योजनाओं और सब्सिडी की जानकारी, मिल और बाजार से जुड़ाव के बारे में भी जानकारी मिलेगी। इससे किसानों का समय और खर्च दोनों बचेंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिलेगा।

 

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