• चक्रधर समारोह 2025: हास्य, वीर रस और व्यंग्य का अद्भुत काव्य संध्या अनुभव

    रायपुर,

    अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह में आठवें दिन हास्य, वीर रस और व्यंग्य के साथ काव्य पाठ और मधुर गीत-गायन-संगीत  की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह की आठवीं शाम छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि पद्मश्री स्व.डॉ.सुरेन्द्र दुबे की स्मृतियों को नमन करते हुए एक विशेष काव्य संध्या का आयोजन रायगढ़ के रामलीला मैदान में हुआ। पद्मश्री डॉ.दुबे, जिन्होंने हास्य और व्यंग्य को वैश्विक पहचान दिलाई, अनेक बार इस मंच पर अपनी रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदा चुके थे। उनकी स्मृतियों को समर्पित इस संध्या में प्रदेश के ख्यात कवियों ने वीर रस, हास्य और व्यंग्य की रचनाओं से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

    समारोह में राजनांदगांव के पद्मलोचन मुंहफट ने हास्य, व्यंग्य और पैरोडी से हंसी की फुहारें बिखेरीं। भिलाई के किशोर तिवारी ने अपने मधुर गीतों से श्रोताओं के दिलों को छू लिया। मुंगेली के देवेन्द्र परिहार ने ओजस्वी वीर रस की कविताओं ने वातावरण को ऊर्जावान बना दिया। रायपुर की शशि सुरेन्द्र दुबे ने गीत और व्यंग्य की रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया और सोचने पर विवश किया। रायगढ़ के नरेन्द्र गुप्ता ने वीर रस की कविताओं ने देशभक्ति और पराक्रम की भावना को जीवित किया।

    बिलाईगढ़ के बंशीधर मिश्रा ने हास्य कविताओं की चुटीली पंक्तियों से माहौल को खुशनुमा बना दिया। कवर्धा के अभिषेक पांडे ने युवा ऊर्जा और समकालीन व्यंग्य से भरी हास्य कविताओं ने मंच को जीवंत किया। बता दे कि गत वर्ष आयोजित 39वें चक्रधर समारोह में डॉ.दुबे ने अपनी चिरपरिचित पैनी व चुटीली कविताओं से मंच को हँसी और व्यंग्य से गूंजा दिया था। अब वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी साहित्य साधना और कला अवदान अमर है। इस काव्य संध्या ने उनके योगदान को सच्ची श्रद्धांजलि दी।

    शशि सुरेंद्र दुबे-छत्तीसगढ़ की जानीमानी कवयित्री और दिवंगत डॉ.सुरेंद्र दुबे की धर्मपत्नी हैं। उन्होंने ‘वाह वाह क्या बात है‘ जैसे कई टीवी कार्यक्रमों और दूरदर्शन पर काव्य पाठ किया है। उनका काव्य संग्रह ‘पट्टी खोलो गांधारी‘ प्रकाशित हो चुका है। किशोर तिवारी-मधुर गीतकार हैं, जो वाह वाह क्या बात है समेत विभिन्न राष्ट्रीय मंचों, आकाशवाणी और दूरदर्शन पर काव्य पाठ कर चुके हैं। पद्मलोचन मुंहफट-पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे के शिष्य, पद्मलोचन हास्य-व्यंग्य और पैरोडी के लिए मशहूर हैं। उन्होंने देश के 16 राज्यों में काव्य पाठ कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। देवेन्द्र परिहार-वीर रस के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने ज़ी न्यूज़ के कवि युद्ध सहित कई राष्ट्रीय और प्रादेशिक चौनलों पर काव्य पाठ किया है। नरेंद्र गुप्ता-रायगढ़ के मूल निवासी और वीर रस के कवि हैं। उन्हें अटल साहित्य सम्मान और दिनकर साहित्य सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। बंशीधर मिश्रा-ख्यात हास्य कवि, जो देश के कई राज्यों में काव्य पाठ और मंच संचालन कर चुके हैं। वे वाह भाई वाह टीवी शो में भी 6 एपिसोड में शामिल हुए थे। उनकी हास्य संग्रह ‘भूतहा लोरी‘ प्रकाशित हो चुकी है और उन्हें धुरंधर हास्य सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया है। अभिषेक पांडे-युवा कवि, वक्ता और आयोजक हैं, जो अपनी वक्ता कला के लिए युवा पुरस्कार से सम्मानित हैं। वे दूरदर्शन सहित विभिन्न निजी चौनलों पर काव्य पाठ कर चुके हैं।

    सुप्रसिद्ध संगीतकार एवं गायक अर्नव चटर्जी ने अपनी अनूठी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्में और ऑल इंडिया रेडियो, मुंबई से प्रमाणित गायक अर्नव चटर्जी ने भजन, गज़ल और गीतों की प्रस्तुति दी। उनकी मधुर आवाज़ और सुर-ताल की अद्भुत संगति ने श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान अर्नव चटर्जी ने फिल्म, टीवी सीरियल, म्यूज़िक एल्बम और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के लिए किए गए अपने सृजनात्मक योगदान की झलक भी प्रस्तुत की। संगीत प्रेमियों ने उन्हें खड़े होकर तालियों से सम्मानित किया। चक्रधर समारोह की इस संध्या में उनकी प्रस्तुति ने न केवल भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया बल्कि अर्नव चटर्जी की संगीतमयी संध्या ने समारोह को अविस्मरणीय बना दिया।

  • किशन सूर्यवंशी का संदेश: शिक्षक हैं छात्र-छात्राओं और देश के निर्माता

    भोपाल 
    शिक्षक सम्मान समारोह में नगर निगम अध्यक्ष माननीय श्री किशन सूर्यवंशी जी ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु ही वह शक्ति हैं जो केवल छात्र के भविष्य का ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के निर्माण का कार्य करते हैं।

    उन्होंने कहा कि “शास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान बताया गया है। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण जैसे अवतारों ने भी आश्रमों में शिक्षा ग्रहण की। इससे सिद्ध होता है कि चाहे सामान्य विद्यार्थी हों या ईश्वर के अवतार, सबके जीवन में गुरु की भूमिका अनिवार्य है।

    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा 2047 तक विकसित भारत का जो सपना देखा गया है, उसमें शिक्षकों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्त और जिम्मेदार नागरिक गढ़ने वाला होता है।”

    श्री सूर्यवंशी जी ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा ने सदैव दुनिया को मार्गदर्शन दिया है। नालंदा विश्वविद्यालय जैसे ज्ञान-केंद्रों को नष्ट इसलिए किया गया क्योंकि दुनिया को भय था कि भारत ज्ञान के बल पर विश्व नेतृत्व करेगा। आज भारत पुनः ‘विश्वगुरु’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    गणेश उत्सव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गणेश जी ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर यह संदेश दिया कि माता-पिता ही संपूर्ण संसार हैं। यह शिक्षा आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है।

    अपने उद्बोधन के अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षक का सम्मान करना सूर्य को दीप दिखाने के समान है। शिक्षक के भीतर उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम जैसे गुण होते हैं और यही गुण राष्ट्र निर्माण का आधार बनते हैं। इस अवसर पर कार्यक्रम में चांसलर आदरणीय श्री वी.एस. यादव जी, सम्माननीय शिक्षकगण और गणमान्यजन उपस्थित रहे।

  • उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने एनआईआरएफ- 2025 में उल्लेखनीय रैंकिंग मिलने पर, आईईएचई संस्थान परिवार को बधाई दीं

    आईईएचई, भोपाल ने स्थिर रखी एनआईआरएफ में अपनी रैंकिंग

    भोपाल 
    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने भोपाल स्थित उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान को, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ)-2025 में "महाविद्यालय श्रेणी" में गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी 201 से 300 बैंड में रैंक प्राप्त करने पर, उच्च शिक्षा विभाग एवं संस्थान परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मंत्री श्री परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार, विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक उच्च शिक्षा प्रदान करने की दिशा में प्रतिबद्धता से सतत् कार्य कर रही है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवीन आयाम स्थापित हो रहे हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के समग्र विकास एवं प्रगति के साथ, शैक्षणिक एवं अकादमिक स्तर पर उत्तरोत्तर गुणवत्ता वृद्धि हो रही है।

    मंत्री श्री परमार ने कहा कि उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान के निदेशक डॉ प्रज्ञेश अग्रवाल के नेतृत्व में संस्थान परिवार अपने पुरुषार्थ से सतत् नए आयाम स्थापित कर रहा है और अन्य संस्थानों के लिए अभिप्रेरणा का केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। संस्थान का उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क के निर्धारित मानकों पर खरा उतरकर, उक्त उपलब्धि अर्जित करना प्रशंसनीय एवं सराहनीय है। श्री परमार ने कहा कि संस्थान, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क के निर्धारित मानकों पर और अधिक बेहतर प्रदर्शन कर, अग्रणी श्रेणी में उत्कृष्ट स्थान अर्जित करने का प्रयास करें। मंत्री श्री परमार ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य समस्त उच्च शिक्षण संस्थान भी, एनआईआरएफ के मानकों पर खरा उतरने के लिए प्रयास करें और राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क की श्रेणी में उत्कृष्ट स्थान अर्जित करें।

    "कॉलेज कैटेगरी" में इस वर्ष भी 201 से 300 बैंड में मिली रैंक
    उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल की उपलब्धियों में एक अध्याय और जुड़ चुका है। 4 सितम्बर को शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी इंडिया रैंकिंग (NIRF, 2025) में उच्च शैक्षिक संस्थानों की रैंकिंग में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान (IEHE), भोपाल को गत वर्ष की भांति कॉलेज कैटेगरी में इस वर्ष भी 201 से 300 बैंड में रैंक प्राप्त हुई है। ज्ञातव्य है कि यह प्रदेश का एकमात्र संस्थान है, जिसे वर्ष 2024 में भी कॉलेज कैटेगरी में एनआईआरएफ रैंकिंग प्राप्त हुई थी, इस वर्ष भी संस्थान अपनी रैकिंग स्थिर रखने में सफल हुआ है। संस्थान की एनआईआरएफ समिति द्वारा निदेशक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल के कुशल मार्गदर्शन में, डॉ. अनुज हुंडैत एवं डॉ. ए. एस. सलूजा के द्वारा रिपोर्ट तैयार कर एनआईआरएफ पोर्टल पर अपलोड की गई थी, जिसके परिणामस्वरुप यह उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है।

    राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार अन्तर्गत संरचना है। यह संरचना, देश भर के संस्थानों को रैंकिंग देने की एक पद्धति की रूपरेखा प्रस्तुत करती है। यह पद्धति, विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों की रैंकिंग के लिए व्यापक मानदंडों की पहचान के लिए तैयार की गई समग्र सिफारिशों और व्यापक समझ पर आधारित है। इन मानदंडों में व्यापक रूप से "शिक्षण, अधिगम और संसाधन", "अनुसंधान और व्यावसायिक अभ्यास", "स्नातक परिणाम", "आउटरीच और समावेशिता" और "धारणा" सम्मिलित हैं। 

  • एक बगिया माँ के नाम के तहत पौध-रोपण की जीवित्ता के लिये अधिकारी करेंगे मॉनीटरिंग

    विभाग ने 41 अधिकारियों की लगाई ड्यूटी, सितम्बर में दो बार भ्रमण कर मनरेगा आयुक्त को देंगे रिपोर्ट

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्व सहायता समूह की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ ही मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थलों को संवारने, नदियों के उद्गम स्थलों को संरक्षित करने के लिए एक बगिया मां के नाम परियोजना, मां नर्मदा परिक्रमा पथ और गंगोत्री हरित योजना चला रही है। परियोजना का जिले स्तर पर बेहतर ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिये जमीनी स्तर पर निरीक्षण करने राज्य स्तरीय अधिकारी जिलों में पहुंचेंगे। भ्रमण के बाद क्रियान्वित कार्यों की वस्तुस्थिति के बारे में मनरेगा आयुक्त को जानकारी देंगे। अधिकारियों द्वारा यह जानकारी मनरेगा परिषद द्वारा उपलब्ध कराए गए मोबाइल ऐप के माध्यम से दी जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश भी जारी किए गए हैं।

    अधिकारियों की लगाई गई ड्यूटी
    'एक बगिया मां के नाम' मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थलों की भूमि पर किए जा रहे पौधरोपण और गंगोत्री हरित योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की गतिविधि को देखने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 41 अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। ये सभी अधिकारी सितम्बर माह में प्रदेश के सभी जिलों में जाकर तीनों योजनाओं का जमीनी स्तर पर कार्य देखेंगे। इसमें मुख्य अभियंता, संयुक्त अभियंता, अधीक्षण यंत्री, उपायुक्त, उपसंचालक, कार्यपालन यंत्री, एससीएफ, सहायक यंत्री और परियोजना अधिकारी स्तर के अधिकारी शामिल है। सभी अधिकारी सितंबर माह में दो बार आवंटित जिलों का भ्रमण करेंगे।

    अनियमितता की अलग से देंगे रिपोर्ट
    अधिकारियों द्वारा भम्रण के दौरान तीनों योजनाओं के क्रियांन्वयन में कोई गंभीर अनियमितता पाये जाने पर संबंधित अधिकारियों को उसकी अलग से रिपोर्ट बनाकर मनरेगा आयुक्त को दी जाएगी।

     

  • उत्कृष्ट कार्य करने वाली आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य अमले को किया सम्मानित

    किलकारी और मोबाइल अकादमी से सही समय पर सही जानकारी और प्रशिक्षित आशा कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवा को किया है सशक्त : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    राज्य स्तरीय मोबाइल अकादमी एवं किलकारी कार्यक्रम की कार्यशाला सम्पन्न

    भोपाल
    उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि किलकारी और मोबाइल अकादमी ने यह सिद्ध किया है कि सही समय पर सही जानकारी और प्रशिक्षित आशा कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को नई दिशा दे सकती हैं। यह पहल मध्यप्रदेश को स्वस्थ, सशक्त और सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर कर रही है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल की अध्यक्षता में होटल एमपीटी पलाश भोपाल में राज्य स्तरीय मोबाइल अकादमी एवं किलकारी कार्यक्रम की कार्यशाला आयोजित हुई। अपर मिशन संचालक श्री मनोज सरियाम और आशा कार्यक्रम के संयुक्त संचालक डॉ. राकेश बोहरे विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) एवं मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में सुधार के लिए सशक्त प्रयास कर रहा है। ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि मातृ मृत्यु दर को 80 प्रतिशत तथा शिशु मृत्यु दर को 20 प्रतिशत तक लाया जाये। इस दिशा में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हें निरंतर प्रशिक्षण, अद्यतन जानकारी तथा तकनीकी साधनों से सशक्त करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटलीकरण की दिशा में नई ऊर्जा और दृष्टि प्रदान की है। इसी परिप्रेक्ष्य में 15 जनवरी 2016 को तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा द्वारा मोबाइल अकादमी एवं किलकारी कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया था। विगत दस वर्षों की सफल यात्रा में इन कार्यक्रमों ने देशव्यापी स्तर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और प्रभावशीलता को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि इन पहलों के माध्यम से मध्यप्रदेश का लक्ष्य शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) को 20 तथा मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को 80 तक लाना है। इसके लिये आवश्यक है कि सभी आशा कार्यकर्ता, जिला स्वास्थ्य अधिकारी एवं प्रशासनिक इकाइयाँ पूर्ण निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। उन्होंने शिक्षण एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से अपेक्षा की कि वे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और सेवा प्रदायगी के माध्यम से प्रदेश को स्वास्थ्य संकेतकों में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाएँ। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया।

    अपर मिशन संचालक श्री मनोज सरियाम ने बताया कि मध्यप्रदेश ने इन कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन में देशव्यापी स्तर पर अग्रणी भूमिका निभाई है। अब तक 50 हजार से अधिक आशा कार्यकर्ताओं ने मोबाइल अकादमी का प्रमाणन कोर्स पूरा किया है। प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में 100 प्रतिशत आशाओं ने प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन 200 से अधिक आशाएँ कोर्स पूर्ण कर रही हैं। किलकारी कार्यक्रम के माध्यम से लाखों गर्भवती महिलाएँ एवं माताएँ लाभान्वित हो रही हैं।

    किलकारी कार्यक्रम गर्भवती महिलाओं तथा नवजात शिशुओं की माताओं को समय पर आवश्यक जानकारी प्रदान करने के लिये विकसित किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत लाभार्थियों को उनकी गर्भावस्था एवं शिशु की आयु के अनुसार 72 पूर्व निर्धारित ऑडियो संदेश प्राप्त होते हैं। सरल भाषा में प्रस्तुत ये संदेश लाभार्थियों में सहज विश्वास और आत्मीयता का भाव उत्पन्न करते हैं। यह सेवा पूर्णतः निःशुल्क है और मोबाइल फोन पर आसानी से उपलब्ध है। मोबाइल अकादमी आशा कार्यकर्ताओं के लिए एक दूरस्थ प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें 240 मिनट का ऑडियो कोर्स, 11 अध्याय और 44 पाठ सम्मिलित हैं। यह कार्यक्रम आशा कार्यकर्ताओं के ज्ञान, संचार कौशल एवं आत्मविश्वास को सुदृढ़ करता है। यह सेवा 14424 नंबर के माध्यम से कहीं भी, कभी भी सुलभ है।

  • मंत्री सारंग ने की मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ की समीक्षा

    भोपाल 
    सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने गुरुवार को मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ मर्यादित की गतिविधियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में मंत्री श्री सारंग ने कहा कि आवास संघ को एक सशक्त निर्माण एजेंसी के रूप में स्थापित करने के लिए ठोस और दूरदर्शी कार्ययोजना तैयार की जाए।

    मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर उनकी निधि से किए जाने वाले निर्माण कार्य आवास संघ को दिए जाने हेतु आग्रह करें। उन्होंने कहा कि “सहकारिताओं के बीच सहकार” की भावना को मूर्त रूप देते हुए सहकारिता विभाग के अंतर्गत राज्य संघ, उपभोक्ता संघ एवं अन्य सहकारी संस्थाओं से संबंधित सभी निर्माण कार्यों के लिए आवास संघ को नोडल एजेंसी बनाया जाए।

    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि एम-पैक्स से जुड़े निर्माण कार्य भी आवास संघ को ही सौंपे जाएं। उन्होंने आवास संघ की गतिविधियों के विस्तार के लिए सभी सहकारी सोसाइटियों को सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए इस दिशा में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में आयुक्त एवं पंजीयक सहकारिता श्री मनोज पुष्प, उप सचिव सहकारिता श्री मनोज सिन्हा, प्रबंध संचालक आवास संघ श्री विश्वकर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • ग्रामीण युवाओं के लिए सुनहरा मौका: प्रधानमंत्री आवास योजना में मुफ्त राजमिस्त्री प्रशिक्षण

    रायपुर,

    प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण रूप से क्रियान्वित करने के लिए बलरामपुर जिला प्रशासन ने अभिनव पहल की है। कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज के मार्गदर्शन में जिले के ग्रामीण युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार एवं निर्माण कार्यों में दक्ष बनाने की योजना लागू की गई है।

    ग्रामीण स्व-रोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के माध्यम से जिले के वाड्रफनगर, रामचंद्रपुर, बलरामपुर, राजपुर एवं शंकरगढ़ जनपद पंचायतों में कुल 5 प्रशिक्षण बैच (प्रत्येक में 35 प्रशिक्षार्थी) प्रारंभ किए गए हैं। इस तरह 175 युवाओं को 30 दिवसीय निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण का लाभ दिलाया गया। जिसमें ले-आउट, नींव से छत तक निर्माण की तकनीकी ज्ञान, निर्माण सामग्री का अनुपात एवं गुणवत्ता निर्धारण, सुरक्षा मानक तथा फील्ड प्रैक्टिकल शामिल है।

    इस पहल से न केवल प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत घरों का निर्माण तेज़ी और गुणवत्ता के साथ तेजी से पूरा पूरा कराया जा रहा है। ग्रामीण युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण की व्यवस्था कर स्वरोजगार के अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर दक्ष श्रमिकों की उपलब्धता बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं या उनके परिजन, मनरेगा में 100 दिवस कार्य कर चुके श्रमिक और इच्छुक ग्रामीण युवाओं को शामिल किया गया। जिला पंचायत सीईओ बलरामपुर ने बताया कि, हमारा लक्ष्य है कि सभी प्रधानमंत्री आवास समय-सीमा में और गुणवत्ता के साथ पूरे हों। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को अपने गांव में ही रोजगार दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम है।

    जिला प्रशासन ने अधिक से अधिक युवाओं से अपील की है कि वे इस प्रशिक्षण का लाभ उठाकर न केवल एक नया कौशल सीखें, बल्कि जिले के विकास में भी योगदान दें। इच्छुक उम्मीदवार अपने ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत अथवा सीधे ग्रामीण स्व-रोजगार प्रशिक्षण संस्थान बलरामपुर से संपर्क कर सकते हैं।

  • जीएसटी सुधारों से भारतीय अर्थ-व्यवस्था होगी और ज्यादा गतिशील : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

    उदयोग मजबूत होंगे, निवेश बढ़ेगा, रोजगार के होंगे अवसर सृजित
    बाजारों की बढ़ जायेगी रौनक
    प्रधानमंत्री श्री मोदी और केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण का माना आभार

    भोपाल 
    उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने जीएसटी स्लैब को चार से घटा कर दो करने के ऐतिहासिक निर्णय को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये क्रांतिकारी बताते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया है। श्री देवड़ा ने कहा कि जीएसटी की दरों को और अधिक तार्क‍िक और सरल बनाने का जो ऐतिहासिक निर्णय प्रधानमंत्री श्री मोदी ने लिया है वह सिर्फ कर ढांचे में सुधार नहीं बल्क‍ि अर्थव्यवस्था को नई गति देनेवाला दूरदर्शी कदम है।  

    उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में  देश तीसरी आर्थिक शक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में अगली पीढ़ी के सुधारों को लागू करने का निर्णय भारत की अर्थव्यवस्था की गति को और तेजी से बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से उदयोग और व्यापार जगत को बड़ी राहत मिलेगी। छोटे और मध्यम उदयोगों की लागत घटेगी और वे ज्यादा से ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे। उन्होंने कहा कि उत्पादन और वितरण तंत्र सरल और किफायती होगा। उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुएं और सेवाएं पहले की तुलना में अधिक उचित दाम पर मिलेंगी।

    उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि बढ़ती हुई करदाताओं की संख्या न केवल कर संग्रहण और अर्थवयवस्था को विधिसंगत बनाती है, साथ ही यह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और कर प्रणाली पर बढ़ते विश्वास को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने से कर प्रणाली अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी। ईमानदार करदाताओं को सुविधा होगी। अनुपालन आसान होगा और प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी। इससे निवेश बढ़ेगा और रोजगार सृजन को नई गति मिलेगी। साथ ही कर विवाद कम होने से कर अववंचन में भी कमी आयेगी।

    उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि पूरी दुनिया में आर्थ‍िक परिस्थ‍ितियां चुनौतीपूर्ण हैं। भारतीय उत्पाद अब कम लागत पर तैयार होंगे और वैश्व‍िक बाजारों में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इससे भारत की निर्यात क्षमता को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री श्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने वाला है। अब उदयोग मजबूत होंगे, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर बढेंगे। देश आत्मनिर्भरता की राह पर और तेजी से आगे बढे़गा।

    उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि मध्यप्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिये ट्रेक्टर और उसके पार्टस की दर सुधार से किसानों को लाभ होगा। खाद के निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल में दर में कमी से खाद के मूल्य में कमी होगी जिसका लाभ किसानों को मिलेगा। इसी प्रकार नमकीन तथा कन्फेक्शनरी में हो रहे मिस क्लास‍‍फिकेशन को समाप्त करने के लिए जो कदम उठाये जा रहे हैं इससे इंदौर के नमकीन तथा कन्फेक्शनरी सेक्टर को प्रोत्साहन मिलेगा और आय में वृद्ध‍ि होगी।

    उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी दूरदृष्ट‍ि सम्पन्न नेता हैं। उनके निर्णय से आम नागरिकों का जीवन आसान होगा। स्वास्थ्य , शिक्षा, कृषि, आटोमोबाइल और इलेक्‌ट्रानिक, स्‍टील, सीमेंट और टैक्सटाइल क्षेत्र में जीएसटी सुधारों का सीधा प्रभाव पड़ेगा और नागरिकों को राहत मिलेगी। ग्रीन इनर्जी और रियलस्टेट क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ेंगे। अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को लाभ मिलेगा। उन्होंने जीएसटी में अगले पीढ़ी के सुधारों को लागू करने का वचन पूरा कर दिया। जीएसटी सुधार आम नागरिकों के लिये दीपावली का उपहार है। इस बार बाजारों की रौनक बढ़ जायेगी। व्यापारी समुदाय और ग्राहक दोनों में उत्साह होगा। जीएसटी सुधारों का व्यापक सकारात्मक असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, इससे गतिशीलता आयेगी। 

  • उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने एम्स भोपाल की व्यवस्थाओं का किया अवलोकन

    प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने विभिन्न विषयों पर की चर्चा

    भोपाल 
    उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने एम्स भोपाल का दौरा कर वहाँ की चिकित्सा व्यवस्थाओं एवं अधोसंरचना का अवलोकन किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने एम्स भोपाल द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सहज एवं सुलभ बनाने के लिए किए जा रहे विभिन्न नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए एम्स जैसे अग्रणी संस्थानों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानंद ने एम्स की वर्तमान स्वास्थ्य सेवाओं तथा भविष्य की योजनाओं की विस्तार से जानकारी प्रदान की।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विश्वास व्यक्त किया कि एम्स भोपाल के अनुभव एवं नवाचार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी व गुणवत्तापूर्ण बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। इस दौरान प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई तकनीक एवं आधुनिक संसाधनों से सशक्त करने, अनुसंधान आधारित चिकित्सा सेवाओं को बढ़ावा देने तथा जनसामान्य को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने संबंधी विभिन्न आयामों पर वृहद चर्चा हुई। इस दौरान उप संचालक प्रशासन श्री संदेश जैन सहित एम्स के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने 13 करोड़ से अधिक लागत के निर्माण कार्यों का किया भूमिपूजन

    गोविंदपुरा क्षेत्र को मिली लंबे समय से प्रतीक्षारत 4 सड़कों की सौगात
    शहर में सुगम होगा यातायात

    भोपाल 
    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गुरुवार को एक साथ लंबे समय से प्रतीक्षारत 4 सड़कों के निर्माणकार्य का भूमिपूजन किया। 13 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से बनने वाली ये सड़कें गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के साथ साथ भोपाल की यातायात और आवागमन की सुविधाओं में मील का पत्थर साबित होंगी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि गोविंदपुरा विधानसभा को प्रदेश की सबसे बेहतर विधानसभा बनाना हमारा लक्ष्य है और इसी कड़ी में क्षेत्र के हर वार्ड को सुव्यवस्थित यातायात व आधुनिक सड़क सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बीएचईएल से अनुमति मिलने के बाद लंबे समय से प्रतीक्षित सड़क निर्माण का कार्य भी अब शुरू हो रहा है। इसके बाद क्षेत्रवासियों को बीएचईएल तक आने-जाने में सुविधा मिलेगी।

    इन क्षेत्रों को मिली विकास कार्यों की सौगात

    तिलक नगर से दानापानी ढाबा तक सड़क चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण का कार्य 2 करोड़ 98 लाख रुपए की लागत से पूरा किया जाएगा। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने शक्तिनगर डीआरएम से करियर कॉलेज तक सड़क निर्माण कार्य की भी सौगात दी। इसकी लागत 3 करोड़ 90 लाख रुपए है।

    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने 2 सीसी रोड के निर्माण कार्यों का भी भूमिपूजन किया। इसके तहत महात्मा गांधी चौराहे से न्यू फोर्ट शिव मंदिर तक सीसी रोड का निर्माण कार्य किया जाएगा। इसकी लागत 3 करोड़ 9 लाख रुपए है। अवधपुरी तिराहे से एसओएस बालग्राम तक सीसी रोड निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन हुआ। इसकी लागत 3 करोड़ 22 लाख रुपए है।

    कार्यक्रम में श्रीमती मोनिका ठाकुर, श्री प्रताप सिंह बेस, श्री सुरेंद्र धोटे, पार्षद श्रीमती शीला पाटीदार, श्रीमती अर्चना परमार, श्रीमती मधु शिवनानी, श्री जितेंद्र शुक्ला, श्री धर्मेंद्र सिंह परिहार, श्री रामबाबू पाटीदार, श्री प्रताप वारे, श्री वी.शक्तिराव, श्री शिवलाल मकोरिया, श्री प्रदीप पाठक, श्री राजकमल श्रीवास्तव, श्री शेखर श्रीवास्तव, श्री तीर्थराज मिश्रा, श्री करनेल सिंह, श्री सोमदत्त द्विवेदी, श्री केवल मिश्रा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जीएसटी दरों में कटौती को बताया ऐतिहासिक निर्णय

    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर दिए वचन को एक महीने से भी कम समय में पूरा कर दिखाया
    जीएसटी दरों में कटौती से लाभान्वित होंगे देश के 90 प्रतिशत नागरिक

    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी देश के गरीब-वंचितों सहित उद्यमियों का भी रखा ध्यान
    नागरिकों को राहत देने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी और वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण का माना आभार

    भोपाल 
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुड्स एवं सर्विस टैक्स काउंसिल द्वारा जीएसटी दरों में कटौती को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वागत योग्य कदम बताया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार ने जीएसटी दरों में बदलाव कर मुक्त हृदय से देश के हर वर्ग को फायदा पहुंचाया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने उद्बोधन में लाल किले की प्राचीर से कहा था कि, अगले कुछ समय में प्रदेशवासियों को बहुत अच्छी सुविधाएं मिलने वाली हैं। हमने देखा कि एक महीने से भी कम समय में उन्होंने अपने इन वचनों को साकार कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीएसटी के क्रांतिकारी बदलाव से देश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी यानी 125 करोड़ से अधिक देशवासी लाभान्वित होंगे। प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और लघु एवं कुटीर उद्योग को भी व्यवसाय में इसका लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है और तेजी से तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद गुरुवार को उज्जैन में जारी संदेश में ये विचार व्यक्त किए। उन्होंने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का आभार भी माना।

    स्कूली बच्चों की शिक्षण सामग्री पर जीएसटी 12% से शून्य करना महत्वपूर्ण
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी दरों में कटौती का निर्णय देशवासियों के लिए एक प्रकार से गुलदस्ते के समान है, जिसमें सभी सैक्टर को कवर किया गया है। इंडस्ट्रीज के साथ देश के सभी वर्गों को इसका लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में दुनिया भर में भारत की एक अद्भुत छवि निर्मित हो रही है। वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी सरकार ने अपने नागरिकों, उद्यमियों, गरीब एवं वंचित वर्ग का ध्यान रखा है। नागरिकों के हैल्थ इंश्योरेंस को टैक्स फ्री कर स्वास्थ्य के क्षेत्र में अतिरिक्त राहत दी गई है। जीएसटी के सभी बदलाव इसी माह नवरात्रि से अर्थात 22 सितंबर से लागू हो जाएंगे, जिसका लाभ गरीबों, मध्यवर्ग और किसानों को भी मिलेगा। आम आदमी की जरूरत की वस्तुएं जैसे- रोटी, पराठा, पनीर, छैना सस्ते होंगे। यह सामग्री बड़े पैमाने पर निर्यात भी होती है, अत: इस बदलाब से किसानों को भी लाभ होगा। स्कूली बच्चों के लिए शिक्षण सामग्री नक्शे, चार्ट, ग्लोब, पेंसिल, शार्पनर, कॉपी, नोटबुक पर जीएसटी 12% से शून्य करना स्कूली बच्चों और युवाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

    हैल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को 18% के स्लैब से हटाकर शून्य करना क्रांतिकारी निर्णय
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे लिए कृषि क्षेत्र पहली प्राथमिकता है। भारतीय कृषि व्यवसाय को वैश्विक प्रभावों से सुरक्षित रखने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ट्रैक्टर के टायर, पार्ट्स, बायोपेस्टिसाइड, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम, स्प्रिंकलर, बागवानी की मशीनों पर जीएसटी दर 18% से घटाकर 5% तक लाने का निर्णय लिय है। यह कृषक कल्याण के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दूसरी ओर नागरिकों को स्वास्थ्य क्षेत्र में लाभ मिले, इसके लिए हैल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को मौजूदा 18% के स्लैब से हटाकर टैक्स खत्म करना निर्णय क्रांतिकारी है। साथ ही कैंसर जैसी घातक बीमारियों के मरीजों के लिए कई जीवन रक्षक दवाइयां कर मुक्त कर दी गई हैं। इस फैसले का सीधा लाभ जरूरतमंदों को मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में 1200 सीसी इंजन क्षमता के वाहनों पर जीएसटी स्लैब 28% से घटाकर 18% किया गया है। यह मध्यम वर्गीय के लिए कार खरीदने का सपना पूरा करेगा। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे- प्रोजेक्टर, डिश, वाशिंग मशीन सस्ती होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन निर्णयों का प्रदेशवासियों को जल्द से जल्द लाभ दिलवाने के लिए राज्य सरकार सभी संबंधित क्षेत्रों में त्वरित गति से कार्य करेगी।

     

  • पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय में नए युग की शुरुआत, राजेश अग्रवाल ने ली संभाला कामकाज

    रायपुर,

    पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज मंत्रालय महानदी भवन स्थित कार्यालय मे विधिवत पूजा अर्चना कर कामकाज की शुरूआत की। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, विधायक अनुज शर्मा, संपत अग्रवाल, प्रबोध मिंज, उद्धेश्वरी पैंकरा, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण मंडल के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के अध्यक्ष शशांक शर्मा एवं पवन साय और वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें पुष्प गुच्छ भेंट कर बधाई और शुभकामनाएं दी।

    संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव के मार्गदर्शन में राज्य में पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में काफी तेजी से कार्य करना है। राज्य में पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में काफी संभावनाऐं है। पर्यटन क्षेत्रों के विकसित होंने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेगें। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की मदद से राज्य में सड़क कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हो रहा है, इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। राज्य में नई सड़कों की स्वीकृति के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय भू-तल परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी के प्रति आभार जताया।  

     इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग सुब्रत साहू, संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के जनरल मैनेजर वेदव्रत सिरमौर, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की सचिव पुष्पा साहू सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • स्वच्छता से खुलता है समृद्धि का द्वार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    स्वच्छता हमारी आदत, परंपरा, दिनचर्या और संस्कारों में सदियों से है शामिल
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इन आदतों और संस्कारों को पुनर्जीवित कर स्वच्छता को दिया जनआंदोलन का स्वरूप
    स्वच्छता कर्मवीरों का सम्मान कर उनके साथ किया भोजन
    50 इलेक्ट्रिक एसी बसों का किया लोकार्पण
    इंदौर को दी विकास की अनेक सौगातें

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वच्छता से समृद्धि आती है। स्वच्छता हमारी परंपरा, दिनचर्या और संस्कारों में सदियों से शामिल रही है, किंतु समय के साथ हम इसे भूलते गए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इन आदतों और संस्कारों को पुनर्जीवित कर स्वच्छता को जन आंदोलन का रूप दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को इंदौर में “स्वच्छता ही सेवा” अभियान के अंतर्गत आयोजित स्वच्छता कर्मवीरों के सम्मान और सहभोज कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में इंदौर ने लगातार आठ बार प्रथम स्थान प्राप्त कर देश में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इसके लिए इंदौर के सभी 36 लाख नागरिक और विशेष रूप से स्वच्छता कर्मवीर बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर ने स्वच्छता के क्षेत्र में विश्वस्तरीय पहचान बनाई है। यह उपलब्धि टीम भावना, नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और सफाईकर्मियों की अथक मेहनत से संभव हुई है।

    इस अवसर पर महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, सांसद श्री शंकर लालवानी, विधायक श्री रमेश मेंदोला, श्री गोलू शुक्ला, श्रीमती मालिनी गौड, श्री महेंद्र हार्डिया, विधायक श्री मधु वर्मा एवं सुश्री ऊषा ठाकुर, अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री सावन सोनकर, सफाई कामगार आयोग के अध्यक्ष श्री प्रताप करोसिया, श्री सुमित मिश्रा, श्री श्रवण चावड़ा, पूर्व विधायक श्री जीतू जिराती, पूर्व महापौर श्री कृष्ण मुरारी मोघे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

    समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वच्छता कर्मवीरों का सम्मान कर उनके साथ भोजन किया। उन्होंने इंदौर को स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार आठ बार अव्वल बनाने के लिए स्वच्छता कर्मवीरों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता कर्मवीरों ने अपनी कर्मठता, लगन, मेहनत, सेवा और समर्पण भाव से कार्य कर इंदौर को नई ऊँचाईयों तक पहुँचाया है। साथ ही स्वच्छता कर्मवीर सही अर्थों में सम्मान के हकदार है। उन्होंने "स्वच्छता का महागुरु" लोगो का विमोचन भी किया। स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पार्षदों को भी पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देश के पहले जीरो वेस्ट जू (प्राणी संग्रहालय) का शुभारंभ भी किया।

    इलेक्ट्रिक एसी बस में किया सफर
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर की लोक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 60 करोड़ रुपये की लागत की 50 नई इलेक्ट्रिक बसों का लोकार्पण किया। इंदौर को कुल 150 नई इलेक्ट्रिक बसें मिलेंगी, इनमें से उक्त 50 बसों का लोकार्पण किया गया है। इन बसों में डिजिटल पेमेंट व्यवस्था भी रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिजिटल पेमेंट व्यवस्था का शुभारंभ भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बस में सवार भी हुए और यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, जीपीएस, सीसीटीवी, पेनिक बटन एवं अन्य सुविधाओं को देखा। उन्होंने कहा कि इंदौर में सड़क, वायु मार्ग और रेल मार्ग का तेजी से विस्तार हो रहा है। इससे इंदौर से देश में चारों ओर कनेक्टिविटी बढ़ रही है।

    रणजीत हनुमान मंदिर के पुनर्विकास कार्यों का भूमिपूजन
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर के प्रसिद्ध श्री रणजीत हनुमान मंदिर के पुनर्विकास कार्यों का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वर्चुअली भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि रणजीत हनुमान मंदिर प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर से हमें हर क्षेत्र में रण जीतने की प्रेरणा मिलती है। इस अवसर पर मंदिर के विकास के संबंध में तैयार प्रेजेंटेशन भी दिखाया गया। इस मंदिर के पुनर्विकास पर 7 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। भक्तों के लिए अनेक सुविधाएं जुटाई जाएंगी। इस राशि से भव्य द्वार शेड एवं बाउंड्रीवॉल पाथ-वे और उद्यान विकसित करने के कार्य किए जाएंगे। मंदिर के वर्तमान स्वरूप को बरकरार रखा जाएगा। यह कार्य मंदिर क्षेत्र के सौंदर्यीकरण, श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में इंदौर ने विश्व मानचित्र पर अपना नया स्थान बनाया है। इंदौर स्वच्छता में लगातार आठ बार से अव्वल है। इंदौर में लोक परिवहन को नई दिशा मिली है, अब यह डिजिटल इंदौर की ओर बढ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में तेजी से पूरा किया जा रहा है।

    महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने इंदौर की विकास यात्रा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इंदौर का विकास आगामी वर्ष-2050 को दृष्टिगत रखते हुए तेजी से किया जा रहा है। इंदौर का चहुँमुखी विकास हो रहा है। यहां स्वच्छता के क्षेत्र में अनेक नवाचार किए जा रहे हैं। इंदौर नगर निगम डिजिटल क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्वच्छता के क्षेत्र में किए जा रहे हैं नवाचारों की जानकारी भी दी। कार्यक्रम में विधायकगण नगर निगम के सभापति, महापौर परिषद सदस्य, पार्षदगण तथा बड़ी संख्या में सफाई मित्र और उनसे जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि तथा अन्य नागरिकगण उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव और विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर ने वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं को किया पुरस्कृत

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पूर्व मंत्री स्व. श्री निर्भय सिंह पटेल अपनी ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में शुचिता के लिए जाने जाते हैं। सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी के लिए उनका नाम हमेशा अमर रहेगा। स्व. श्री पटेल का नाम आज भी बड़े आदर के साथ लिया जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को इंदौर में पूर्व वन मंत्री स्व. श्री पटेल के 29वें पुण्य स्मरण दिवस पर "निर्भयसिंह पटेल स्मृति विचार मंच" द्वारा आयोजित जिला स्तरीय अंतरविद्यालयीन भारतीय मंत्री स्तरीय वाद–विवाद प्रतियोगिता का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर भी शामिल हुये।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वाद-विवाद प्रतियोगिताओं से नई पीढ़ी के अच्छे वक्ता सामने आते हैं। भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल में शास्त्रार्थ होते थे, जो अब वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का रूप ले चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रेल, खेल, कृषि और रक्षा विभाग सहित सभी विभागों के बजट में काफी वृद्धि हुई है और देश का विकास तीव्र गति से हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में वाद–विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये।

    विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि स्व. श्री निर्भय सिंह पटेल अपनी ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा के लिए हमेशा याद किए जाते रहेंगे। उन्होंने अपने कृतित्व और व्यक्तित्व से इंदौर की राजनीति में अलग ही पहचान स्थापित की। श्री तोमर ने कहा कि "प्रतिकूलता में से अनुकूलता निकालने" की जो कला स्व. श्री पटेल में थी वह अनूठी ही थी। उन्होंने सुझाव दिया कि इस वर्ष की वाद-विवाद प्रतियोगिता के विषय में भारत सरकार के कृषि, रेल और खेल विभाग को शामिल किया गया है। अगले वर्ष से रक्षा विभाग को भी शामिल किया जाना चाहिए।

    सांसद श्री शंकर लालवानी ने कहा कि स्व. श्री निर्भय सिंह पटेल की तरह सार्वजनिक जीवन में ईमानदार रहकर हम उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। स्व. श्री पटेल ने प्रदेश में एक ईमानदार और सशक्त मंत्री के रूप में अपनी पहचान स्थापित की जो आज भी याद की जाती है। विधायक मनोज पटेल ने कहा कि यह उनके पिता दादा श्री निर्भय पटेल की स्मृति में आयोजित होने वाला एक ऐसा कार्यक्रम है, जो युवाओं को लम्बे समय से देश के बारे में सोचने और नई दिशा देने के लिए प्रेरित करता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव और विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर स्व. श्री निर्भय सिंह पटेल के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। कार्यक्रम का संचालन नगर अध्यक्ष श्री सुमित मिश्रा ने और श्री जीतू जिराती ने आभार माना। वाद-विवाद प्रतियोगिता के पक्ष विषय के विजेता छात्र श्री जय मिश्रा और विपक्ष विषय के विजेता छात्र श्री संघमित्र भार्गव ने भी व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, पूर्व मंत्री सुश्री उषा ठाकुर, विधायक श्री मधु वर्मा, विधायक देपालपुर श्री मनोज पटेल, श्रीमती मालिनी गौड़, विधायक श्री गोलू शुक्ला, श्री रमेश मेंदोला, श्री मधु वर्मा, श्री सुदर्शन गुप्ता सहित जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

    विजेताओं को 2.30 लाख रुपए की नगद राशि पुरस्कार स्वरूप की गई प्रदान
    वाद विवाद प्रतियोगिता में विजेताओं को दो लाख तीस हजार रुपए की नगद राशि पुरस्कार स्वरूप वितरित की गई। डेली कॉलेज के छात्र संघमित्र भार्गव ने अपने उत्कृष्ट तर्क-वितर्क से प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि द्वितीय स्थान पर साउथ वैली स्कूल के छात्र अथर्व राठौर रहे। प्रतियोगिता में कृषि, रेल और खेल जैसे विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विषयों पर आयोजित वाद–विवाद में प्रथम आने वाले प्रतिभागियों को दस–दस हजार रुपए के पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही द्वितीय स्थान पर आने वाले प्रतिभागियों को 5100 रुपए की राशि देकर सम्मानित किया गया। कॉलेज श्रेणी में जय मिश्रा प्रथम स्थान पर रहे।

    कुल 60 प्रतिभागियों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जिनमें 22 प्रतिभागियों को पुरस्कार दिया गया। इनमें से स्कूल स्तर के 16 और कॉलेज स्तर के 6 विद्यार्थी थे। प्रतियोगिता में तीन प्रतिभागियों को श्रेष्ठ घोषणा पत्र तैयार करने के लिए ग्यारह–ग्यारह हजार रुपए के विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष रवि पटेल और निरल पटेल ने मुख्य अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि समिति का उद्देश्य युवा पीढ़ी को विचारशील, तर्कसंगत और रचनात्मक संवाद की दिशा में प्रेरित करना है।

     

  • दिल्ली में 4-6 सितम्बर तक भारत मंडपम में मेडटेक एक्सपो

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विज़न से उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी को मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत आधार मिला है। राज्य सरकार की यह पहल स्वास्थ्य विनिर्माण के क्षेत्र में राज्य की विशिष्ट पहचान बना रही है और मेडटेक सेक्टर में नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर रही है। नई दिल्ली में 4 से 6 सितम्बर तक भारत मंडपम में आयोजित इंडिया मेडटेक एक्सपो-2025 में मध्यप्रदेश ने अपने अत्याधुनिक मेडिकल डिवाइस पार्क को प्रस्तुत किया। इस दौरान 5 सितम्बर को आयोजित "स्ट्रेंथनिंग इंडियाज मेडिकल डिवाइस पार्क्स" सत्र में राज्य के प्रयासों और विक्रम उद्योगपुरी की उपलब्धियों को विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा। प्रथम दिन एक्सपो में एमपी पवेलियन निवेशकों के आकर्षण का केंद्र रहा, जहाँ उपस्थित उद्योगपतियों ने उद्योग विभाग के अधिकारियों से सीधा संवाद कर राज्य में उपलब्ध प्रोत्साहनों और अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

    विक्रम उद्योगपुरी का मेडिकल डिवाइस पार्क 360 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है। इसमें प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स, 3डी प्रिंटिंग, प्रोटोटाइपिंग, पीसीबी और क्लीनरूम जैसी अत्याधुनिक कॉमन फैसिलिटीज़ उपलब्ध हैं। अपनी श्रेणी में यह देश का अनूठा औद्योगिक परिसर है, जहाँ निवेशकों को विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज़ी से उत्पादन शुरू करने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

    राज्य का सशक्त स्किल इकोसिस्टम इस पार्क की सबसे बड़ी ताकत है। आईआईटी-इंदौर, आईआईएम-इंदौर, आरआरसीएटी, जीएसआईटीएस और औरोबिंदो मेडिकल कॉलेज जैसी प्रीमियर संस्थाओं की उपस्थिति से उच्च प्रशिक्षित मानव संसाधन, अनुसंधान और नवाचार का सतत सहयोग मिल रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस, त्वरित अनुमोदन, प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन, किफायती उत्पादन लागत और यूटिलिटीज़ विक्रम उद्योगपुरी को निवेश के लिए आदर्श गंतव्य बनाते हैं। यह पार्क न केवल राज्य में स्वास्थ्य उपकरण निर्माण को गति दे रहा है बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर भी प्रदान कर रहा है।

    मध्यप्रदेश मेडटेक ग्रोथ-इंजन के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य का फोकस आयात पर निर्भरता घटाने, निर्यात बढ़ाने और मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त करने पर है। विक्रम उद्योगपुरी उज्जैन का यह मेडिकल डिवाइस पार्क वास्तव में भारत के हृदय से वैश्विक-स्तरीय हेल्थकेयर मैन्युफैक्चरिंग के क्षितिज का विस्तार कर रहा है।

     

  • PM Svanidhi Scheme: 2025 में मिलेगा 1600 रुपये कैशबैक, अब 2030 तक बढ़ाई गई

    भागलपुर
    पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के पुनर्गठन और ऋण अवधि को 31 दिसंबर 2024 से बढ़ाकर अब 31 मार्च 2030 तक करने को केंद्र सरकार ने मंजूरी दी। इस योजना का कुल परिव्यय 7,332 करोड़ रुपये होगा। पुनर्गठन के बाद इसका लाभ 50 लाख नए लाभार्थियों सहित कुल 1.15 करोड़ रेहड़ी-पटरी वालों को मिलेगा। इस विस्तार से रेहड़ी-पटरी वालों को न सिर्फ स्थायी वित्तीय सहायता मिलेगी, बल्कि उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान और शहरी अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण का भी मार्ग प्रशस्त होगा।
     
    इसका लाभ भागलपुर नगर निगम क्षेत्र को भी मिलेगा। शहरी क्षेत्र में करीब 72 सौ रेहड़ी-पटरी वालों का सर्वे पांच वर्ष पहले कराया गया था। जिसमें से पीएम स्वनिधि योजना से पहले, दूसरे व तीसरे चरण के ऋण का लाभ 4300 रेहड़ी-पटरी वालों को मिला। शेष बचे वेंडरों को अगले पांच साल में योजना का लाभ मिलेगा। इसके साथ नए वेंडरों का शहर में सर्वे कराकर योजना से जोड़ने की तैयारी है। जबकि सार्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग 7200 में 6600 को मिला है। वहीं, 5800 को फुटकर विक्रेता पहचान पत्र उपलब्ध कराया गया है। जिससे वो अपना रोजगार को बढ़ा सके और आर्थिक रूप से मजबूत बन सके।

    योजना से ऋण मद में हुआ बदलाव
    योजना का क्रियान्वयन आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग की संयुक्त जिम्मेदारी होगी। नई संरचना के तहत प्रथम किस्त ऋण 10,000 से बढ़ाकर 15 हजार रुपये, द्वितीय किस्त 20 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है, जबकि तीसरी किस्त 50,000 रुपये पर यथावत रहेगी। दूसरी किस्त चुकाने वाले लाभार्थियों को यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा मिलेगी, जिससे वे आकस्मिक व्यावसायिक या व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए तुरंत ऋण प्राप्त कर सकेंगे।

    डिजिटल लेनदेन को मिला बढ़ावा
    डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहन देने के लिए रेहड़ी-पटरी वाले 1,600 रुपये तक कैशबैक का लाभ उठा सकेंगे। साथ ही एफएसएसएएल के सहयोग से मानक स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा। ‘स्वनिधि से समृद्धि’ पहल के तहत मासिक लोक कल्याण मेलों का आयोजन कर विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ परिवारों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।

    2020 में शुरू हुई थी योजना
    गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के दौरान एक जून 2020 को शुरू हुई यह योजना अब तक 68 लाख से अधिक वेंडरों को 13,797 करोड़ रुपये के 96 लाख से ज्यादा ऋण वितरित कर चुकी है। 47 लाख लाभार्थियों ने 557 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन कर 241 करोड़ रुपये कैशबैक प्राप्त किया है। योजना को प्रधानमंत्री पुरस्कार (2023) और डिजिटल प्रक्रिया पुनर्रचना के लिए रजत पुरस्कार (2022) भी मिल चुका है।

  • मुख्यमंत्री साय का आदेश: बाढ़ प्रभावितों को मिलेगी सम्पूर्ण सहायता—राशन, इलाज और दस्तावेज

    तत्काल मुआवजा और सहायता से मिली बड़ी राहत

    रायपुर,

    बस्तर संभाग में पिछले सप्ताह हुई अतिवृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। अपने विदेश दौरे से लौट कर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा पहुंचकर संभागीय बैठक में जिला कलेक्टरों को राहत और बचाव कार्यो में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिये थे। अब मुख्यमंत्री के इस निर्देश पर तेजी अमल किया जा रहा है।  बाढ़ पीड़ित नागरिकों को जहां एक ओर राशन, ईलाज और दवाईयां के साथ-साथ गैस चुल्हे और सिंलेण्डर दिये गये हैं वहीं राहत शिविरों में उनके दैनिक जीवन की उपयोगी सभी व्यवस्थाएं भी की गई है। अब बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही नुकसान का वास्तविक आंकलन और अन्य जरूरी सहायता तथा मुआवजा देने की कार्यवाही पर भी तेजी से अमल किया जा रहा है। बाढ़ के पानी में खराब या नष्ट हो गये जरूरी दस्तावेजों को बनाने का काम भी राजस्व विभाग ने शुरू कर दिया हैं। बाढ़ की इस भीषण आपदा में छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय नेतृत्व में एक संवेदनशील पहल कर त्वरित राहत कार्य और सहायता-मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर पीड़ित परिवारों को एक बड़ी राहत दी है।

          बाढ़ से प्रभावित गाँवों में राहत दल तेजी से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के लोहन्डीगुड़ा तहसील के मांदर गांव के प्रभावित किसानों को किसान किताब वितरित की जा रही है, जो बाढ़ के कारण बह गई थी। किसान किताब के मिलने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और भविष्य में किसी भी सहायता के लिए पात्र बनने में मदद करेगी। वहीं प्रभावितों को नवीन राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड एवं बैंक पासबुक तैयार कर प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला प्रशासन की टीमें नुकसान का आकलन करने के लिए घर-घर सर्वे कर रही हैं और पात्रता के अनुसार तत्काल राहत राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर कर भुगतान कर रही हैं।

          सरकार का ध्यान इस बात पर है कि किसी भी पीड़ित परिवार को उनकी जरूरत के समय अकेला न छोड़ा जाए। इसके लिए, मकान क्षति सहित पशु, फसल और घरेलू सामग्री की क्षति का विस्तृत ब्यौरा तैयार कर, हर एक प्रकरण पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है, ताकि जरूरतमंद प्रभावितों तक मुआवजा राशि सीधे और समय पर पहुँच सके।
    स्थानीय प्रभावित परिवारों ने सरकार की इस पहल की सराहना की है। एक प्रभावित ग्रामीण श्री मुरहा पटेल ने कहा कि हमने सोचा था कि बाढ़ के बाद सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन सरकार की इस त्वरित मदद ने हमें फिर से जीवन को नये सिरे से शुरू करने की उम्मीद दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिला आधिकारियों की इस पहल को प्रशासन की ओर से एक मजबूत और मानवीय दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। जो यह दर्शाता है कि आपदा की घड़ी में सरकार न सिर्फ राहत कार्य बल्कि पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस तरह के प्रयास बाढ़ पीड़ितों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से सहारा देते हैं, जिससे उन्हें जीवन को सामान्य पटरी पर लाने में मदद मिलती है।

  • रायपुर एनआईटी-एफआईई को राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार

    स्टार्टअप्स को उत्कृष्ट तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन के लिए मिलेगा पुरस्कार 

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी शुभकामनाएँ

    एनआईटी-एफआईई ने छत्तीसगढ़ में अब तक 40 से अधिक स्टार्टअप्स को दिया बढ़ावा

    रायपुर
    एनआईटी रायपुर फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (एफआईई) को चौथे भारत उद्यमिता शिखर सम्मेलन में राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह आयोजन 13 सितंबर को नई दिल्ली के संसद मार्ग स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में होगा। भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एनआईटी रायपुर-एफआईई के उत्कृष्ट योगदान के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। संस्था को यह सम्मान राज्य में 35 से आधिक नये स्आर्टअप्स को मार्गदर्शन और उन्हें उत्कृष्ट तकनीकी सहयोग के लिए मिलेगा। भारत उद्यमिता शिखर सम्मेलन का आयोजन भारतीय उद्यमी संघ (ईएआई) और एंटरप्राइजिंग जोन-ईजेड द्वारा किया जा रहा है, जो भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेशन केंद्र है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में लगातार स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिल रहा है। यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ में तेजी से बदल रहे औद्योगिक वातावरण को प्रोत्साहित करेगा। एनआईटी रायपुर फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार मिलना छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। स्टार्टअप्स के पोषण और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एनआईटी रायपुर-एफआईई की टेक्नोलॉजी आधारित गतिविधियां हमारे राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी, और छत्तीसगढ़ को नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करेंगी। मुख्यमंत्री ने पूरी टीम को बधाई देते देते हुए उम्मीद जताई कि यह संस्था युवाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने और तकनीकी प्रगति को आगे बढ़ाने में निरंतर सफलता हासिल करेगी।

    एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने कहा कि राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने में संस्था की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि एफआईई लगातार एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने में जुटा है, जो तकनीकी स्टार्टअप्स को सहयोग देकर उन्हें सफल उद्यमों में बदलता है। यह उपलब्धि उन्हें नई पीढ़ी के उद्यमियों को और मजबूती देने की प्रेरणा देती है।

    गौरतलब है कि एनआईटी रायपुर-एफआईई एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में मार्च 2021 में स्थापित हुआ। जो एनआईटी रायपुर का प्रौद्योगिकी व्यापार इन्क्यूबेटर है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की राष्ट्रीय नवाचार विकास और दोहन पहल (निधि) योजना के तहत कार्य करता है। संस्था ने अब तक छत्तीसगढ़ में 35 से अधिक स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया है। इनमें से कुछ स्टार्टअप्स गवर्नेंस और मेडिकल उपकरण निर्माण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। जबकि कुछ एनालिटिक्स, डीप-टेक, क्लीन टेक और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) समेत अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े हैं।

    एनआईटी रायपुर एफआईई का संचालन निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव और कैरियर डेवलपमेंट सेंटर प्रमुख डॉ. समीर बाजपेयी के नेतृत्व में हो रहा है। परिचालन टीम में डॉ. अनुज कुमार शुक्ला (फैकल्टी प्रभारी), श्री पवन कटारिया (अधिकारी प्रभारी) और सीईओ श्रीमती मेधा सिंह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। एफआईई ने तकनीकी स्टार्टअप्स को व्यापक सहयोग देकर खुद को देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित किया है। जिनमें स्टार्टअप शुरू करना, कंपनी बनाना, तकनीकी मार्गदर्शन समेत स्टार्टअप्स से जुड़े सभी तरह के समर्थन शामिल हैं। छत्तीसगढ़ का कोई भी युवा यदि अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहता है तो वह इसके लिए एनआईटी रायपुर एफआईई से संपर्क कर सकता है।

  • मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर त्वरित अमल, तत्काल मुआवजा और सहायता से मिली बड़ी राहत

    बाढ़ पीड़ितों को राशन-ईलाज के साथ अब जरूरी दस्तावेज बनाने का काम भी शुरू

    रायपुर
    बस्तर संभाग में पिछले सप्ताह हुई अतिवृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। अपने विदेश दौरे से लौट कर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा पहुंचकर संभागीय बैठक में जिला कलेक्टरों को राहत और बचाव कार्यो में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिये थे। अब मुख्यमंत्री के इस निर्देश पर तेजी अमल किया जा रहा है।  बाढ़ पीड़ित नागरिकों को जहां एक ओर राशन, ईलाज और दवाईयां के साथ-साथ गैस चुल्हे और सिंलेण्डर दिये गये हैं वहीं राहत शिविरों में उनके दैनिक जीवन की उपयोगी सभी व्यवस्थाएं भी की गई है। अब बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही नुकसान का वास्तविक आंकलन और अन्य जरूरी सहायता तथा मुआवजा देने की कार्यवाही पर भी तेजी से अमल किया जा रहा है। बाढ़ के पानी में खराब या नष्ट हो गये जरूरी दस्तावेजों को बनाने का काम भी राजस्व विभाग ने शुरू कर दिया हैं। बाढ़ की इस भीषण आपदा में छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय नेतृत्व में एक संवेदनशील पहल कर त्वरित राहत कार्य और सहायता-मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर पीड़ित परिवारों को एक बड़ी राहत दी है।

          बाढ़ से प्रभावित गाँवों में राहत दल तेजी से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के लोहन्डीगुड़ा तहसील के मांदर गांव के प्रभावित किसानों को किसान किताब वितरित की जा रही है, जो बाढ़ के कारण बह गई थी। किसान किताब के मिलने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और भविष्य में किसी भी सहायता के लिए पात्र बनने में मदद करेगी। वहीं प्रभावितों को नवीन राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड एवं बैंक पासबुक तैयार कर प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला प्रशासन की टीमें नुकसान का आकलन करने के लिए घर-घर सर्वे कर रही हैं और पात्रता के अनुसार तत्काल राहत राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर कर भुगतान कर रही हैं।

          सरकार का ध्यान इस बात पर है कि किसी भी पीड़ित परिवार को उनकी जरूरत के समय अकेला न छोड़ा जाए। इसके लिए, मकान क्षति सहित पशु, फसल और घरेलू सामग्री की क्षति का विस्तृत ब्यौरा तैयार कर, हर एक प्रकरण पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है, ताकि जरूरतमंद प्रभावितों तक मुआवजा राशि सीधे और समय पर पहुँच सके।

    स्थानीय प्रभावित परिवारों ने सरकार की इस पहल की सराहना की है। एक प्रभावित ग्रामीण श्री मुरहा पटेल ने कहा कि हमने सोचा था कि बाढ़ के बाद सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन सरकार की इस त्वरित मदद ने हमें फिर से जीवन को नये सिरे से शुरू करने की उम्मीद दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिला आधिकारियों की इस पहल को प्रशासन की ओर से एक मजबूत और मानवीय दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। जो यह दर्शाता है कि आपदा की घड़ी में सरकार न सिर्फ राहत कार्य बल्कि पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस तरह के प्रयास बाढ़ पीड़ितों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से सहारा देते हैं, जिससे उन्हें जीवन को सामान्य पटरी पर लाने में मदद मिलती है।

  • मैदानी अधिकारी–कर्मचारी फील्ड में जाकर बांधों एवं संबंधित संरचनाओं का करें सतत निरीक्षण

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की जल संसाधन विभाग के कामकाज की समीक्षा

    रायपुर
     मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बलरामपुर–रामानुजगंज जिले में स्थित लुत्ती बांध के टूटने की घटना पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की गलती किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। श्री साय ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि मैदानी अधिकारी और कर्मचारी फील्ड में जाकर नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण यह स्थिति बनी है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सतत रूप से फील्ड में जाकर बांधों सहित अन्य संरचनाओं का निरंतर निरीक्षण करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग की गहन समीक्षा बैठक ली। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने, सभी बांधों की जलभराव क्षमता, वर्तमान सिंचाई स्थिति और आगामी परियोजनाओं की प्रगति आदि के सम्बन्ध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा–निर्देश दिए। साथ ही विशेष रूप से बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 का कड़ाई से पालन करने तथा जिला प्रशासन के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए।

    बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने लक्षित सिंचाई क्षमता और वास्तविक सिंचाई क्षमता के बीच अंतर को कम करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेषकर बस्तर और सरगुजा संभाग की अधूरी योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्माणाधीन वृहद परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर बल दिया, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।

    बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में 04 वृहद परियोजनाएँ, 357 लघु परियोजनाएँ और 300 एनीकेट, इस प्रकार कुल 661 कार्य प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 1036 जीर्णोद्धार कार्य भी चल रहे हैं। इस तरह कुल 1697 कार्य प्रगतिरत हैं, जिनमें लगभग ₹8966 करोड़ की राशि व्यय होगी।

    इस बैठक में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री रवि मित्तल, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, प्रमुख अभियंता श्री इंद्रजीत उईके तथा बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग मंडलों के मुख्य अभियंता सहित जल संसाधन विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।